नशे में घर लौटा बेटा, घर में अकेली थी ममेरी बहन; फिर हुआ ऐसा कांड जिसने पूरे परिवार को हिला दिया
नशे में घर लौटा बेटा, घर में अकेली थी ममेरी बहन; फिर हुआ ऐसा कांड जिसने पूरे परिवार को हिला दिया
बरेली के एक गांव की यह कहानी नशे की लत, अपराध, पारिवारिक विश्वास और एक मां के खौफनाक फैसले की ऐसी दास्तान है, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गांव में कांता देवी अपने इकलौते बेटे शंकर के साथ रहती थी। पति का साया काफी पहले उठ चुका था। घर चलाने की जिम्मेदारी पूरी तरह कांता के कंधों पर थी।
वह बेहद गरीब थी और गांव के संपन्न परिवारों के घरों में झाड़ू-पोंछा करके किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करती थी।
कांता की सबसे बड़ी उम्मीद उसका बेटा शंकर था।
शंकर उस समय 11वीं कक्षा में पढ़ता था। मां चाहती थी कि उसका बेटा पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी करे और एक दिन परिवार की गरीबी दूर करे।
लेकिन धीरे-धीरे शंकर गलत संगत में पड़ने लगा।
उसकी दोस्ती गगन नाम के युवक से हुई। दोनों अक्सर साथ घूमते और धीरे-धीरे शंकर को नशे की आदत लग गई।
कांता अपने बेटे को बार-बार समझाती थी।
वह कहती थी, “बेटा, नशा तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर देगा। पढ़ाई पर ध्यान दो और गलत दोस्तों से दूर रहो।”
लेकिन शंकर हर बार अपनी मां को भरोसा दिलाता कि एक दिन वह बड़ा आदमी बनेगा।
कांता अपने बेटे की बात पर विश्वास कर लेती।
उसे क्या पता था कि जिस बेटे से वह अपने भविष्य की उम्मीद लगाए बैठी है, वही आगे चलकर ऐसे अपराध का हिस्सा बनने वाला है जिसकी कीमत पूरे परिवार को चुकानी पड़ेगी।

पैसों की जरूरत और पुरानी लत
7 जुलाई 2026 की सुबह शंकर ने अपनी मां से एक हजार रुपये मांगे।
कांता ने साफ कह दिया कि उसके पास पैसे नहीं हैं।
उस दिन कांता काम के लिए घर से बाहर चली गई। शंकर घर में अकेला था।
कुछ देर बाद उसने अपने दोस्त गगन को फोन किया।
गगन भी गलत आदतों में फंस चुका था। वह अपने घर से पैसे लेकर शंकर के पास पहुंचा और दोनों ने नशा करने का फैसला किया।
दोनों घर के अंदर बैठे थे और नशा कर रहे थे, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
दरवाजा खोला गया तो सामने पड़ोस की महिला पुष्पा देवी थी।
पुष्पा ने शंकर से कुछ पैसे उधार मांगे। शंकर ने बताया कि उसके पास पैसे नहीं हैं।
इसके बाद बातचीत का माहौल अचानक बदल गया।
पुलिस रिकॉर्ड और जांच में सामने आई कहानी के अनुसार, उस मुलाकात के दौरान पैसों और गलत संबंधों को लेकर ऐसी बातचीत हुई, जिसने आगे कई घटनाओं का रास्ता खोल दिया।
नशे और गलत संगत के बीच शंकर की सोच लगातार बिगड़ती जा रही थी।
कुछ समय बाद यह बात पड़ोस की महिला रीटा देवी को भी पता चली।
रीटा ने कांता को उसके बेटे के व्यवहार के बारे में बताया।
कांता के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह अपने बेटे को लेकर पहले से चिंतित थी, लेकिन अब उसे डर था कि कहीं शंकर पूरी तरह अपराध की दुनिया में न चला जाए।
उस रात कांता ने बेटे को खूब समझाया।
शंकर ने मां से वादा किया कि वह पुष्पा से दोबारा नहीं मिलेगा और नशा छोड़कर काम करेगा।
अगले दिन उसने एक फैक्ट्री में मजदूरी शुरू कर दी।
कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चलता दिखाई दिया।
कांता को लगा कि शायद उसका बेटा सच में बदल रहा है।
मां की बीमारी और घर में आई दिव्या
समय बीतता गया।
अगस्त 2026 की शुरुआत में कांता की तबीयत अचानक खराब रहने लगी। वह पहले की तरह घरों में काम करने में असमर्थ हो गई।
कांता ने अपने भाई मानसिंह को फोन किया और मदद मांगी।
उसने कहा कि जब तक उसकी तबीयत ठीक नहीं होती, तब तक उसकी बेटी दिव्या को उसके पास भेज दिया जाए, ताकि घर के काम में मदद मिल सके।
मानसिंह अपनी बेटी दिव्या को लेकर कांता के घर पहुंच गया।
दिव्या कुछ दिनों के लिए अपनी बुआ के घर रहने लगी।
घर का माहौल कुछ समय के लिए सामान्य हो गया।
कांता आराम करती थी, दिव्या घर का काम संभालती थी और शंकर रोज फैक्ट्री जाने लगा।
शंकर भी दिव्या के आने से खुश दिखाई देता था।
उसे लगता था कि अब मां अकेली नहीं रहेगी।
लेकिन इस सामान्य दिखने वाले माहौल के पीछे एक गंभीर खतरा छिपा हुआ था।
16 अगस्त की दोपहर ने सब बदल दिया
16 अगस्त 2026 की सुबह कांता ने दिव्या से कहा कि उसकी तबीयत अब पहले से बेहतर है और जल्द ही वह उसे उसके घर वापस भेज देगी।
दिव्या ने कुछ और दिन रुकने की इच्छा जताई।
कांता ने भी उसे रोक लिया।
उस दिन कांता काम पर चली गई।
कुछ देर बाद शंकर भी फैक्ट्री के लिए निकल गया।
दोपहर में शंकर को मजदूरी के कुछ पैसे मिले।
यही वह क्षण था जब उसकी पुरानी नशे की लत फिर जाग उठी।
उसने गगन को फोन किया।
दोनों मिले और पैसे से नशे का इंतजाम किया। इसके बाद दोनों एक सुनसान जगह पर काफी देर तक नशे में रहे।
शाम होने पर शंकर घर लौट आया।
जब वह घर पहुंचा तो उसकी हालत नशे में थी।
दरवाजा दिव्या ने खोला।
दिव्या ने शंकर को देखकर तुरंत समझ लिया कि उसने नशा किया हुआ है।
उसने उसे सावधान रहने को कहा।
शंकर घर के अंदर चला गया।
उस समय घर में कांता मौजूद नहीं थी।
दिव्या अकेली थी।
और यहीं से कहानी ने बेहद भयावह मोड़ लिया।
नशे की हालत में शंकर ने अपनी ममेरी बहन के साथ गंभीर अपराध किया।
दिव्या ने विरोध किया और खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन शंकर ने उसे डराया-धमकाया।
घटना के बाद उसने दिव्या को किसी को कुछ न बताने की धमकी दी।
दिव्या पूरी तरह टूट चुकी थी।
वह घंटों तक कमरे में बैठकर रोती रही।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किससे मदद मांगे।
जिस व्यक्ति को वह अपना भाई समझती थी, उसी ने उसके विश्वास को तोड़ दिया था।
बुआ के सामने खुला दर्दनाक सच
शाम को जब कांता घर लौटी तो उसने देखा कि दिव्या बेहद परेशान है।
उसकी आंखों में आंसू थे और वह लगातार रो रही थी।
कांता ने पूछा कि आखिर हुआ क्या है।
दिव्या खुद को रोक नहीं पाई।
उसने रोते हुए पूरी घटना अपनी बुआ को बता दी।
कांता यह सुनकर सन्न रह गई।
कुछ क्षण तक उसे समझ ही नहीं आया कि वह क्या करे।
एक तरफ उसकी भतीजी थी, जो उसके सामने टूट चुकी थी।
दूसरी तरफ उसका अपना बेटा था।
वह बेटा, जिसके भविष्य के लिए कांता ने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत की थी।
कांता का गुस्सा और सदमा इतना बढ़ गया कि उसने बेहद खतरनाक फैसला ले लिया।
वह घर के अंदर गई और एक धारदार हथियार उठा लिया।
इसके बाद उसने अपने बेटे शंकर पर हमला कर दिया।
हमले में शंकर की मौत हो गई।
घर में चीख-पुकार मच गई।
कुछ देर बाद कांता ने खुद पुलिस को फोन किया और घटना की जानकारी दी।
उसने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उसने अपने बेटे पर हमला किया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
शंकर का शव कब्जे में लिया गया और कांता को हिरासत में ले लिया गया।
पूछताछ के दौरान कांता ने दिव्या के साथ हुई घटना की जानकारी पुलिस को दी और बताया कि इसी वजह से उसने अपने बेटे पर हमला किया।
अब पुलिस के सामने दो गंभीर घटनाएं थीं—एक युवती के साथ हुआ कथित यौन अपराध और उसके बाद हुई हत्या।
मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
दिव्या के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, मेडिकल जांच और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जानी थी।
कांता ने जो किया, उसके पीछे उसका गुस्सा, सदमा और अपनी भतीजी के लिए न्याय की भावना रही हो सकती है, लेकिन कानून किसी व्यक्ति को खुद सजा देने की अनुमति नहीं देता।
अपराध की स्थिति में पुलिस और न्यायपालिका के माध्यम से कार्रवाई ही कानूनी रास्ता है।
नशे ने बदल दी एक परिवार की पूरी कहानी
इस पूरे मामले को केवल एक हत्या की कहानी के रूप में देखना आसान होगा।
लेकिन इसके पीछे कई सवाल छिपे हैं।
एक गरीब मां, जो अपने बेटे को पढ़ाकर बेहतर जिंदगी देना चाहती थी।
एक युवक, जो पढ़ाई छोड़कर नशे और गलत संगत में फंस गया।
एक दोस्त, जिसने उसकी बुरी आदतों को और बढ़ाया।
एक परिवार, जहां भरोसा धीरे-धीरे टूटता गया।
और अंत में ऐसा अपराध, जिसने एक परिवार से हमेशा के लिए उसका बेटा छीन लिया।
सबसे बड़ा सबक नशे की उस दुनिया से जुड़ा है, जिसमें शुरुआत अक्सर “बस एक बार” से होती है।
लेकिन धीरे-धीरे वही आदत पैसे, रिश्ते, पढ़ाई और भविष्य सब कुछ निगल सकती है।
शंकर की कहानी में भी यही दिखाई देता है। जब वह काम करने लगा था, तब उसकी जिंदगी पटरी पर लौटती हुई नजर आई। लेकिन पैसे हाथ में आते ही पुरानी संगत और नशे की लत फिर लौट आई।
और इस बार उसके परिणाम कहीं ज्यादा गंभीर थे।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि यौन हिंसा या किसी भी तरह के अपराध को छिपाना समस्या का समाधान नहीं है। पीड़ित व्यक्ति को सुरक्षित वातावरण, चिकित्सा सहायता, भरोसेमंद परिजनों और कानून की मदद मिलनी चाहिए।
दिव्या के लिए यह केवल एक घटना नहीं थी, बल्कि उसके भरोसे और सुरक्षा की भावना पर गहरा आघात था।
वहीं कांता के लिए अपने बेटे और भतीजी के बीच खड़ा होना एक ऐसी परिस्थिति थी, जिसने उसे जीवन का सबसे कठोर फैसला लेने तक पहुंचा दिया।
लेकिन इस कहानी का अंतिम फैसला अदालत और कानून को करना है।
किसी भी अपराध का जवाब निजी हिंसा नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया होना चाहिए।
नशा, गलत संगत और अपराध जब एक साथ जुड़ते हैं तो उनका असर केवल अपराध करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। पूरा परिवार इसकी कीमत चुकाता है।
एक मां का सपना टूटता है, एक परिवार बिखरता है और कई जिंदगियां ऐसी चोट लेकर आगे बढ़ती हैं जिसे समय भी आसानी से नहीं मिटा पाता।
यही इस दर्दनाक घटना की सबसे बड़ी सीख है—गलत संगत और नशे को छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज करना कभी-कभी बहुत बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।