पत्नी की गलती की वजह से पति ने उठाया गलत कदम/
भाग 1: लोहार का परिवार और खूबसूरत पत्नी
नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से। मेरठ जिले में एक मेदपुर नाम का गांव पड़ता है और इसी मेदपुर गांव में रहने वाला विनोद कुमार। विनोद कुमार जो कि पेशे से एक लोहार होता है। विनोद कुमार की इस गांव में दुकान होती है और इस दुकान पर विनोद कुमार लोहे के गेट बनाने का काम किया करता था। गांव के सभी लोग गेट बनवाने के लिए विनोद कुमार की दुकान पर ही आया करते थे। विनोद कुमार बहुत ही मेहनत और लगन से काम किया करता था। यहां तक कि आसपास के गांव के लोग भी इसकी दुकान पर आया करते थे।
इसी दुकान के बलबूते पर विनोद कुमार ने बहुत अच्छे खासे पैसे भी कमा रखे होते हैं। यहां तक कि विनोद कुमार ने इस गांव में एक आलीशान महल जैसा घर भी बना रखा होता है। विनोद कुमार के परिवार में इसकी धर्मपत्नी होती है जिसका नाम सुलेखा देवी होता है। सुलेखा देवी जो कि देखने में एक अप्सरा की तरह खूबसूरत जवान और सुंदर दिखाई देती है। विनोद कुमार अपनी पत्नी सुलेखा देवी को घर से बाहर नहीं निकलने दिया करता था क्योंकि विनोद कुमार की पत्नी खूबसूरत और सुंदर होती है। बस इसी वजह से विनोद कुमार अपनी पत्नी पर अंकुश लगाकर रखता था।

लेकिन विनोद कुमार की पत्नी एक ऐसी महिला होती है जिसका चाल चलन और चरित्र कुछ ठीक नहीं होता है। विनोद कुमार की पत्नी सुलेखा देवी को जो भी मर्द या जो भी लड़का पसंद आ जाया करता था बस उसी की तरफ आकर्षित हो जाया करती थी। आगे चलकर विनोद की पत्नी बहुत बड़े-बड़े कांड करने वाली थी, जिसके बारे में विनोद कुमार कुछ भी नहीं जानता था।
भाग 2: पति-पत्नी का झगड़ा और नौकर की तलाश
अब विनोद कुमार और सुलेखा के पास अपना कोई भी बच्चा नहीं होता है और इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच हमेशा झगड़े होते रहते थे। कभी विनोद कुमार अपनी पत्नी सुलेखा को ताना मार दिया करता था और कभी सुलेखा अपने पति को ताना मार दिया करती थी। कई बार तो ऐसा भी हो जाता था कि पड़ोस के जो भी लोग हैं वह विनोद का मजाक भी उड़ाया करते थे, जिसकी वजह से पति और पत्नी दोनों काफी परेशान और उदास रहते थे।
लेकिन कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद विनोद कुमार की दुकान पर काम ज्यादा आना शुरू हो जाता है, जिसकी वजह से विनोद कुमार काफी परेशान और उदास रहने लग जाता है। विनोद कुमार अपने मन में सोचने लग जाता है कि आजकल उसकी दुकान पर काम ज्यादा बढ़ चुका है, उसे कोई एक अच्छा सा नौकर रख लेना चाहिए।
और इस तरह से एक ऐसा दिन भी आ जाता है जिसमें रात के करीब 9:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। विनोद कुमार अपनी दुकान से थक हार कर अपने घर पर आता है, खाना खाता है और अपनी पत्नी सुलेखा देवी के पास बैठ जाता है। तभी सुलेखा देवी अपने पति को कहने लगती है कि तुम आजकल काफी ज्यादा परेशान और उदास रहते हो, आखिर परेशानी का कारण क्या है? इसके बाद सुलेखा का पति विनोद कुमार अपनी पत्नी को कहता है कि आजकल दुकान पर बहुत ज्यादा कामकाज बढ़ गया है। इसके बाद सुलेखा देवी कहने लगती है कि दुकान पर कोई अच्छा सा नौकर रख लो। तभी इसका पति विनोद कुमार कहता है कि तुम्हारी बात तो सही है, अब जैसे ही सुबह होगी तो मैं कोई अच्छा सा नौकर भी देख लूंगा।
भाग 3: जतिन की दुकान में एंट्री
और इस तरीके से पूरी रात गुजर जाती है। जैसे ही अगला दिन आता है तो सुबह के करीब 9:00 बजे के आसपास अब विनोद कुमार पूरे गांव में किसी नौकर की तलाश करता है, लेकिन इसको कहीं भी कोई भी नौकर नहीं मिलता है। थक हारकर विनोद कुमार अपने घर पर आ जाता है और अपनी पत्नी सुलेखा देवी को कहता है कि मुझे कोई भी नौकर नहीं मिला है। इसके बाद सुलेखा देवी कहने लगती है कि हमारे पड़ोस में एक लड़का रहता है और लड़का बहुत ही मेहनती है और उस लड़के का नाम जतिन है। आजकल उसके पास कोई भी काम धंधा नहीं है, उसकी मां हमारे घर पर आई थी और ये सारी बातें उसने मुझे बताई हैं।
अब इसके बाद पति विनोद कुमार अपनी पत्नी सुलेखा को कहता है कि कोई बात नहीं मैं उसके घर पर चला जाता हूं। इसके बाद विनोद कुमार सीधा ही जतिन के घर पर चला जाता है और जतिन से मिलता है। जतिन एक ऐसा लड़का होता है जो कि बड़ी उम्र की महिलाओं और औरतों को काफी पसंद किया करता था। औरत उसकी सबसे बड़ी कमजोरी होती है, वह हमेशा महिलाओं को गलत नजर से देखा करता था। लेकिन जो विनोद कुमार होता है, जतिन के बारे में इतना कुछ नहीं जानता था।
इसके बाद विनोद कुमार जतिन से मिलता है और जतिन को कहता है कि जतिन आजकल मेरी दुकान पर काफी ज्यादा कामकाज बढ़ गया है, अगर तुम मेरी दुकान पर नौकरी करना चाहते हो तो कल से ही तुम मेरी दुकान पर आ सकते हो। जतिन कहने लगता है कि मेरे पास कोई भी काम धंधा नहीं है और मैं आज से ही तुम्हारी दुकान पर नौकरी करना चाहता हूं। लेकिन विनोद कुमार कहता है कि आज का दिन शुभ नहीं है और तुम कल से मेरी दुकान पर आ सकते हो और मैं तुम्हें महीने के 12 से 13 हजार दे दिया करूंगा। अब जैसे ही जतिन विनोद कुमार की बातों को सुनता है तो बड़ा खुश हो जाता है। इसके बाद विनोद कुमार जतिन के घर से निकलता है और अपनी दुकान पर चला जाता है और कामकाज में व्यस्त हो जाता है।
भाग 4: सुलेखा और जतिन की पहली मुलाकात
जैसे ही आज का दिन गुजर जाता है तो अगला दिन आ जाता है। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। जतिन कुमार अपने घर से बाहर निकलता है और सीधा ही वह विनोद कुमार की दुकान पर चला जाता है। दुकान पर जाने के बाद जतिन देखता है कि उसकी दुकान पर ताला लगा होता है। इसके बाद जतिन अपने मन में सोचने लग जाता है कि क्यों ना विनोद कुमार के घर पर ही चले जाना चाहिए।
और इस तरह से अब जतिन कुमार सीधा ही विनोद के घर पर आ जाता है। विनोद के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है लेकिन विनोद अपने घर पर नहीं होता है, वह किसी जरूरी काम से बाहर गया हुआ था। विनोद की पत्नी सुलेखा देवी अपने घर का दरवाजा खोल देती है। सुलेखा देवी जैसे ही दरवाजा खोलती है तो देखती है कि उसके सामने बड़ा ही हैंडसम नौजवान लड़का जतिन खड़ा होता है।
जैसे ही जतिन की नजरें इस महिला की खूबसूरती और जवानी पर पड़ती हैं तो जतिन की नियत में भी कमी आ जाती है, लेकिन दूसरी तरफ सुलेखा भी कुछ कम नहीं होती है। सुलेखा जैसे ही इस लड़के जतिन की कद-काठी को देखती है तो इसकी तरफ मोहित हो जाती है। इसके बाद सुलेखा इस लड़के जतिन को कहती है कि तुम घर के अंदर आ जाओ क्योंकि तुम्हारा जो मालिक है विनोद कुमार, वह किसी जरूरी काम से बाहर गया हुआ है।
इसके बाद लड़का जो जतिन होता है घर के अंदर आ जाता है और फिर सुलेखा देवी कहने लगती है कि जब तक तुम्हारे मालिक विनोद कुमार घर पर आते हैं तब तक मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं। लेकिन जतिन की नजरें तो अपनी मालकिन सुलेखा देवी की खूबसूरती पर टिक चुकी होती हैं और दूसरी तरफ जो सुलेखा होती है वह भी इस लड़के की तरफ अजीब नजरों से देखती रहती है। जैसे ही चाय बनकर तैयार हो जाती है तो इसके बाद सुलेखा चाय लेकर इस लड़के के पास आ जाती है। सुलेखा इस लड़के के साथ बैठकर मीठी-मीठी बातचीत करना शुरू कर देती है और वैसे भी यह लड़का जो जतिन होता है, अक्सर इस महिला के घर पर आ जाया करता था।
भाग 5: अवैध संबंधों की शुरुआत
और इस तरीके से अब यह दोनों एक दूसरे की तरफ आकर्षित हो चुके होते हैं। दोनों जैसे ही बातचीत कर रहे होते हैं तो वहां पर विनोद कुमार भी आ जाता है। विनोद कुमार जैसे ही जतिन को अपने घर पर देखता है तो बड़ा खुश हो जाता है। विनोद कहने लगता है कि जतिन आज मैं किसी जरूरी काम से बाहर चला गया था और आज मैंने अपनी दुकान नहीं खोली है। तुम ऐसा करो चाबी ले जाओ और चाबी लेकर दुकान खोल सकते हो। और इस तरीके से अब यह लड़का जतिन कुमार अपने मालिक विनोद से दुकान की चाबी लेता है और इस घर से बाहर निकल जाता है और दुकान पर चला जाता है। दुकान पर साफ-सफाई करता है और कामकाज में व्यस्त हो जाता है। आधे घंटे का वक्त गुजर जाने के बाद विनोद कुमार भी अपने घर से बाहर निकलता है और अपनी दुकान पर आ जाता है। इस तरीके से जतिन कुमार इस दुकान में कामकाज करना शुरू कर देता है।
लगभग एक महीने का वक्त गुजर जाता है और इतना वक्त गुजरते-गुजरते अब जतिन ने अपने इस मालिक विनोद कुमार का मन जीत लिया था। विनोद कुमार जो भी जितना भी काम इस लड़के को सौंपता था, यह लड़का उतना ही काम बड़ी मेहनत और लगन के साथ कर लिया करता था। जब से जतिन कुमार इस दुकान पर कामकाज करना शुरू कर देता है तब से विनोद कुमार की आमदनी और भी ज्यादा बढ़ जाती है। अब विनोद कुमार आंख बंद करके इस लड़के जतिन पर विश्वास करना शुरू कर देता है।
इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 5 मई 2026 का दिन। दोपहर के करीब 12:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। विनोद कुमार और साथ में जतिन दोनों दुकान पर बैठकर कामकाज कर रहे होते हैं। उसी समय कई और ग्राहक भी विनोद कुमार की दुकान पर आ जाते हैं। तभी विनोद कुमार अपने इस नौकर जतिन को कहता है कि जतिन आज दुकान पर काम बहुत ज्यादा है, ऐसा करते हैं कि दोपहर का खाना यहीं पर खा लेते हैं। तुम ऐसा करो घर पर चले जाओ और घर से दोपहर का खाना यहीं लेकर आ जाओ।
इसके बाद जतिन नौकर उसी समय वहां से खड़ा होता है और विनोद कुमार के घर की तरफ चल पड़ता है। थोड़ी देर में ही जतिन विनोद के घर पर पहुंच जाता है। विनोद कुमार के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है। विनोद की पत्नी सुलेखा अपने घर का दरवाजा खोल देती है। सुलेखा देखती है कि सामने जतिन नौकर खड़ा होता है। जतिन हंसते-मुस्कुराते हुए घर के अंदर आता है और अपनी मालकिन सुलेखा को कहता है कि आज मालिक ने दोपहर का खाना दुकान पर ही मंगवाया है।
अब इसके बाद सुलेखा उसी समय अपने घर का मुख्य दरवाजा जानबूझकर बंद कर लेती है और अपने नौकर को कहने लगती है कि खाना बनकर तैयार हो चुका है, मैं ऐसा करती हूं कि उसको टिफिन में पैक कर देती हूं। इसके बाद सुलेखा देवी खाना टिफिन में पैक कर देती है और वह टिफिन जतिन को पकड़ा दिया जाता है। अब जैसे ही जतिन टिफिन पकड़ लेता है और घर से बाहर निकलने की कोशिश करने लग जाता है तो सुलेखा देवी उसी समय अपने इस नौकर जतिन का हाथ पकड़ लेती है और जतिन को कहती है कि देखो आज आपके पास अच्छा खासा मौका है, अगर तुम इस मौके का फायदा उठाना चाहते हो तो उठा सकते हो।
अब जैसे ही ये बातें जतिन को कही जाती हैं तो जतिन भी कुछ कम नहीं होता है। जतिन उसी समय अपनी मालकिन सुलेखा देवी का हाथ खींचकर इसको कमरे के अंदर ले जाता है। कमरे का दरवाजा बंद कर लिया जाता है और इसके बाद मालकिन और नौकर के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। जतिन और मालकिन सुलेखा दोनों मिलकर अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करना शुरू कर देते हैं। यह दोनों काफी देर तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं।
और जैसे ही इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो उसी समय सुलेखा देवी कहती है कि मैं तुम्हें कुछ पैसे भी दे दिया करूंगी लेकिन तुम्हें मेरी जरूरतें पूरी करने के लिए मेरे घर पर आना पड़ेगा। जतिन भी खुश होकर कहता है कि कोई बात नहीं मालकिन, जब भी तुम बुलाओगी मैं हाजिर हो जाया करूंगा। और इस तरीके से जैसे ही इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है तो अब सुलेखा देवी अपने इस नौकर जतिन को कुछ पैसे देती है और कहती है कि जब भी मैं तुम्हें बुलाऊंगी तुम आ जाया करना। इसके बाद जतिन नौकर टिफिन लेता है और टिफिन लेने के बाद इस घर से बाहर निकल जाता है। जतिन कुमार अब अपनी दुकान पर आता है और मालिक और नौकर मिल-बैठकर खाना खाते हैं और खाना खाने के बाद कामकाज में व्यस्त हो जाते हैं। इस तरीके से नौकर और मालकिन की जो प्रेम कहानी होती है, इन दोनों की यहां से शुरुआत हो जाती है।
भाग 6: पति का बाहर जाना और रात की रंगरेलियां
इसके बाद कई दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 15 मई 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। जतिन नौकर सीधा ही अपने मालिक विनोद कुमार के घर पर आता है। विनोद कुमार को आवाज लगाई जाती है। विनोद कुमार अपने घर का दरवाजा खोलता है। विनोद इसके बाद जतिन को चाबी पकड़ाता है और कहता है कि तुम दुकान का ताला खोलकर साफ-सफाई कर देना। जतिन इसके बाद चाबी लेकर सीधा ही दुकान की तरफ चला जाता है।
लेकिन आज के समय में जो पति विनोद कुमार होता है, अपनी पत्नी सुलेखा को कहता है कि सुलेखा मुझे दो दिनों के लिए दिल्ली जाना पड़ेगा। क्योंकि दुकान का थोड़ा सा सामान खत्म हो चुका है और मैं दिल्ली जा रहा हूं। अगर तुम्हें भी मेरे साथ चलना है तो जल्दी से तैयार हो जाओ। लेकिन जैसे ही दिल्ली जाने की बात सुलेखा देवी सुनती है तो सुलेखा देवी मन ही मन बड़ी खुश हो जाती है। सुलेखा देवी कहती है कि मैं दिल्ली जाकर क्या करूंगी? मैं घर पर ही रहने वाली हूं क्योंकि आजकल मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं रहती है। लेकिन पति विनोद कहते हैं कि कोई बात नहीं अगर तुम्हें दिल्ली नहीं जाना है तो घर का ख्याल रखना और अपना भी ख्याल रखना और रात होते ही घर का दरवाजा बंद कर लेना। लेकिन यह बात ध्यान रखना कि घर के बाहर तुम्हें जाना नहीं है।
अब इसके बाद विनोद कुमार अपने घर से कुछ पैसे लेता है और उसी समय दिल्ली के लिए निकल जाता है। जैसे ही आधे घंटे का वक्त गुजर जाता है तो पत्नी सुलेखा घर के कामकाज में व्यस्त हो जाती है। लेकिन सुलेखा अपने मन में सोचने लग जाती है कि आज उसका पति दो दिनों के लिए बाहर चला गया है और नौकर जो जतिन है वह दुकान पर कामकाज कर रहा है, क्यों ना आज रात अपने नौकर जतिन कुमार को अपने घर पर बुला लिया जाए।
इस तरीके से जैसे ही पूरा दिन गुजर जाता है तो रात के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है और उसी समय जो पत्नी सुलेखा होती है अपने नौकर जतिन के पास फोन कॉल करती है। जतिन को कहती है कि दुकान बंद करने के बाद तुम चाबी देने के लिए घर पर आ जाना। इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है और जैसे ही रात के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है तो नौकर जतिन अपनी दुकान बंद करता है। दुकान बंद करने के बाद वह सीधा ही सुलेखा के घर की तरफ चला जाता है।
सुलेखा के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है। सुलेखा अपने घर का दरवाजा खोल देती है और सुलेखा देवी देखती है कि सामने नौकर खड़ा होता है। नौकर घर के अंदर आ जाता है और उसी समय यह नौकर जतिन कहने लगता है कि मैं चाबी देने के लिए आया था। लेकिन आज सुलेखा देवी अपने इस नौकर जतिन को कहती है कि देखो आज मेरा पति घर पर नहीं है, यह बात तुम्हें भी पता है। वह दो दिनों के लिए दिल्ली गया हुआ है और वह दो दिन तक घर पर लौटने वाला नहीं है और इन दो रातों में हम जमकर मस्ती करने वाले हैं।
जतिन को जैसे ही यह बात कही जाती है तो जतिन भी खुश हो जाता है। लेकिन आज जतिन अपनी इस मालकिन सुलेखा देवी को कहता है कि मालकिन मुझे 5000 की सख्त जरूरत है, अपनी मां के लिए कुछ दवाइयां खरीदनी हैं। सुलेखा कहती है कि तुम किसी बात की फिक्र मत करो, मैं तुम्हें जाते हुए ₹5,000 जरूर दे दूंगी। लेकिन उससे पहले हम रात भर मस्ती करने वाले हैं।
और इस तरीके से अब सुलेखा देवी अपने इस नौकर जतिन को लेकर अपने कमरे के अंदर चली जाती है। इस कमरे का दरवाजा बंद करने के बाद इन दोनों के बीच आज भी गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को, अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करना शुरू कर देते हैं और जैसे ही इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं, दोनों का मन भर जाता है तो इसके बाद सुलेखा अपने इस नौकर को ₹5,000 देती है और कहती है कि कल का जो दिन है वह भी हमारे पास बाकी पड़ा है, हम कल के समय में भी पूरी मस्ती करने वाले हैं।
इसके बाद जैसे ही नौकर को ₹5000 मिल जाते हैं तो नौकर भी खुश हो जाता है। दूसरी तरफ सुलेखा भी बड़ी खुश हो जाती है क्योंकि सुलेखा की अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी होने लग रही होती हैं और नौकर की भी अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी होती रहती हैं। जैसे ही इस नौकर जतिन का यह काम खत्म होता है तो नौकर रात के करीब 1:00 बजे के आसपास इसके घर से बाहर निकल जाता है और अपने घर की तरफ चला जाता है। इस तरीके से नौकर और मालकिन के बीच दो रातों तक यह गलत काम होता रहता है। लेकिन सुलेखा के पति को इस बात के बारे में भनक तक नहीं होती है।
भाग 7: दूसरे प्रेमी कुंदन का आगमन
जैसे ही दो रातें गुजर जाती हैं तो सुलेखा का पति विनोद कुमार अपने घर पर आता है। विनोद कुमार देखता है कि आजकल उसकी पत्नी काफी खुश रहती थी। लेकिन विनोद कुमार नहीं जानता था कि उसकी पत्नी के खुश होने का क्या राज है। फिर भी यह सब कामकाज चलता रहता है। और इस तरीके से अब जब भी विनोद कुमार की पत्नी सुलेखा देवी का मन करता था, वह अपने नौकर को अपने घर पर बुला लिया करती थी और इसके बाद नौकर जतिन भी इसके घर पर आता था और फिर यह दोनों मिलकर अपने गलत रिश्ते कायम किया करते थे। मालकिन अपने इस नौकर जतिन को कुछ पैसे दे दिया करती थी जिसकी वजह से जतिन की आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाया करती थीं। दूसरी तरफ मालकिन सुलेखा की भी अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी हो जाया करती थीं।
काफी लंबा समय गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 5 जून 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास पति विनोद कुमार अपनी पत्नी को कहता है कि जल्दी से मेरे लिए खाना तैयार कर दो, खाना खाने के बाद मैं अपनी दुकान पर जाना चाहता हूं। इसके बाद इसकी पत्नी सुलेखा देवी अपने पति के लिए खाना तैयार करती है। पति विनोद कुमार खाना खाने के बाद अपनी दुकान पर चला जाता है। दो-तीन घंटों का वक्त गुजर जाता है। लगभग 11:00 बजे के आसपास का वक्त होता है और उस समय विनोद कुमार अपनी दुकान पर कामकाज कर रहा होता है।
उसी समय विनोद कुमार का एक दोस्त जिसका नाम कुंदन होता है, वह इसकी दुकान पर आता है। कुंदन पर जैसे ही विनोद कुमार की नजरें पड़ती हैं तो बड़ा खुश हो जाता है। विनोद कुमार अपने दोस्त कुंदन को कहने लगता है कि कुंदन आज तुम पूरे 2 महीनों के बाद मेरी दुकान पर आए हो। कुंदन भी कहता है कि मैं भी दिल्ली में रहकर कामकाज में व्यस्त हो गया था और दो महीने पहले ही मैं तुम्हारी दुकान पर भी आया था, तुम्हारे घर पर भी आया था, तब मुझे बहुत अच्छा लगा था।
अब इसके बाद कुंदन अपने दोस्त विनोद को कहता है कि विनोद चलो आज बैठकर कहीं पर पार्टी करते हैं। विनोद भी मान जाता है। विनोद कहने लगता है कि कुंदन पार्टी कहां पर करेंगे? तभी कुंदन कहने लगता है कि जहां पर हमने पिछली बार पार्टी करी थी वहीं पर बैठकर पार्टी करते हैं। विनोद कहता है कि पिछली बार तो हमने मेरे घर पर बैठकर पार्टी की थी। कुंदन कहता है कि आज भी तुम्हारे घर पर ही बैठकर हम पार्टी करने वाले हैं।
और इस तरह से अब कुंदन अपने दोस्त विनोद को मोटरसाइकिल पर बैठाता है और सीधा ही शराब के ठेके की तरफ चला जाता है। दोनों दोस्त शराब के ठेके से शराब खरीदते हैं। शराब खरीदने के बाद किसी दुकान से खाने-पीने का सामान खरीदते हैं। और यह सारा सामान लेकर अब कुंदन और विनोद मोटरसाइकिल के माध्यम से विनोद के घर पर आ जाते हैं।
विनोद कुमार के घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है। विनोद की पत्नी सुलेखा देवी अपने घर का दरवाजा खोलती है। सुलेखा देवी देखती है कि आज उसके पति के साथ उसका दोस्त कुंदन भी खड़ा होता है। सुलेखा देवी कुंदन को अच्छे तरीके से जानती थी और जैसे ही सुलेखा कुंदन को देखती है तो कुंदन को देखकर बड़ी खुश हो जाती है। सुलेखा देवी इस कुंदन को देखकर अपने पहले प्रेमी को भुला देती है। सुलेखा अपने मन में सोचने लग जाती है कि आज उसका सबसे बड़ा और हैंडसम प्रेमी उसके घर पर आया है।
और जैसे ही कुंदन घर के अंदर प्रवेश कर जाता है तो पूछने लगता है कि भाभी आज मैं पूरे दो महीनों के बाद तुम्हारे घर पर आया हूं, आज मेरे लिए खाने में क्या बनाओगी? तभी सुलेखा हंसते-मुस्कुराते हुए कहती है कि मैं तुम्हारे लिए बहुत अच्छी-अच्छी चीजें बनाने वाली हूं। कुंदन कहता है कि हम दोनों दोस्त मिलकर बैठकर तुम्हारे घर में पार्टी करना चाहते हैं। सुलेखा कहती है कि मुझे इस बात से कोई भी ऐतराज नहीं है।
और इसके बाद कुंदन और कुंदन का दोस्त विनोद कुमार, विनोद के घर में ही बैठकर शराब पीना शुरू कर देते हैं। लेकिन जो कुंदन होता है, अपने दोस्त विनोद कुमार को जानबूझकर ज्यादा शराब पिलाता चला जाता है और देखते ही देखते विनोद कुमार को गहरा नशा हो जाता है। विनोद को इतना ज्यादा नशा हो जाता है कि विनोद को गहरी नींद आ जाती है। विनोद उसी समय चारपाई पर लेटकर गहरी नींद में सो जाता है।
और जैसे ही विनोद कुमार को नींद आती है तो विनोद की पत्नी सुलेखा देवी कुंदन को कहने लगती है कि मेरा पति गहरी नींद में सो चुका है। अब देखते ही देखते विनोद कुमार की पत्नी सुलेखा देवी अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लेती है और फिर इसके बाद कुंदन को कहती है कि कुंदन 2 महीनों के बाद तुम मेरे घर पर आए हो और पिछले 2 महीने से तुमने फोन कॉल भी नहीं किया था। कुंदन कहता है कि आज मैं तुमसे मिलकर बड़ा खुश हूं, चलो अपना समय गुजार लेते हैं।
और इसके बाद कुंदन और विनोद की पत्नी सुलेखा देवी दोनों अलग से कमरे में चले जाते हैं। कमरे में जाने के बाद कुंदन और सुलेखा के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं और यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को, अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर तब तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं जब तक दोनों की इच्छाएं, दोनों की जरूरतें पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे ही दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो कुंदन कहने लगता है कि अब भाभी मुझे अपने घर पर चलना चाहिए, नहीं तो जैसे ही मेरे दोस्त को होश आ जाएगा तो इसके बाद फिर से कहेगा कि चलो फिर से शराब पीने बैठ जाते हैं। इसके बाद कुंदन यह सारा कामकाज खत्म करने के बाद इसके घर से बाहर निकलता है और अपने घर पर चला जाता है। इस तरीके से सुलेखा देवी ने दो लड़कों को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था। लेकिन आगे चलकर सुलेखा देवी के साथ क्या कांड होने वाला था, इस बात के बारे में सुलेखा देवी को भनक तक नहीं होती है।
भाग 8: पड़ोसन का खुलासा
अब दोस्तों जब भी सुलेखा देवी का मन करता था, सुलेखा देवी अपने प्रेमी जतिन को अपने घर पर बुला लेती थी और कभी अपने इस दूसरे प्रेमी कुंदन को अपने घर पर बुला लेती थी और दोनों के साथ अपना वक्त गुजार लिया करती थी। काफी दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 15 जून 2026 का दिन। सुबह के करीब 11:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। पति विनोद कुमार और उसका नौकर जतिन कुमार, यह दोनों दुकान पर कामकाज कर रहे होते हैं।
और जैसे ही एक घंटे का और वक्त गुजर जाता है तो उसी समय विनोद कुमार अपने इस नौकर जतिन को कहने लगता है कि जतिन देखो आज भी हमारी दुकान पर बहुत कामकाज बाकी पड़ा हुआ है, ऐसा करते हैं कि आज भी दोपहर का खाना यहीं पर मंगवा लेते हैं। जतिन कहता है कि मालिक मैं घर पर जाता हूं और खाना लेकर आता हूं। विनोद कहता है कि यह तो अच्छी बात है, तुम घर पर चले जाओ और दोपहर का खाना यहीं पर लेकर आ जाओ। इसके बाद जतिन उसी समय इस दुकान से बाहर निकलता है और विनोद कुमार के घर की तरफ चल पड़ता है।
अब जैसे ही 5 मिनट का वक्त गुजर जाता है तो विनोद कुमार की दुकान पर इसकी एक पड़ोसन ताई जिसका नाम शांति देवी होता है, वो इसकी दुकान पर आ जाती है। शांति देवी अभी इस विनोद कुमार से मिलती है और विनोद कुमार को कहती है कि विनोद तुम अपनी पत्नी का ध्यान नहीं रखते हो, तुम्हारे पीठ पीछे तुम्हारे घर पर एक लड़का आता है।
अब जैसे ही यह बात विनोद को सुनाई देती है तो विनोद कहने लगता है कि ताई ऐसा कौन सा लड़का मेरे घर पर आता है? शांति देवी कहती है कि तुम्हारे घर पर तुम्हारी पीठ के पीछे तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त कुंदन सिंह आता है। मैंने कई बार उसको आते-जाते देखा है। लेकिन आज मुझसे रहा नहीं गया, इसी वजह से मैं तुम्हें बता रही हूं। लेकिन जो विनोद होता है, शांति देवी की किसी भी बात का विश्वास नहीं करता है। विनोद कहता है कि ताई तुम्हें किसी तरह की गलतफहमी हो गई है, मेरा दोस्त ऐसा नहीं है और ना ही मेरी पत्नी ऐसी है।
तभी शांति देवी कहती है कि मैंने बहुत दिन गुजार के देखे हैं, मैंने एक लंबी उम्र गुजार दी है। तुम्हारे घर पर जो तुम्हारा दोस्त आता है वो तुम्हारी पत्नी के साथ गलत काम करता है। जैसे ही यह बात इस लड़के विनोद को कही जाती है तो विनोद को अब शांति देवी की बातों पर विश्वास हो जाता है। विनोद अपने मन में सोचने लग जाता है कि मुझे अपनी पत्नी से अभी इसी समय बातचीत करके देखनी चाहिए और इसके बाद विनोद उसी समय अपने घर की तरफ चल पड़ता है।
भाग 9: खूनी अंजाम और दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश
विनोद जैसे ही अपने घर पर पहुंचता है तो देखता है कि घर का दरवाजा बंद होता है। अब इसके बाद विनोद अपने मन में इस बात को भी सोचने लग जाता है कि दिन के समय दरवाजा क्यों बंद है और मेरा नौकर जतिन कहां गया है। अब लड़का विनोद उसी समय अपने घर की दीवार फांद देता है और घर के अंदर चला जाता है।
घर के अंदर जाने के बाद जब वह अपने घर के कमरे का दरवाजा खोलता है तो कमरे का दरवाजा खोलते ही विनोद कुमार की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। विनोद कुमार देखता है कि उसकी पत्नी सुलेखा देवी और उसका नौकर जतिन आपत्तिजनक स्थिति में पाए जाते हैं। बस इस बात पर विनोद कुमार को गुस्सा आ जाता है।
विनोद कुमार उसी समय घर के अंदर पड़ा एक लोहे का सरिया उठाता है। लोहे का सरिया उठाने के बाद वह अपने नौकर जतिन के पेट में तीन-चार बार सरिया घुसा देता है, जिसकी वजह से जतिन कुमार की मौके पर ही मौत हो जाती है। और इसके बाद जो विनोद होता है, अपनी पत्नी सुलेखा को घसीट कर दूसरे कमरे में ले जाता है, उसके हाथ-पैर रस्सी के साथ बांध देता है। और फिर इसके बाद विनोद कुमार अपनी पत्नी से पूछने लगता है कि तुम्हें सच-सच बताना पड़ेगा कि तुम्हारे किस-किस के साथ गलत रिश्ते हैं।
इसके बाद जो विनोद कुमार की पत्नी सुलेखा देवी होती है, डर की वजह से वह उसके दोस्त कुंदन का नाम भी बता देती है और कहती है कि मैं इन दो लड़कों के साथ अपना वक्त गुजारा करती थी। लेकिन विनोद कुमार को इस बात पर इतना ज्यादा गुस्सा आता है कि विनोद कुमार के हाथ में लोहे का सरिया होता है और उस लोहे के सरिये को विनोद कुमार अपनी पत्नी सुलेखा देवी के संवेदनशील हिस्से में पूरा ठूस देता है। और जैसे ही यह काम किया जाता है तो सुलेखा की मौत मौके पर ही हो जाती है।
भाग 10: पुलिस स्टेशन में सरेंडर
और जैसे ही सुलेखा की मौत होती है तो इसके बाद जो पति विनोद कुमार होता है, अपने घर का दरवाजा खोलता है और 1 घंटे का वक्त गुजरने के बाद अपने आप को पुलिस स्टेशन में जाकर सरेंडर कर देता है और पुलिस वालों को बताता है कि मैंने दो कत्ल किए हैं। मैंने एक अपनी पत्नी का कत्ल किया है और एक अपने नौकर जतिन का कत्ल किया है।
इसके बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंचती है और सुलेखा देवी तथा नौकर जतिन का शव अपने कब्जे में लेती है। दोनों की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है। और जब पुलिस विनोद कुमार से पूछने लगती है कि तुमने अपनी पत्नी और नौकर का कत्ल क्यों किया है, तो विनोद कुमार अपनी पूरी कहानी पुलिस के सामने रखता है।
विनोद कुमार बताता है कि उसकी पत्नी गलत रास्ते पर चल पड़ी थी। वह मेरे दोस्त और हमारे नौकर के साथ गलत और गंदा काम किया करती थी और इसी वजह से मैंने अपनी पत्नी और अपने नौकर का कत्ल कर दिया है। इसके बाद पुलिस विनोद कुमार के खिलाफ चार्जशीट दायर कर लेती है। यह बात भविष्य के गर्त में छिपी है कि जज साहब विनोद कुमार को आखिरकार क्या सजा सुनाने वाले हैं।
लेकिन दोस्तों, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विनोद कुमार ने अपनी पत्नी सुलेखा के साथ जो किया, क्या वह सही था या गलत था? कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।