पत्नी की एक गलती की वजह से पति ने ये सब कर दिया/
कानपुर की सनसनीखेज वारदात: एक भूल और ब/र/बा/दी की दास्तान
आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से। कानपुर जिले में ‘पारस’ नाम का एक गाँव पड़ता है। इसी पारस गाँव में वेद प्रकाश नाम का एक व्यक्ति रहता था। वेद प्रकाश पेशे से एक किसान था और उसके पास अपनी तीन-चार एकड़ जमीन थी। वह खेती-किसानी का काम करके जो भी पैसे कमाता था, उन सारे पैसों को अपने बैंक खाते में जमा करवा दिया करता था।
वेद प्रकाश की पत्नी की लगभग तीन साल पहले म/ौ/त हो चुकी थी, जिसकी वजह से वह अपने जीवन में अकेला पड़ गया था। पत्नी के चले जाने के बाद वेद प्रकाश का च/रि/त्र और नी/य/त बिगड़ने लगी थी। गाँव की या खेत के आसपास की कोई महिला अगर उसे दिखती, तो वह पैसों का लालच देकर उनके साथ अ/वै/ध संबंध बनाने की कोशिश करता और बाद में मामले को रफा-दफा कर देता था।
वेद प्रकाश के परिवार में उसका एक इकलौता बेटा था, जिसका नाम शेरपाल सिंह था। शेरपाल की शादी अंजलि देवी नाम की महिला से हुई थी। अंजलि देखने में काफी सुंदर और जवान महिला थी। हालाँकि, अंजलि का चाल-चलन और च/रि/त्र भी ठीक नहीं था। अंजलि का पति शेरपाल पेशे से एक ट्रक ड्राइवर था, जो महीनों तक घर से बाहर ही रहता था और महीने में केवल एक या दो बार ही घर आता था। शेरपाल काफी लालची किस्म का व्यक्ति था, जो हमेशा केवल पैसे कमाने के पीछे भागता रहता था और अपनी पत्नी की जरूरतों या मानसिक स्थिति का ख्याल नहीं रखता था। इसी वजह से अंजलि भी धीरे-धीरे गलत रास्ते पर चलने लगी।
अंजलि आगे चलकर तीन ऐसी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाली थी, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था।
पहली घटना: कपड़े की दुकान और अ/वै/ध संबंध
समय बीतता गया और तारीख आई 5 जुलाई 2026। सुबह के लगभग 8:00 बजे का समय था। वेद प्रकाश घर के अंदर बैठकर खाना खा रहा था और उसकी बहु अंजलि रसोई में काम कर रही थी। तभी अंजलि अपने ससुर वेद प्रकाश के पास आई और बोली— “पिताजी, आपके बेटे तो 20 दिनों तक घर नहीं आने वाले हैं। मुझे अपने लिए कुछ नए कपड़े खरीदने हैं, इसलिए मुझे ₹5,000 दे दीजिए।”
वेद प्रकाश ने अजीब नजरों से देखते हुए साफ मना कर दिया और कहा कि उसके पास इतने पैसे नहीं हैं। अंजलि मायूस हो गई। वेद प्रकाश खाना खाकर अपने खेतों की तरफ निकल गया।
इसके बाद अंजलि ने अपने पति शेरपाल को फोन मिलाया और पैसों की माँग की। शेरपाल ने भी कहा कि अभी उसके पास पैसे नहीं हैं, वह 20 दिन बाद आकर कपड़े दिलवा देगा। लेकिन अंजलि जिद पर अड़ गई। तब शेरपाल ने कहा— “अपने गाँव में प्रवीण की एक बहुत बड़ी कपड़े की दुकान है। तुम वहाँ जाकर उधारी में कपड़े ले आओ, मैं आने के बाद पैसे दे दूँगा।”
अंजलि तुरंत गाँव की उस दुकान पर पहुँची। दुकान चलाने वाला लड़का प्रवीण सुंदर महिलाओं पर कमजोर नी/य/त रखता था। वह अक्सर गाँव की महिलाओं को लुभाने के लिए उधारी या मुफ्त में कपड़े देकर उनके साथ ग/ल/त सांठ-गाँठ बना लेता था। जब अंजलि उसकी दुकान पर पहुँची और 4 साड़ियाँ तथा 4 सूट माँगे, तो प्रवीण ने दुकान के बाहर लगे बोर्ड का हवाला देते हुए उधारी देने से मना कर दिया।
अंजलि ने तब अपने घर की स्थिति का फायदा उठाते हुए प्रवीण से कहा— “मेरा पति ट्रक ड्राइवर है और बाहर है। घर में सिर्फ मेरा 6 साल का बेटा आरव है और ससुर दिन-रात खेतों में रहते हैं। आज मैं घर में अकेली हूँ, तुम रात में मेरे घर आ जाना और कपड़ों की पूरी कीमत वसूल कर लेना।”
प्रवीण इस बात पर राजी हो गया। उसने अंजलि को कपड़े दे दिए। उसी रात लगभग 9:00 बजे अंजलि ने अपने बेटे आरव को खाना खिलाकर सुला दिया और ससुर के खेत जाने के बाद प्रवीण को फोन करके घर बुला लिया। उस रात अंजलि और प्रवीण के बीच अ/वै/ध संबंध बने। इसके बाद प्रवीण अक्सर अंजलि को कुछ पैसे देकर उसके घर आने-जाने लगा।
दूसरी घटना: ससुर द्वारा रंगे हाथों पकड़ना और नया मोड़
समय बीतता गया और 20 जुलाई 2026 की तारीख आ गई। अंजलि ने फिर अपने पति शेरपाल से पैसों की माँग की, लेकिन शेरपाल ने दोबारा मना कर दिया। गुस्से में अंजलि ने अपने प्रेमी प्रवीण को फोन किया और कहा कि उसे ₹5,000 की सख्त जरूरत है। उसने प्रवीण को तुरंत घर आने को कहा।
प्रवीण अपनी दुकान बंद करके अंजलि के घर पहुँच गया। अंजलि ने अपने बेटे आरव को कुछ पैसे देकर बाहर दोस्तों के साथ खेलने भेज दिया। इसके बाद प्रवीण ने दरवाजा बंद करने का दबाव बनाया। अंजलि को डर था कि उसका ससुर न आ जाए, लेकिन प्रवीण के दबाव में आकर उसने दरवाजा बंद कर लिया और दोनों बेडरूम में चले गए।
तभी अचानक अंजलि का ससुर वेद प्रकाश खेत से वापस घर लौटा। उसने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। 10 मिनट तक दरवाजा न खुलने पर वेद प्रकाश चिल्लाने लगा। डर के मारे अंजलि ने प्रवीण को बेड के नीचे छिपा दिया और दरवाजा खोला।
वेद प्रकाश सीधे कमरे में गया और जब वह कुछ सामान ढूँढ रहा था, तब उसकी नजर बेड के नीचे छिपे प्रवीण पर पड़ गई। वेद प्रकाश चिल्लाने और गा/लि/याँ देने लगा। नौजवान प्रवीण मौका देखकर वहाँ से भाग निकला।
इसके बाद वेद प्रकाश अपनी बहु अंजलि पर बरस पड़ा— “मेरा बेटा दिन-रात मेहनत करके ट्रक चलाता है और तुम यहाँ गैर-मर्दों के साथ रंग-रलियाँ मना रही हो! मैं अभी शेरपाल को फोन करके सब बताता हूँ।”
अंजलि डर गई। उसने अपने ससुर के पैर पकड़ लिए और अपनी स/ौ/दे/बा/जी वाली चाल चली। उसने कहा— “पिताजी, मुझसे गलती हो गई। मैं जानती हूँ कि आपकी नी/य/त भी मुझ पर खराब रहती थी। अगर आप यह बात मेरे पति को नहीं बताएंगे, तो मैं आपकी भी हर जरूरत पूरी करूँगी।”
वेद प्रकाश की नी/य/त भी अपनी बहु पर खराब हो गई। उसने दरवाजा बंद किया और उस दिन ससुर व बहु के बीच अ/वै/ध सं/बं/ध स्थापित हो गए। वेद प्रकाश ने अंजलि को चेतावनी दी कि वह प्रवीण को अब घर न बुलाए और बदले में वह उसकी आर्थिक मदद करता रहेगा।
तीसरी घटना: सोने की चैन और सुनार सोहन लाल
अंजलि की लालच यहीं खत्म नहीं हुई। 8 अगस्त 2026 को उसने अपने ससुर वेद प्रकाश से सोने की चैन की माँग की। वेद प्रकाश ने कहा कि उसके खाते में इतने पैसे नहीं हैं और वह अगले साल दिलवा देगा। इस पर अंजलि भड़क गई।
अंजलि ने प्रवीण को फोन किया, लेकिन प्रवीण ने ससुर के डर से मना कर दिया। इसके बाद अंजलि की नजर गाँव के अमीर सुनार सोहन लाल पर पड़ी। सोहन लाल लगभग 60 वर्ष का विधुर व्यक्ति था, जिसकी पत्नी की म/ौ/त हो चुकी थी और बच्चे विदेश में रहते थे। वह भी कमजोर च/रि/त्र का व्यक्ति था।
अंजलि सोहन लाल की दुकान पर पहुँची और सोने की चैन उधारी में माँगी। जब सुनार ने उधारी देने से मना किया, तो अंजलि ने उसे भी वही प्रस्ताव दिया। सोहन लाल ने अंजलि को रात 10:00 बजे अपने घर बुलाया।
उसी रात 10:30 बजे अंजलि सोहन लाल के घर पहुँची। सोहन लाल ने श/रा/ब पी रखी थी। उसने अंजलि को सोने की चैन दी और दोनों के बीच अ/वै/ध संबंध बने। अंजलि सोने की चैन लेकर रात 1:00 बजे घर लौट आई। इस तरह अंजलि ने गाँव के तीन-तीन पुरुषों को अपने जाल में फँसा लिया था।
खौफनाक अंत: 22 अगस्त 2026
22 अगस्त 2026 की सुबह अंजलि ने राशन खरीदने के लिए सुनार सोहन लाल से ₹2,000 लिए और बदले में उसे दिन में ही अपने घर बुला लिया। जब अंजलि और सोहन लाल बेडरूम में थे, तभी ससुर वेद प्रकाश घर लौट आया।
दरवाजा बंद देखकर वेद प्रकाश दीवार फाँदकर घर के अंदर कूद गया। उसने अपनी बहु अंजलि और सुनार सोहन लाल को आ/प/त्ति/ज/न/क स्थिति में देख लिया। वेद प्रकाश ने सोहन लाल को धक्के देकर घर से बाहर निकाला और तुरंत अपने बेटे शेरपाल को फोन करके घर बुला लिया।
रात 9:30 बजे शेरपाल अपना ट्रक लेकर घर पहुँचा। पिता वेद प्रकाश ने शेरपाल को अंजलि की सारी करतूतें बता दीं।
क्रोध में अंधा होकर शेरपाल अपनी पत्नी अंजलि को घसीटते हुए कमरे में ले गया। अंजलि ने रोते हुए अपना गुनाह कबूल किया और कहा कि पैसों की तंगी और अकेलापन की वजह से उसने ऐसा किया, यहाँ तक कि ससुर के साथ भी सं/बं/ध बनाए।
यह सुनकर शेरपाल का आपा खो गया। उसने चिल्लाते हुए कहा कि गरीबी का मतलब च/रि/त्र गिराना नहीं होता। शेरपाल ने रस्सी से अंजलि के हाथ-पैर कसकर बाँध दिए। फिर वह घर में पड़ा लो/हे का एक स/रि/या उठाकर लाया और उसे आग में लाल-गर्म किया।
शेरपाल ने उस खौ/फ/ना/क और अ/मा/न/वी/य गुस्से में आकर अंजलि के सं/वे/द/न/शी/ल श/री/रि/क अं/ग में वह गरम स/रि/या डाल दिया। अत्यधिक पी/ड़ा और अ/स/ह्य ज/ल/न के कारण मौके पर ही अंजलि की दर्दनाक म/ौ/त हो गई।
घंटों के भीतर, रात में ही शेरपाल सीधे नजदीकी पु/लि/स थाने पहुँचा और आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया। उसने पु/लि/स के सामने अपना अ/प/रा/ध कबूल करते हुए पूरी कहानी बयान की। पु/लि/स ने मौके पर पहुँचकर अंजलि के श/व को अपने कब्जे में लिया और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
निष्कर्ष
एक स्त्री की अ/मर्यादित लालच, पुरुषों की कामुकता और पति के हिंसक अंधी नफरत ने एक पूरे परिवार को तहस-नहस कर दिया। कानून अब यह तय करेगा कि शेरपाल को उसके इस खौफनाक कदम के लिए क्या सजा मिलेगी, लेकिन यह घटना समाज में घटते नैतिक मूल्यों और अनैतिक संबंधों के खौफनाक परिणाम का एक कड़वा उदाहरण बन गई।