दो कलयुगी लड़कों ने महिला संग कर दिया बड़ा कां*ड/पुलिस के भी होश उड़ गए/
दो कलयुगी लड़कों ने महिला संग कर दिया बड़ा का*ड – कानपुर की सनसनीखेज कथा
अध्याय 1: शाहपुर गाँव की शिल्पा देवी और कल्याणी देवी का परिवार
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में ‘शाहपुर’ नाम का एक शांत गाँव पड़ता है। इसी शाहपुर गाँव में शिल्पा देवी नाम की एक अत्यंत खूबसूरत और नवयुवती महिला रहती थी। शिल्पा देवी के पति कदम सिंह की कुछ समय पहले गाँव के पास बहने वाली नहर में डूबने से अकाल मृत्यु हो गई थी। पति के अचानक चले जाने से शिल्पा देवी अपने जीवन में बिल्कुल अकेली पड़ गई थी।
पति की मृत्यु के बाद शिल्पा देवी ने हार नहीं मानी। उसने अपने परिवार का पेट पालने के लिए गाँव से थोड़ी दूर स्थित शराब के ठेके के ठीक सामने उबले हुए अंडे बेचने का एक छोटा-सा ठेला लगाना शुरू कर दिया। उबले अंडे बेचकर शिल्पा देवी ठीक-ठाक पैसे कमा लेती थी, जिससे उसके घर का गुज़र-बसर अच्छे से चलने लगा।
शिल्पा देवी के परिवार में उसकी बूढ़ी सासू माँ ‘कल्याणी देवी’ और 12 साल का एक बेटा ‘अमन’ था। अमन गाँव के ही स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ाई करता था।
सासू माँ कल्याणी देवी अपनी बहू शिल्पा देवी पर हमेशा बाज़ की तरह तीखी नज़र रखा करती थी। कल्याणी देवी को अक्सर अपनी बहू के चाल-चलन और आचरण पर शक रहता था, क्योंकि शिल्पा बहुत सुंदर थी और अक्सर अनजान पुरुषों की तरफ आकर्षित हो जाती थी। कल्याणी देवी चाहती थी कि उसके बेटे की मृत्यु के बाद भी घर की मर्यादा और कुल की इज़्ज़त बनी रहे।
अध्याय 2: किराएदारों की तलाश और अंकित-किशन का आगमन
समय बीतता गया। एक दिन सुबह के लगभग 8:00 बजे कल्याणी देवी ने अपने बड़े से मकान को देखा, जिसमें दो कमरे पूरी तरह खाली पड़े हुए थे। कल्याणी देवी ने अपनी बहू शिल्पा से कहा, “शिल्पा, हमारे घर में दो कमरे बेकार खाली पड़े हैं। अगर हम इन्हें किसी अच्छे इंसान को किराए पर दे दें, तो घर में कुछ अतिरिक्त कमाई हो जाएगी और गुज़ारा और आसानी से चलेगा।”
शिल्पा देवी ने अपनी सास की बात से सहमति जताई और बोली, “जी माँ जी, मैं आज ही बाज़ार और पड़ोसियों से बात करके किसी किराएदार का इंतज़ाम करती हूँ।”
शिल्पा अपनी दुकान पर चली गई और आसपास के पड़ोसियों से भी कह दिया कि अगर कोई किराएदार दिखे तो उसके घर भेज दें।
उसी गाँव से थोड़ी दूरी पर एक निजी फैक्ट्री थी, जहाँ ‘अंकित’ और ‘किशन’ नाम के दो कलयुगी और आवारा किस्म के मजदूर काम करते थे। अंकित और किशन काम-वा/स/ना में डूबे रहने वाले और सुंदर महिलाओं पर ब/द-नि/य/त रखने वाले लड़के थे।
उसी दोपहर अंकित और किशन फैक्ट्री से निकलकर शराब के ठेके पर शराब खरीदने आए। शराब खरीदने के दौरान अंकित की नज़र सामने अंडे बेच रही खूबसूरत शिल्पा देवी पर पड़ी। शिल्पा की सुंदरता और गठीले शरीर को देखते ही अंकित की नियत खराब हो गई। उसने अपने दोस्त किशन से कहा, “देख किशन, सामने कितनी सुंदर और जवान औरत अंडे बेच रही है!”
दोनों अंडे खाने के बहाने शिल्पा की दुकान पर पहुँचे और 10 उबले अंडे पैक करने को कहा। बातचीत के दौरान अंकित ने चालाकी से कहा, “भाभी जी, हमारे फैक्ट्री मालिक ने हमें कमरे से निकाल दिया है, हम रहने के लिए किसी किराए के कमरे की तलाश में भटक रहे हैं।”
शिल्पा देवी यह सुनकर खुश हो गई और बोली, “तुम दोनों को घबराने की ज़रूरत नहीं है! मेरे घर में दो कमरे खाली पड़े हैं। तुम वहाँ किराए पर रह सकते हो।”
शिल्पा ने अंकित को अपना मोबाइल नंबर और घर का पता दे दिया। शाम को 7:00 बजे अंकित और किशन अपना सामान लेकर शिल्पा के घर पहुँच गए। कल्याणी देवी ने एक महीने का अग्रिम (एडवांस) किराया लेकर दोनों को कमरा दे दिया। इस तरह अंकित और किशन उसी घर में किराएदार बनकर रहने लगे।
अध्याय 3: मंजू देवी के साथ घिनौना काम और कल्याणी का गुस्सा
लगभग 15 दिनों तक सब कुछ सामान्य चलता रहा। अंकित और किशन रोज़ सुबह 8:00 बजे अपनी फैक्ट्री चले जाते और शाम को लौटते।
तारीख आई 5 जुलाई 2026। शाम के लगभग 7:30 बजे अंकित और किशन अपनी साइकिलों से फैक्ट्री से लौट रहे थे। रास्ते में अंधेरा हो चुका था। बीच रास्ते में उन्हें ‘मंजू देवी’ नाम की एक महिला मिली, जो कि गलत धं/धा (जि/स्म-फ़ा/रो/शी) करने का काम करती थी।
मंजू देवी की खूबसूरती देखकर दोनों लड़कों की नियत फिर बिगड़ गई। अंकित ने सीधे मंजू से पूछा, “एक रात के कितने पैसे लोगी?” मंजू ने कहा, “₹2000 एक रात के।” अंकित ने कहा, “हम दो दोस्त हैं, सही दाम बताओ।” मंजू ₹3000 में दोनों के साथ रात गुज़ारने पर राजी हो गई।
अंकित और किशन चुपके से मंजू देवी को अपने किराए के कमरे में ले आए और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया। कमरे में मंजू ने ₹3000 एडवांस लिए। इसके बाद सबसे पहले अंकित ने मंजू के साथ अ/ंत/रं/ग संबंध बनाए। अपनी काम-पि/पा/सा पूरी करने के बाद अंकित बाहर आया और किशन से बोला, “जा किशन, तू भी बहती गंगा में हाथ धो ले।” फिर किशन ने भी मंजू देवी के साथ अनुचित संबंध बनाए।
इसके बाद दोनों दोस्त कमरे में बैठकर शराब पीने लगे। रात के समय जब मंजू देवी चुपके से कमरे से बाहर निकल रही थी, तभी अचानक सासू माँ कल्याणी देवी की आँख खुल गई। कल्याणी देवी ने एक अनजान औरत को रात के अंधेरे में लड़कों के कमरे से निकलते देख लिया।
कल्याणी देवी का खून खौल उठा। उसने मंजू देवी और दोनों लड़कों को कड़े शब्दों में गालियाँ देना और डांटना शुरू कर दिया। कल्याणी का शोर सुनकर शिल्पा भी जाग गई।
शिल्पा देवी ने अपनी सास को शांत कराते हुए कहा, “माँ जी, दोनों जवान लड़के हैं, उनसे गलती हो गई। अब दोबारा ऐसा नहीं होगा।” अंकित और किशन ने भी माफ़ी माँगते हुए कहा, “जी अम्मा जी, हमसे भूल हो गई, आगे से हम किसी लड़की को कमरे पर नहीं लाएंगे।”
शिल्पा ने मंजू देवी को डांटकर भगा दिया और मामला शांत कराया। लेकिन अंदर ही अंदर शिल्पा खुद भी इन दोनों जवान लड़कों की तरफ शारीरिक रूप से आकर्षित होने लगी थी।
अध्याय 4: जागरण की रात और शिल्पा का भटकाव
समय बीतता गया और तारीख आई 20 जुलाई 2026। सुबह 7:30 बजे कल्याणी देवी ने अपनी बहू शिल्पा से कहा, “शिल्पा, आज रात हमारे गाँव के मंदिर में विशाल माता का जागरण है। तुम्हें आज रात मेरे साथ मंदिर चलना होगा।”
शिल्पा ने झूठी मुस्कान के साथ कहा, “ठीक है माँ जी, मैं शाम को जल्दी दुकान बढ़ा कर आ जाऊँगी।”
शाम को 7:00 बजे शिल्पा घर लौटी और बहाना बनाते हुए अपनी सास से बोली, “माँ जी, आज मेरी तबीयत बहुत खराब लग रही है, मुझसे चला नहीं जाएगा। आप अकेले ही जागरण में चली जाइए।”
कल्याणी देवी रात 8:30 बजे अकेली मंदिर चली गई। घर में शिल्पा और उसका 12 साल का बेटा अमन अकेले थे। शिल्पा ने अपने बेटे को जल्दी खाना खिलाकर कमरे में सुला दिया।
रात लगभग 9:30 बजे दरवाज़े पर दस्तक हुई। शिल्पा ने दरवाज़ा खोला तो सामने अंकित और किशन शराब के नशे में धुत खड़े थे। मुख्य दरवाज़ा बंद करते हुए अंकित ने पूछा, “शिल्पा, तुम्हारी सास कहाँ है?” शिल्पा ने कहा, “वह तो मंदिर के जागरण में गई हैं और मेरा बेटा सो रहा है।”
अंकित की हिम्मत बढ़ गई। उसने तुरंत शिल्पा का हाथ पकड़ लिया। शिल्पा ने कोई विरोध नहीं किया। अंकित ने कहा, “शिल्पा! आज बहुत अच्छा मौका है। तेरे घर में गरीबी है, पति भी नहीं है। तू हम दोनों के साथ अपनी रात गुज़ार ले, हम तुझे पैसे भी देंगे।”
शिल्पा का मन बहक चुका था। उसने इत्र लगाया और सज-धजकर लड़कों के कमरे में पहुँच गई।
कमरे का दरवाज़ा बंद करके सबसे पहले अंकित ने शिल्पा देवी के साथ उसकी रज़ामंदी से अनुचित अ/ंत/रं/ग संबंध बनाए। इच्छा पूरी होने पर अंकित बाहर आया और किशन को अंदर भेज दिया। फिर किशन ने भी शिल्पा के साथ अनुचित संबंध बनाए।
काम खत्म होने के बाद दोनों लड़कों ने शिल्पा को कुछ पैसे दिए। शिल्पा ने मुस्कुराते हुए कहा, “जब भी मेरी सास घर पर नहीं होगी, मैं तुम दोनों को अपने कमरे में बुला लिया करूँगी।”
पति की कमी और पैसों के लालच में शिल्पा देवी पूरी तरह इन दोनों कलयुगी लड़कों के प्रेम-जाल में फँस चुकी थी।
अध्याय 5: रजनी की नज़र और किराएदारों की बेदखली
इसके बाद शिल्पा जब भी मौका मिलता, दोनों लड़कों के साथ अपनी रातें रंगीन करने लगी और बदले में उनसे पैसे लेने लगी।
तारीख आई 5 अगस्त 2026। सुबह 8:00 बजे कल्याणी देवी ने शिल्पा से कहा कि वह अपने पोते अमन को लेकर शहर दवा लेने जा रही है और दोपहर तक लौटेगी।
कल्याणी के जाते ही शिल्पा ने तुरंत अंकित को फोन करके घर बुला लिया। अंकित अपनी साइकिल से आया और दोनों बेडरूम में अ/ंत/रं/ग हो गए। इसके बाद अंकित ने फोन करके किशन को भी बुला लिया। किशन ने भी आकर शिल्पा के साथ अपनी इच्छा पूरी की।
दोनों लड़के जब घर से बाहर निकल रहे थे, तभी पड़ोस में रहने वाली ‘रजनी देवी’ ने उन्हें शिल्पा के घर से निकलते देख लिया। रजनी काफी दिनों से इन पर नज़र रख रही थी और उसे शिल्पा के भटकाव की भनक लग चुकी थी।
शाम को 5:30 बजे जब कल्याणी देवी दवा लेकर लौटी, तो रास्ते में रजनी ने उसे रोक लिया और कहा, “कल्याणी! तेरे घर में कुछ ठीक नहीं चल रहा। तेरी बहू शिल्पा इन दोनों मजदूर लड़कों के साथ अपनी रातें रंगीन करती है और तुझे खबर तक नहीं है!”
कल्याणी देवी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने घर आकर शिल्पा से पूछताछ की, लेकिन शिल्पा साफ मुकर गई। दोनों में जमकर झगड़ा हुआ।
रात 8:00 बजे जब अंकित और किशन कमरे पर आए, तो कल्याणी देवी ने उनका दरवाज़ा खटखटाया और गालियाँ देते हुए चिल्लाई, “अपना सामान उठाओ और अभी के अभी मेरे घर से दफ़ा हो जाओ! तुम दोनों मेरी बहू के साथ गं/दा और अनुचित काम करते हो।”
कल्याणी देवी ने दोनों लड़कों को धक्के देकर घर से बाहर निकाल दिया। बेइज्जत होकर बाहर निकलते समय अंकित और किशन ने कल्याणी देवी को घूरते हुए धमकी दी, “बूढ़ी! तूने हमें धक्के देकर निकाला है न? तुझे इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा, हम तुझे सबक ज़रूर सिखाएंगे!”
दोनों लड़के वापस फैक्ट्री में ही रहने लगे, लेकिन उनके मन में बदला लेने की आग सुलग रही थी।
अध्याय 6: 24 अगस्त की खौफनाक शाम और कल्याणी देवी का अंत
तारीख आई 24 अगस्त 2026। शाम के लगभग 4:30 बजे कल्याणी देवी ने अपनी बहू शिल्पा से कहा, “शिल्पा, मैं पास के खेतों में जा रही हूँ, वहाँ कुछ ताज़ा सब्जियाँ लगी हैं, तोड़कर लाती हूँ।”
कल्याणी देवी अकेली ही खेतों की तरफ निकल पड़ी।
उसी समय फैक्ट्री के पास वाली सड़क के किनारे बैठकर अंकित और किशन शराब पी रहे थे। दोनों अत्यधिक नशे में थे। तभी अंकित की नज़र अकेली जा रही कल्याणी देवी पर पड़ी।
अंकित ने ज़हरीली मुस्कान के साथ किशन से कहा, “देख किशन! वही कल्याणी बुढ़िया अकेली खेतों की तरफ जा रही है। इसी ने हमें धक्के मारकर निकाला था। आज शाम को खेत में कोई नहीं है, आज इसे हमेशा के लिए सबक सिखाते हैं!”
किशन भी राजी हो गया। दोनों चुपके से कल्याणी के पीछे-पीछे खेत में पहुँच गए। शाम का वक्त होने के कारण दूर-दूर तक खेतों में कोई नहीं था।
जैसे ही कल्याणी देवी ईख (गन्ने) के खेत के पास पहुँची, दोनों लड़कों ने झपटकर उसे दबोच लिया और घसीटते हुए गन्ने के घने खेत के अंदर ले गए। कल्याणी चीख न सके, इसलिए उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया और उसके ही आँचल/कपड़े से उसके हाथ-पैर कसकर बाँध दिए।
इसके बाद दोनों हैवानों ने बारी-बारी से उस असहाय वृद्ध महिला कल्याणी देवी के साथ क्रूर और अ/त्या/चा/री शा/री/रि/क कु-कृ/त्य (ब/ला*त्का/र) किया।
कल्याणी देवी रोती रही, उनके सामने हाथ जोड़ती रही, लेकिन उन दोनों दरिंदों पर हैवानियत सवार थी।
इसी छीना-झपटी के दौरान ज़मीन पर तड़पती कल्याणी देवी के हाथ में एक छोटा-सा नुकीला पत्थर आ गया। कल्याणी ने अपनी बची-कुची ताकत लगाकर वह पत्थर अंकित के सिर पर दे मारा, जिससे अंकित का सिर फूट गया और खून बहने लगा।
सिर पर चोट लगते ही अंकित का गुस्सा वहशीपन में बदल गया। उसने कल्याणी देवी के हाथ से वह पत्थर छीन लिया और अंधाधुंध कल्याणी देवी के सिर और चेहरे पर तब तक वार करता रहा, जब तक कल्याणी देवी का तड़पना बंद नहीं हो गया और उसकी मौ*त नहीं हो गई।
अध्याय 7: खेत मालिक शंकर की चौकसी और पुलिस की कार्रवाई
कल्याणी देवी की मौ*त होते ही दोनों लड़कों के हाथ-पाँव फूल गए। अंकित ने घबराकर किशन से कहा, “किशन, यह तो मर गई! चलो इसे इसी खेत में गड्ढा खोदकर दफ़न कर देते हैं।” किशन ने कहा, “फावड़ा (कसी) कहाँ से लाएंगे?” अंकित ने पास ही खेत के किनारे पड़ी एक कसी (फावड़ा) देखी। दोनों ने मिलकर तेज़ी से खेत की मिट्टी खोदना शुरू कर दिया। लगभग आधे घंटे में उन्होंने एक गहरा गड्ढा खोद लिया।
वे कल्याणी देवी की ला/श को घसीटकर गड्ढे के पास ला ही रहे थे कि तभी खेत का असली मालिक ‘शंकर’ अपने 3-4 मजदूरों को लेकर वहाँ आ पहुँचा। शंकर को शाम के समय अपने खेत में काम देखना था।
शंकर ने जब दूर से दो लड़कों को गड्ढा खोदते और कुछ घसीटते देखा, तो उसे शक हुआ। शंकर को देखते ही अंकित और किशन बदहवास होकर भागने लगे।
शंकर ने चिल्लाकर अपने मजदूरों से कहा, “पकड़ो इन दोनों को! भागने न पाएँ!”
मजदूरों ने दौड़कर अंकित और किशन को मौके पर ही दबोच लिया। जब शंकर गड्ढे के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि वहाँ गाँव की कल्याणी देवी की र/क्त-रं/जि/त ला/श पड़ी हुई थी।
शंकर और उसके मजदूरों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने दोनों दरिंदों को खंभे से बाँधकर लात-घूसों से जमकर धुन दिया। इसके बाद शंकर ने तुरंत पुलिस स्टेशन फोन कर दिया।
डेढ़ घंटे के भीतर पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुँच गई। पुलिस ने कल्याणी देवी के शव को सील किया और खून से लथपथ अंकित और किशन को गिरफ्तार कर लिया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों कलयुगी लड़कों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि कैसे उन्होंने पहले किराएदार बनकर बहू शिल्पा देवी के साथ अ/वै/ध संबंध बनाए और फिर कल्याणी देवी द्वारा बेदखल किए जाने के प्रतिशोध में उसके साथ कु-कृ/त्य करके उसकी हत्या कर दी।
पुलिस ने दोनों अपराधियों के खिलाफ ह/त्या, ब/ला*त्का/र और साज़िश की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। जब यह खबर शाहपुर गाँव में फैली, तो पूरा कानपुर दहल उठा और हर कोई शिल्पा के चरित्रहीन भटकाव तथा दोनों कलयुगी लड़कों की क्रूरता पर थू-थू करने लगा।
महा-निष्कर्ष और संपूर्ण कथा की अमर सीख
- मर्यादा और चरित्र ही जीवन की रक्षा करते हैं: क्षणिक शा/री/रि/क आ/क/र्ष/ण, अ/वै/ध संबंध और वास/ना के बहकावे में आना केवल परिवार की बर्बादी, सामाजिक बदनामी और अपूरणीय क्षति लाता है।
- कुसंगति और लालच का भयानक अंत: अनजान और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को बिना सही जांच-पड़ताल के घर में पनाह देना या किराएदार बनाना जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
- पाप का घड़ा हमेशा फूटता है: इंसान चाहे जितनी चालाकी से गलत काम करे, कानून और ईश्वर की लाठी से कोई नहीं बच सकता। दुष्टता और अपराध का अंत केवल सलाखों के पीछे या विनाश में ही होता है।