उस स्कूल में गोलियों की आवाज़ आई जहाँ वे कभी साथ पढ़ते थे।
उस स्कूल में गोलियों की आवाज़ आई जहाँ वे कभी साथ पढ़ते थे।
टीचर डे के एक डांस वीडियो से जुड़ा एंगल जांच में सामने आया, लेकिन पुलिस के अनुसार असली वजह और घटनाक्रम की कई कड़ियां अभी जांच का हिस्सा हैं। बचपन के परिचय से शुरू हुई कहानी आखिर स्कूल के गलियारे में हुई गोलीबारी तक कैसे पहुंची?
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 21 सितंबर 2026 की सुबह एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया।
शाहपुरा कोठी इलाके के चिल्ड्रंस एकेडमी स्कूल में उस समय बच्चे और स्टाफ अपनी सामान्य दिनचर्या में व्यस्त थे। तभी एक युवक स्कूल परिसर में पहुंचा और एक महिला शिक्षिका के साथ हुई कथित कहासुनी के बाद गोलीबारी हो गई।
पुलिस के मुताबिक, 28 वर्षीय मोहम्मद सऊद अंसारी ने 26 वर्षीय शिक्षिका निशात फातिमा को गोली मार दी और इसके बाद खुद को भी गोली मार ली। दोनों की मौके पर मौत हो गई। घटना करीब सुबह 11:30 बजे की बताई गई।
लेकिन इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात सिर्फ गोलीबारी नहीं थी।
सऊद और निशात एक-दूसरे को वर्षों से जानते थे।
बताया गया है कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से पारिवारिक परिचय था। दोनों ने बचपन में इसी स्कूल में पढ़ाई भी की थी। बाद में निशात उसी स्कूल में शिक्षिका बन गईं।
जिस स्कूल की कक्षाओं और गलियारों में कभी दोनों बच्चों के रूप में पढ़ते थे, वर्षों बाद वहीं एक की जान चली गई और दूसरे की भी मौत हो गई।
दो परिवारों की पुरानी पहचान
स्थानीय जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निशात का परिवार मूल रूप से सुल्तानपुर का रहने वाला था और बाद में लखीमपुर खीरी आकर बस गया।
लखीमपुर में रहने के शुरुआती दौर में उनका परिवार सऊद के परिवार के मकान में किराए पर रहा था। इसी वजह से दोनों परिवारों के बीच नजदीकी बढ़ती गई।
धीरे-धीरे मकान मालिक और किरायेदार का रिश्ता पारिवारिक परिचय में बदल गया।
दोनों परिवार एक-दूसरे के घर आते-जाते थे। बच्चों की भी आपस में दोस्ती थी।
निशात और सऊद ने चिल्ड्रंस एकेडमी स्कूल में साथ पढ़ाई की थी। समय बीतने के साथ दोनों की जिंदगी अलग-अलग दिशा में आगे बढ़ी।
निशात ने पढ़ाई पूरी की और करीब एक साल पहले उसी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम शुरू किया, जहां उन्होंने खुद छात्र जीवन बिताया था।
दूसरी तरफ सऊद अपने परिवार के फर्नीचर कारोबार से जुड़ा हुआ था।
बाहर से देखने पर दोनों परिवारों के बीच सब कुछ सामान्य दिखाई देता था।
लेकिन पिछले कुछ समय में रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा।

जब निशात ने दूरी बनानी शुरू की
पुलिस और निशात के परिवार की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, सऊद कथित तौर पर निशात पर शादी के लिए दबाव डाल रहा था।
निशात के भाई शादाब अख्तर ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि सऊद लगातार उसकी बहन को परेशान करता था और शादी के लिए दबाव बनाता था।
परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि निशात ने सऊद के व्यवहार से परेशान होकर उससे दूरी बनानी शुरू कर दी थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, निशात ने सऊद के साथ आना-जाना भी बंद कर दिया था और अकेले ऑटो से स्कूल आने-जाने लगी थीं।
परिवार ने सऊद को समझाने की कोशिश की और उसके परिजनों से भी शिकायत की।
लेकिन आरोप है कि परेशान किए जाने का सिलसिला पूरी तरह नहीं रुका।
पुलिस ने इस मामले में निशात के भाई की शिकायत के आधार पर सऊद और उसके माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मामले में लगाए गए आरोपों और उनकी कानूनी स्थिति की जांच पुलिस द्वारा की जा रही थी।
यही वह दौर था जब एक पुराना परिचय धीरे-धीरे तनाव में बदलता दिखाई दिया।
फिर आया टीचर डे का वीडियो
5 सितंबर को स्कूल में शिक्षक दिवस के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ।
कार्यक्रम में निशात ने अपने एक पुरुष सहकर्मी के साथ डांस किया था। इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि यह वीडियो सऊद तक भी पहुंचा और उसने इसे देखकर आपत्ति जताई।
यहीं से कहानी में एक नया एंगल सामने आता है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, निशात का उस कार्यक्रम में डांस करते हुए वीडियो सामने आने के बाद सऊद की कथित नाराजगी बढ़ी थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही थी कि क्या वीडियो ने पहले से चल रहे विवाद को और बढ़ाया था।
हालांकि, यह कहना कि सिर्फ डांस वीडियो ही हत्या का कारण था, अभी जल्दबाजी होगी।
जांच में कथित उत्पीड़न, शादी के लिए दबाव, दोनों के बीच पुराना संबंध, परिवारों के आरोप और डिजिटल साक्ष्य जैसे कई पहलुओं को देखा जा रहा था।
एक वीडियो किसी व्यक्ति को हिंसा करने के लिए मजबूर नहीं करता। हिंसा की जिम्मेदारी उसे अंजाम देने वाले व्यक्ति की होती है।
21 सितंबर की सुबह
21 सितंबर की सुबह लखीमपुर खीरी का चिल्ड्रंस एकेडमी स्कूल बाकी दिनों की तरह चल रहा था।
करीब 11:30 बजे सऊद स्कूल पहुंचा।
पुलिस के मुताबिक, वह निशात से मिलने आया था।
स्कूल के भीतर दोनों की मुलाकात हुई और इसके बाद दोनों ऊपर की तरफ गए।
इसके बाद कुछ ही समय में स्थिति अचानक बिगड़ गई।
पुलिस के अनुसार, बातचीत के दौरान विवाद हुआ और सऊद ने बैग से देशी हथियार निकालकर निशात पर गोली चला दी।
गोलीबारी के बाद निशात गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ीं।
सऊद ने इसके बाद खुद को भी गोली मार ली।
दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की आवाज सुनते ही स्कूल में अफरा-तफरी मच गई।
बच्चों और कर्मचारियों में डर फैल गया।
माता-पिता भी स्कूल के बाहर जमा होने लगे।
कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
CCTV ने खोली घटनाक्रम की कड़ियां
घटना के बाद पुलिस ने स्कूल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।
रिपोर्टों के अनुसार, CCTV में सऊद को निशात के साथ स्कूल के अंदर जाते हुए देखा गया।
कुछ रिपोर्टों में उसे निशात को पकड़कर ऊपर ले जाते हुए बताया गया है।
पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और इस्तेमाल किए गए कारतूस बरामद किए और फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए।
जांचकर्ताओं के सामने एक अहम सवाल यह भी था कि हथियार लेकर एक बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में कैसे दाखिल हो गया।
पुलिस ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था, CCTV कवरेज और आगंतुकों के प्रवेश की प्रक्रिया की समीक्षा करने की बात कही।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्कूल के भीतर बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे।
अगर गोलीबारी कुछ और मिनटों तक चलती या हमलावर अन्य हिस्से में पहुंच जाता, तो खतरा और बड़ा हो सकता था।
सोशल मीडिया पर मिला एक और सुर
जांच में सऊद की सोशल मीडिया गतिविधियां भी पुलिस के सामने आईं।
रिपोर्टों के मुताबिक, घटना से कुछ समय पहले उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक विदाई जैसा संदेश पोस्ट किया गया था। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही थी कि यह पोस्ट घटना से पहले की उसकी मानसिक और आपराधिक तैयारी के बारे में क्या संकेत देती है।
ऐसे डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन किसी सोशल मीडिया पोस्ट से अकेले अपराध का पूरा मकसद तय नहीं किया जा सकता।
इसीलिए पुलिस ने CCTV, परिवारों के बयान, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को जोड़कर घटनाक्रम समझने की कोशिश की।
क्या डांस वीडियो बना आखिरी ट्रिगर?
यह सवाल सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि शिक्षक दिवस के कार्यक्रम में निशात के एक पुरुष शिक्षक के साथ डांस का वीडियो देखने के बाद सऊद की कथित नाराजगी बढ़ गई थी।
लेकिन इस दावे को एक अंतिम और आधिकारिक कारण मानना अभी उचित नहीं होगा।
पुलिस की जांच में पहले से मौजूद कथित उत्पीड़न और शादी के दबाव की शिकायतें भी महत्वपूर्ण हैं।
निशात के भाई ने आरोप लगाया था कि सऊद लगातार उनकी बहन को परेशान करता और शादी के लिए दबाव डालता था। दूसरी ओर, सऊद के परिवार की ओर से मामले की अलग व्याख्या सामने आई थी। इसलिए घटना के पीछे की पूरी कहानी जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
एक स्कूल, दो जिंदगियां और कई सवाल
इस घटना की सबसे दर्दनाक बात यह है कि निशात और सऊद एक-दूसरे के लिए अजनबी नहीं थे।
उन्होंने बचपन का समय एक ही स्कूल में बिताया था।
एक समय दोनों परिवारों के बीच नजदीकी थी।
लेकिन वर्षों बाद उसी स्कूल में हुई गोलीबारी ने दोनों परिवारों को हमेशा के लिए बदल दिया।
निशात, जो शिक्षक बनकर बच्चों का भविष्य संवार रही थीं, खुद हिंसा का शिकार हो गईं।
वहीं सऊद की मौत ने उसके परिवार को भी एक ऐसी त्रासदी के बीच ला खड़ा किया, जिसकी जांच अब कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।
इस घटना ने स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या हर स्कूल में आने वाले व्यक्ति की पर्याप्त जांच होती है?
क्या बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल है?
क्या किसी कर्मचारी या छात्र को पहले से मिल रही धमकी को गंभीरता से लेने के लिए स्कूल और परिवारों के बीच बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए?
और सबसे अहम—जब कोई व्यक्ति बार-बार किसी महिला से उसकी इच्छा के विरुद्ध संपर्क करने या शादी के लिए दबाव डालने की कोशिश करता है, तो ऐसी शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई कैसे सुनिश्चित की जाए?
इन सवालों के जवाब सिर्फ इस मामले के लिए नहीं, बल्कि स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
सबसे बड़ी सीख
लखीमपुर की यह घटना केवल एक हत्या की कहानी नहीं है।
यह हमें बताती है कि एकतरफा अधिकार की भावना, लगातार पीछा करना, धमकी और महिला की स्पष्ट इच्छा का सम्मान न करना किस तरह खतरनाक स्थिति में बदल सकता है।
किसी रिश्ते में “नहीं” का मतलब “नहीं” ही होता है।
किसी व्यक्ति का डांस करना, किसी सहकर्मी से दोस्ती रखना या अपनी जिंदगी का फैसला खुद करना हिंसा का कारण नहीं बन सकता।
21 सितंबर को चिल्ड्रंस एकेडमी के गलियारे में जो हुआ, उसकी जांच कानून के मुताबिक आगे बढ़ेगी। लेकिन निशात फातिमा की मौत के बाद सबसे जरूरी सवाल यही है कि ऐसी घटनाओं को पहले ही कैसे रोका जाए।
क्योंकि किसी भी स्कूल का सबसे महत्वपूर्ण काम केवल बच्चों को शिक्षा देना नहीं है।
उसे बच्चों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित जगह भी होना चाहिए।
और किसी महिला की सुरक्षा तब शुरू होती है, जब उसकी इच्छा, उसकी सीमाओं और उसके “नहीं” को गंभीरता से लिया जाए।
लखीमपुर की इस दर्दनाक घटना की पूरी सच्चाई जांच और अदालत की प्रक्रिया से सामने आएगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि एक पुराने परिचय का अंत बेहद भयावह तरीके से हुआ—और पीछे छोड़ गया कई परिवारों का दर्द, बच्चों का डर और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल।