अप्सरा मर्डर केस: एक गुमशुदगी से खुला खौफनाक राज – News

अप्सरा मर्डर केस: एक गुमशुदगी से खुला खौफनाक राज

अप्सरा मर्डर केस: एक गुमशुदगी से खुला खौफनाक राज

अप्सरा मर्डर केस: एक गुमशुदगी से खुला खौफनाक राज

हैदराबाद, जून 2023।
एक 30 वर्षीय युवती घर से निकली। परिवार को लगा कि वह अपने परिचितों के साथ कहीं जा रही है और जल्द लौट आएगी। लेकिन रात बीत गई, अगला दिन भी गुजर गया और उसका फोन बंद हो गया। परिवार की बेचैनी धीरे-धीरे डर में बदलने लगी।

युवती का नाम था अप्सरा। वह अभिनय की दुनिया में अपना करियर बनाने का सपना देख रही थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि उसकी गुमशुदगी के पीछे ऐसा राज छिपा है, जो कुछ ही दिनों में एक गंभीर हत्या के मामले में बदल जाएगा।

यह कहानी सिर्फ एक लापता लड़की की तलाश की नहीं थी। यह उस जांच की कहानी थी जिसमें सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्ध बयानों ने पुलिस को एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंचाया, जिसे परिवार अपना करीबी मानता था।

3 जून की रात के बाद अप्सरा गायब

3 जून 2023 की रात अप्सरा घर से निकली थी। परिवार के अनुसार वह बाहर जाने वाली थी और इसके बाद उसका संपर्क टूट गया। अगले दिन परिवार ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला।

समय बीतता गया और कोई जानकारी नहीं मिली। आखिरकार 5 जून की शाम परिवार ने आरजीआईए पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने शुरुआती तौर पर कई संभावनाओं पर विचार किया। क्या अप्सरा किसी दोस्त के साथ गई थी? क्या वह किसी परिचित के साथ बाहर गई थी? या फिर उसके साथ कोई आपराधिक घटना हुई थी?

जांच का पहला महत्वपूर्ण बिंदु था—अप्सरा को आखिरी बार किसने देखा था?

पुलिस के सामने आया एक करीबी व्यक्ति

पुलिस को बताया गया कि अप्सरा को छोड़ने के लिए वेंकटा साईं कृष्णा उसके साथ गया था। वह परिवार के लिए कोई अनजान व्यक्ति नहीं था। अप्सरा की मां उसे अपना मुंह बोला भाई मानती थीं और वह एक मंदिर में पुजारी के रूप में काम करता था।

साईं कृष्णा ने पुलिस को बताया कि उसने अप्सरा को शमशाबाद क्षेत्र में छोड़ा था, क्योंकि वह अपने दोस्तों के साथ यात्रा पर जाने वाली थी।

पहली नजर में यह बयान सामान्य लग सकता था। लेकिन पुलिस ने जब इस दावे को स्वतंत्र सबूतों से मिलाना शुरू किया, तो तस्वीर बदलने लगी।

जांचकर्ताओं ने घर से लेकर बताए गए स्थान तक के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। साथ ही अप्सरा के फोन रिकॉर्ड और उसके दोस्तों से भी पूछताछ की गई।

यहीं से जांच में पहला बड़ा विरोधाभास सामने आया।

दोस्तों के बयान ने बदली जांच की दिशा

पुलिस ने अप्सरा के दोस्तों से उसकी कथित यात्रा के बारे में पूछा। लेकिन दोस्तों के बयानों से पता चला कि ऐसी किसी यात्रा की जानकारी उन्हें नहीं थी।

अब पुलिस के सामने दो सवाल थे—अगर यात्रा का कोई प्लान नहीं था, तो अप्सरा कहां जा रही थी? और साईं कृष्णा ने पुलिस को यात्रा की बात क्यों बताई?

जांचकर्ताओं ने इसके बाद अप्सरा के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की।

रिकॉर्ड में एक नंबर बार-बार सामने आया।

यह नंबर साईं कृष्णा का था।

पुलिस के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि अप्सरा और साईं कृष्णा के बीच लगातार बातचीत होती थी। अब उस व्यक्ति की भूमिका पर गंभीरता से सवाल उठने लगे, जिसने खुद पुलिस को बताया था कि वह अप्सरा को आखिरी बार छोड़कर आया था।

एक बयान, लेकिन कई सवाल

पूछताछ में साईं कृष्णा लगातार एक ही कहानी दोहराता रहा। उसके अनुसार वह अप्सरा को लेकर गया और फिर उसे शमशाबाद में छोड़ दिया।

लेकिन पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से ऐसी तस्वीर नहीं मिल रही थी जो उसके बयान से पूरी तरह मेल खाती हो।

जांचकर्ताओं ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों का दोबारा निरीक्षण किया। पुलिस ने साईं कृष्णा को साथ लेकर घटनाक्रम को दोहराने की कोशिश की, ताकि उसके बयान और वास्तविक परिस्थितियों के बीच अंतर का पता लगाया जा सके।

जैसे-जैसे फुटेज और दूसरे सबूत सामने आते गए, पुलिस का संदेह गहराता गया।

9 जून 2023 को साईं कृष्णा को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया।

इस बार पुलिस के सामने उसके बयान, सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अप्सरा के दोस्तों के बयान मौजूद थे।

पूछताछ के दौरान आखिरकार जांच की दिशा निर्णायक रूप से बदल गई।

सामने आया शव

पूछताछ के दौरान साईं कृष्णा ने पुलिस को एक स्थान के बारे में जानकारी दी, जहां अप्सरा का शव होने की बात सामने आई।

पुलिस उसे सारूर नगर इलाके में एक स्थान पर लेकर गई। वहां एक ड्रेनेज मैनहोल मिट्टी और सीमेंट से ढका हुआ था।

जांच टीम ने उस जगह को खुलवाया।

कुछ समय बाद अंदर से एक शव बरामद हुआ।

अप्सरा की मां को पहचान के लिए बुलाया गया। शव की पहचान अप्सरा के रूप में हुई।

एक परिवार की तलाश, जो कुछ दिनों पहले सिर्फ अपनी बेटी को ढूंढने से शुरू हुई थी, अब हत्या की जांच में बदल चुकी थी।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी था—आखिर अप्सरा की हत्या क्यों की गई?

रिश्ते की परतें खुलने लगीं

जांच में अप्सरा और साईं कृष्णा के बीच पुराने परिचय और नजदीकी संबंधों की बात सामने आई।

पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार दोनों की मुलाकात मंदिर के माध्यम से हुई थी। समय के साथ दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी।

हालांकि परिवार की ओर से रिश्ते की कुछ बातों को लेकर अलग दावे किए गए, लेकिन अभियोजन की कहानी के अनुसार साईं कृष्णा ने अप्सरा को अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में पूरी सच्चाई नहीं बताई थी।

बाद में अप्सरा को पता चला कि साईं कृष्णा पहले से शादीशुदा था।

अभियोजन के अनुसार, इसके बाद अप्सरा ने उससे अपनी पत्नी को तलाक देकर उससे शादी करने की मांग की। उसने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर वह ऐसा नहीं करता तो उसके बारे में सच्चाई सामने आ सकती है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक यहीं से साईं कृष्णा पर दबाव बढ़ने लगा।

3 जून की रात क्या हुआ?

जांच में सामने आई कहानी के अनुसार 3 जून की शाम साईं कृष्णा अप्सरा को अपने साथ लेकर गया।

बताया गया कि उसने उसे एक दूसरे स्थान पर ले जाकर कथित तौर पर उसके सिर पर पत्थर से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

इसके बाद शव को छिपाने की कोशिश की गई।

जांच के अनुसार शव को कुछ समय तक वाहन और दूसरे स्थानों पर रखने के बाद मंदिर के पीछे स्थित ड्रेनेज मैनहोल में डाल दिया गया। इसके ऊपर मिट्टी और सीमेंट डालकर उसे छिपाने का प्रयास किया गया।

लेकिन अपराध को छिपाने की यह कोशिश ज्यादा समय तक काम नहीं आई।

सीसीटीवी, कॉल रिकॉर्ड और बयानों में मौजूद विरोधाभासों ने जांचकर्ताओं को उस जगह तक पहुंचा दिया जहां अप्सरा का शव बरामद हुआ।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

9 जून 2023 को साईं कृष्णा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या और धारा 201 के तहत सबूत मिटाने या अपराध के सबूत को छिपाने से संबंधित आरोप लगाए गए।

इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई चली।

इस दौरान अभियोजन पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक सामग्री और डीएनए समेत कई सबूत अदालत के सामने रखे।

26 मार्च 2025: अदालत का फैसला

करीब डेढ़ साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद 26 मार्च 2025 को ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर साईं कृष्णा को दोषी ठहराया और हत्या तथा सबूत मिटाने से संबंधित धाराओं में दोषसिद्धि की।

बताया गया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला लगभग 143 पन्नों का था, जिसमें मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहियों का विस्तार से उल्लेख किया गया।

इस फैसले ने उस जांच के अंतिम चरण को सामने रखा, जिसकी शुरुआत एक साधारण गुमशुदगी की शिकायत से हुई थी।

एक गुमशुदगी ने खोली पूरी कहानी

अप्सरा की कहानी कई सवाल पीछे छोड़ जाती है।

एक तरफ एक परिवार था, जिसने एक करीबी व्यक्ति पर भरोसा किया। दूसरी तरफ जांच के दौरान सामने आए ऐसे सबूत थे, जिन्होंने उसी व्यक्ति की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए।

इस केस में पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरागों में से एक वह तथ्य था कि साईं कृष्णा खुद पुलिस के पास गया था और उसने बताया था कि वह अप्सरा को आखिरी बार छोड़ने गया था।

यानी जांच की शुरुआत से ही वह उन आखिरी लोगों में था, जिनके बारे में पुलिस को जानकारी थी।

बाद में उसके बयान और डिजिटल तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के बीच सामने आए विरोधाभासों ने जांच को आगे बढ़ाया।

अप्सरा की तलाश आखिरकार उसके शव की बरामदगी तक पहुंची और फिर मामला अदालत में चला गया।

यह घटना यह भी दिखाती है कि किसी गुमशुदगी के मामले में शुरुआती जानकारी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। एक फोन रिकॉर्ड, एक सीसीटीवी कैमरा या किसी बयान में मौजूद छोटा-सा विरोधाभास पूरी जांच की दिशा बदल सकता है।

अप्सरा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके मामले की जांच ने यह दिखाया कि अपराध को छिपाने की कोशिश के बावजूद डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य कई बार जांचकर्ताओं को सच्चाई तक पहुंचने में मदद करते हैं।

एक लड़की के गायब होने से शुरू हुई यह कहानी आखिरकार हत्या के मुकदमे और अदालत के फैसले तक पहुंची—और इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ वही था, जब पुलिस ने सवाल पूछना बंद नहीं किया और हर बयान को उपलब्ध सबूतों से मिलाकर देखा।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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