PART 2 मर के फिर जिंदा हुई यह लड़की, Rebirth की खौफनाक और सच्ची कहानी | Reincarnation | Etawah
मर के फिर जिंदा हुई यह लड़की – भाग 2: यमलोक का खौफनाक सफर, वैज्ञानिक टेस्ट और हत्या का सनसनीखेज सच!
(Etawah Rebirth & Reincarnation Case – Part 2 & Grand Finale)
प्रस्तावना: 21 मिनट के सन्नाटे का वो खौफनाक राज
भाग 1 में आपने देखा कि कैसे उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में 17 साल की अनपढ़ देहाती लड़की सुमित्रा की 21 मिनट के लिए सां/सें थम गईं और जब वह उठी, तो उसके शरीर पर डिबियापुर की रहने वाली बी.ए. पास शिवा त्रिवेदी की आत्मा का कब्जा हो चुका था। शिवा की 19 मई 1985 को उसके ससुराल वालों ने ईंट से मारकर ह/त्या कर दी थी और ला/श को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था।
अब इस दूसरे और अंतिम अध्याय (Part 2) में हम जानेंगे कि उन 2 महीनों (मई 1985 से जुलाई 1985) के दौरान शिवा की आत्मा कहाँ थी? यमलोक के उस खौ/फ/नाक सफर का सच क्या था? अमेरिका के वैज्ञानिकों ने शिवा को बेनकाब करने के लिए क्या-क्या कठिन टेस्ट लिए और इस परकाया प्रवेश का अंतिम व खौ/फ/नाक अंत कैसे हुआ!
1. यमलोक का खौफनाक सफर और संतोषी माता का वरदान
जब सुमित्रा बनी शिवा से वैज्ञानिकों और पत्रकारों ने पूछा कि “19 मई को ह/त्या होने के बाद और 19 जुलाई को सुमित्रा के शरीर में आने से पहले के 2 महीनों में तुम्हारी आत्मा कहाँ थी?” तो उसने जो भयानक आंखों देखा हाल बताया, उसे सुनकर डॉक्टरों और पैरासाइकोलॉजिस्टों के रोंगटे खड़े हो गए।
- काली रात और यमदूतों का घेरा: शिवा ने बताया कि जब उसके ससुराल वालों ने उसके सिर पर ईंट मारकर उसकी ह/त्या की और श/व को जला दिया, तो उसकी आत्मा एक बेहद घने अंधेरे रास्ते पर घसीटकर ले जाई गई। वहाँ सिर्फ और सिर्फ काली रात थी।
- उलटे पैरों वाले खौफनाक प्राणी: उसने बताया कि वहाँ पा/पि/यों को खौ/फ/नाक तरीकों से सजा दी जा रही थी। वहाँ मौजूद छलावा जीवों और यमदूतों के पैर पीछे की तरफ मुड़े हुए थे और वे गुनहगारों को गर्म तेल व कांटों पर घसीट रहे थे।
- संतोषी माता और 7 साल का समय: शिवा ने बताया कि वह अपनी बेगुनाही और अपने दो मासूम बच्चों (रिंकू और टिंकू) के लिए रोती रही। उसने अपने जीवन में संतोषी माता का व्रत रखा था। यमराज के दरबार में जब उसके कर्मों का हिसाब हुआ, तो उसकी अकाल म/ृ/त्यु और बेगुनाही के कारण उसे पृथ्वी पर अपनी बची हुई जिंदगी पूरी करने के लिए 7 से 13 सालों का अतिरिक्त समय देकर सुमित्रा के शरीर में वापस भेजा गया!
2. यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के वैज्ञानिकों की कड़ी परीक्षा (1985 – 1986)
अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया’ के मशहूर प्रोफेसर डॉ. इयान स्टीवेन्सन (Dr. Ian Stevenson) और भारत की डॉ. सतवंत पसरीचा ने इस केस की वैज्ञानिक जांच की। उन्होंने शिवा बनी सुमित्रा को झूठा साबित करने के लिए कई जाल बिछाए:
- पहला धोखे का टेस्ट (Fake Mother Test): शिवा के असली पिता राम सिया त्रिपाठी सुमित्रा को अपने घर ले गए। घर के बाहर कई महिलाओं की भीड़ खड़ी थी। राम सिया त्रिपाठी ने सुमित्रा से कहा, “जाओ, अपनी मां के गले लग जाओ, वो सामने खड़ी हैं!” लेकिन सुमित्रा ने भीड़ की तरफ देखा और बोली, “पापा, आप मुझसे झूठ बोल रहे हैं! मेरी मां इस भीड़ में है ही नहीं, वो तो अंदर कमरे में बैठी हैं!” और वह सीधे अंदर जाकर अपनी असली मां राम रानी के गले लगकर रोने लगी।
- दूसरा दाढ़ी वाला टेस्ट (Disguised Uncle Test): शिवा के मामा राम प्रकाश दीक्षित ने अपनी पहचान छुपाने के लिए अपनी दाढ़ी बढ़ा ली थी और चुपचाप सुमित्रा के सामने बैठ गए। सुमित्रा ने थोड़ी देर उनकी तरफ देखा और उनकी आवाज सुनते ही चिल्लाई, “मामा! आप दाढ़ी बढ़ाकर मुझे बेवकूफ बना रहे हैं? आप तो कानपुर वाले राम प्रकाश मामा हैं!”
- तीसरा गुप्त चीजों का राज (Hidden Objects Test): सुमित्रा ने शिवा के पुराने घर में छिपाकर रखी गई एक पीली साड़ी, घड़ी का डिब्बा और अपने बचपन के गुप्त नाम (Pet Names) तक सही-सही बता दिए, जिनका जिक्र किसी अखबार या मैगजीन में नहीं छपा था।
वैज्ञानिकों ने 19 से ज्यादा ऐसे सबूत दर्ज किए जो केवल और केवल म/ृ/त शिवा त्रिवेदी ही जान सकती थी।
3. कातिल ससुराल वालों में खौफ और कानूनी पेचदगियां
जब यह खबर पूरे उत्तर प्रदेश में आग की तरह फैली कि ह/त्या की गई शिवा त्रिवेदी 100 किलोमीटर दूर एक दूसरी औरत के शरीर में जिंदा हो गई है, तो डिबियापुर में उसके कातिल ससुराल वालों के हाथ-पांव फूल गए।
- बेटों को छुपाया गया: शिवा अपने दो सगे बेटों रिंकू और टिंकू से मिलने के लिए तड़प रही थी। लेकिन उसके ससुराल वालों को डर था कि अगर बच्चा सुमित्रा के सामने गया और उसने अपनी मां को पहचान लिया, तो पुलिस उन्हें ह/त्या और दहेज उ/त्पी/ड़/न के जु/र्/म में फांसी पर लटका देगी। इसलिए उन्होंने बच्चों को किसी अनजान शहर में छिपा दिया।
- पुलिस की फाइल और अदालत: फफूंद रेलवे स्टेशन पर हुई उस म/ृ/त्यु की केस फाइल दोबारा खंगाली गई। शिवा बने सुमित्रा के बयानों ने पुलिस को ह/त्या के वे सबूत दे दिए जो पहले गायब कर दिए गए थे। हालांकि, भारतीय कानून में “पुनर्जन्म या आत्मा की गवाही” का कोई प्रावधान न होने के कारण कातिलों को सख्त सजा दिलाने में कानूनी अड़चनें आईं।
4. दो शरीरों और दो परिवारों का दर्दनाक संतुलन
सुमित्रा का पति जगदीश और उसका परिवार इस सच को स्वीकार कर चुके थे कि सुमित्रा अब सुमित्रा नहीं रही, बल्कि उसके अंदर शिवा की आत्मा निवास कर रही है।
- ठाकुर परिवार में ब्राह्मण रीति-रिवाज: सुमित्रा (ठाकुर कुल) होने के बावजूद वह पूरी तरह से ब्राह्मणों की तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाती, पूजा-पाठ करती और अपनी उच्च शिक्षा के बल पर घर के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाती।
- मासूम बच्चे का पालन-पोषण: अपने असली बेटों से न मिल पाने के गम में शिवा (सुमित्रा) ने सुमित्रा के ही 2 महीने के मासूम बच्चे को अपना बेटा मान लिया। वह कहती थी, “मैं इस बेजुबान बच्चे को मां का प्यार दूंगी, तो भगवान मेरे रिंकू और टिंकू की रक्षा करेंगे।”
5. यमराज की भविष्यवाणी और अंतिम विदाई (1998)
समय बीतता गया। शिवा बनी सुमित्रा ने अपने नए परिवार के साथ 13 साल का सफर तय किया। यमलोक में मिला समय अब खत्म होने की कगार पर था।
सन 1998 का साल: अचानक सुमित्रा की तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने कई टेस्ट किए, लेकिन शरीर में कोई बड़ी बीमारी निकलकर सामने नहीं आई। ऐसा लग रहा था जैसे उसकी जीवन-ऊर्जा (Life Force) धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
अपनी अंतिम सांस लेने से कुछ दिन पहले, उसने अपने आसपास बैठे लोगों से कहा:
“मेरा इस धरती का समय पूरा हो चुका है। यमराज ने मुझे जितने सालों का जीवन दिया था, वह आज समाप्त हो रहा है। अब मुझे जाना होगा।”
सन 1998 में, 30 साल की उम्र में सुमित्रा बनी शिवा ने हमेशा-हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। इस बार कोई चमत्कार नहीं हुआ, कोई 21 मिनट का सन्नाटा नहीं टूटा—उसकी आत्मा हमेशा के लिए इस नश्वर संसार से आजाद हो चुकी थी।
महा-निष्कर्ष: विज्ञान के मुंह पर करारा तमाचा!
इटावा का यह सुमित्रा-शिवा री-इन्कार्नेशन केस (Reincarnation Case) आज भी दुनिया के महानतम पैरानॉर्मल रहस्यों में प्रथम स्थान पर है:
- आत्मा अजर-अमर है: शरीर मिट सकता है, आग में जलकर राख हो सकता है, लेकिन आत्मा और उसकी यादें कभी खत्म नहीं होतीं।
- कुदरत का इंसाफ: भले ही इंसानी अदालतें सबूतों के अभाव में शिवा के कातिलों को सजा न दे सकी हों, लेकिन कुदरत ने उस म/ृ/त लड़की को दोबारा जुबान देकर दुनिया के सामने उसकी ह/त्या का खौ/फ/नाक सच लाकर खड़ा कर दिया।
- वैज्ञानिक मुहर: यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के आधिकारिक शोध पत्रों ने यह साबित कर दिया कि इंसान की चेतना (Consciousness) शरीर की म/ृ/त्यु के बाद भी खत्म नहीं होती!