PART 2 पति की एक कमी की वजह से पत्नी ने कर दिया कां@ड/असली वजह जानकर S.P साहब के होश उड़ गए/
भाग 2: शक की पहली चिंगारी और छुपे हुए रिश्तों का सच
अध्याय 10: पुलिस जांच का नया मोड़
हनुमानगढ़ पुलिस मुख्यालय में रात काफी गहरी हो चुकी थी। लेकिन इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच अभी शुरू ही हुई थी। S.P. साहब अपनी कुर्सी पर बैठे फाइलों को ध्यान से देख रहे थे। उनके सामने राकेश हत्याकांड की हर छोटी-बड़ी जानकारी रखी हुई थी।
एक तरफ राकेश की निर्मम हत्या थी, तो दूसरी तरफ यह सवाल था कि आखिर एक पत्नी अपने ही पति के खिलाफ इतनी बड़ी साजिश तक कैसे पहुँच गई?
S.P. साहब ने जांच अधिकारी से कहा—
“हमें सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि इस पूरे षड्यंत्र की हर कड़ी को जोड़ना है। पता लगाओ कि कजरी और शंकर का रिश्ता कब से चल रहा था और इस हत्या की योजना कब बनी।”
पुलिस टीम ने कजरी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की जांच शुरू कर दी।
कुछ ही घंटों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे।
अध्याय 11: मोबाइल फोन से खुला पुराना राज
जांच के दौरान पुलिस को कजरी के मोबाइल में कई ऐसे नंबर मिले, जिनसे वह लगातार संपर्क में थी।
सबसे ज्यादा कॉल नौकर शंकर के नंबर पर थीं।
पुलिस ने जब पिछले कई महीनों की कॉल डिटेल निकाली, तो पता चला कि राकेश की शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी थी।
जांच अधिकारी ने S.P. साहब से कहा—
“सर, ऐसा लगता है कि यह रिश्ता अचानक नहीं बना था। दोनों काफी समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे।”
S.P. साहब गंभीर हो गए।
उन्होंने कहा—
“यही वह लालच और आकर्षण है, जिसने एक परिवार को बर्बाद कर दिया। लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि इस अपराध में और कौन-कौन शामिल था।”
अध्याय 12: होटल मालिक की गवाही
पुलिस ने उस होटल मालिक सुरेंद्र कुमार को भी पूछताछ के लिए बुलाया, जहाँ कजरी और शंकर गए थे।
शुरुआत में सुरेंद्र डर रहा था। उसे लग रहा था कि कहीं वह भी कानूनी परेशानी में न फंस जाए।
लेकिन पुलिस के सामने उसने सच बता दिया।
उसने कहा—
“साहब, वह दोनों पति-पत्नी बनकर नहीं आए थे। उन्होंने ज्यादा पैसे दिए और जल्दी से कमरा मांगा। मुझे शक तो हुआ था, लेकिन पैसों के लालच में मैंने ध्यान नहीं दिया।”
यह बयान जांच के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ।
अब पुलिस के पास यह साबित करने के लिए एक और मजबूत सबूत था कि हत्या की योजना अचानक नहीं बनी थी, बल्कि पहले से तैयारी की गई थी।
अध्याय 13: पूर्ण सिंह का टूटता हुआ दिल
जब यह खबर कजरी के पिता पूर्ण सिंह तक पहुँची कि उनकी बेटी ने लालच और गलत रास्ते की वजह से इतना बड़ा अपराध कर दिया है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह घंटों चुपचाप बैठे रहे।
उनकी आँखों के सामने अपनी पूरी जिंदगी घूमने लगी।
उन्होंने अपनी बेटी के लिए कितनी मेहनत की थी। अपनी गरीबी के बावजूद दो-दो बार उसका घर बसाने की कोशिश की थी।
पूर्ण सिंह रोते हुए बोले—
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि जिस बेटी के सुख के लिए मैंने अपनी जिंदगी लगा दी, वही बेटी एक दिन किसी की जान लेने का कारण बन जाएगी।”
गाँव के लोग भी यह देखकर हैरान थे कि एक पिता का दर्द कितना गहरा होता है।
अध्याय 14: अदालत में शुरू हुई कानूनी लड़ाई
कुछ महीनों बाद यह मामला अदालत में पहुँचा।
सरकारी वकील ने अदालत के सामने सारे सबूत पेश किए—
- मोबाइल रिकॉर्ड
- होटल की जानकारी
- फॉरेंसिक रिपोर्ट
- शंकर के बयान
- घटनास्थल से मिले सबूत
वकील ने कहा—
“यह केवल हत्या नहीं है, बल्कि लालच और विश्वासघात से पैदा हुआ एक सुनियोजित अपराध है।”
कजरी और शंकर दोनों अदालत में चुप खड़े थे।
अब उनके पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचा था।
जिस धन-दौलत और आराम भरी जिंदगी के सपने उन्होंने देखे थे, वही सपना उनकी पूरी जिंदगी की सबसे बड़ी सजा बन चुका था।
अध्याय 15: धीरखेड़ा गाँव की सीख
राकेश हत्याकांड के बाद धीरखेड़ा गाँव में लंबे समय तक इस घटना की चर्चा होती रही।
लोग कहते थे—
“इंसान को अपनी इच्छाओं और लालच पर नियंत्रण रखना चाहिए, क्योंकि गलत रास्ते पर उठाया गया एक कदम पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकता है।”
किसान अमृत सिंह की सतर्कता ने जहाँ एक खतरनाक अपराध को उजागर किया, वहीं इस घटना ने पूरे समाज को एक बड़ी सीख दी।
कभी-कभी अपराध अचानक नहीं होते, बल्कि छोटी-छोटी गलतियों, झूठ और लालच से धीरे-धीरे एक बड़ी त्रासदी बन जाते हैं।
समाप्त — भाग 2