सुशांत सिंह राजपूत केस: क्या 6 साल बाद सामने आया कोई नया सच? ‘असली मर्डर वीडियो’ के दावे की पूरी कहानी
सुशांत सिंह राजपूत केस: क्या 6 साल बाद सामने आया कोई नया सच? ‘असली मर्डर वीडियो’ के दावे की पूरी कहानी
मुंबई। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन यह मामला आज भी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है। समय-समय पर ऐसे वीडियो, पोस्ट और दावे सामने आते रहे हैं जिनमें उनकी मौत को हत्या बताया जाता है। अब एक बार फिर “सुशांत सिंह राजपूत का असली मर्डर वीडियो” जैसे दावे इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
लेकिन यहां सबसे जरूरी सवाल है—क्या वास्तव में ऐसा कोई प्रमाणित वीडियो सामने आया है जो सुशांत सिंह राजपूत की हत्या साबित करता हो?
उपलब्ध आधिकारिक जांच संबंधी जानकारी के आधार पर इस दावे को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
14 जून 2020 ने बदल दी पूरी कहानी
सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई स्थित अपने बांद्रा आवास में मृत पाए गए थे। उनकी मौत के बाद देशभर में सवाल उठे और सोशल मीडिया पर हत्या समेत कई तरह के दावे तेजी से फैलने लगे।
मामले की जांच आगे चलकर केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI तक पहुंची। जांच एजेंसी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच की।
मार्च 2025 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, CBI ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि जांच में ऐसी सामग्री नहीं मिली जिससे किसी आपराधिक साजिश या बाहरी व्यक्ति द्वारा हत्या की पुष्टि हो।
इसलिए सोशल मीडिया पर किसी वीडियो को “असली मर्डर वीडियो” कहने से पहले उसके स्रोत और प्रमाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है।
AIIMS की फोरेंसिक राय भी जांच का हिस्सा बनी
सुशांत मामले में मेडिकल और फोरेंसिक पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण रहे।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने मुंबई पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से संबंधित दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप, कपड़े और अन्य सामग्री हासिल की थी। जांच के दौरान AIIMS के विशेषज्ञों की राय भी ली गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, AIIMS के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने मौत को फांसी और आत्महत्या के रूप में माना था।
यानी आज तक उपलब्ध प्रमुख जांच निष्कर्षों में ऐसा प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह स्थापित हो कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या का कोई वीडियो मौजूद है।

फिर ‘मर्डर वीडियो’ का दावा क्यों वायरल होता है?
सुशांत की मौत के बाद सोशल मीडिया पर हजारों पोस्ट, वीडियो और थ्योरी सामने आईं। इनमें कुछ लोगों ने दावा किया कि तस्वीरों, कमरे की परिस्थितियों या अन्य घटनाओं से हत्या की संभावना दिखाई देती है।
एक अकादमिक अध्ययन ने भी 2020 के दौरान सोशल मीडिया पर सुशांत की मौत से जुड़ी अफवाहों और “मर्डर” नैरेटिव के तेजी से फैलने का विश्लेषण किया था। अध्ययन के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर गलत या अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार काफी व्यापक था।
यही कारण है कि आज भी पुराने वीडियो को नए शीर्षक के साथ दोबारा वायरल किया जा सकता है।
कई बार वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द—“6 साल बाद बड़ा खुलासा”, “असली वीडियो”, “मर्डर का राज खुल गया”—दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन किसी वीडियो का वायरल होना अपने आप में उसके सच होने का प्रमाण नहीं है।
2026 में फिर क्यों बढ़ी चर्चा?
सितंबर 2026 में सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े मामले ने एक अलग वजह से फिर सुर्खियां बटोरीं।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में CBI जांच का आदेश दिया। कोर्ट ने मुंबई पुलिस की लगभग छह साल चली जांच और FIR दर्ज न होने के संबंध में गंभीर सवाल उठाए और मामले की आगे जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया।
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी, जबकि सुशांत सिंह राजपूत की मौत छह दिन बाद 14 जून को हुई। दोनों घटनाओं की समय-समीपता के कारण सोशल मीडिया पर लंबे समय से दोनों मामलों को जोड़कर कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं।
हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच कोई आपराधिक संबंध स्थापित हो चुका है, ऐसा कहना अभी तथ्यों से समर्थित नहीं है। बॉम्बे हाई कोर्ट के हालिया आदेश ने भी किसी व्यक्ति को आरोपी घोषित नहीं किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में पर्याप्त सामग्री मिलने पर ही किसी व्यक्ति के खिलाफ आगे कार्रवाई हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या सुशांत की हत्या साबित हुई?
अभी उपलब्ध आधिकारिक जांच संबंधी रिपोर्टों के आधार पर इसका जवाब नहीं है।
CBI ने 2025 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि उसे सुशांत की मौत में किसी तरह की आपराधिक साजिश या foul play का प्रमाण नहीं मिला। रिपोर्टों के अनुसार, CBI ने सोशल मीडिया पर मौजूद अनेक दावों की भी जांच की थी।
हालांकि, किसी भी क्लोजर रिपोर्ट की अंतिम न्यायिक स्थिति अदालत की प्रक्रिया से जुड़ी होती है। इसलिए सोशल मीडिया के दावों और अदालत में स्थापित तथ्यों के बीच अंतर रखना जरूरी है।
वायरल वीडियो देखने वालों के लिए जरूरी सावधानी
अगर कोई वीडियो यह दावा करता है कि “यह सुशांत सिंह राजपूत की हत्या का असली वीडियो है”, तो उसे तुरंत सच मानने के बजाय कुछ सवाल पूछना चाहिए:
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वीडियो पहली बार कब और कहां प्रकाशित हुआ?
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क्या किसी आधिकारिक जांच एजेंसी ने उसकी पुष्टि की है?
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क्या वीडियो की मूल फुटेज उपलब्ध है?
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क्या किसी विश्वसनीय समाचार संस्था ने स्वतंत्र रूप से उसकी पुष्टि की है?
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क्या वीडियो वास्तव में सुशांत सिंह राजपूत से संबंधित है या किसी दूसरी घटना का है?
इन सवालों के जवाब के बिना किसी वायरल वीडियो को प्रमाण मानना भ्रामक हो सकता है।
छह साल बाद भी क्यों जिंदा है यह सवाल?
सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया था। उनकी लोकप्रियता, कम उम्र में मौत और मामले से जुड़े लगातार सामने आते दावों ने इसे लंबे समय तक सार्वजनिक चर्चा में बनाए रखा।
अब 2026 में दिशा सालियान मामले में CBI जांच का आदेश आने से सुशांत से जुड़े पुराने सवाल फिर चर्चा में हैं। लेकिन नई जांच का आदेश अपने आप में सुशांत की हत्या साबित नहीं करता, और न ही इससे किसी वायरल “मर्डर वीडियो” की प्रमाणिकता स्थापित होती है।
अंततः इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण चीज वायरल दावा नहीं, बल्कि फोरेंसिक साक्ष्य, आधिकारिक जांच और अदालत में स्वीकार्य प्रमाण हैं।
फिलहाल “सुशांत सिंह राजपूत का असली मर्डर वीडियो सामने आ गया” वाला दावा प्रमाणित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि भविष्य में कोई वास्तविक नया सबूत सामने आता है, तो उसकी पुष्टि जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगी।