मंदिर में कथा सुनने गई महिला के साथ खौफनाक वारदात, पुजारी और सरपंच पर गंभीर आरोप; तहखाने में छिपा था बड़ा राज – News

मंदिर में कथा सुनने गई महिला के साथ खौफनाक वारदात, पुजारी और सरपंच पर गंभीर आरोप; तहखाने में छिपा था बड़ा राज

मंदिर में कथा सुनने गई महिला के साथ खौफनाक वारदात, पुजारी और सरपंच पर गंभीर आरोप; तहखाने में छिपा था बड़ा राज

मंदिर में कथा सुनने गई महिला के साथ खौफनाक वारदात, पुजारी और सरपंच पर गंभीर आरोप; तहखाने में छिपा था बड़ा राज

अमेठी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से सामने आई एक कथित आपराधिक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक परिवार की दो महिलाएं अपने बीमार परिजन की सलामती और परिवार की सुख-समृद्धि की उम्मीद में मंदिर में कथा सुनने जाया करती थीं। लेकिन आरोप है कि इसी धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर एक पुजारी और गांव के सरपंच ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।

इस मामले में सामने आई कहानी के मुताबिक, घटनाओं की शुरुआत अमेठी जिले के एक गांव से हुई। गांव में रहने वाले सतबीर सिंह करीब एक साल पहले हुए एक हादसे में अपनी दोनों टांगें गंवा चुके थे। हादसे के बाद वह चलने-फिरने और काम करने में असमर्थ हो गए थे और अधिकतर समय चारपाई पर ही रहते थे।

सतबीर की पत्नी रीना देवी घर संभालने के साथ-साथ अपने पति की देखभाल करती थीं। परिवार में सतबीर की विधवा भाभी बबीता देवी भी रहती थीं, जिनका एक 10 साल का बेटा था।

मंदिर जाने की दी गई सलाह

बताया जाता है कि एक दिन पड़ोस की महिला कविता देवी सतबीर के घर पहुंचीं। उन्होंने सतबीर की हालत देखी और रीना से कहा कि उन्हें नियमित रूप से मंदिर जाकर पूजा-पाठ और कथा सुननी चाहिए।

रीना धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। उन्होंने मंदिर जाने की बात मान ली। अगले दिन सुबह रीना और बबीता पूजा की थाली लेकर मंदिर पहुंचीं।

लेकिन मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने वहां बेहद खराब व्यवस्था देखी। मंदिर परिसर में गंदगी थी, आवारा जानवर घूम रहे थे और वहां कोई पुजारी मौजूद नहीं था।

दोनों महिलाओं ने तय किया कि गांव के सरपंच सूरजपाल सिंह से मंदिर के लिए पुजारी नियुक्त करने की बात की जाए।

यहीं से कथित तौर पर इस कहानी ने एक नया मोड़ लिया।

मंदिर में पहुंचा किशन दत्त

रीना और बबीता ने सरपंच से मंदिर की व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई। सरपंच ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही मंदिर में एक पुजारी की व्यवस्था कर देगा।

कुछ दिनों बाद किशन दत्त नाम का एक व्यक्ति मंदिर में रहने लगा और पूजा-पाठ तथा कथा कराने लगा।

शुरुआत में गांव के लोग उसे धार्मिक व्यक्ति मानकर सम्मान देने लगे। लेकिन आरोप है कि मंदिर में आने से पहले ही किशन दत्त और सरपंच के बीच कुछ ऐसी शर्तें तय हुई थीं, जिनका मकसद धार्मिक सेवा से कहीं अलग था।

कहानी के अनुसार, मंदिर में आने वाले चढ़ावे में हिस्सेदारी और महिलाओं को लेकर भी कथित तौर पर अनुचित समझौता किया गया था।

कथा के बहाने महिलाओं को बुलाने का आरोप

10 जुलाई 2026 के आसपास किशन दत्त ने मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करना शुरू किया। इसी दौरान वह सतबीर के घर भी पहुंचा।

दरवाजा बबीता देवी ने खोला। पुजारी ने उन्हें मंदिर में होने वाली कथा के बारे में बताया और शाम को कथा सुनने आने के लिए कहा।

किशन दत्त ने कथित तौर पर परिवार की परेशानियों और सतबीर की खराब तबीयत का हवाला देते हुए रीना और बबीता को धार्मिक उपाय करने की सलाह भी दी।

बबीता उस शाम कथा सुनने मंदिर पहुंचीं।

कथा खत्म होने के बाद जब बाकी महिलाएं मंदिर से चली गईं, तो आरोप है कि किशन दत्त ने बबीता को यह कहकर रोक लिया कि वह उन्हें कुछ विशेष मंत्र और उपाय बताएगा।

इसके बाद उसे कथित तौर पर मंदिर के तहखाने में ले जाया गया।

तहखाने में सामने आया कथित डरावना सच

कहानी के अनुसार, तहखाने में पहुंचने के बाद स्थिति अचानक बदल गई। आरोप है कि किशन दत्त ने बबीता को चाकू दिखाकर धमकाया और उसे बंधक बना लिया।

इसके बाद कथित तौर पर सरपंच सूरजपाल को वहां बुलाया गया।

बबीता ने बाद में अपने परिवार को कुछ नहीं बताया। आरोप है कि उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई थी।

कुछ समय बाद किशन दत्त ने रीना को भी मंदिर में कथा सुनने के लिए बुलाना शुरू कर दिया।

रीना अपने बीमार पति की हालत को लेकर पहले से परेशान थीं। उन्हें कथित तौर पर विश्वास दिलाया गया कि मंदिर में कथा और कुछ धार्मिक उपाय करने से उनके पति की हालत बेहतर हो सकती है।

रीना भी कथित तौर पर जाल में फंसी

एक दिन रीना अकेली मंदिर पहुंचीं।

कथा समाप्त होने के बाद किशन दत्त ने कथित तौर पर उन्हें भी मंदिर के तहखाने में चलने के लिए कहा। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें धमकाया गया और उनके साथ भी जबरदस्ती की गई।

इसके बाद कथित तौर पर सरपंच को भी वहां बुलाया गया।

रीना को भी कथित रूप से परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर चुप रहने के लिए मजबूर किया गया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि रीना ने भी घर लौटने के बाद किसी को इस बारे में नहीं बताया।

इस तरह परिवार के दो सदस्यों के साथ कथित तौर पर गंभीर घटनाएं होने के बावजूद दोनों महिलाएं डर और दबाव में चुप रहीं।

18 अगस्त की रात बदला पूरा घटनाक्रम

मामले में सबसे बड़ा मोड़ कथित तौर पर 18 अगस्त 2026 को आया।

आरोप है कि सरपंच ने किशन दत्त से बबीता को फिर मंदिर बुलाने के लिए कहा।

किशन दत्त बबीता के घर पहुंचा और उसे धमकी दी कि अगर वह मंदिर नहीं आई तो उसके परिवार को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

डरी हुई बबीता ने मंदिर जाने की बात मान ली।

लेकिन इस बार कथित तौर पर उसने अपने साथ एक चाकू रख लिया।

रात करीब 8 बजे के बाद बबीता घर से निकली और मंदिर पहुंची। वहां कथित तौर पर किशन दत्त और सरपंच सूरजपाल दोनों मौजूद थे।

इसके बाद बबीता को मंदिर के तहखाने में ले जाया गया।

चाकू से हमला, फिर ईंट से वार का आरोप

तहखाने में कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ।

कहानी के मुताबिक, इसी दौरान बबीता ने चाकू निकालकर सूरजपाल पर हमला कर दिया। सरपंच की पीठ पर चोट लगने के बाद वह कथित तौर पर गुस्से में आ गया।

आरोप है कि उसने पास पड़ी ईंट से बबीता के सिर पर वार किया।

बबीता गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ी और कथित तौर पर उसकी मौत हो गई।

इसके बाद आरोप है कि किशन दत्त ने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की।

बोरी में शव देखकर किसानों के उड़े होश

कथित तौर पर रात करीब 10 बजे किशन दत्त एक बोरी में शव डालकर खेतों की ओर जा रहा था।

इसी दौरान गांव के दो किसानों, प्रताप और अजय, की नजर उस पर पड़ गई।

उन्होंने पुजारी से बोरी के बारे में पूछा। बताया जाता है कि उसने बोरी में मंदिर का कचरा होने की बात कही।

लेकिन किसानों को शक हुआ और उन्होंने बोरी खोलने को कहा।

जब बोरी खोली गई तो कथित तौर पर उसमें बबीता देवी का शव मिला।

दोनों किसानों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

पुलिस जांच में सामने आई कई बातें

पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद शव को कब्जे में लिया गया और किशन दत्त को हिरासत में लिया गया।

कहानी के अनुसार, पूछताछ के दौरान किशन दत्त ने कथित तौर पर सरपंच सूरजपाल की भूमिका के बारे में जानकारी दी।

इसके बाद पुलिस ने सरपंच को भी गिरफ्तार किया।

पुलिस ने रीना देवी से भी पूछताछ की। कथित तौर पर रीना ने जांच अधिकारियों को अपने साथ हुई घटनाओं के बारे में बताया।

मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।

हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक उन्हें कानूनी रूप से निर्दोष माना जाता है। मामले की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

आस्था के नाम पर भरोसा कितना सुरक्षित?

यह कथित घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। धार्मिक स्थान लोगों के लिए विश्वास, शांति और उम्मीद का केंद्र होते हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इसी भरोसे का कथित तौर पर गलत फायदा उठाता है, तो उसका असर केवल एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि पूरे समुदाय पर पड़ सकता है।

इस मामले में भी दोनों महिलाओं ने कथित तौर पर मंदिर का रुख अपने परिवार की परेशानियों का समाधान तलाशने के लिए किया था। लेकिन कहानी एक ऐसी त्रासदी में बदल गई, जिसने पूरे गांव को हिला दिया।

अब सबकी नजर पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई पर है। आने वाले समय में यह पता चलेगा कि इस मामले में वास्तव में क्या हुआ और आरोपों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून क्या फैसला करता है।

धार्मिक आस्था इंसान को ताकत दे सकती है, लेकिन किसी भी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय अपनी सुरक्षा और सतर्कता को हमेशा प्राथमिकता देना जरूरी है।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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