करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था – News

करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था

करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था

करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था

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दोस्तों, आज की कहानी आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ।
यह कहानी है हैदराबाद में जूस का ठेला लगाने वाले एक 24 साल के लड़के अमन की। अमन हैदराबाद के एक छोटे से इलाके में अपनी जिंदगी गुजार रहा था। वह बचपन से ही अनाथ था। उसे अपने माता-पिता का चेहरा तक ठीक से याद नहीं था। बचपन में ही उसके माता-पायर इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। कुछ साल तक एक अनाथालय में रहने के बाद जब वह बड़ा हुआ तो उसने वहां से निकलकर खुद अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया। अमन ने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया था। वह सुबह जल्दी उठता, अपनी छोटी सी गाड़ी पर फल रखता और शहर की सड़क के किनारे जूस का ठेला लगा देता। उसके पास एक छोटी सी बेंच थी जिस पर उसके ग्राहक बैठकर जूस पीते थे। उसका ठेला कोई बहुत बड़ा नहीं था। लेकिन अमन का व्यवहार इतना अच्छा था कि आसपास के लोग उसे पसंद करते थे। वह गरीबों से कम पैसे लेता और कभी-कभी किसी बुजुर्ग या बच्चे के पास पैसे न होते तो उन्हें मुफ्त में जूस पिला देता।

एक दिन एक बुजुर्ग आदमी ने उससे पूछा, “बेटा, तुम हर किसी की मदद क्यों करते हो? तुम्हें भी तो पैसे कमाने हैं।” अमन मुस्कुराकर बोला, “बाबा, पैसे तो मेहनत करके दोबारा कमाए जा सकते हैं। लेकिन किसी जरूरतमंद इंसान की मदद करने का मौका हर रोज नहीं मिलता।” बुजुर्ग आदमी ने उसकी पीठ थपथपाई और कहा, “बेटा, तुम्हारे पास पैसा भले ही कम है लेकिन तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है।” अमन मुस्कुराकर अपना काम करने लगा।

उसे क्या पता था कि उसकी यही छोटी सी आदत एक दिन उसकी जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है। दोस्तों, उसी शहर में राजेंद्र मल्होत्रा नाम का एक बहुत बड़ा कारोबारी रहता था। उसके पास करोड़ों रुपए की संपत्ति थी। शहर में कई मकान, जमीनें, दुकानें और बड़े-बड़े कारोबार थे। लेकिन राजेंद्र की जिंदगी में एक कमी थी। उसकी केवल एक बेटी थी। उस बेटी का नाम था शीतल। शीतल 28 साल की थी। वह पढ़ी-लिखी और समझदार लड़की थी। राजेंद्र अपनी बेटी से बहुत प्यार करता था। उसने शीतल को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी थी।

लेकिन शीतल की जिंदगी में एक ऐसा तूफान आ चुका था जिसने उसके पिता को अंदर से तोड़ दिया था। शीतल की शादी कुछ साल पहले विक्रम नाम के एक लड़के से हुई थी। विक्रम एक बहुत बड़े कारोबारी परिवार से था। उसका परिवार पैसे वाला था। इसीलिए राजेंद्र को लगा था कि उसकी बेटी खुश रहेगी। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद शीतल के चेहरे की मुस्कान गायब होने लगी। विक्रम को शराब और गुस्से की बुरी आदत थी। छोटी-छोटी बातों पर वह शीतल से झगड़ा करता और कई बार उसके साथ मारपीट भी करता। शीतल अपने पिता को कुछ नहीं बताती थी। वह सोचती थी कि शायद समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। लेकिन एक दिन बात इतनी बढ़ गई कि शीतल ने रोते हुए अपनी मां को फोन किया। उसने कहा, “मां, अब मैं और नहीं सह सकती।” मां ने घबराकर पूछा, “क्या हुआ बेटा?” शीतल कुछ देर चुप रही और फिर रोते हुए बोली, “मां, मुझे यहां बहुत डर लगता है।” उसकी आवाज सुनकर मां समझ गई कि बेटी के साथ कुछ ठीक नहीं है।

जब यह बात राजेंद्र को पता चली तो वह तुरंत अपनी बेटी को घर लेकर आया। राजेंद्र ने विक्रम के परिवार से बात की। उसने बहुत कोशिश की कि मामला किसी तरह ठीक हो जाए। लेकिन विक्रम ने अपनी गलती मानने के बजाय शीतल को ही दोष देना शुरू कर दिया। तब राजेंद्र ने अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद होने से बचाने के लिए एक कठिन फैसला लिया। उसने शीतल का तलाक करवा दिया। शीतल वापस अपने पति के पिता के घर आ गई लेकिन तलाक के बाद शीतल पूरी तरह टूट चुकी थी। एक शाम वह अपने पिता के सामने बैठी थी। राजेंद्र ने उसके सर पर हाथ रखा और कहा, “बेटा, जो हुआ उसे भूलने की कोशिश करो। तुम्हारी जिंदगी यहां खत्म नहीं हुई है।”

शीतल की आंखों में आंसू आ गए। वह बोली, “पापा, अब मुझे दोबारा शादी नहीं करनी। मुझे डर लगता है कि कहीं फिर से वही सब न हो।” राजेंद्र कुछ नहीं बोला। उसने बस अपनी बेटी का हाथ पकड़ लिया। कुछ देर बाद उसने कहा, “मैं तुम्हें किसी ऐसे इंसान के हाथ में नहीं दूंगा जो तुम्हें मेरी बेटी नहीं अपनी संपत्ति समझे। अगर तुम्हारी दूसरी शादी होगी तो सिर्फ ऐसे इंसान से होगी जो तुम्हारी इज्जत करे। चाहे वह गरीब ही क्यों ना हो।”

शीतल ने अपने पिता की तरफ देखा। राजेंद्र ने कहा, “मुझे करोड़ों की संपत्ति का वारिस नहीं चाहिए। मुझे अपनी बेटी के लिए एक अच्छा इंसान चाहिए।” यही वजह थी कि राजेंद्र अब अपनी बेटी के लिए दामाद तलाश रहा था। वह ऐसे लड़के की तलाश में था जो लालची ना हो, मेहनती हो और सबसे बढ़कर इंसानियत समझता हो। लेकिन जितने भी रिश्ते आते किसी की नजर राजेंद्र की संपत्ति पर होती तो कोई शीतल के तलाकशुदा होने की बात सुनकर पीछे हट जाता। राजेंद्र परेशान हो गया था।

एक सुबह वह रोज की तरह अपने घर से जॉगिंग के लिए निकला। सुबह का समय था। सड़क पर हल्की ठंडी हवा चल रही थी। लोग टहल रहे थे। कुछ लोग पार्क की तरफ जा रहे थे। राजेंद्र काफी देर से चल रहा था। अचानक उसके सिर में तेज चक्कर आया। उसने सड़क के किनारे एक पेड़ को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन उसके हाथ से पेड़ छूट गया। वह जमीन पर बैठ गया। पास से गुजर रहे लोग उसे देखकर आगे बढ़ गए। लेकिन तभी सामने से अमन अपनी जूस की गाड़ी की तरफ आ रहा था। उसने देखा कि एक बुजुर्ग आदमी जमीन पर बैठा हुआ है। अमन तुरंत अपनी गाड़ी छोड़कर उसकी तरफ दौड़ा। उसने कहा, “बाबा, क्या हुआ आपको?” राजेंद्र ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। अमन ने बिना देर किए उसे सहारा दिया और अपनी छोटी सी बेंच पर बैठा दिया। फिर उसने तुरंत एक गिलास मौसंबी का जूस निकाला। उसने कहा, “पहले यह पी लीजिए। शायद कमजोरी की वजह से चक्कर आया है.” राजेंद्र ने जूस पी लिया। कुछ मिनट बाद उसकी हालत थोड़ी ठीक हुई।

राजेंद्र ने अमन की तरफ देखा और कहा, “बेटा, तुमने मेरी बहुत मदद की। धन्यवाद।” अमन मुस्कुराया और बोला, “साहब, इसमें धन्यवाद बोलने की क्या बात है? आखिर इंसान ही इंसान के काम आता है.” राजेंद्र कुछ पल तक उसे देखता रहा। अमन ने फिर अपनी गाड़ी की तरफ जाकर अपना काम शुरू कर दिया। लेकिन राजेंद्र के कानों में अमन की बात गूंजती रही। “इंसान ही इंसान के काम आता है।”

राजेंद्र ने जिंदगी में करोड़ों रुपए कमाए थे। उसने बड़े-बड़े लोगों से मुलाकात की थी। लेकिन इतने सरल शब्दों में इंसानियत की बात शायद उसने बहुत समय बाद सुनी थी। वह अपने घर तो लौट गया लेकिन अमन का चेहरा और उसकी बातें उसके मन में बस गई। अगली सुबह जब राजेंद्र जॉगिंग के लिए निकला तो वह उसी रास्ते पर पहुंचा। उसकी नजर सीधे अमन के जूस के ठेले पर गई। अमन ने उसे देखते ही कहा, “साहब, आज तबीयत ठीक है?” राजेंद्र मुस्कुराया और बोला, “हां बेटा, अब बिल्कुल ठीक हूं। एक गिलास जूस देना।” अमन ने तुरंत जूस बनाया और उसके सामने रख दिया। राजेंद्र ने जूस पीते हुए अमन से पूछा, “बेटा, तुम यहां कब से जूस बेच रहे हो?” अमन बोला, “साहब, कई साल हो गए। यही मेरा काम है और इसी से मेरा घर चलता है.” राजेंद्र ने पूछा, “घर में कौन-कौन है?” यह सवाल सुनकर अमन कुछ पल के लिए चुप हो गया। फिर बोला, “कोई नहीं साहब, मैं अकेला हूं। बचपन में ही माता-पिता चले गए थे। अब मेहनत करता हूं और अपनी जिंदगी चलाता हूं.”

राजेंद्र ने उसकी तरफ देखा। उसे अमन पर दया नहीं आई बल्कि उसके दिल में अमन के लिए सम्मान पैदा हो गया। उसने सोचा, जिस लड़के ने खुद जिंदगी में इतना कुछ सहा है, फिर भी उसके अंदर इंसानियत बची हुई है। वह जरूर दिल का अच्छा होगा। उस दिन राजेंद्र ने जाते समय अमन को जरूरत से ज्यादा पैसे देने की कोशिश की। लेकिन अमन ने पैसे वापस करते हुए कहा, “साहब, जूस के जितने पैसे हैं उतने ही दीजिए, ज्यादा पैसे मैं नहीं ले सकता.” राजेंद्र ने कहा, “रख लो बेटा.” अमन बोला, “नहीं साहब, मेहनत की कमाई कम हो तो भी ठीक है। लेकिन बिना मेहनत के ज्यादा पैसे लेने की आदत लग जाए तो इंसान खुद को खो देता है.” राजेंद्र फिर चुप हो गया। उसके मन में अपनी बेटी शीतल का ख्याल आया और उसी पल पहली बार उसके मन में एक विचार आया। क्या यही वह लड़का है जिसकी मुझे तलाश थी?

लेकिन राजेंद्र जानता था कि केवल दो-चार मुलाकातों से किसी इंसान को समझा नहीं जा सकता। उसे अमन को और करीब से जानना था। क्योंकि इस बार वह अपनी बेटी की जिंदगी के साथ कोई गलती नहीं करना चाहता था। और दोस्तों राजेंद्र को यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि आने वाले दिनों में अमन की जिंदगी और शीतल की जिंदगी एक ऐसे मोड़ पर मिलने वाली थी जहां दोनों की किस्मत हमेशा के लिए बदल जाएगी। लेकिन उससे पहले राजेंद्र अमन की परीक्षा लेने वाला था और उस परीक्षा में अमन को पता भी नहीं था कि उसके सामने सिर्फ एक ग्राहक नहीं बल्कि उसकी पूरी जिंदगी बदलने वाला इंसान खड़ा है।

राजेंद्र ने अपनी जिंदगी में बहुत से लोगों को देखा था। कुछ लोग उससे दोस्ती सिर्फ इसलिए करते थे क्योंकि वह अमीर था। कुछ लोग उसकी एक छोटी सी मुस्कान पाने के लिए भी उसके सामने झुक जाते थे। लेकिन अमन ऐसा पहला लड़का था जिसने उसकी पहचान या उसकी हैसियत देखे बिना उसकी मदद की थी।

अगली सुबह राजेंद्र फिर उसी रास्ते पर पहुंचा। अमन हमेशा की तरह अपने जूस के ठेले पर खड़ा था। राजेंद्र ने उसके पास जाकर कहा, “बेटा, आज मेरे लिए जूस नहीं बनाओगे?” अमन तुरंत मुस्कुराया और बोला, “क्यों नहीं साहब, बताइए कौन सा जूस बनाऊं?” राजेंद्र ने कहा, “आज तुम जो खुद पीते हो वही बना दो.” अमन ने मौसंबी का जूस बनाया और राजेंद्र को दे दिया। राजेंद्र जूस पीते हुए काफी देर तक अमन को देखता रहा। अमन ने पूछा, “साहब, क्या हुआ? आप मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं?” राजेंद्र मुस्कुराकर बोला, “कुछ नहीं बेटा, बस सोच रहा हूं कि आजकल तुम्हारी उम्र के लड़के अपना ज्यादातर समय मौज मस्ती में बिताते हैं और तुम सुबह से शाम तक मेहनत करते हो.” अमन ने कहा, “साहब, मौज मस्ती करने के लिए भी पहले जिंदगी संभालनी पड़ती है। मेरे पास कोई अपना नहीं है। अगर मैं मेहनत नहीं करूंगा तो मेरा साथ कौन देगा?”

राजेंद्र के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। उसने पूछा, “अगर तुम्हारे पास बहुत सारे पैसे आ जाए तो तुम क्या करोगे?” अमन हंसते हुए बोला, “साहब, पहले अपना एक छोटा सा घर बनाऊंगा फिर एक अच्छी सी जूस की दुकान खोलूंगा और अगर पैसे ज्यादा हुए तो किसी ऐसे बच्चे की पढ़ाई करवाऊंगा जिसके मां-बाप उसके लिए फीस नहीं भर सकते.” राजेंद्र ने हैरानी से पूछा, “तुम अपने लिए इतना कम और दूसरों के लिए इतना ज्यादा क्यों सोचते हो?” अमन ने मुस्कुराकर कहा, “क्योंकि साहब, मैंने बचपन में बहुत अकेलापन देखा है। मैं नहीं चाहता कि कोई दूसरा बच्चा सिर्फ पैसों की कमी की वजह से अपने सपने छोड़ दे.”

राजेंद्र के दिल में अमन के लिए सम्मान और बढ़ गया। वह वहां से चला तो गया लेकिन इस बार उसके मन में एक फैसला हो चुका था। उसने सोचा, मुझे इस लड़के को अपने घर बुलाना चाहिए। लेकिन वह सीधे अमन को अपनी बेटी के बारे में नहीं बताना चाहता था। राजेंद्र पहले यह देखना चाहता था कि अमन सिर्फ बातें अच्छा करता है या वास्तव में उसका दिल भी साफ है।

अगले दिन राजेंद्र जूस पीने के बाद बोला, “बेटा, आज शाम मेरे बंगले पर आओ, साथ में खाना खाएंगे.” अमन यह सुनकर चौंक गया। उसने कहा, “साहब, मैं आपके बंगले पर…” राजेंद्र हंसते हुए बोला, “हां, इसमें इतना हैरान होने की क्या बात है?” अमन ने सिर झुकाकर कहा, “साहब, आप बहुत बड़े आदमी हैं और मैं एक छोटा सा जूस वाला हूं। आपके घर आकर मुझे अच्छा नहीं लगेगा.” राजेंद्र ने कहा, “अमन, इंसान बड़ा या छोटा उसके पैसों से नहीं होता। तुमने उस दिन मेरी मदद की थी। इसीलिए तुम मेरे लिए खास हो। आज शाम जरूर आना.” अमन कुछ देर सोचता रहा और आखिरकार बोला, “ठीक है साहब, अगर आप इतना कह रहे हैं तो मैं आ जाऊंगा.”

उस शाम अमन अपने पुराने लेकिन साफ कपड़े पहनकर राजेंद्र के बंगले के बाहर पहुंचा। बंगला देखकर उसकी आंखें कुछ पल के लिए खुली रह गई। इतना बड़ा घर उसने सिर्फ फिल्मों में देखा था। बाहर बड़ा सा गेट था। अंदर खूबसूरत बगीचा था। गाड़ी खड़ी करने के लिए अलग जगह थी। अमन ने गेट पर खड़े होकर कुछ पल सोचा। फिर उसने खुद से कहा, “अमन, तू यहां किसी लालच में नहीं आया है। बस खाना खाने आया है। अपनी इज्जत के साथ जाना और अपनी इज्जत के साथ वापस आना.” वह अंदर चला गया। दरवाजे पर एक नौकर ने पूछा, “किससे मिलना है?” अमन ने कहा, “राजेंद्र साहब ने बुलाया है.” नौकर उसे अंदर ले गया। कुछ ही देर बाद राजेंद्र सामने आया। उसने अमन को देखते ही कहा, “आओ बेटा, मुझे खुशी हुई कि तुम आए.” अमन ने हाथ जोड़कर कहा, “नमस्ते साहब.” राजेंद्र ने कहा, “आज साहब मत बोलो। मुझे अंकल कह सकते हो.” अमन मुस्कुराया। बोला, “ठीक है अंकल.” राजेंद्र के चेहरे पर खुशी आ गई। वह अमन को डाइनिंग टेबल पर ले गया। टेबल पर कई तरह के पकवान रखे थे। अमन ने इतनी चीजें एक साथ कभी नहीं देखी थी। लेकिन उसने किसी चीज पर लालच भरी नजर नहीं डाली। राजेंद्र यह सब ध्यान से देख रहा था।

खाना शुरू हुआ। राजेंद्र ने पूछा, “बेटा, तुम्हें पता है मैंने तुम्हें यहां क्यों बुलाया?” अमन ने कहा, “नहीं अंकल.” राजेंद्र ने कहा, “मैं तुम्हें पसंद करता हूं। तुम्हारी बातें मुझे अच्छी लगती हैं। इसीलिए सोचा कि कभी-कभी मिलनाजुलना चाहिए.” अमन ने सिर हिलाया। उसी समय राजेंद्र की बेटी शीतल वहां आई। शीतल ने अपने पिता को देखा और बोली, “पापा, आप खाना खा रहे हैं?” राजेंद्र ने कहा, “हां बेटा, आओ तुम्हें किसी से मिलवाता हूं। यह अमन है.” शीतल की नजर अमन पर गई। अमन ने सम्मान से सिर झुकाकर कहा, “नमस्ते.” शीतल ने भी कहा “नमस्ते.” बस यह उनकी पहली मुलाकात थी। ना कोई लंबी बातचीत हुई और ना ही दोनों ने एक दूसरे से कोई सवाल किया। लेकिन शीतल ने अपने पिता की आंखों में एक अलग चमक जरूर देख ली थी।

खाने के बाद अमन उठने लगा। तो राजेंद्र ने कहा, “बेटा थोड़ा बैठो.” अमन फिर कुर्सी पर बैठ गया। राजेंद्र ने अपने नौकर से कहा, “अमन के लिए मिठाई का डिब्बा पैक कर दो.” अमन ने तुरंत कहा, “नहीं अंकल, इसकी जरूरत नहीं है। आपने खाना खिला दिया मेरे लिए वही काफी है.” राजेंद्र ने कहा, “अरे बेटा, इसे घर ले जाना.” अमन बोला, “अगर आपने मेरे लिए कुछ करना ही है तो एक काम कीजिए। अगली बार जब मैं आऊं यहां तो मुझे कोई काम बता दीजिएगा। मुफ्त की चीजें लेने की मुझे आदत नहीं है.” राजेंद्र एकदम शांत हो गया। उसे अमन का जवाब सुनकर खुशी भी हुई और गर्व भी। उसने कहा, “बेटा, तुम बहुत अलग हो.”

अमन मुस्कुराया और वहां से चला गया। लेकिन जैसे ही अमन घर से बाहर निकला, शीतल ने अपने पिता से पूछा, “पापा, यह कौन है?” राजेंद्र ने कहा, “एक बहुत अच्छा लड़का है.” शीतल कुछ पल चुप रही। फिर बोली, “पापा, इसे घर क्यों बुलाया था?” राजेंद्र ने उसकी तरफ देखा और बोला, “बस ऐसे ही.” शीतल अपने कमरे में चली गई। राजेंद्र कुछ देर तक वहीं बैठा रहा। उसके मन में एक बात बार-बार आ रही थी। क्या अमन मेरी बेटी को वह जिंदगी दे सकता है जिसकी वह हकदार है? लेकिन वह जल्दबाजी नहीं करना चाहता था। उसे अभी अमन की और परीक्षा लेनी थी।

अगले दिन राजेंद्र ने अपने एक पुराने कर्मचारी को बुलाया। उसने कहा, “मुझे अमन की जिंदगी के बारे में पता करना है। लेकिन ध्यान रखना, उसे पता नहीं चलना चाहिए.” कर्मचारी ने पूछा, “साहब, क्या कोई खास वजह है?” राजेंद्र ने कहा, “बस इतना समझ लो कि मुझे उसके बारे में पूरी सच्चाई जाननी है.” उधर अमन को इन सब बातों की जरा भी जानकारी नहीं थी। वह अपने ठेले पर रोज की तरह जूस बेच रहा था। उस दिन दोपहर में एक बुजुर्ग महिला उसके ठेले पर आई। उसने कहा, “बेटा, मेरे पास पूरे पैसे नहीं है। क्या आधा गिलास जूस मिल जाएगा?” अमन ने मुस्कुराकर कहा, “अम्मा, आधा क्यों? पूरा गिलास पीजिए.” महिला बोली, “लेकिन मेरे पास पैसे कम है.” अमन ने कहा, “आज पैसे रहने दीजिए। जब आपके पास हो तब दे देना.” महिला ने जूस पीते हुए उसे आशीर्वाद दिया। दूर खड़ा राजेंद्र का कर्मचारी यह सब देख रहा था। उसने अपनी डायरी में कुछ लिखा। शाम को उसने राजेंद्र को सारी बात बताई। राजेंद्र के चेहरे पर संतोष था। लेकिन अगले दिन जो होने वाला था, वह अमन के लिए बहुत बड़ी परीक्षा थी।

क्योंकि राजेंद्र जानता था कि किसी इंसान की अच्छाई को सिर्फ उसकी बातों से नहीं परखा जा सकता। इंसान की असली परीक्षा तब होती है जब उसके सामने लालच और ईमानदारी में से किसी एक को चुनने का मौका आता है। और अब राजेंद्र ने अमन की वही परीक्षा लेने का फैसला कर लिया था। अगली सुबह अमन अपने जूस के ठेले पर पहुंचा ही था कि राजेंद्र की गाड़ी उसके पास आकर रुकी। राजेंद्र गाड़ी से उतरा और अमन के पास आकर बोला, “अमन बेटा, आज मुझे तुमसे एक छोटा सा काम है.” अमन ने तुरंत कहा, “जी अंकल, बताइए.” राजेंद्र ने अपनी जेब से एक सफेद लिफाफा निकाला और उसके हाथ में दे दिया। कहा, “यह लिफाफा मेरे ऑफिस में मेरे मैनेजर को दे देना। बहुत जरूरी कागज है.” अमन ने लिफाफा हाथ में लेते हुए कहा, “ठीक है अंकल, मैं पहुंचा दूंगा.” राजेंद्र ने कहा, “ध्यान रखना, लिफाफा रास्ते में खुलना नहीं चाहिए.” अमन ने कहा, “आप चिंता मत कीजिए.”

राजेंद्र वहां से चला गया। अमन ने लिफाफे को अपनी गाड़ी के नीचे रख रखे एक छोटे से बैग में सुरक्षित रख दिया। उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि राजेंद्र उसके बारे में क्या सोच रहा है। दरअसल राजेंद्र ने उस लिफाफे में कुछ महत्वपूर्ण कागजों के साथ काफी रकम भी रखी थी। वह देखना चाहता था कि अमन उस पैसे को देखकर क्या करता है। कुछ देर बाद अमन अपनी जूस की गाड़ी बंद करके राजेंद्र के ऑफिस की तरफ निकल पड़ा।

रास्ते में उसकी नजर बार-बार उस लिफाफे पर जा रही थी। लेकिन उसने उसे खोलने के बारे में सोचा तक नहीं। अमन मन ही मन सोच रहा था, “अंकल ने भरोसा करके यह चीज मुझे दी है। अगर मैंने इसे खोल भी लिया तो क्या फायदा? किसी की अमानत में बेईमानी करना तो अपने आप से बेईमानी करने जैसा है.” करीब आधे घंटे बाद वह राजेंद्र के ऑफिस पहुंचा। उसने रिसेप्शन पर जाकर कहा, “मुझे राजेंद्र अंकल ने यह लिफाफा उनके मैनेजर साहब को देने के लिए कहा है.” मैनेजर ने लिफाफा लिया, लेकिन जैसे ही उसने लिफाफा खोला, उसकी आंखें कुछ पल के लिए रुक गई।

उसने अमन की तरफ देखा और पूछा, “तुमने इसे खोला था?” अमन ने कहा, “नहीं साहब.” मैनेजर ने पूछा, “तुम्हें पता था इसमें पैसे भी हैं.” अमन ने सिर हिलाते हुए कहा, “नहीं.” मैनेजर ने कहा, “अगर पता होता तो…” अमन ने बिना झिझक कहा, “तब भी नहीं खोलता.” मैनेजर ने पूछा, “क्यों?” अमन मुस्कुराकर बोला, “क्योंकि यह मेरे पैसे नहीं है.”

मैनेजर कुछ नहीं बोला। उसने तुरंत राजेंद्र को फोन किया। बोला, “सर, अमन लिफाफा लेकर आ गया है.” राजेंद्र ने पूछा, “लिफाफा खोला था उसने?” मैनेजर ने कहा, “नहीं सर, उसने उसे हाथ तक नहीं लगाया.” राजेंद्र के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वह बोला, “ठीक है, उसे वापस भेज दो.” कुछ देर बाद अमन वापस अपने ठेले पर पहुंच गया। राजेंद्र भी कुछ देर बाद वहां आ गया। उसने अमन के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “बेटा, तुमने मेरा भरोसा जीत लिया.” अमन ने कहा, “अंकल, मैंने तो सिर्फ अपना काम किया है.” राजेंद्र ने कहा, “नहीं बेटा, आजकल बहुत लोग मौका देखकर अपना फायदा सोचते हैं। तुमने मौका मिलने के बाद भी ईमानदारी नहीं छोड़ी। यही तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी है.”

अमन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अंकल, गरीब आदमी के पास अगर पैसा कम है तो कम से कम अपनी इज्जत तो बचा कर रखनी चाहिए.” राजेंद्र की आंखें नम हो गई। उसे लगा जैसे उसे वह इंसान मिल गया है जिसकी वह इतने दिनों से तलाश कर रहा था। लेकिन राजेंद्र अभी भी एक बात अपनी बेटी से छिपा रहा था। वह अमन को केवल एक अच्छा लड़का मानकर नहीं देख रहा था। उसके मन में एक पिता का सपना आकार ले रहा था। वह चाहता था कि अगर अमन सच में ऐसा ही है जैसा वह दिखाई देता है तो शायद वही उसकी बेटी शीतल के लिए सही जीवन साथी हो सकता है। लेकिन इस फैसले से पहले राजेंद्र को शीतल की इच्छा जानना जरूरी था।

उस शाम राजेंद्र अपनी बेटी के कमरे में गया। शीतल खिड़की के पास बैठी बाहर देख रही थी। राजेंद्र ने पूछा, “बेटा, क्या कर रही हो?” शीतल ने कहा, “कुछ नहीं पापा, बस ऐसे ही बैठी हूं.” राजेंद्र उसके पास बैठ गया। कुछ देर दोनों चुप रहे। फिर राजेंद्र ने कहा, “शीतल, अगर मैं तुमसे दोबारा शादी के बारे में बात करूं तो क्या तुम नाराज होगी?” शीतल की आंखें नीचे झुक गई। वह कुछ देर तक चुप रही। फिर बोली, “पापा, मैंने पहले भी आपसे कहा था कि मैं दोबारा शादी नहीं करना चाहती.” राजेंद्र ने कहा, “मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूंगा लेकिन हर इंसान को जिंदगी में दोबारा खुश होने का अधिकार है.” शीतल ने कहा, “मुझे डर लगता है पापा.” राजेंद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया। “इस बार मैं तुम्हें किसी की दौलत देखकर नहीं दूंगा। मैं उस इंसान को देखूंगा जो तुम्हारी इज्जत करे.”

शीतल ने धीरे से पूछा, “क्या आपको कोई लड़का पसंद आया है?” राजेंद्र कुछ पल चुप रहा। फिर बोला, “हां.” शीतल ने अपने पिता की तरफ देखा। बोली, “कौन है वह?” राजेंद्र ने कहा, “अमन.” शीतल कुछ पल बिल्कुल शांत रही। फिर बोली, “वही जूस वाला.” राजेंद्र मुस्कुराया। “हां, वही.” शीतल ने कहा, “पापा, आप उसे कितने दिनों से जानते हैं?” वो बोले, “बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ लेकिन मैंने उसके अंदर जो देखा है वह बहुत बड़े-बड़े घरों में भी नहीं मिलता.” शीतल ने कुछ नहीं कहा। उसने सिर्फ इतना पूछा, “क्या उसे मेरे बारे में पता है?” राजेंद्र ने कहा, “अभी नहीं.” शीतल ने गहरी सांस ली और बोली, “अगर उसे पता चल गया कि मेरा तलाक हो चुका है तो…” राजेंद्र ने कहा, “अगर वह सच में अच्छा इंसान है तो तुम्हारे अतीत को तुम्हारे खिलाफ इस्तेमाल नहीं करेगा.” शीतल की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा, “पापा, मैं बस इतना चाहती हूं कि जो भी मेरी जिंदगी में आए वह मुझे सम्मान दे। मुझे किसी के पैसे की जरूरत नहीं है.” राजेंद्र ने कहा, “मैं भी यही चाहता हूं बेटा.”

उधर अमन को इन बातों की कोई जानकारी नहीं थी। वह रोज की तरह मेहनत कर रहा था। लेकिन अगले कुछ दिनों में राजेंद्र उसके और करीब आने लगता। कभी वह अमन के ठेले पर बैठकर जूस पीता, कभी उसके साथ चाय पीता और कभी उसके जीवन के बारे में बातें करता। एक दिन राजेंद्र ने अमन से पूछा, “बेटा, अगर तुम्हें जिंदगी में बहुत पैसा मिल जाए तो क्या तुम बदल जाओगे?” अमन हंसकर बोला, “नहीं अंकल.” राजेंद्र ने पूछा, “मतलब?” अमन ने कहा, “पैसा इंसान को बदलता है या नहीं यह उस इंसान पर निर्भर करता है। लेकिन मैं एक बात जरूर जानता हूं कि अगर मेरे पास बहुत पैसा हुआ तो मैं किसी गरीब को अपने से छोटा नहीं समझूंगा.” राजेंद्र ने पूछा और अगर तुम्हारी शादी किसी बहुत अमीर परिवार में हो जाए। अमन ने हंसते हुए कहा, “अंकल, मेरे जैसे लड़के से कौन अमीर परिवार अपनी बेटी की शादी करेगा?” राजेंद्र कुछ पल चुप रहा। फिर बोला, “अगर कोई करे तो…” अमन ने मजाक में कहा, “तो मैं पहले यह देखूंगा कि लड़की मुझे पसंद करती है या नहीं। पैसा देखकर शादी करने का कोई मतलब नहीं है.” राजेंद्र का दिल अंदर तक खुश हो गया। लेकिन उसी समय उसने सोचा, अगर मैं अमन को अपनी बेटी के बारे में बता दूं तो कहीं उसे ऐसा ना लगे कि मैं उसे अपनी संपत्ति के लालच में परख रहा हूं। इसलिए उसने अभी चुप रहने का फैसला किया।

कुछ दिन बाद राजेंद्र ने अमन को अपने ऑफिस बुलाया। अमन ऑफिस पहुंचा तो राजेंद्र ने कहा, “बेटा, मैं तुम्हें एक काम देना चाहता हूं.” अमन ने कहा, “जी अंकल.” राजेंद्र ने कहा, “मेरे एक छोटे से प्रोजेक्ट में मुझे ऐसे आदमी की जरूरत है जो ईमानदारी से काम करें। मैं चाहता हूं कि तुम मेरे साथ काम करो.” अमन चौंक गया। बोला, “अंकल लेकिन मुझे तो इस काम का ज्यादा अनुभव नहीं है.” राजेंद्र ने कहा, “अनुभव काम करते-करते आ जाएगा। ईमानदारी हर किसी में नहीं आती.” अमन ने कहा, “अगर आप मुझे मौका दे रहे हैं तो मैं पूरी मेहनत करूंगा.” राजेंद्र ने उसे काम दे दिया। अब अमन रोज कुछ घंटे राजेंद्र का ऑफिस जाने लगा। धीरे-धीरे वह कारोबार की छोटी-छोटी बातें सीखने लगा। वहीं दूसरी तरफ शीतल भी दूर से अमन के बारे में जानने लगी।

एक दिन वह अपने पिता के साथ ऑफिस आई। वहां उसने देखा कि अमन एक कर्मचारी की मदद कर रहा था। एक कर्मारी से गलती हो गई थी और मैनेजर उस पर नाराज हो रहा था। अमन ने कहा, “गलती हो गई है तो इसे समझा दीजिए। डांटने से गलती ठीक नहीं होगी.” शीतल यह बात सुन रही थी। उसके चेहरे पर पहली बार हल्की मुस्कान आई। उसे लगा कि अब सिर्फ उसके पिता के सामने ही अच्छा बनने की कोशिश नहीं कर रहा था। वह वास्तव में दूसरों के साथ भी सम्मान से पेश आता था। उस दिन घर लौटते समय शीतल ने अपने पिता से कहा, “पापा, अमन सच में अच्छा लड़का लगता है.” राजेंद्र ने उसकी तरफ देखा। बोले, “तो क्या तुम मुझसे शादी के बारे में सोच सकती हो?” शीतल चुप हो गई। उसके चेहरे पर चिंता भी थी और हल्की सी उम्मीद भी। वह बोली, “पापा, फैसला करने से पहले मैं उससे एक बात जरूर पूछना चाहती हूं.” राजेंद्र ने पूछा, “क्या?” शीतल ने कहा, “क्या वह मेरी पूरी सच्चाई जानने के बाद भी मुझे स्वीकार करेगा?” राजेंद्र के पास इसका जवाब नहीं था। क्योंकि अभी अमन को शीतल के तलाक के बारे में कुछ भी पता नहीं था। और अब समय आ चुका था कि अमन को शीतल की जिंदगी की सच्चाई बताई जाए। लेकिन राजेंद्र को डर था कि कहीं यह सच्चाई सुनने के बाद अमन भी बाकी लोगों की तरह पीछे ना हट जाए।

अगले दिन राजेंद्र ने अमन को अपने घर बुलाया। अमन घर पहुंचा तो राजेंद्र ने कहा, “बेटा, आज मुझे तुमसे एक जरूरी बहुत जरूरी बात करनी है.” अमन ने कहा, “जी अंकल, क्या बात है?” राजेंद्र ने गहरी सांस ली और कहा, “मैंने तुम्हें अब तक सिर्फ एक अच्छे लड़के की तरह देखा है। लेकिन आज मैं तुम्हारे सामने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई रखने जा रहा हूं.” अमन ध्यान से उसकी तरफ देखने लगा। तभी राजेंद्र ने कहा, “मेरी बेटी शीतल की एक शादी पहले हो चुकी है.” अमन के चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई। कमरे में कुछ पल के लिए बिल्कुल सन्नाटा छा गया और फिर राजेंद्र ने उसे शीतल की पिछली शादी और उसके साथ हुए अन्याय की पूरी कहानी बतानी शुरू की।

राजेंद्र ने गहरी सांस ली और बोला, “बेटा, मेरी बेटी शीतल की शादी कुछ साल पहले विक्रम नाम के लड़के से हुई थी। विक्रम बहुत बड़े परिवार से था। उसके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी। मुझे लगा था कि मेरी बेटी वहां खुश रहेगी। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उसकी जिंदगी बदल गई.” अमन चुपचाप सुन रहा था। राजेंद्र की आवाज भारी हो गई। विक्रम को गुस्सा बहुत आता था। वह छोटी-छोटी बातों पर शीतल से झगड़ा करता था। कई बार उसने मेरी बेटी के साथ मारपीट भी की। शीतल ने बहुत कुछ सहा लेकिन हमें बताने से डरती रही। आखिर एक दिन उसने अपनी मां को फोन करके सब कुछ बता दिया। राजेंद्र की आंखों में आंसू आ गए। बोले, “मैं अपनी बेटी को वहां से वापस लेकर आया। मैंने बहुत कोशिश की कि दोनों के बीच बात से मामला सुलझ जाए। लेकिन विक्रम ने अपनी गलती मानने के बजाय शीतल को ही दोषी ठहराया। तब मैंने अपनी बेटी का तलाक करवा दिया.”

कमरे में कुछ पल के लिए खामोशी छा गई। राजेंद्र ने अमन की तरफ देखा। बोले, “बेटा, मैंने तुम्हें यह बात इसलिए बताई क्योंकि मैं तुमसे कुछ छिपाना नहीं चाहता। शीतल का कोई दोस्त नहीं था। उसने सिर्फ गलत इंसान पर भरोसा किया था.” अमन अब भी चुप था। राजेंद्र ने कहा, “मैं चाहता हूं कि अगर तुम शीतल को अपनी जिंदगी में जगह दो तो उसके अतीत को कभी उसके खिलाफ इस्तेमाल मत करना। और अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो अभी साफ मना कर देना. मैं अपनी बेटी को दोबारा किसी ऐसे रिश्ते में नहीं भेजूंगा जहां उसे अपने अतीत के लिए शर्मिंदा होना पड़े.” अमन ने पहली बार सिर उठाया। उसकी आंखों में गंभीरता थी। वो बोला, “अंकल, शीतल जी के साथ जो हुआ उसमें उनकी क्या गलती थी?” राजेंद्र ने कहा, “कोई गलती नहीं थी बेटा.” अमन ने कहा, “फिर मैं उन्हें उनके अतीत के लिए क्यों दोष दूंगा?”

राजेंद्र कुछ पल तक अमन को देखता रहा। अमन ने कहा, “अगर किसी इंसान के साथ बुरा हुआ है तो उसे सहारे की जरूरत होती है। ताने की नहीं.” राजेंद्र की आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने अमन के कंधे पर हाथ रख दिया। बोले, “बेटा, तुमने आज मेरे दिल का बोझ हल्का कर दिया.” अमन ने कहा, “अंकल, मैं अभी शादी का फैसला नहीं कर सकता। लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि शीतल जी के साथ जो हुआ उसके लिए मैं उन्हें कभी जिम्मेदार नहीं मानूंगा.” राजेंद्र ने सिर हिलाया और कहा, “मैं तुमसे अभी कोई फैसला नहीं मांग रहा। पहले तुम दोनों एक दूसरे को समझो.”

उसी समय कमरे के बाहर खड़ी शीतल की आंखों में आंसू थे। वो काफी देर से दोनों की बातें सुन रही थी। उसे पहली बार किसी ऐसे आदमी की बात सुनाई दी थी जिसने उसके अतीत को उसके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया था। शीतल धीरे-धीरे अपने कमरे में चली गई। उसने दरवाजा बंद किया और बिस्तर पर बैठ गई। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। लेकिन इस बार यह आंसू सिर्फ दुख के नहीं थे। इनमें एक छोटी सी उम्मीद भी थी। उधर अमन घर से निकलने लगा। राजेंद्र ने कहा, “बेटा, तुम्हें सोचने के लिए जितना समय चाहिए ले लो। कोई जल्दी नहीं है.” अमन ने कहा, “धन्यवाद अंकल.” राजेंद्र ने पूछा, “तुम नाराज तो नहीं हो?” अमन ने मुस्कुराकर कहा, “नहीं अंकल, आपने मुझ पर भरोसा करके अपनी बेटी की जिंदगी की इतनी बड़ी बात बताई है। मैं उसका सम्मान करता हूं.”

अमन वहां से निकल गया। रास्ते भर उसके मन में शीतल की कहानी घूमती रही। वह सोच रहा था कि जिस लड़की ने इतना कुछ सहा है उसके लिए जिंदगी कितनी मुश्किल रही होगी। अमन के मन में शीतल के लिए सहानुभूति पैदा हो चुकी थी। लेकिन वह यह भी समझता था कि सिर्फ सहानुभूति के आधार पर शादी का फैसला नहीं किया जा सकता। उसे शीतल से बात करनी थी। अगले दिन जब अमन ऑफिस पहुंचा तो शीतल भी वहां मौजूद थी। राजेंद्र किसी जरूरी काम से बाहर गया हुआ था। अमन और शीतल आमने-सामने आ गए। दोनों कुछ पल तक चुप रहे। आखिर शीतल ने कहा, “अमन जी, पापा ने आपको मेरे बारे में सब बता दिया होगा.” अमन ने कहा, “हां.” शीतल ने नजरें झुका ली। बोली, “आपको शायद मेरे बारे में जानकर बुरा लगा होगा.” अमन ने तुरंत कहा, “ऐसा मत कहिए.” शीतल ने उसकी तरफ देखा। अमन बोला, “आपके साथ जो हुआ उसमें आपकी कोई गलती नहीं थी.” शीतल की आंखें भर आई। वह बोली, “लेकिन समाज तो ऐसा नहीं सोचता.” अमन ने कहा, “समाज क्या सोचता है? यह हमेशा सही नहीं होता.” शीतल ने पूछा, “अगर कल कोई आपको मेरे अतीत के बारे में कुछ गलत कहे तो…” अमन ने शांत स्वर में कहा, “मैं उससे पूछूंगा कि क्या वह उस समय वहां मौजूद था? अगर नहीं तो उसे किसी की जिंदगी पर फैसला सुनाने का अधिकार भी नहीं है.” शीतल की आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने कहा, “आप बहुत अच्छी बातें करते हैं.” अमन मुस्कुराया और बोला, “अच्छी बातें करना आसान है। असली बात तो तब होगी जब मुश्किल समय आएंगे.”

शीतल ने पहली बार खुलकर उसकी तरफ देखा। अमन ने कहा, “मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूं.” शीतल ने कहा, “पूछिए, आप क्या चाहती हैं?” शीतल कुछ देर तक चुप रही। फिर उसने कहा, “मैं बस सम्मान से जीना चाहती हूं। मैं नहीं चाहती कि कोई मुझे मेरे पुराने रिश्ते की वजह से कम समझे.” अमन ने कहा, “तो फिर आपको किसी ऐसे इंसान की जरूरत है जो आपको बराबर समझे.” शीतल ने धीमे से पूछा, “और अगर वह इंसान गरीब हो तो…” अमन मुस्कुराकर बोला, “गरीब होना कोई अपराध नहीं है.” शीतल ने उसकी तरफ देखा। लेकिन लोग कहेंगे कि करोड़पति की बेटी है। जूस वाले से शादी कर ली। अमन ने कहा, “लोग आज कहेंगे कल किसी और के बारे में कहेंगे। जिंदगी हमें लोगों की बातें सुनने के लिए नहीं मिली.” शीतल के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। दोनों के बीच बातचीत ज्यादा लंबी नहीं हुई। लेकिन उस दिन दोनों के मन में एक दूसरे के लिए सम्मान जरूर पैदा हो गया।

कुछ दिनों तक अमन और शीतल की मुलाकातें होती रही। कभी ऑफिस में कभी राजेंद्र के घर पर अमन शीतल को कभी उसकी पिछली शादी के बारे में सवाल नहीं करता था। वह हमेशा वर्तमान की बात करता। एक दिन शीतल ने अमन से पूछा, “आपको अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा किस चीज की कमी महसूस होती है?” अमन कुछ देर चुप रहा। फिर बोला, “अपनेपन की.” शीतल ने पूछा, “मतलब?” अमन ने कहा, “जब मैं बीमार पड़ता हूं तो खुद ही दवा लाता हूं। जब खुश होता हूं तो खुद ही खुश होता हूं। जब कोई परेशानी आती है तो खुद ही उसका सामना करता हूं। कभी-कभी सोचता हूं कि काश मेरा भी कोई अपना होता जिससे मैं कह सकता कि आज मैं बहुत थक गया हूं.” शीतल की आंखों में नमी आ गई। वह बोली, “आपको अब अकेले रहने की जरूरत नहीं है.” यह कहते ही शीतल चुप हो गई। उसे एहसास हुआ कि उसके मुंह से क्या निकल गया था। अमन ने उसकी तरफ देखा लेकिन कुछ नहीं कहा। दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी छा गई। लेकिन यह खामोशी असहज नहीं थी। उसमें एक अपनापन था।

समय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। राजेंद्र भी यह सब देख रहा था। एक दिन उसने अमन को अपने ऑफिस में बुलाया। उसने कहा, “बेटा, मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूं.” अमन ने कहा, “जी अंकल.” राजेंद्र ने कहा, “मैं चाहता हूं कि तुम और शीतल शादी के बारे में सोचो.” अमन कुछ देर तक चुप रहा। फिर बोला, “अंकल, मैं आपसे एक बात साफ कहना चाहता हूं.” वह बोले, “कहो बेटा.” अमन बोला, “अगर मैं शीतल से शादी करूंगा तो आपकी संपत्ति के लिए नहीं करूंगा.” राजेंद्र मुस्कुराए। बोले, “मुझे पता है.” अमन ने कहा, “और अगर कभी मुझे लगे कि मैं आपकी संपत्ति की वजह से इस रिश्ते में हूं तो मैं खुद पीछे हट जाऊंगा.” राजेंद्र की आंखें भर आई। उसने कहा, “इसलिए तो मैं चाहता हूं कि तुम मेरी बेटी की जिंदगी का हिस्सा बनो.” लेकिन तभी कमरे का दरवाजा खुला। शीतल वहां खड़ी थी। उसने दोनों की बातें सुन ली थी। राजेंद्र ने उसकी तरफ देखा। कहा, “बेटा, हम तुम्हारे बारे में ही बात कर रहे थे.” शीतल अंदर आई और बोली, “पापा, मुझे सब पता है.” राजेंद्र ने पूछा, “तुम क्या चाहती हो?” शीतल ने पहले अपने पिता को देखा फिर अमन की तरफ उसकी आंखों में डर था लेकिन इस बार वह अकेली नहीं थी। वह बोली, “मैं अमन को पसंद करती हूं.” कमरे में खामोशी छा गई। राजेंद्र की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। अमन भी शीतल की तरफ देखता रह गया। शीतल ने कहा, “लेकिन मैं चाहती हूं कि हमारी शादी से पहले अमन को मेरे बारे में हर बात पता हो। मेरे अतीत की कोई बात उससे छुपाई ना जाए.” अमन ने कहा, “मुझे कुछ छिपाने की जरूरत नहीं है। मैं आपको आपके अतीत से नहीं आपके वर्तमान से देखता हूं.”

शीतल लो पड़ी। राजेंद्र ने दोनों को देखकर मन ही मन भगवान को धन्यवाद दिया। लेकिन दोस्तों, जिंदगी में खुशी हमेशा बिना परीक्षा के नहीं मिलती। अमन और शीतल के रिश्ते की बात जैसे ही राजेंद्र के कुछ रिश्तेदारों को पता चली। उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। किसी ने कहा, “करोड़पति की बेटी और जूस बेचने वाला लड़का.” किसी ने कहा, “लोग क्या कहेंगे?” और किसी ने तो यहां तक कह दिया कि राजेंद्र जी कहीं यह लड़का आपकी संपत्ति के लिए तो शादी नहीं कर रहा। अमन ने यह बात सुन ली। उसने राजेंद्र से कहा, “अंकल, अगर मेरी वजह से आपकी बेटी को अपने ही परिवार के सामने अपमानित होना पड़े तो मैं पीछे हट जाऊंगा.” राजेंद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया। बोले, “बेटा, तुम पीछे नहीं हटोगे। इस बार फैसला मेरी बेटी करेगी.” उधर शीतल ने भी सब कुछ सब सुन लिया था। वह अपने पिता के पास आई और बोली, “पापा, मेरी पहली शादी में सबने मेरी जिंदगी का फैसला मेरे लिए किया था। इस बार मैं खुद फैसला करूंगी.” राजेंद्र ने कहा, “तुम्हारा फैसला ही मेरा फैसला है.” लेकिन उसी रात अमन के पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने कहा, “अगर तुमने शीतल से शादी की तो तुम्हें बहुत पछताना पड़ेगा.” अमन ने पूछा, “आप कौन बोल रहे हैं?” उधर से कोई जवाब नहीं आया और फोन कट गया। अमन कुछ देर तक मोबाइल को देखता रहा। उसे समझ आ गया था कि शीतल से शादी का रास्ता उतना आसान नहीं होने वाला था जितना उसने सोचा था।

और दोस्तों, उसे अभी यह पता नहीं था कि यह फोन किसने किया था। फोन कटने के बाद अमन काफी देर तक सोचता रहा। उसने किसी को यह बात नहीं बताई। अमन नहीं चाहता था कि उसकी वजह से राजेंद्र और शीतल परेशान हो। लेकिन अगले दिन सुबह जब वह अपने जूस के ठेले पर पहुंचा तो वहां एक आदमी पहले से उसका इंतजार कर रहा था। अमन ने उसे देखते हुए पूछा, “आप कौन हैं?” उस आदमी ने कहा, “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.” अमन ने कहा, “कहिए.” वो आदमी बोला, “तुम्हें पता है शीतल की पहली शादी क्यों टूटी?” अमन ने गंभीर होकर कहा, “हां, मुझे पता है.” आदमी ने कहा, “तुम्हें जो बताया गया वह पूरी सच्चाई नहीं है.” अमन चुप हो गया। उस आदमी ने जेब से कुछ कागज निकाले और कहा, “अगर तुमने यह शादी की तो तुम्हें बहुत नुकसान हो सकता है.” अमन ने कागज लेने से इंकार कर दिया। उसने कहा, “अगर आपके पास कोई सच्चाई है तो सीधे राजेंद्र अंकल के सामने जाकर बताइए। मेरे सामने आधी अधूरी बातें करके किसी के बारे में गलतफहमी पैदा मत कीजिए.” वह आदमी कुछ पल तक अमन को देखता रहा और फिर वहां से चला गया।

लेकिन अमन के मन में सवाल पैदा हो गया था। आखिर वह आदमी कौन था और वह शीतल की शादी क्यों रोकना चाहता था? अमन ने उसी दिन राजेंद्र को सारी बात बता दी। राजेंद्र ने गंभीर होकर कहा, “बेटा, मुझे शक है कि यह विक्रम के परिवार की कोई चाल हो सकती है.” अमन ने पूछा, “क्या विक्रम दोबारा शीतल की जिंदगी में आना चाहता है?” राजेंद्र ने कहा, “मुझे नहीं पता.” लेकिन मैं अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहता.” राजेंद्र ने तुरंत अपने पुराने वकील से संपर्क किया और शीतल के तलाक से जुड़े सभी दस्तावेज फिर से निकलवाए। वकील ने साफ बताया कि शीतल का तलाक कानून कानूनी रूप से पूरा हो चुका था और उसके खिलाफ कोई ऐसी बात नहीं थी जिससे उसकी दूसरी शादी पर कोई सवाल उठता। राजेंद्र ने राहत की सांस ली। लेकिन उसने फिर भी अमन से कहा, “बेटा, अगर तुम्हें लगता है कि यह रिश्ता तुम्हारे लिए मुश्किल हो सकता है तो तुम पीछे हट सकते हो.” अमन ने राजेंद्र की तरफ देखा और बोला, “अंकल, मैं मुश्किल से डरकर रिश्ता नहीं तोड़ना चाहता लेकिन मैं यह भी नहीं चाहता कि शीतल की वजह से आपको कोई परेशानी हो.” राजेंद्र ने कहा, “तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी यही है कि तुम हर बात में दूसरों के बारे में सोचते हो.” अमन ने कहा, “अंकल, मुझे बचपन से एक बात समझ आई है। इंसान के पास पैसा हो या ना हो अगर उसके पास किसी का साथ देने का दिल है तो वह कभी गरीब नहीं होता.”

उधर शीतल भी इस पूरे मामले से परेशान थी। उसने अमन से कहा, “अगर आपको मेरे कारण कोई परेशानी हो रही है तो आप पीछे हट सकते हैं। मैं आपको मजबूर नहीं करूंगी.” अमन ने उसकी तरफ देखा और बोला, “शीतल जी, मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं.” वह बोली, “क्या?” बोला, “आपने मुझे कभी अपनी जिंदगी में बोझ समझा?” शीतल तुरंत कहा, “नहीं.” अमन मुस्कुराकर बोला, “तो फिर मैं आपको अपनी जिंदगी में बोझ कैसे समझ सकता हूं?” शीतल की आंखों में आंसू आ गए। अमन ने कहा, “आपके साथ जो हुआ वह आपका अतीत है। मैं आपका भविष्य देखना चाहता हूं.” शीतल रोते हुए बोली, “लेकिन मुझे डर लगता है.” अमन ने कहा, “डर मुझे भी लगता है, लेकिन अगर दो लोग एक दूसरे का हाथ पकड़ लें तो डर छोटा हो जाता है.” यह सुनकर शीतल ने पहली बार अमन का हाथ पकड़ लिया। दोनों कुछ पल तक चुप रहे।

इधर राजेंद्र ने शादी की तैयारी शुरू कर दी। वह चाहता था कि शादी बहुत धूमधाम से हो। उसने अमन से कहा, “बेटा, शादी में तुम्हारे लिए नए कपड़े, गाड़ी और बाकी सब चीजें मैं अपनी तरफ से दूंगा.” अमन ने कहा, “अंकल, कपड़े आप दे सकते हैं। लेकिन एक बात मैं आपसे जरूर कहना चाहता हूं. शादी में मेरे लिए बहुत ज्यादा खर्च मत कीजिए.” राजेंद्र ने कहा, “क्यों?” अमन बोला, “क्योंकि मैं नहीं चाहता कि लोग यह कहें कि जूस वाला लड़का करोड़पति के घर में जाकर अमीर बन गया। मैं चाहता हूं कि लोग कहें कि दो अच्छे इंसानों ने एक दूसरे को चुना.” राजेंद्र की आंखें नम हो गई। उसने कहा, “बेटा, आज मुझे तुम पर गर्व है.”

शादी की तारीख तय हो गई लेकिन शादी से दो दिन पहले एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे घर को हिला दिया। राजेंद्र के ऑफिस में अचानक एक जरूरी फाइल गायब हो गई। उस फाइल में राजेंद्र की कई महत्वपूर्ण संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज थे। सभी कर्मचारियों से पूछताछ हुई। किसी को कुछ पता नहीं था। लेकिन उसी शाम किसी ने राजेंद्र से कहा, “साहब, आखिर आखिरी बार वह फाइल अमन के हाथ में देखी गई थी.” राजेंद्र कुछ पल के लिए चुप हो गया। अमन को बुलाया गया। राजेंद्र ने पूछा, “बेटा, क्या तुमने वह फाइल देखी थी?” अमन ने कहा, “जी अंकल, मैंने देखी थी लेकिन मैंने उसे छुआ भी नहीं था.” एक रिश्तेदार तुरंत बोल पड़ा। “यही तो बात है। इसे पता है कि शादी के बाद इतनी बड़ी संपत्ति का हिस्सा इसे मिल सकता है. शायद इसने पहले ही दस्तावेज अपने पास कर लिए हो.” अमन का चेहरा उतर गया। वह कुछ नहीं बोला। शीतल ने गुस्से में कहा, “बस कीजिए. अमन के बारे में ऐसा बोलने से पहले सबूत दीजिए.”

रिश्तेदार बोला, “मैं तो सिर्फ शक की बात कर रहा हूं.” अमन ने राजेंद्र की तरफ देखा। उसकी आंखों में दुख था। वह बोला, “अंकल, अगर आपको भी मुझ पर शक है तो मैं आज ही इस घर से चला जाऊंगा.” राजेंद्र तुरंत उठ खड़ा हुआ। उसने कहा, “मुझे तुम पर शक नहीं है.” अमन ने कहा, “लेकिन अगर मेरे कारण आपके परिवार में दरार पड़ रही है तो मैं यह रिश्ता नहीं चाहता.” शीतल रोते हुए बोली, “अमन, ऐसा मत कहिए.” अमन ने कहा, “मैं नहीं चाहता कि शादी के बाद हर छोटी बात पर मेरी नियत पर सवाल उठे.” राजेंद्र ने कहा, “तुम कहीं नहीं जाओगे.” फिर उसने अपने मैनेजर से पूछा, “आखिरी बार फाइल कहां देखी गई थी?” मैनेजर ने बताया कि फाइल को ऑफिस के पुराने रिकॉर्ड रूम में रखा गया था। राजेंद्र तुरंत वहां गया। कुछ देर खोजने के बाद उसे पता चला कि फाइल एक दूसरी अलमारी में रख दी गई थी। दरअसल एक कर्मचारी ने पुराने दस्तावेजों को व्यवस्थित करते समय उसे गलती से दूसरी जगह रख दिया था। फाइल मिलते ही राजेंद्र ने सबके सामने कहा, “जिस लड़के पर तुम लोगों ने शक किया था आज उसी की ईमानदारी के सामने तुम सबकी सोच छटी पड़ गई.”

वह रिश्तेदार की तरफ देखकर बोला, “अमन को मेरी संपत्ति की जरूरत नहीं है। अगर उसे पैसा चाहिए होता तो वह उस दिन मेरे दिए हुए लिफाफे में रखी रकम लेकर भाग सकता था। लेकिन उसने एक रुपया भी नहीं लिया.” कमरे में खामोशी छा गई। अमन की आंखों में आंसू थे। राजेंद्र उसके पास गया और सबके सामने उसका हाथ पकड़ लिया और बोले, “आज से यह सिर्फ मेरी बेटी का होने वाला पति नहीं है। यह मेरा बेटा है.” शीतल अपने पिता से लिपट कर रो पड़ी।

दोस्तों, आखिर वह दिन भी आ गया जिसका इंतजार सब कर रहे थे। शादी का मंडप सज चुका था। अमन साधारण कपड़ों में बैठा था। राजेंद्र ने अपनी तरफ से शादी में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी थी। लेकिन अमन की इच्छा के अनुसार शादी को जरूरत से ज्यादा दिखावे वाला नहीं बनाया गया था। जब शीतल दुल्हन बनकर मंडप में आई तो अमन की नजर उस पर पड़ी। शीतल की आंखों में खुशी के साथ आंसू भी थे। उसे अपनी पहली शादी याद आ रही थी। लेकिन आज उसके मन में डर नहीं था क्योंकि आज उसके सामने ऐसा इंसान बैठा था जो उसे उसके अतीत से नहीं उसके वर्तमान से पहचानता था। फेरे फेरे शुरू हुए। पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे। अमन और शीतल एक दूसरे के साथ-साथ फेरे ले रहे थे।

सातवें फेरे के बाद अमन ने शीतल की तरफ देखकर कहा, “मैं आपसे एक वादा करता हूं। मैं आपको कभी किसी चीज के लिए मजबूर नहीं करूंगा। हम दोनों मिलकर जिंदगी के फैसले करेंगे.” शीतल की आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने कहा, “और मैं वादा करती हूं कि मैं आपके साथ हर मुश्किल में खड़ी रहूंगी.” राजेंद्र दूर खड़ा यह सब देख रहा था। उसकी आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे। शादी के बाद राजेंद्र ने अमन को अपने पास बुलाया। उसने कहा, “बेटा, यह कागज लो.” अमन ने पूछा, “यह क्या है?” राजेंद्र ने कहा, “तुम्हारे नाम कुछ संपत्ति कर रहा हूं.” अमन ने कागज लेने से इंकार कर दिया। बोला, “अंकल, मुझे इसकी जरूरत नहीं है.” राजेंद्र ने कहा, “यह तुम्हें खरीदने के लिए नहीं है। यह एक पिता की तरफ से अपने बेटे के लिए है.”

अमन कुछ नहीं बोला। राजेंद्र ने कहा, “तुमने मुझे यह सिखाया है कि असली अमीरी बैंक खाते में नहीं इंसान के चरित्र में होती। इसलिए आज मुझे लगता है कि मेरी संपत्ति का सही हकदार वही इंसान है जो उसके पीछे नहीं भागता.” अमन की आंखों में आंसू आ गए। उसने कागज ले लिया लेकिन उसने कहा, “अंकल, मैं वादा करता हूं कि इस संपत्ति का इस्तेमाल सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी करूंगा.” राजेंद्र ने उसे गले लगा लिया।

समय बीतता गया। अमन ने जूस का अपना काम बंद नहीं किया। राजेंद्र ने उसकी मदद से शहर में एक बड़ी जूस और हेल्थ ड्रिंक की दुकान शुरू करवाई। कुछ ही समय में अमन ने अपने काम को इतना बढ़ाया कि उसके पास कई कर्मचारी काम करने लगे। लेकिन अमन में कोई घमंड नहीं आया। वह आज भी सुबह उठकर सबसे पहले अपनी दुकान पर जाता था। एक दिन वही बुजुर्ग महिला उसके पास आई जिसे उसने कभी पैसे ना होने पर मुफ्त जूस पिलाया था। अमन ने उसे पहचान लिया। वह तुरंत उठकर उसके पास गया। बोला, “अम्मा, आप बैठिए.” महिला ने कहा, “बेटा, अब तो तुम्हारी बड़ी दुकान हो गई. मुझे पहचान लिया.” अमन मुस्कुरा कर बोला, “अम्मा, जिसने मुझे दुआ दी हो उसे मैं कैसे भूल सकता हूं?” शीतल यह सब देख रही थी। उसने मुस्कुराकर कहा, “अमन, आपने अपना वादा निभा दिया.” अमन ने पूछा, “कौन सा?” शीतल बोली, “आपने कहा था कि अगर कभी आपके पास पैसा आया तो आप जरूरतमंद बच्चों की मदद करेंगे.” अमन ने कहा, “हां, और वह काम अभी शुरू हुआ है.” कुछ महीनों बाद अमन ने गरीब बच्चों के लिए एक छोटा सा शिक्षा केंद्र खुलवाया। वहां उन बच्चों को पढ़ाया जाने लगा जिनके माता-पिता उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे। राजेंद्र अक्सर वहां जाता और बच्चों को देखकर खुश होता।

एक दिन उसने अमन से कहा, “बेटा, जब तुम पहली बार मेरे घर आए थे तो तुमने कहा था कि बिना मेहनत के ज्यादा पैसे लेने की आदत नहीं डालना चाहता. आज तुम करोड़ों की संपत्ति के बीच खड़े हो। लेकिन तुम्हारे अंदर कोई बदलाव नहीं आया.” अमन ने मुस्कुराकर कहा, “अंकल, आपने मुझे पैसा नहीं दिया। आपने मुझे परिवार दिया.” राजेंद्र की आंखों में आंसू आ गए। वो बोला, “नहीं बेटा, परिवार तुमने मुझे दिया है.”

दोस्तों, इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिंदगी में इंसान की कीमत उसकी जेब से नहीं उसके चरित्र से तय होती है। अमन के पास पैसा नहीं था लेकिन उसके पास ईमानदारी थी। शीतल के पास एक टूटा हुआ अतीत था। लेकिन उसके अंदर फिर से खुश होने की हिम्मत थी। राजेंद्र के पास करोड़ों की संपत्ति थी। लेकिन वह अपनी बेटी के लिए सिर्फ एक ऐसा इंसान चाहता था जो उसे सम्मान दे। और आखिरकार तीनों को वही मिला जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी. इसलिए दोस्तों, कभी किसी इंसान को उसके कपड़ों, उसके काम या उसकी आर्थिक स्थिति देखकर छोटा मत समझिए। क्योंकि हो सकता है जिसके पास आज कुछ नहीं है उसके पास कल पूरी दुनिया हो और हो सकता है जिसके पास आज करोड़ों रुपए हैं उसे भी जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत सिर्फ एक सच्चे इंसान की हो।

याद रखिए, पैसा इंसान को अमीर बना सकता है लेकिन संस्कार ही उसे बड़ा इंसान बनाते हैं। रिश्ते दौलत से नहीं भरोसे से टिकते हैं और सच्चा जीवन साथी वही है जो आपके अच्छे समय में नहीं बल्कि आपके बुरे समय में आपका हाथ पकड़ कर कहे “मैं तुम्हारे साथ हूं”. दोस्तों, यहां पर कहानी का अंत होता है और यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताइएगा और हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लीजिएगा क्योंकि मैं आप लोगों के लिए एक से बढ़कर एक कहानियां लेकर आता रहता हूं। धन्यवाद।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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