PART 2 उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery – News

PART 2 उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery

PART 2 उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery

उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत – भाग 2: 6 साल बाद का सबसे बड़ा सच और अधूरा इंसाफ!

(Sushant Singh Rajput Mystery – Part 2)

प्रस्तावना: 14 जून के बाद उबला देश और सवालों के घेरे में ‘सिस्टम’

14 जून 2020 की दोपहर जब बांद्रा वाले फ्लैट से सुशांत सिंह राजपूत की म/ौ/त की खबर बाहर आई, तो पूरे देश में शोक और गुस्से की एक ऐसी लहर दौड़ी जिसने मुंबई से लेकर दिल्ली तक के सियासी और फिल्मी गलियारों की नींदे उड़ा दीं। शुरुआत में ही इसे जल्दबाजी में सु/सा/इ/ड करार देने की जो साजिश रची गई थी, देश की जनता ने उस थ्योरी को पहले ही दिन खारिज कर दिया।

करोड़ों प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर अब तक का सबसे बड़ा जन-आंदोलन खड़ा कर दिया। सवाल उठने लगे कि एक हंसता-खेलता, चांद-तारों के सपने देखने वाला और 50 ख्वाहिशों की लिस्ट बनाने वाला इंसान अचानक अपनी जिं/द/गी खुद कैसे खत्म कर सकता है?

जब मुंबई पुलिस की जांच में लीपापोती और सबूतों को मिटाने की बू आने लगी, तो बिहार पुलिस की एंट्री हुई। इसके बाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी केस के लिए देश की तीन सबसे बड़ी एजेंसियां—CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो), ED (प्रवर्तन निदेशालय) और NCB (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) एक साथ मैदान में उतरीं।

लेकिन आखिर इन बड़ी एजेंसियों की जांच में क्या-क्या चौंकाने वाले तथ्य सामने आए? कौन से ऐसे सबूत थे जिन्हें डार्क वेब और डिजिटल फॉरेंसिक के जरिए डिलीट कर दिया गया? आइए जानते हैं इस रहस्य की अगली कड़ी का खौ/फ/नाक सच।

1. 15 करोड़ का हेरफेर और ईडी (ED) की एंट्री

सुशांत के पिता के.के. सिंह ने पटना में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई, जिसमें सुशांत के बैंक खातों से 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन का खुलासा हुआ। यही वह मोड़ था जहां से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की आपराधिक कोण से जांच शुरू की:

  • फर्जी कंपनियां और पैसे की हेराफेरी: सुशांत के पैसों से ऐसी कंपनियां बनाई गईं जिनमें रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के लोग डायरेक्टर थे। सुशांत की कमाई का बड़ा हिस्सा उनकी मर्जी के बिना ट्रांसफर किया जा रहा था।
  • अचानक बदले गए स्टाफ: सुशांत के पुराने, वफादार और भरोसेमंद बॉडीगार्ड्स, ड्राइवर्स और हाउस स्टाफ को एक-एक करके नौकरी से निकाल दिया गया। उनकी जगह ऐसे लोगों को रखा गया जो उस खास सिंडिकेट के इशारों पर काम कर रहे थे।
  • साइकोलॉजिकल दवाइयों का खेल: सुशांत को बिना किसी योग्य डॉक्टर की सलाह के ऐसी भारी डोज वाली दवाइयां दी जा रही थीं जो इंसान के सोचने-समझने की क्षमता और याददाश्त को कमजोर कर देती हैं।

ईडी की पूछताछ में जब बैंक स्टेटमेंट खंगाले गए, तो पता चला कि सुशांत के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) पर भी दबाव बनाकर उनसे सुशांत की संपत्तियों के पन्नों पर दस्तखत करवाए गए थे।

2. ड्/र/ग्/स सिंडिकेट और बॉलीवुड की हाई-प्रोफाइल रातें

जब ईडी ने सुशांत और उनके करीबियों के फोन जब्त किए, तो डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने डिलीट किए गए हजारों वॉट्सऐप (WhatsApp) चैट्स को रिकवर कर लिया। इन चैट्स ने बॉलीवुड के उस काले और घि/नौ/ने चेहरे का पर्दाफाश कर दिया जिसे आज तक एक रंगीन पर्दे के पीछे छिपाकर रखा गया था।

एनसीबी (NCB) की जांच में हुए बड़े खुलासे:

  1. सीक्रेट ड्/र/ग्/स नेटवर्क: मुंबई के अंडरवर्ल्ड और हाई-प्रोफाइल प/ा/र्टि/यों से जुड़े ड्/र/ग्/स सप्लायर्स का एक बहुत बड़ा जाल सुशांत के इर्द-गिर्द बिछा दिया गया था।
  2. धोखे से जहर देना: चैट्स से साफ हुआ कि सुशांत के चाय, कॉफी और पानी में बिना उनकी जानकारी के प्रतिबंधित केमिकल्स और ड्/र/ग्/स मिलाए जा रहे थे ताकि उन्हें मानसिक रूप से बीमार साबित किया जा सके।
  3. ए-लिस्ट सितारों के नाम: इस जांच की आंच बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स, अभिनेत्रियों और निर्देशकों तक पहुंची। कई ए-लिस्ट सितारों को एनसीबी के दफ्तर में कटघरे में खड़ा होकर सवालों के जवाब देने पड़े।

लेकिन जैसे ही यह जांच बॉलीवुड के सबसे ताकतवर आकाओं और राजनीतिक घरानों के बच्चों तक पहुंचने वाली थी, तभी अचानक इस ड्/र/ग्/स एंगल की रफ्तार को भी मंदा कर दिया गया।

3. रूपकुमार शाह का सनसनीखेज दावा: “वह सु/सा/इ/ड नहीं, ह/त्या थी!”

2022 के आखिर में कूपर अस्पताल के मोर्चरी अटेंडेंट रूपकुमार शाह ने एक ऐसा बयान देकर पूरे देश में सनसनी फैला दी, जिसने सुशांत सिंह राजपूत केस की दिशा ही बदलकर रख दी। रूपकुमार शाह वही शख्स थे जो 14 जून 2020 की रात सुशांत के पो/स्ट/मा/र्ट/म के दौरान मोर्चरी रूम में मौजूद थे।

रूपकुमार शाह ने कैमरे पर आकर खुलेआम बयान दिया:

  • “सुशांत के शरीर और गर्दन पर जो निशान थे, वे फांसी लगाने के बिल्कुल नहीं थे। उनकी गर्दन पर ता/र या पतली डोरी से घों/ट/ने के निशान थे।”
  • “सुशांत के शरीर पर कई जगहों पर मा/र-पी/ट और चोटों के गंभीर निशान थे। उनकी हड्डियां टूटी हुई दिख रही थीं।”
  • “जब मैंने अपने सीनियर्स को बताया कि यह मामला ह/त्या का लग रहा है और हमें इसकी वीडियोग्राफी करनी चाहिए, तो बड़े अफसरों ने मुझे डांटकर चुप करा दिया और जल्दी से जल्दी पो/स्ट/मा/र्ट/म खत्म करने का हुक्म दिया।”

इस सनसनीखेज खुलासे ने यह साफ कर दिया कि 14 जून की सुबह अस्पताल और पुलिस प्रशासन के अंदर किस कदर खौ/फ और दबाव का माहौल था।

4. दिशा साल्यान केस और 8 जून का खौ/फ/नाक लिंक

सुशांत केस का सबसे बड़ा और सुलझता हुआ सिरा 8 जून 2020 की रात से जुड़ता है, जब सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा साल्यान की एक बहुमंजिला इमारत से गिरकर म/ौ/त हो गई थी।

आखिर उस रात क्या हुआ था?

  • 8 जून की रात मुंबई के एक फार्महाउस/फ्लैट में एक बेहद हाई-प्रोफाइल प/ा/र्/टी रखी गई थी, जिसमें कई युवा नेता, बड़े बिल्डर्स और बॉलीवुड के बड़े नाम शामिल थे।
  • सूत्रों के अनुसार, उस पार्टी में दिशा साल्यान के साथ बेहद घि/नौ/नी और अमानवीय हरकत (ब/ला/त्का/र) की गई थी।
  • दिशा ने किसी तरह वहां से भागकर सुशांत को फोन मिलाया था और रोते हुए उस रात की पूरी सच्चाई, उन बड़े चेहरों के नाम और अपने साथ हुई द/रिं/द/गी के बारे में बता दिया था।
  • सुशांत ने दिशा को हिम्मत दी थी और कहा था कि वह उनके साथ खड़े होंगे और इस सच को छुपाने नहीं देंगे।

लेकिन इससे पहले कि सुशांत कुछ कर पाते, दिशा की सं/दि/ग्ध म/ौ/त हो गई। दिशा की म/ौ/त की खबर सुनते ही सुशांत समझ गए थे कि वह सिंडिकेट अब किसी भी हद तक गिर सकता है। उन्होंने अपनी डायरी में लिखा था— “वे लोग मुझे भी नहीं छोड़ेंगे।”

5. गायब हुई ‘सीक्रेट पेनड्राइव’ और डिजिटल सुराग

सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वह एक बेहतरीन कोडर और कंप्यूटर विजार्ड भी थे। जब सुशांत को लगा कि उनकी जान पर खतरा है, तो उन्होंने अपनी सुरक्षा के तौर पर एक मास्टर प्लान बनाया था:

  1. सबूतों का बैकअप: सुशांत ने बॉलीवुड के वित्तीय घोटालों, दिशा साल्यान केस से जुड़े ऑडियो रिकॉर्डिंग्स और 13 बड़ी साजिशों के सबूतों की एक सीक्रेट पेनड्राइव बनाई थी।
  2. लैपटॉप का डेटा डिलीट होना: 13 और 14 जून की दरमियानी रात सुशांत के फ्लैट में घुसे अज्ञात लोगों का सबसे बड़ा मकसद उसी पेनड्राइव और लैपटॉप को हासिल करना था।
  3. फॉरेंसिक रिपोर्ट में छेड़छाड़: बाद में जब साइबर फॉरेंसिक टीम ने सुशांत के हार्ड ड्राइव्स और क्लाउड स्टोरेज की जांच की, तो पाया गया कि 13 जून की रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच भारी मात्रा में डेटा परमानेंटली डिलीट किया गया था।

वह पेनड्राइव आज भी गायब है। अगर वह पेनड्राइव देश के सामने आ जाती है, तो कई ऐसे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे जो आज भी टीवी स्क्रीनों पर सफेदपोश बनकर घूमते हैं।

6. गवाहों का खामोश होना और गंदे खेल की रणनीति

पिछले 6 सालों के दौरान इस केस से जुड़े कई अहम गवाहों और बयानों को बेहद शातिराना तरीके से खामोश करने की कोशिश की गई:

  • अंबुलेंस ड्राइवर और अटेंडेंट: सुशांत की ला/श ले जाने वाले अंबुलेंस के ड्राइवर को लगातार अं/जा/न नंबरों से जान से मा/र/ने की ध/म/कि/यां मिलती रहीं।
  • गवाहों के बदलते बयान: फ्लैट में मौजूद सिद्धार्थ पिठानी, नीरज और दीपेश जैसे मुख्य गवाहों ने जांच एजेंसियों के सामने बार-बार अपने बयान बदले। ऐसा लगता था कि उन्हें किसी बहुत बड़ी ताकत का संरक्षण और खौ/फ दोनों था।
  • सीसीटीवी फुटेज का गायब होना: सोसाइटी के गेट का वह सीसीटीवी फुटेज, जिसमें 13 जून की रात 11:30 बजे दो काले रंग की एसयूवी (SUV) गाड़ियां अंदर आती दिख रही थीं, उसे फॉरेंसिक रिकवरी से पहले ही करप्ट कर दिया गया था।

निष्कर्ष: 6 साल बाद भी जलती हुई इंसाफ की मशाल

आज सुशांत सिंह राजपूत को हमसे दूर गए 6 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सीबीआई (CBI) ने अभी तक इस मामले में अपनी अंतिम क्लोजर रिपोर्ट (Closure Report) अदालत में दाखिल नहीं की है, जो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यह मामला एक साधारण सु/सा/इ/ड का बिल्कुल नहीं था।

सुशांत की म/ौ/त ने बॉलीवुड के उस नकली और खोखले नेपोटिज्म, सिंडिकेट और अंडरवर्ल्ड के गठजोड़ को उघाड़कर रख दिया। पटना के उस सीधे-साधे लड़के ने अपनी शहादत देकर पूरे देश को यह समझा दिया कि चमक-धमक की इस दुनिया के पीछे कितना भयानक अंधेरा छुपा हुआ है।

सुशांत सिंह राजपूत भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन उनकी मुस्कान, उनके विचार और उस रात बंद कमरे का अधूरा सच आज भी करोड़ों दिलों में इंसाफ की आग बनकर जल रहा है। यह खामोशी तब तक शांत नहीं होगी जब तक उस रात के असली गुनहगारों को कानून के शिकंजे में नहीं लाया जाता।

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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