लड़की अपनी दादी के साथ घर पर रहती थी माता पिता नहीं थे फिर !
**दोस्तों, आज की कहानी: भतीजे और मौसी का गुप्त रिश्ता – एक बुजुर्ग दादी की नजर में क्या हुआ**
दोस्तों, आज मैं अपनी कहानी शुरू करने से पहले आप लोगों को एक बात बता देना चाहता हूँ कि बहुत से मेरे दोस्त, भाई-बहन और खासकर आप यूट्यूबर हैं जो सिर्फ मेरी कहानी सुनते हैं, लेकिन कभी-कभी लाइक, सब्सक्राइब या कमेंट भी नहीं करते। और कई लोग तो मेरी कहानी को चुराकर अपने चैनल पर अपलोड कर देते हैं, एआई वर्जन बना कर आपके सामने पेश कर देते हैं और लाखों व्यूज, लाइक, कमेंट से कमाई करते हैं। लेकिन मैं आप लोगों से क्या ही मांगता हूँ? सिर्फ एक लाइक और एक सब्सक्राइब।
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तो आइए, बिना देरी किए आज की कहानी शुरू करते हैं।
आज की कहानी बिहार के पटना जिले के छोटे से गांव पंचारण की सच्ची घटना है। गांव में रहता है बबलू नाम का लड़का। उसकी उम्र 21-22 साल के करीब है। बबलू पिछले कई सालों से मुंबई में पढ़ रहा था। कई दिनों पहले उसकी मौसी का फोन आया। मौसी का नाम कविता है। उसकी उम्र भी लगभग 23 साल के करीब है। अभी तक उसकी शादी नहीं हुई थी। मौसी ने फोन करके कहा, “देख बबलू, हम दोनों कावड़ यात्रा पर साथ चलें।”

बबलू ने तुरंत हां कर दी। उसने कहा, “मौसी, मैं कल ही गांव की ओर निकल जाता हूँ।” अगले दिन बबलू दिल्ली से सीधा अपने गांव पहुंचा। नाना-नानी के घर पहुंचा। वहां उसकी मौसी कविता भी रहती थी। बबलू को अपनी मौसी को देखते ही दिल में गलत ख्याल आ गया। रात को खाना खाने के बाद दोनों अपने-अपने कमरों में सो गए। लेकिन बबलू अपनी मौसी के कमरे में ही चला गया। रात के 12 बजे के आसपास उसने कहा, “मौसी, आज मेरा मन बहुत कर रहा है।”
कविता सोई नहीं थी। वह जाग रही थी। दोनों के बीच एक अनजाना रिश्ता शुरू हो गया। दोनों एक दूसरे को छूने लगे। कविता ने विरोध नहीं किया। दोनों एक हो गए। रात भर वे एक दूसरे के साथ बिताते रहे। सुबह होते ही लाइट जल गई। कमला देवी (बबलू की मौसी) ने अचानक बबलू को देख लिया। वे चीखीं, “बबलू तू कौन है? तू मेरे साथ ऐसा क्या कर रहा है?”
रेखा (रेखा नहीं, कविता) कमरे में आई। उसने सब देख लिया। वह बोली, “भतीजे, तूने यह क्या कर दिया? यह मेरी दादी है।” बबलू घबरा गया, “कविता, मैं तुम्हारी दादी को समझकर आ गया था। बिजली चली गई थी।”
कमला देवी रोने लगीं। उन्होंने रेखा को डांटा, “रेखा, मैंने तुझे पाला-पोस किया। तू मुझसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।” दोनों बहनें रोईं। बबलू शर्म से सर झुकाए घर चला गया।
सुबह होते ही दादी कविता से बात नहीं करतीं। घर सूना सा हो गया। रेखा को बहुत अकेलापन महसूस हो रहा था। एक दिन दादी घर से बाहर गईं। रेखा कॉलेज गई और अमन (नहीं, बबलू ने अमन नहीं, बबलू ने कविता को समझाया) से मिला। बबलू ने माफी मांगी। कविता ने कहा, “अब गलती करने के लिए बचा ही क्या है? दादी मुझसे रूठ चुकी हैं।” बबलू ने कहा, “मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता। आज शाम को दादी को समझाऊंगा।”
शाम को बबलू दादी के पैरों पर गिरकर माफी मांगा। कमला देवी ने माफ कर दिया। उन्होंने कहा, “अमन (बबलू), दोनों शादी कर लो। मैं मानती हूं तुम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हो।” अगले दिन ही बबलू और कविता शादी कर लेते हैं। दादी उन्हें आशीर्वाद देती हैं। घर में खुशी लौट आती है।
दोस्तों, यह कहानी हमें सिखाती है कि तनाव के समय प्यार और माफी से सब ठीक हो सकता है। रेखा ने गलती की लेकिन दादी ने माफ कर दिया। बबलू ने गलती मान ली और सब ठीक हो गया।
आपको कहानी कैसी लगी? कमेंट में बताइए। क्या रेखा की गलती बबलू की थी या दादी की? अगर कहानी पसंद आई तो लाइक कर दीजिए और चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए। मिलते हैं अगली कहानी में। तब तक के लिए जय हिंद!