PART 3: घर लौट रही महिला टीचर के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/पुलिस के भी होश उड़ गए/
घर लौट रही महिला टीचर के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/पुलिस के भी होश उड़ गए/
घर लौट रही महिला टीचर के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा – भाग 3 (नारी शक्ति का उदय और तस्करों का अंत)
भाग 13: बदलाव की गूंज और एक नई पहचान
समय बीतता गया और चित्रा देवी की ‘सेल्फ-डिफेंस’ (आत्मरक्षा) क्लास अब केवल गुरुकुल कॉलोनी तक सीमित नहीं रही। कानपुर के आस-पास के कई गांवों और शहरों की लड़कियां चित्रा से ट्रेनिंग लेने आने लगीं। जो चित्रा कभी खुद एक बेबस पीड़िता थी, वह अब सबके लिए ‘गुरु चित्रा’ बन चुकी थी। उनका इकलौता बेटा सोनू भी अब बड़ा हो रहा था और अपनी मां की बहादुरी देखकर एक ईमानदार पुलिस अफसर बनने का सपना देखने लगा था। किसान रामफल भी समय-समय पर चित्रा के ट्रेनिंग कैंप में आकर लड़कियों का हौसला बढ़ाता था। चित्रा ने लड़कियों को शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में फौलाद बना दिया था।
भाग 14: जेल की सलाखों के पीछे रची गई नई साजिश
उधर, जेल की कालकोठरी में उम्रकैद की सजा काट रहे सोमनाथ, पवन और कदम सिंह के दिलों में चित्रा के खिलाफ /ब/द/ले/ की आ/ग/ धधक रही थी। सोमनाथ ने जेल के एक भ्रष्ट गार्ड की मदद से अपने पुराने बॉस, ‘भैरव’ से संपर्क किया।
भैरव उस इलाके का एक बहुत बड़ा और खूंखार अपराधी था, जो महिलाओं की /मा/न/व त/स्क/री/ करने और मासूम लड़कियों को /दे/ह व्या/पा/र/ के दलदल में धकेलने का एक बहुत बड़ा /अ/वै/ध धं/धा/ चलाता था। चित्रा की जागरूकता मुहिम और लड़कियों के निडर होने की वजह से भैरव का यह /घि/नौ/ना का/रो/बा/र/ ठप पड़ने लगा था। कई लड़कियां अब उसके गुंडों से डरने के बजाय उनका डटकर मुकाबला करने लगी थीं।
भाग 15: कैंप पर मंडराता खौफनाक खतरा
भैरव ने चित्रा की आवाज को हमेशा के लिए दबाने का फैसला किया। उसने योजना बनाई कि चित्रा के ट्रेनिंग कैंप पर अचानक /ह/म/ला/ किया जाए और वहां मौजूद लड़कियों का /अ/प/ह/र/ण/ करके उन्हें /गु/ला/मी/ और /शो/ष/ण/ की दुनिया में बेच दिया जाए।
भैरव ने अपने सबसे खतरनाक और हथियारबंद गुंडों को इस काम के लिए चुना। योजना यह थी कि रात के अंधेरे में कैंप पर धावा बोला जाए, चित्रा को रास्ते से हटाकर, यानी उसकी /ह/त्या/ करके, लड़कियों को ट्रकों में भरकर रातों-रात सीमा पार भेज दिया जाए ताकि कोई सुराग न बचे।
भाग 16: खौफनाक रात और नारी शक्ति का ऐतिहासिक पलटवार
अक्टूबर की एक सुनसान और अंधेरी रात थी। चित्रा अपने कैंप में लगभग 30 लड़कियों के साथ रुकी हुई थी, जिनका अगले दिन एक विशेष अभ्यास होना था। रात के लगभग 2 बजे, भैरव के 15-20 हथियारबंद गुंडों ने कैंप की पिछली दीवार फांदी और अंदर घुस गए। उनका इरादा उन लड़कियों के साथ /ब/र्ब/र/ता/ और /अ/त्या/चा/र/ करने का था।
लेकिन उन गुंडों को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वे किनसे पंगा ले रहे हैं। आहट होते ही चित्रा और उसकी लड़कियां सतर्क हो गईं। जैसे ही गुंडों ने कमरों का दरवाजा तोड़ा और लड़कियों को पकड़ने की कोशिश की, लड़कियों ने डरकर रोने के बजाय उन पर भूखी शेरनियों की तरह पलटवार कर दिया।
एक पल में ही पासा पलट गया। किसी ने गुंडों की आंखों में मिर्ची स्प्रे डाल दिया, तो किसी ने अपनी मार्शल आर्ट किक से गुंडों के हथियार उनके हाथों से गिरा दिए। कैंप का हर कोना अब युद्ध के मैदान में बदल गया था। चित्रा ने खुद भैरव के सबसे बड़े गुंडे को अपनी लाठी से ऐसा सबक सिखाया कि वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिरकर रहम की भीख मांगने लगा। गुंडों के लिए वहां से भागना मुश्किल हो गया था।
भाग 17: रामफल और पुलिस की एंट्री तथा गिरोह का खात्मा
इसी बीच, रात के समय गश्त लगा रहे किसान रामफल को कैंप की तरफ से आ रही अजीब सी आवाजों और ट्रकों के खड़े होने पर शक हो गया था। उसने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी और अपने गांव के कुछ नौजवानों को लेकर कैंप की तरफ दौड़ पड़ा।
जब तक रामफल और भारी पुलिस बल वहां पहुंचते, चित्रा और उसकी बहादुर लड़कियों ने भैरव के आधे से ज्यादा गुंडों को रस्सियों से बांधकर जमीन पर लिटा दिया था। बाकी बचे गुंडों को पुलिस ने घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
गुंडों से सख्ती से हुई पूछताछ के आधार पर, पुलिस ने उसी रात भैरव के मुख्य ठिकाने पर भी छापा मारा। पुलिस ने उस बड़े /मा/न/व त/स्क/री/ रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया और भैरव को रंगे हाथों पकड़ लिया। वहां बने तहखानों से कई और मासूम लड़कियों को /अ/नै/ति/क धं/धे/ और /शा/री/रि/क प्र/ता/ड़/ना/ से मुक्त कराया गया।
भाग 18: सच्ची विजय और राष्ट्रीय सम्मान
अगले दिन जब यह खबर टीवी और अखबारों की सुर्खियों में आई, तो पूरे देश में चित्रा और उसकी छात्राओं की बहादुरी के चर्चे होने लगे। पुलिस महानिदेशक ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि बिना चित्रा और उनकी छात्राओं के अदम्य साहस के, इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को तोड़ना असंभव था।
इस घटना के कुछ महीनों बाद, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार द्वारा चित्रा देवी को महिला सशक्तिकरण और बहादुरी के सर्वोच्च सम्मान ‘राष्ट्रीय नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
जिस महिला को कभी कमजोर समझकर कुछ दरिंदों ने शिकार बनाने की कोशिश की थी, उसने न केवल खुद को मौत के मुंह से निकाला, बल्कि पूरे समाज के लिए एक ऐसा रक्षा कवच तैयार कर दिया जिसे भेदना किसी भी अपराधी के बस की बात नहीं थी।