श्मशान में तांत्रिक का खौफनाक खेल: पति को वापस पाने की उम्मीद में गई महिला, फिर जो हुआ उसने पूरे गांव को हिला दिया
श्मशान में तांत्रिक का खौफनाक खेल: पति को वापस पाने की उम्मीद में गई महिला, फिर जो हुआ उसने पूरे गांव को हिला दिया
मेरठ, उत्तर प्रदेश: रात का सन्नाटा, सुनसान श्मशान और चारों तरफ पसरा अंधेरा। ऐसे माहौल में अगर किसी महिला को यह भरोसा दिलाया जाए कि कोई तांत्रिक उसके टूटते वैवाहिक जीवन को फिर से जोड़ सकता है, तो शायद मजबूरी और उम्मीद के बीच वह महिला उस पर विश्वास कर बैठे।
लेकिन उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आई इस कथित घटना में इसी विश्वास का फायदा उठाकर एक महिला को श्मशान बुलाने और उसके साथ गंभीर अपराध करने का आरोप दो लोगों पर लगा। मामला सामने आने के बाद गांव में हड़कंप मच गया।
यह कहानी सिर्फ अंधविश्वास की नहीं है। यह उस खतरे की भी याद दिलाती है जो तब पैदा होता है, जब किसी परेशान व्यक्ति की भावनाओं और कमजोरियों का फायदा उठाकर उसे झूठे वादों के जाल में फंसाया जाता है।
पति के बदलते व्यवहार से परेशान थी प्रियंका
कहानी मेरठ जिले के बसा टीकरी गांव से शुरू होती है। यहां देशराज नाम का एक मजदूर अपनी पत्नी प्रियंका देवी और तीन वर्षीय बेटे के साथ रहता था। शुरुआत में परिवार का जीवन सामान्य बताया जाता है, लेकिन समय के साथ देशराज के व्यवहार में बदलाव आने लगा।
कहानी के अनुसार, देशराज शराब पीने लगा और दूसरी महिलाओं के संपर्क में भी रहने लगा। इससे घर में तनाव बढ़ने लगा।
दूसरी ओर, प्रियंका धार्मिक गतिविधियों और तांत्रिकों पर काफी विश्वास करती थी। जब भी कोई साधु, तांत्रिक या पीर-फकीर गांव में आता, वह उनसे तंत्र-मंत्र और घरेलू समस्याओं के समाधान के बारे में पूछती थी।
देशराज कथित तौर पर अपनी पत्नी को ऐसे लोगों से दूर रहने की सलाह देता था। लेकिन प्रियंका अपने विश्वास पर कायम रही।
कैलाश नाम के कथित तांत्रिक की एंट्री
इसी दौरान कैलाश नाम का एक व्यक्ति प्रियंका के घर पहुंचा, जिसे कहानी में तांत्रिक बताया गया है।
देशराज को कैलाश का घर आना पसंद नहीं था। दोनों के बीच विवाद हुआ और देशराज ने उसे घर से बाहर निकाल दिया।
बताया जाता है कि जाते समय कैलाश ने ऐसी बात कही जिससे प्रियंका के मन में डर बैठ गया। उसने कथित तौर पर संकेत दिया कि देशराज जल्द किसी बड़ी मुसीबत में फंस सकता है।
बाद की घटनाओं में यही बात प्रियंका के लिए और महत्वपूर्ण बन गई।

दूसरी महिला से बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाया तनाव
कहानी के मुताबिक, देशराज की मुलाकात गांव की एक विधवा महिला सुदेश से हुई। दोनों के बीच संबंध बनने लगे और धीरे-धीरे देशराज का सुदेश के घर आना-जाना बढ़ गया।
कुछ समय बाद प्रियंका को भी इसकी जानकारी हो गई।
एक दिन सुदेश के प्रियंका के घर पहुंचने के बाद दोनों महिलाओं के बीच विवाद हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि प्रियंका ने सुदेश को घर से बाहर कर दिया।
इसके बाद देशराज और प्रियंका के बीच भी तीखी बहस हुई। कहानी के अनुसार, देशराज ने प्रियंका को तलाक देने और सुदेश से शादी करने की बात तक कह दी।
यह बात प्रियंका के लिए बड़ा झटका थी।
पति के बदलते व्यवहार और टूटते रिश्ते के बीच वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी।
फिर दोबारा सामने आया कैलाश
25 अगस्त 2026 की सुबह, जब प्रियंका कथित तौर पर घर में अकेली थी, कैलाश फिर उसके घर पहुंचा।
प्रियंका ने उसे अपने पति और सुदेश के संबंधों के बारे में बताया। कैलाश ने कथित तौर पर दावा किया कि वह ऐसा उपाय जानता है जिससे देशराज को दूसरी महिला से दूर किया जा सकता है।
यहीं से कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया।
कैलाश ने प्रियंका से कहा कि यह उपाय सामान्य जगह पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए उसे रात में श्मशान आना होगा।
प्रियंका पहले डर गई, लेकिन पति को वापस पाने की उम्मीद में वह तैयार हो गई।
उसने अपनी पड़ोसन रीतू से भी साथ चलने के लिए कहा, लेकिन रीतू ने रात में श्मशान जाने से इनकार कर दिया।
अब प्रियंका के सामने दो विकल्प थे—या तो वह घर लौट जाए या अकेले उस कथित तांत्रिक के पास जाए।
आखिरकार उसने अकेले जाने का फैसला किया।
रात में श्मशान पहुंची महिला
रात लगभग 11 बजे प्रियंका श्मशान पहुंची। वहां कैलाश मौजूद था।
कहानी के अनुसार, कैलाश ने प्रियंका को भरोसा दिलाया कि वह उसके पति को वापस लाने के लिए विशेष अनुष्ठान करेगा।
इसके बाद उसने प्रियंका को एक पेय दिया और कहा कि इसे पीने के बाद अनुष्ठान शुरू होगा।
कुछ देर बाद प्रियंका बेहोश हो गई।
पुलिस के सामने दिए गए कथित विवरण के अनुसार, आरोप है कि पेय में नशीला पदार्थ मिलाया गया था। इसके बाद कैलाश ने बेहोशी की हालत में प्रियंका के साथ यौन अपराध किया।
मामला यहीं नहीं रुका।
कैलाश ने कथित तौर पर अपने एक साथी आलोक को भी वहां बुलाया। कुछ समय बाद आलोक भी श्मशान पहुंच गया।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने महिला को बंधक बनाकर उसके साथ गंभीर यौन अपराध किया।
चार घंटे बाद महिला को आया होश
कई घंटे बाद प्रियंका को होश आया।
जब उसने खुद को देखा तो वह भयभीत हो गई। वह श्मशान में थी और कथित तौर पर उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे।
उसे समझ आ गया कि जिस व्यक्ति पर उसने भरोसा किया था, उसी ने उसके साथ विश्वासघात किया था।
प्रियंका ने मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया।
यही चीखें उसकी जिंदगी बचाने वाली साबित हुईं।
खेत में सो रहे मजदूरों ने सुनी चीख
श्मशान के पास ही रतिराम नाम के एक व्यक्ति का खेत बताया गया है। उस रात वह अपने कुछ मजदूरों के साथ वहीं मौजूद था।
अचानक उन्हें महिला के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।
पहले सभी घबरा गए। रात का समय था और आवाज श्मशान की दिशा से आ रही थी।
लेकिन रतिराम ने हिम्मत दिखाई और अपने चार मजदूरों के साथ आवाज की दिशा में जाने का फैसला किया।
जब वे श्मशान पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर वे हैरान रह गए।
कहानी के अनुसार, उन्होंने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और महिला को उनके कब्जे से मुक्त कराया।
इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया
पुलिस के पहुंचने के बाद प्रियंका से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई।
आरोप है कि कैलाश और आलोक ने शुरुआत में खुद को तांत्रिक बताया था, लेकिन पूछताछ के दौरान उन्होंने कथित तौर पर कई गंभीर बातें स्वीकार कीं।
कहानी में यह भी दावा किया गया कि दोनों ने खुद को असली तांत्रिक नहीं बल्कि छोटे-मोटे अपराध करने वाले लोगों के रूप में बताया और श्मशान जैसे सुनसान स्थान का इस्तेमाल महिलाओं को निशाना बनाने के लिए करते थे।
हालांकि, ऐसे दावों की पुष्टि केवल आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड और अदालत के दस्तावेजों से ही मानी जानी चाहिए।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।
इस घटना का सबसे बड़ा सबक क्या है?
यह कहानी सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि अंधविश्वास के खतरनाक परिणामों की चेतावनी भी है।
जब इंसान किसी परेशानी में होता है, तो वह जल्दी समाधान चाहता है। रिश्ते में तनाव हो, आर्थिक समस्या हो, बीमारी हो या परिवार से जुड़ी कोई चिंता—ऐसे समय में झूठे दावे करने वाले लोग आसानी से भरोसा हासिल कर सकते हैं।
कथित तांत्रिकों ने भी प्रियंका की इसी कमजोरी का फायदा उठाया।
उसे बताया गया कि एक विशेष अनुष्ठान उसके पति को वापस ला सकता है। फिर उसे ऐसी जगह बुलाया गया जहां आम तौर पर कोई आसानी से मदद के लिए नहीं पहुंच सकता था।
यही वजह है कि विशेषज्ञ लंबे समय से लोगों को सलाह देते हैं कि किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक दावे के नाम पर अपनी सुरक्षा से समझौता न करें।
रतिराम और मजदूरों की भूमिका बनी अहम
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू उन लोगों की भूमिका है जिन्होंने महिला की चीख सुनी और मदद के लिए आगे आए।
अगर रतिराम और उसके साथ मौजूद मजदूर उस रात आवाज को नजरअंदाज कर देते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
उनका समय पर वहां पहुंचना महिला को आरोपियों के कब्जे से निकालने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
लेकिन किसी भी स्थिति में भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेना उचित नहीं है। संदिग्धों को पकड़ने के बाद पुलिस को सूचना देना और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ने देना ही सही तरीका है।
अंधविश्वास नहीं, सावधानी जरूरी
इस घटना से जुड़ी कहानी में कई सनसनीखेज दावे किए गए हैं। इसलिए अंतिम सत्य वही माना जाना चाहिए जो पुलिस की जांच, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अदालत की कार्यवाही में प्रमाणित हो।
फिर भी एक बात साफ है—किसी भी व्यक्ति को अपनी निजी परेशानियों के समाधान के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ सुनसान जगह पर नहीं जाना चाहिए।
खासकर यदि कोई व्यक्ति कहे कि समस्या का समाधान केवल रात में, श्मशान में या किसी गुप्त अनुष्ठान के जरिए ही संभव है, तो यह गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है।
जरूरत पड़ने पर परिवार के भरोसेमंद लोगों को जानकारी देना, स्थानीय पुलिस से संपर्क करना और कानूनी या पेशेवर सहायता लेना कहीं अधिक सुरक्षित रास्ता है।
मेरठ की इस कथित घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है—जब विश्वास और अंधविश्वास के बीच की सीमा मिट जाती है, तो उसका फायदा कौन उठाता है?
जवाब समाज के लिए एक चेतावनी है: मुश्किल समय में उम्मीद जरूरी है, लेकिन उम्मीद के नाम पर किसी अजनबी पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।