PART 5 दामाद ऐसा करेगा सोचा नहीं था।
दामाद ऐसा करेगा सोचा नहीं था (भाग 5)
भाग 1: जेल की अंधेरी सलाखें और प्रमोद का मानसिक पतन
समय का पहिया कभी नहीं रुकता। अदालत द्वारा 10 वर्ष की कठोर सजा सुनाए जाने के बाद प्रमोद को केंद्रीय जेल भेज दिया गया। जेल की चार दीवारों के भीतर की कठोर जिंदगी, पत्थर तोड़ना और जेल की मशक्कत ने प्रमोद के वासना (वा/स/ना) और अहंकार को पूरी तरह चूर-चूर कर दिया।
जेल में बिताए गए हर एक दिन में प्रमोद को अपने घिनौने क/ृ/त्य का अहसास होने लगा। उसे समझ आया कि केवल कुछ क्षणों के श/ा/री/रि/क सु/ख और अ/नै/ति/क ह/व/स के चक्कर में उसने अपना हंसता-खेलता जीवन, कमाई का साधन (ऑटो), घर-परिवार और समाज में अपनी पूरी इज्जत दांव पर लगा दी। उसके बूढ़े माता-पिता ने भी उससे सारे नाते तोड़ लिए थे। जेल के एकांत में प्रमोद दिन-रात अपने ही पा/पो/ं और धो/खे पर पछतावे के आंसू बहाता रहा, लेकिन अब समय हाथ से निकल चुका था।
भाग 2: ‘लवली नारी शक्ति संस्थान’ का विस्तार और सफलता
दूसरी ओर, लवली ने अपने अतीत के काले पन्नों को पीछे छोड़कर एक नई सुबह की शुरुआत की। उसने अपने ब्यूटी पार्लर और सिलाई केंद्र को ‘लवली नारी शक्ति संस्थान’ के रूप में एक विशाल रूप दे दिया।
लवली अब उन तमाम असहाय, पीड़ित और उपेक्षित महिलाओं के लिए एक मजबूत सहारा बन गई थी जो पारिवारिक धो/खे, अ/त्या/चा/र, अ/म/र्या/दि/त बर्ताव और श/ा/री/रि/क श/ो/ष/ण का शिकार हुई थीं। लवली का यह संस्थान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुफ़्त प्रशिक्षण, कानूनी सहायता और रहने का आश्रय प्रदान करने लगा। लवली के इस निस्वार्थ कार्य की सराहना पूरे जिले और प्रदेश स्तर पर होने लगी।
भाग 3: प्रमोद की रिहाई और कर्मा का अंतिम न्याय
वर्षों की सजा काटने के बाद जब प्रमोद जेल से रिहा हुआ, तो उसकी उम्र ढल चुकी थी और उसका शरीर जर्जर हो चुका था। उसके पास न रहने का कोई ठिकाना था और न ही कोई काम देने वाला था। वह सडकों पर एक-एक रोटी के लिए भटकने पर मजबूर हो गया।
एक दिन जब प्रमोद शहर के मुख्य चौराहे से गुजर रहा था, तो उसने देखा कि वहां एक बड़े सभागार के बाहर ‘महिला सशक्तिकरण पुरस्कार’ का आयोजन हो रहा था। कौतूहलवश जब प्रमोद ने अंदर झांका, तो मंच पर लवली खड़ी थी, जिसे सरकार द्वारा सम्मानित किया जा रहा था।
लवली के चेहरे पर स्वाभिमान और सत्य का तेज था, जबकि प्रमोद दूर खड़ा फटे कपड़ों में कांप रहा था। उस पल प्रमोद को अहसास हुआ कि जिसने मर्यादा, धर्म और सत्य का रास्ता चुना, वह आज सफलता के शिखर पर है; और जिसने अ/नै/ति/क स/म्बंध, धो/खा और नीच क/ा/म/ना का रास्ता चुना, वह सड़क की धूल बन चुका है। कर्मा का यह अंतिम न्याय था।
भाग 4: मर्यादा, नैतिक मूल्य और पारिवारिक सुरक्षा का संदेश
यह पूरी घटना समाज के हर वर्ग के लिए एक गंभीर चेतावनी और सीख प्रस्तुत करती है। जब भी कोई व्यक्ति रिश्तों की पवित्रता, लोक-लाज और पारिवारिक सीमाओं को लांघकर केवल श/ा/री/रि/क इच्छाओं, अ/म/र्या/दि/त वा/स/ना और अ/नै/ति/क स/म्बंधों के पीछे अंधा हो जाता है, तो उसका अंत विनाशकारी ही होता है।
पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर फूटता है। किसी की सरलता और लाचारी का फायदा उठाकर नीं/द क/ी गो/ली देकर बेसुध करना या पारिवारिक मर्यादाओं का क/त्/ल करना ऐसा अपराध है जिसकी सजा इस जन्म में भोगनी ही पड़ती है।
भाग 5: निष्कर्ष
लवली का जीवन यह साबित करता है कि नारी अबला नहीं है। यदि उसके साथ कोई कितना भी बड़ा छल या श/ो/ष/ण क्यों न करे, अगर वह सत्य और मर्यादा के पथ पर अडिग रहे, तो वह हर मुश्किल को पार करके समाज में अपना एक नया और गौरवशाली इतिहास लिख सकती है। सच्चा सुख और शांति केवल चरित्र की पवित्रता, नैतिक मूल्यों और ईश्वर के न्याय में ही निहित है।