PART 2 मुश्ताक खान के निधन का कारण? Mushtaq Khan Passed Away !
पर्दे का ‘बब्लू’ और ज़िंदगी की असली जंग: मुश्ताक खान की अनकही गाथा (भाग 2)
अध्याय 1: ‘वेलकम’ और ‘गदर’ के सेट के अनसुने किस्से
‘वेलकम’ (2007) में ‘बब्लू’ का किरदार निभाते समय मुश्ताक खान को खुद भी इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि उनका डायलॉग “मेरी एक टांग नकली है…” भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक कल्ट डायलॉग बन जाएगा।
सेट पर अक्षय कुमार, नाना पाटेकर, अनिल कपूर और कटरीना कैफ जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद मुश्ताक खान ने अपने सहज हास्य अभिनय से हर सीन में अपनी एक अलग पहचान बनाई। निर्देशक अनीस बज्मी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बब्लू के किरदार में जो कॉमिक टाइमिंग और बॉडी लैंग्वेज मुश्ताक साहब ने जोड़ी थी, वह पटकथा (Script) में भी पूरी तरह से नहीं लिखी गई थी।
इसी तरह साल 2001 की ऐतिहासिक फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में उन्होंने ‘गुल्ले खां’ (Gul Khan) का यादगार किरदार निभाया। 22 साल बाद जब 2023 में ‘गदर 2’ बनी, तो निर्देशक अनिल शर्मा ने फिर से मुश्ताक खान को उसी किरदार के लिए चुना। कम समय और स्क्रीन स्पेस के बावजूद मुश्ताक खान ने साबित कर दिया कि एक सच्चा कलाकार अपनी छोटी सी भूमिका से भी दर्शकों का दिल जीत सकता है।
अध्याय 2: बिजनौर गैंग, सुनील पाल कांड और उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई
20 नवंबर 2024 को जब मुश्ताक खान का मेरठ बुलाकर बिजनौर में अ/प/ह/र/ण किया गया था, तो उस वक्त उन्होंने अपनी सूझबूझ और अज़ान की आवाज से जान तो बचा ली थी, लेकिन शुरुआत में वे पुलिस में औपचारिक एफआईआर दर्ज कराने से झिझक रहे थे। वे अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गहरे चिंता में थे।
लेकिन कुछ ही हफ़्तों बाद जब मशहूर कॉमेडियन सुनील पाल के साथ भी ठीक इसी बिजनौर गैंग ने अ/प/ह/र/ण और रं/स/म मांगने की वैसी ही घटना को अंजाम दिया, तब मुश्ताक खान आगे आए।
उन्होंने हिम्मत दिखाकर उत्तर प्रदेश पुलिस से संपर्क किया और अपने फ़्लाइट टिकट, बैंक ट्रांजैक्शन की रसीदें और अ/प/ह/र/ण/क/र्ताओं के ठिकाने के लोकेशन सबूत के तौर पर पुलिस को सौंपे।
उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना लवी पाल और उसके साथियों (सार्थक चौधरी, सबीउद्दीन, अज़ीम और शशांक) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से जबरन वसूले गए पैसे और ह/थि/या/र भी बरामद किए। मुश्ताक खान की इस हिम्मत की वजह से अन्य कई कलाकारों को इस खतरनाक गैंग का शिकार बनने से बचाया जा सका।
अध्याय 3: पॉडकास्ट में आख़िरी इंटरव्यू और ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक़
अपने नि/ध/न से कुछ ही हफ़्ते पहले सितंबर 2026 में मुश्ताक खान ‘फाइंडिंग ए वे विथ दीप्ति’ (Finding A Way With Deepti) पॉडकास्ट में नज़र आए थे। यह उनका जीवन का आख़िरी विस्तृत साक्षात्कार (Interview) साबित हुआ।
उस इंटरव्यू में अपने अ/प/ह/र/ण की डरावनी दास्तान सुनाते हुए उन्होंने बहुत ही भावुक अंदाज़ में कहा था: “ईश्वर उस रात मेरे साथ था। हम कलाकार बहुत सीधे-सादे होते हैं; हम लोगों पर जल्दी विश्वास कर लेते हैं और बिना पूरी जांच-पड़ताल किए आयोजकों के बुलावे पर चले जाते हैं। लेकिन उस रात जब वे मुझे बं/धू/क की नोक पर बं/ध/क बनाकर ₹1 करोड़ मांग रहे थे, तब मुझे समझ आया कि ज़िंदगी कितनी अनिश्चित है।”
उन्होंने मुस्कुराते हुए आगे कहा था: “गदर 2 ने 500 करोड़ कमाए तो अ/प/ह/र/ण/क/र्ताओं को लगा कि मुझे भी 5-10 करोड़ मिले होंगे! मैंने उन्हें समझाया कि हम कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं भाई, हमें तो बस हमारी मेहनत की वाजिब फी/स मिलती है।”
अध्याय 4: ‘रफ़ू मास्टर’ की विदाई और बॉलिवुड में शोक की लहर
24 सितंबर 2026 को जब मुंबई के नानावती अस्पताल से मुश्ताक खान के नि/ध/न की खबर आई, तो पूरा फ़िल्म जगत सन्न रह गया। 1990 की सुपरहिट फिल्म ‘आशिकी’ में उनके ‘रफ़ू मास्टर’ के किरदार से लेकर ‘हेरा फेरी’, ‘राउडी राठौर’, ‘स्त्री’, ‘बधाई दो’, ‘स्त्री 2’ और 2026 की ‘जाट’ जैसी दर्जनों फ़िल्मों के सह-कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उनके बेहद करीबी दोस्त और फ़िल्म मेकर अशोक पंडित ने भावुक होते हुए कहा: “मुश्ताक और मैंने थिएटर के दिनों से एक साथ संघर्ष किया था। जब मुंबई में हम दोनों के पास खाने और रहने के पैसे नहीं होते थे, तब भी मुश्ताक के चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। सतीश कौशिक, सतीश शाह और अब मुश्ताक… एक-एक करके हमारे दौर के सच्चे कलाकार हमें छोड़कर जा रहे हैं।”
हास्य कलाकार सुनील पाल, निर्देशक अनीस बज्मी और अभिनेता अक्षय कुमार ने भी मुश्ताक खान को एक महान इंसान और बेमिसाल अदाकार बताया।
अध्याय 5: चरित्र अभिनेताओं (Character Artists) की स्थिति पर छोड़ा सवाल
मुश्ताक खान अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में भी चरित्र अभिनेताओं के अधिकारों और उनके सम्मान के लिए आवाज़ उठाते रहे। उन्होंने हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया कि बॉलीवुड की बड़ी फ़िल्मों की सफलता में सपोर्टिंग कास्ट का योगदान 50% से ज़्यादा होता है, लेकिन फिर भी उन्हें मुख्य स्टार्स की तुलना में बेहद कम फी/स और सुविधाएं दी जाती हैं।
उनके इस बेबाक बयान ने फ़िल्म इंडस्ट्री के अंदर ‘पे-गैप’ (Pay Gap) और कैरेक्टर आर्टिस्टों के वेलफेयर को लेकर एक नई बहस छेड़ दी थी।
2026 में रिलीज़ हुई उनकी अंतिम फ़िल्में ‘हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं’ और ‘कोकीन’ उनके बेहतरीन अभिनय की अंतिम मिसालें बनकर हमारे सामने हैं।
अध्याय 6: मुश्ताक खान की जीवन गाथा से अंतिम संदेश
- ईमानदारी और सादगी की ताकत: बालाघाट जैसे छोटे शहर से निकलकर 4 दशकों तक बॉलीवुड में बिना किसी गॉडफादर के टिके रहना यह साबित करता है कि हुनर कभी किसी पहचान का मोहताज नहीं होता।
- विपत्ति में हिम्मत और ईश्वर पर विश्वास: अ/प/ह/र/ण के उस खौफ़नाक मंज़र में धैर्य बनाए रखना और अज़ान की आवाज़ को अपनी मुक्ति की दिशा बनाना उनकी सूझबूझ का प्रतीक है।
- कलाकार कभी मरता नहीं: मुश्ताक खान भले ही नानावती अस्पताल में क/ै/ं/स/र से जंग हार गए हों, लेकिन पर्दे पर उनकी हर एक मुस्कान और कॉमिक टाइमिंग भारतीय सिनेमा प्रेमी हमेशा याद रखेंगे।