श्मशान में प्रेमी का इंतजार कर रही थी महिला, फिर शुरू हुआ ‘भूत’ का खौफनाक खेल
श्मशान में प्रेमी का इंतजार कर रही थी महिला, फिर शुरू हुआ ‘भूत’ का खौफनाक खेल
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की यह कथित कहानी इन दिनों किसी डरावनी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। एक महिला रात के अंधेरे में श्मशान पहुंची। उसे वहां अपने प्रेमी का इंतजार था। प्रेमी तो नहीं आया, लेकिन इसके बाद महिला के साथ जो कुछ हुआ, उसने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी। कई रातों तक वह एक अनजान ‘साये’ के डर में जीती रही। आखिर में जब पुलिस ने इस रहस्य से पर्दा उठाया तो सामने आई ऐसी सच्चाई, जिसने सबको हैरान कर दिया।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के करमपुर गांव की रहने वाली गायत्री देवी की जिंदगी बाहर से देखने पर सामान्य लगती थी। पति की मृत्यु को कई साल बीत चुके थे। पति जगदेव की मौत कथित तौर पर अत्यधिक शराब पीने के कारण हुई थी। पति के जाने के बाद गायत्री ने खुद को संभाला और गांव में किराने की दुकान चलाकर अपना घर चलाने लगी।
कुछ समय बाद उसने गांव से बाहर, श्मशान के ठीक सामने एक मकान ले लिया। दिनभर दुकान और रात में घर—उसकी जिंदगी इसी तरह गुजर रही थी।
लेकिन इस घर के आसपास का माहौल अलग था। सामने श्मशान और आसपास सुनसान इलाका होने के कारण रात होते ही वहां सन्नाटा छा जाता था।
देवर की गंदी नजर से परेशान थी महिला
गायत्री के परिवार में उसका देवर राकेश कुमार भी था। कहानी के मुताबिक राकेश शराब का आदी था और अपनी भाभी पर गलत नजर रखता था।
एक दिन घर में मौका देखकर उसने गायत्री के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। गायत्री ने विरोध करते हुए उसे थप्पड़ मार दिया और साफ चेतावनी दी कि दोबारा ऐसी हरकत की तो उसे घर से निकाल दिया जाएगा।
जब यह बात राकेश की मां सुधा देवी को पता चली तो उन्होंने भी बेटे को फटकार लगाई और उसे घर से बाहर कर दिया।
राकेश कुछ समय के लिए एक दोस्त के घर रहने लगा। लेकिन कहानी में आगे जो हुआ, उसने इस घटना को और रहस्यमय बना दिया।

दुकान पर आया युवक और शुरू हुई एक गुप्त मुलाकात
कुछ दिनों बाद गांव का एक युवक अशोक कुमार गायत्री की दुकान पर पहुंचा। कहानी के अनुसार अशोक एक संपन्न परिवार से था और पढ़ाई कर रहा था।
दोनों के बीच बातचीत हुई। इसी दौरान गायत्री ने उससे पैसों की जरूरत का जिक्र किया। बातचीत धीरे-धीरे एक ऐसे समझौते तक पहुंच गई, जिसमें पैसों के बदले निजी मुलाकात की बात सामने आई।
लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि मुलाकात के लिए गायत्री ने अपने घर को नहीं, बल्कि घर के सामने स्थित श्मशान को चुना।
अशोक पहले तो श्मशान जाने से डर गया। उसे भूत-प्रेत का डर था। लेकिन आखिरकार वह रात में वहां पहुंचने के लिए तैयार हो गया।
रात करीब साढ़े दस बजे दोनों श्मशान में मिले।
इसके बाद दोनों वहां से अपने-अपने घर लौट गए।
गायत्री को शायद अंदाजा भी नहीं था कि इसी रात से उसकी जिंदगी में एक ऐसा डर प्रवेश करने वाला है, जिसका जवाब उसे कई दिनों तक नहीं मिलेगा।
अगली रात श्मशान में जो हुआ, उससे कांप उठी महिला
अगले दिन गायत्री अपनी दुकान पर थी। तभी घर से फोन आया कि बिजली की तारों में खराबी हो गई है।
गायत्री ने बिजली मिस्त्री रघु को बुलाया। रघु ने घर की बिजली ठीक कर दी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच भी निजी मुलाकात की बात होने लगी।
गायत्री ने उसे भी रात में श्मशान आने के लिए कहा।
लेकिन रात को जब गायत्री श्मशान पहुंची, रघु वहां नहीं आया।
काफी इंतजार के बाद उसने रघु को फोन किया। रघु ने साफ कह दिया कि वह श्मशान में नहीं आएगा क्योंकि उसे डर लगता है।
फोन कटने के कुछ ही देर बाद गायत्री के साथ ऐसी घटना हुई, जिसे उसने बाद में किसी अज्ञात ‘भूत’ का हमला समझा।
वह बेहोश हो गई।
जब उसे होश आया तो वह सुनसान जगह पर थी और उसकी हालत बेहद खराब थी। वह किसी तरह अपने घर पहुंची। उसके मन में एक ही सवाल था—आखिर उसके साथ वहां क्या हुआ?
उसने घटना को भूत-प्रेत से जोड़ लिया।
अब हर रात आने लगा ‘भूत’
इसके बाद कहानी और भी डरावनी हो गई।
गायत्री का दावा था कि रात के समय उसके घर में कोई अज्ञात साया प्रवेश करता है। वह उसे बेहोश कर देता और सुबह होने से पहले गायब हो जाता।
गायत्री को यकीन हो गया कि श्मशान में हुई घटना के बाद कोई भूत उसका पीछा कर रहा है।
एक रात नहीं, बल्कि लगातार कई रातों तक उसके साथ ऐसी घटनाएं होने की बात सामने आई।
धीरे-धीरे गायत्री ने दुकान जाना बंद कर दिया। वह लोगों से मिलना-जुलना भी कम करने लगी। दिनभर घर में गुमसुम रहती और रात होते ही डर जाती।
उसकी सास सुधा देवी ने कई बार उससे परेशानी का कारण पूछा, लेकिन गायत्री हर बार अपनी तबीयत खराब होने की बात कहकर बात टाल देती।
पड़ोसन ने कही ऐसी बात जिसने बदल दिया पूरा मामला
कई दिनों तक गायत्री की हालत देखकर उसकी पड़ोसन सुंदरी देवी उससे मिलने पहुंची।
गायत्री ने आखिरकार उसके सामने अपना डर जाहिर कर दिया।
उसने बताया कि रात में उसके घर में कोई ‘भूत’ आता है और उसके साथ अपराध करता है।
सुंदरी देवी ने उसकी बात ध्यान से सुनी, लेकिन उसने गायत्री को एक अलग संभावना बताई।
उसका कहना था कि शायद कोई इंसान चोरी-छिपे घर में प्रवेश कर रहा है।
गायत्री इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं थी। उसे पूरा विश्वास था कि यह किसी इंसान का काम नहीं, बल्कि श्मशान से जुड़ी कोई डरावनी शक्ति है।
लेकिन सुंदरी ने हार नहीं मानी।
उसने गायत्री को पुलिस के पास चलने के लिए कहा।
पुलिस ने बनाई रात में निगरानी की योजना
मामला पुलिस तक पहुंचा।
पुलिस अधिकारी ने गायत्री की बात सुनी और भूत-प्रेत की कहानी पर विश्वास करने के बजाय इंसानी साजिश की संभावना पर ध्यान दिया।
पुलिस ने फैसला किया कि रात में गायत्री के घर के आसपास निगरानी रखी जाएगी।
कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आसपास छिपकर बैठ गए।
रात गहराती गई।
करीब 11 बजे अचानक एक व्यक्ति दीवार पार करके गायत्री के घर में घुसने की कोशिश करता दिखाई दिया।
पुलिस पहले से तैयार थी।
जैसे ही वह व्यक्ति घर के अंदर पहुंचा, पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया।
और जब उसका चेहरा सामने आया तो पूरा रहस्य लगभग उसी क्षण सुलझ गया।
वह कोई भूत नहीं था।
वह था—गायत्री का अपना देवर राकेश कुमार।
‘भूत’ का रहस्य खुला तो सामने आया खौफनाक सच
पुलिस के सामने पूछताछ में राकेश ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह गायत्री पर नजर रखता था।
कहानी के मुताबिक, उसने श्मशान में गायत्री की रात की गतिविधियां देख ली थीं और इसके बाद उसका पीछा करना शुरू कर दिया था।
उसने कथित तौर पर गायत्री को डराने और बेहोश करने के लिए नशीली दवा का इस्तेमाल किया और फिर रात के समय घर में घुसता था।
गायत्री को लगता रहा कि उसके घर में कोई भूत आता है।
असल में वह ‘भूत’ इंसान था—और वह उसके अपने परिवार का सदस्य था।
पुलिस ने राकेश को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। आगे अदालत में मामले से जुड़े तथ्यों और सबूतों के आधार पर फैसला होना था।
सबसे बड़ा सवाल: डर का फायदा कौन उठा रहा था?
इस पूरी कहानी का सबसे भयावह पहलू यही था कि गायत्री जिस चीज को अलौकिक शक्ति समझ रही थी, उसके पीछे कथित तौर पर एक ऐसा व्यक्ति था जो उसके घर और उसकी दिनचर्या से अच्छी तरह परिचित था।
सुनसान इलाका, सामने श्मशान, रात का सन्नाटा और पहले से मौजूद डर—इन सभी चीजों ने कथित अपराधी के लिए डर का माहौल बनाने का काम किया।
गायत्री को लंबे समय तक लगा कि उसके साथ जो हो रहा है, वह किसी भूत की वजह से है। इसी वजह से उसने शुरुआत में पुलिस से संपर्क करने से भी परहेज किया।
लेकिन पड़ोसन सुंदरी की जिद और पुलिस की निगरानी ने इस रहस्य को उजागर कर दिया।
इस कहानी से मिलती है एक जरूरी सीख
यह कहानी चाहे जितनी डरावनी लगे, इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू भूत-प्रेत नहीं बल्कि सुरक्षा और जागरूकता है।
अगर किसी व्यक्ति को रात में घर में किसी के घुसने का संदेह हो, बार-बार डरावनी घटनाएं महसूस हों या उसके साथ कोई अपराध हो रहा हो, तो उसे केवल अंधविश्वास के भरोसे नहीं रहना चाहिए।
परिवार के भरोसेमंद लोगों को जानकारी देना, दरवाजों और खिड़कियों की सुरक्षा जांचना, जरूरत पड़ने पर पड़ोसियों की मदद लेना और पुलिस से संपर्क करना बेहद जरूरी है।
खासकर यौन हिंसा या जबरदस्ती जैसी किसी भी घटना के मामले में पीड़ित व्यक्ति को दोष देने के बजाय उसकी सुरक्षा और सहायता पर ध्यान देना चाहिए।
श्मशान के सामने रहने वाली इस महिला की कहानी में सबसे बड़ा रहस्य भूत का नहीं था। असली डर उस इंसान का था, जो उसके आसपास रहकर उसकी कमजोरियों और डर का फायदा उठा रहा था।