लड़के ने विज्ञापन देख कर महिला से संपर्क किया था – News

लड़के ने विज्ञापन देख कर महिला से संपर्क किया था

लड़के ने विज्ञापन देख कर महिला से संपर्क किया था

लड़के ने विज्ञापन देख कर महिला से संपर्क किया था

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एक कथा

दोस्तों, अक्सर ही हम सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा एक्टिव रहते हैं। और अगर जब सोशल मीडिया पर कोई रील या कोई वीडियो देखते हैं, तो हमारे पास तरह-तरह के एड्स आते रहते हैं। उसमें कुछ ऐसे भी ऐड आते हैं जिसमें कि कोई रहता है कि मैं विधवा हूं, तो घर में रखने के लिए एक नौकर चाहिए जो सारा काम कर सके। बदले में अच्छी खासी सैलरी दूंगी। या फिर किसी को यह चाहत रहते हैं कि कोई को पर्सनल ड्राइवर चाहिए जो कि उनका पर्सनल काम भी करे। कुछ ऐसे ऐड भी आते हैं जिसमें यह भी लिखा रहता है कि मुझे कुछ लड़कों की जरूरत है जो कि मेरा पर्सनल काम कर सके। ऐसे बहुत सारे ऐड आते जाते रहते हैं या बड़े घर की महिलाओं के साथ दोस्ती कर सके।

एक ऐसा ही दोस्तों एक लड़का था जो कि सोशल मीडिया पर फ्री टाइम पर रील वगैरह देखा करता था। अचानक एक दिन उसके पास उसके सामने एक रील आ जाती है जिसमें यह लिखा था कि मैं एक 45 साल की विधवा महिला हूं और मुझे एक ड्राइवर की जरूरत है। मेरे पति नहीं है और ना ही मेरे बच्चे हैं। मैं अकेली हूं। मेरे पास पैसे हैं। करोड़ों की प्रॉपर्टी है और जो मेरा ड्राइवर होगा उसे मैं बहुत ज्यादा खुश भी रखूंगी।

जब लड़का ऐसा ऐड और ऐसा प्रचार देखता है तो उसे लगा कि वैसे भी मैं टैक्सी ड्राइवर तो हूं ही और अगर मुझे ऐसी जगह पर जॉब मिल जाए तो क्या अच्छा रहेगा। अब जैसे ही वह लिंक पर क्लिक करता है तो वह एक WhatsApp नंबर पर पहुंच जाता है और जैसे ही वहां पर मैसेज आता है तो सामने से मैसेज आता है कि क्या आप इंटरेस्टेड है जॉब में तो लड़का कहता है कि हां।

जैसे ही लड़का हां कहता है पूरी डिटेल उसके सामने आ जाती है पूरा एक बकायदा ब्यौरा आता है वो पूरे डिटेल को पढ़ता है। अब उसे यह लगने लगा कि यार ₹60,000 महीने की सैलरी और एक ड्राइवर को ऊपर से रहने और खाने की व्यवस्था सब कुछ घर में ही उपलब्ध है। उसके दिमाग में दोस्तों बहुत सारी बातें चलने लगी और वो सब कुछ सोचने लगता है जो कि हर मतलब कि ज्यादातर जो है वो अलग चीजें सोचते हैं। पूरा सारा खुराफाती उसके दिमाग में आने लगा। तो वो कहता है कि ठीक है मैं बिल्कुल इंटरेस्टेड हूं इस जॉब को करने के लिए।

अब वो कहता है कि ठीक है लेकिन फिर मेरी एक कंडीशन भी है और एक कंडीशन भी रखता है। उस आधार पर वो लड़का जो है वह पूरा करवाता है। अब उसको एक दिन WhatsApp पर एक एड्रेस आता है। वह कहता है कि यह मेरे घर का एड्रेस है। आप यहां पर आ जाइए और मैं घर पर ही आपको मिलूंगी। अब दोस्तों लड़का जो है वह उस एड्रेस पर चला जाता है और जब जाने के बाद वहां घर का बेल बजाता है और उधर से जो महिला निकल कर आती है आप यकीन नहीं कर करेंगे दोस्तों कि लड़का उसे देखकर दंग रह गया था।

आइए दोस्तों बताते हैं कि वो महिला कौन थी और पूरी कहानी में क्या होता है। जो लोग इन सब चीजों में बहुत इंटरेस्टेड है यह वीडियो खास करके उनके लिए ही है। आइए जानते हैं पूरी कहानी। लेकिन उससे पहले जो नए दर्शक हैं जिन्होंने चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब कर लीजिएगा। वीडियो को एक लाइक कर दीजिएगा और एक प्यारा सा कमेंट हमारी वीडियो पर जरूर कीजिएगा। दोस्तों आपका इतना करना हमें बहुत मोटिवेशन देता है आने वाली और सारी वीडियोस ऐसी ही लाने के लिए। तो चलिए दोस्तों बिना देरी के कहानी की शुरुआत करते हैं। नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे YouTube चैनल में।

दोस्तों हमारी आज की सच्ची घटना जो है वो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की है। एक लड़का जिसका नाम जो है वो केशव होता है जिसकी उम्र तकरीबन 25 साल के आसपास थी। केशव जो था वो बहुत ही गरीब परिवार था। उसके माता-पिता के पास थोड़ी बहुत जमीन थी। उसी पर वो मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का गुजर बसर करता था। केशव से बड़ी एक बहन भी थी। दोस्तों केशव की दो बहनें और भाइयों में अकेला था। यह दूसरे नंबर का भाई था। इसीलिए बहन बड़ी हो चुकी थी और इसीलिए परिवार और सारी जिम्मेदारी उसके ऊपर थी। बड़ी बहन की शादी भी नहीं हुई थी। घर में जो आमदनी का स्रोत था वो कोई खास नहीं था।

यह जो लड़का था वो पैसे से ड्राइवर था जो कि टैक्सी वगैरह चलाया करता था। केशव यही सोच रहा था कि किसी तरीके से कुछ पैसे कमा लूंगा तो बहन की शादी कर दूंगा। उसका घर बस जाएगा। तो जिम्मेदारियां काफी ज्यादा उसके सर पर थीं और पैसे थे नहीं और आमदनी भी कोई ज्यादा नहीं थी। टैक्सी चला करके 1500 से ज्यादा नहीं कमा पा पाता था। ऊपर से तो कभी-कभी 15 16 घंटे काम भी करता था। उसको लगा कि कहीं अगर कोई अच्छी जॉब मिल जाए तो और बढ़िया रहेगी। कहीं कंपनी में या फिर कहीं कोई अच्छे से मालिक यहां जो कि अच्छा खासा बदले में पैसा दे और काम भी काम करवाए।

अब होता क्या है दोस्तों कि हमेशा वो जहां पर टैक्सी चलाया करता था उसके साथ वह बहुत सारी बात भी करता था कि मुझे कहीं और जॉब दे दी है। काम बेशक आप दो-चार घंटा एक्स्ट्रा करा लीजिए लेकिन पैसे मुझे ज्यादा चाहिए। लेकिन दोस्तों ड्राइवर की तनख्वाह कितनी होती है यह आपको तो पता ही है। 15,000 से ज्यादा कोई देने के लिए तैयार ही नहीं था। ऊपर से रहने और खानेपीने का अलग खर्च और यह कुछ व्यक्तिगत भी खर्चे थे। तो कुल मिलाकर के उसके पास कुछ खास पैसे बचते नहीं थे और यही सोचकर यह बहुत परेशान था। लगभग 6 महीने के आसपास तक उसे भोपाल में रहते हुए हो चुका था।

आजकल सोशल मीडिया का जमाना है तो वह Instagram पर वीडियो देख रहा था। अचानक उसके सामने एक ऐड आता है जिसमें यह लिखा था कि मैं एक 45 साल की विधवा महिला हूं और मुझे एक पर्सनल ड्राइवर की जरूरत है। मेरे पति इस दुनिया में नहीं है। मेरे पास करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी है और मुझे बच्चे भी हैं। मुझे एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जो कि ईमानदार हो और मेरे साथ ही रहे और मुझे जहां जाना हो मुझे लेकर के जाए और मेरे साथ मेरे ही घर पर है। मैं रहने की भी सुविधा दूंगी, खाने पीने की भी व्यवस्था दूंगी और बदले में अच्छी खासी सैलरी भी दूंगी लगभग ₹60,000 के आसपास।

अब दोस्तों जब वह इतनी सैलरी सुनता है तो उसे लगा कि यार इतनी सारी सुविधा है तो क्यों ना एक बार ट्राई किया जाए। तो उसके यह नहीं पता था कि आगे चलकर के उसके साथ क्या होने वाला था। अब दोस्तों वो उस वीडियो के लिंक पर क्लिक करता है तो सीधे ही WhatsApp पर पहुंच जाता है और जैसे ही WhatsApp पर उधर से मैसेज सेंड होता है। तो बग बग जो सामने महिला थी वो उधर उधर से रिप्लाई करती है।

अब इन दोनों के बीच यहीं से बातचीत का जो सिलसिला था वो शुरू हुआ था। वो मैसेज में आता है कि क्या आप इस जॉब में इंटरेस्टेड है? तो लड़का बिल्कुल लिख देता है कि मैं बिल्कुल इंटरेस्टेड हूं। आपने जिस जॉब के लिए इस एडवर्टाइज दिया है क्या सच में उधर से है? तो वह महिला कहती है कि जी हां मैं बिल्कुल अकेली हूं और फिर पूरी डिटेल वो वही आती है जो कि ऐड में आता है। अब यह सुनकर देख के लड़का बहुत खुश हुआ था कि यह तो बहुत ही अच्छी बात है।

अब दोस्तों फिर से एक और मैसेज आता है कि देखिए इस जॉब में कुछ कंडीशन भी है। आपको ₹999 का एक रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। अब दोस्तों यह देख के इस लड़के राहुल को लगा कि ड्राइवर की नौकरी में रजिस्ट्रेशन यह कैसा है? तो वो महिला कहती है कि देखो रजिस्ट्रेशन का मतलब यह है कि तुम्हारी उसमें सारी डिटेल होगी। तुम्हारे घर के सारे एड्रेस होंगे। तुम्हारी फैमिली का डिटेल होगा। तुम्हारा आधार कार्ड, तुम्हारा जो ड्राइविंग लाइसेंस है वह सब कुछ भरना होगा और उसको भरने के बाद उसमें ₹999 का चार्ज होगा।

लड़के को लगा कि चलो यह कौन सी बड़ी पैसे की बात है? तो वह लगाने के लिए तैयार हो गया। अब जो लिंक उसे WhatsApp पर दिया गया उसे वह ओपन करता है और फिर वहां पर जाकर वह पूरी डिटेल भर देता है और वहां पर पे नाउ का ऑप्शन भी था। उस पर जैसे ही क्लिक करता है वह अपने यूपीआई में जाता है और वहां से तकरीबन ₹1000 का रिचार्ज करता है। जैसे ही रिचार्ज होता है तो उधर से मैसेज आता है कि थैंक यू आपका जो एप्लीकेशन है वो सफलतापूर्वक सबमिट हो गया है और आप 2 दिन का इंतजार करिए। 2 दिन के बाद हम आपको एड्रेस भेजेंगे। उस एड्रेस पर ही आपको जाना है और वहीं पर वो महिला बताती है कि मैं रहती हूं और वहीं पर मैं आपको मिलूंगी वहां पर ही मेरा घर है।

तो लड़का कहता है कि ठीक है कोई बात नहीं। अब यह लड़का 2 दिन बीतने का इंतजार करने लगता है। लेकिन वह 2 दिन उसके लिए 2 साल के बराबर हो गए थे। क्योंकि उसके दिमाग में सबसे बड़ा तो यह था कि उसमें 50,600 महीने का था। ऊपर से एक 45 साल की विधवा महिला उसके दिमाग में दुनिया भर की खिचड़ी पकने लगती है कि अकेले रहेंगे। यानी कि कुल मिलाकर के उसके दिमाग में बहुत तरह की बातें चलने लगी थी।

अब दो दिन का समय बीत जाता है लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आता है। शाम को लड़का मैसेज करता है कि क्या हुआ मैडम आपने तो कहा था कि मुझे एड्रेस भेजेंगे। उधर से फिर एक मैसेज आता है जिसमें एक एड्रेस लिखा रहता है जो कि भोपाल शहर का ही रहता है। वहां पर एड्रेस पाके जैसे ही अगले दिन सुबह होती है तो फिर बहुत ही खुशी-खुशी से साफ सुथरा कपड़े पहन करके सीधे उस एड्रेस पर चला जाता है जो एड्रेस उसे बताया गया था।

वो वहां एड्रेस पर जाने के लिए तैयार हो गया। टैक्सी पकड़ कर वो उस एड्रेस पर जाकर उस ड्राइवर से कहता है। कहता है कि ले चलूंगा लेकिन ₹300 लगेंगे। तो लड़का कहता है कि ठीक है रिजर्व करके ही ले चलता हूं। अब दोस्तों, वह एक टैक्सी बुक करता है और फिर सीधे उस एड्रेस पर पहुंचने में उसे तकरीबन आधे घंटे का समय लगता है। टैक्सी वाला आधे घंटे के बाद उसे उस एरिया में ले जाकर छोड़ देता है और कहता है कि यही जो पूरा गली है इसी में वो जो मकान नंबर बता रहे हैं उसी यही गली में होगा। आप जाकर के खोज लीजिए। तो लड़का कहता है कि ठीक है।

अब दोस्तों जो मकान नंबर लिखा हुआ था वो कॉलोनी में जो गली होती है उसमें जाकर ढूंढने लगता है और ढूंढते-ढूंढते सबसे लास्ट में वो घर उसे मिलता है। जो मकान नंबर उसे दिया गया था WhatsApp एड्रेस में उसे देखता है तो मकान नंबर वगैरह भी सब कुछ मैच कर रहा था। वहां पर एक गेट लगा हुआ था। गेट के बगल में ही एक बेल लगी हुई थी। बेल को जाकर के दबाता है। दो-तीन बार घर के दरवाजे को बेल बजाता है। लगभग 5 मिनट के बाद अंदर से एक महिला निकल कर आती है जिसकी उम्र तकरीबन 65 साल के आसपास थी।

अब दोस्तों इस बूढ़ी महिला को देख के तो वह सन्न्य रह गया था। महिला जब निकलती है तो पूछती है कि हां कौन? तो वह लड़का बताता है कि यहां पर मीनाक्षी नाम की कोई महिला रहती है। तो वो महिला कहती है कि कौन महिला कहां से आई है और किसके यहां जाना है। अब जो एड्रेस होता है वो पढ़ के बताता है कि मुझे इस एड्रेस पर जाना है। और इसी नंबर से मुझे मैसेज आया है। यहां पर कोई इस नाम की महिला है जिसे एक ड्राइवर की जरूरत है। और मैं एक ड्राइवर हूं। गाड़ी चलाने का काम करता और उन्होंने ही मुझे यह एड्रेस दिया था कि आप यहां पर आ जाइएगा। यहीं मेरा घर है। मैं यहीं पर मिलूंगी और वो विधवा महिला है। उनके बच्चे भी नहीं है। और मुझे पूरी डिटेल उन्होंने ही भेजा है। और उसी के आधार पर मैं यहां पर आया हूं।

अब दोस्तों जो महिला तकरीबन 65 साल के आसपास की होती है। वो कहती है कि देखते हो जो डिटेल उन्होंने भेजी है बिल्कुल परफेक्ट है। मैं विधवा भी हूं और मेरे भी कोई बच्चे नहीं है। मेरे पति भी इस दुनिया में नहीं है। लेकिन रही बात नाम की तो मेरा नाम जो है वो जो तुम बता रहे हो वो नहीं है बल्कि कविता है। और रही बात उम्र की तो तुम मेरी उम्र देख ही रहे हो। और तुम्हें किसने बताया? कैसे पता चला? मुझे इस बारे में नहीं पता है। तो केशव कहता है कि दरअसल मैं सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखा था और उसी के माध्यम से मुझे इस बारे में जानकारी हुई थी। तो महिला कहती है कि मेरे पास तो कोई कार भी नहीं है और तुम मेरी उम्र तो देख ही रहे हो। फिलहाल मुझे नौकर की भी कोई जरूरत नहीं।

अब जो लड़का केशव था उसे लगने लगा कि कहीं ना कहीं उसके साथ धोखा हुआ है। अब जैसे ही WhatsApp खोल करके वो मैसेज करता है तो फिर मैसेज तो जाता है लेकिन वह मैसेज जो है वो डिलीवर नहीं हो रहा था। अब लड़के को ऐसा लग रहा था कि उसके साथ कोई बहुत ही बड़ा फ्रॉड हुआ है। उसको इस तरह से बेवकूफ बनाया गया है। दरअसल ऐसी कोई बात थी ही नहीं। इसीलिए वह तुरंत ही वापस उस नंबर पर जाकर के मैसेज करना शुरू करता है। वो मैसेज तो कर रहा था लेकिन जो मैसेज था वो डिलीवर ही नहीं हो पा रहा था।

अब यह लड़का जो था वो काफी परेशान हो गया। उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि वो इसी सिचुएशन में क्या करें? किससे मदद मांगे और किसको जाकर के यह सच्चाई बताएं कि उसके साथ क्या हुआ है। हालांकि वह पहले खुद ही इस चीज को पूरी तरह से जानकारी लेना चाहता था कि वाकई में उससे कोई गलती तो नहीं हो रही है या फिर वाकई में वो महिला जो थी वो एक धोखेबाज महिला थी और वो इसे बेवकूफ बना रही थी। अब वो मैसेज में से करता है। अब जो एड्रेस वगैरह जो भी इन्हें भेजा था वो इसे ब्लॉक कर दिया था। अब इसे लड़के को लग गया कि इसके साथ फ्रॉड हुआ है। इसका चेहरा पूरी तरीके से उतर गया। तभी तक महिला कविता पूछने लगती है कि क्या हुआ बेटा इतना परेशान क्यों हो गए? केशव बताता है कि दादी मुझे लगता है कि मेरे साथ किसी ने धोखा किया है। मैंने ₹1000 तकरीबन रजिस्ट्रेशन भी कराया और उसके बाद मुझे एड्रेस भेजा गया और जो एड्रेस भेजा यहां पर आया तो यहां पर आप मुझे मिलिए और मुझे लगता है कि सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे किसी ने बेवकूफ बना दिया है।

तो वो महिला कहती है कि देखो आजकल जो सोशल मीडिया है उस पे जरूरी नहीं कि हर चीज सही हो और इसीलिए कभी दोबारा ऐसी गलती मत करना। अब दोस्तों, यह महिला जान चुकी थी कि लड़का काफी परेशान था। तभी वह जो बूढ़ी महिला होती है, वह कहती है कि पहले तुम एक काम करो कि तुम अंदर आओ और काफी थके हुए लग रहे हो। पानी वगैरह पी कर जाओ। अब यह नाम महिला जो है वो उस लड़के को अंदर लेकर जाती है और उसे पानी लाकर देती है और कहती है कि बेटा 2 मिनट बैठो। मैं तुम्हारे लिए चाय बना करके ला देती हूं। तो केशव कहता है कि दादी आप खुद ही सारा काम करती हैं। या आपके यहां कोई नौकर भी है? तो वह कहती है कि बेटा मेरे यहां कोई नौकर नहीं है।

आजकल का टाइम जो है वह ठीक नहीं है और किसी के ऊपर भरोसा करना सही नहीं है। नौकरानी रखूं तो हो सकता है कि अकेली रख दे के कुछ उल्टा सीधा कर दे। नौकर रखूं तो भी कोई विश्वास नहीं होता। इसी तरीके से जिंदगी काट रही हूं। एक टाइम बना के दो टाइम खाना खाती हूं। बस इसी तरीके से मेरी जिंदगी चली है। अब दोस्तों वो महिला कविता नहीं मानती है। वो चाय बना करके उसके लिए लाते हैं। दोनों बैठकर के चाय पीने लगते हैं और फिर दोनों की बातचीत शुरू होती है।

कविता पूछती है केशव से कि बेटा तुम क्या करते हो और कहां के रहने वाले हो? तो वो पूरी डिटेल देता है अपने परिवार के बारे में पूरी जानकारी देता है कि वह बेहद ही गरीब परिवार से है। उसके पिता जो है वो किसान है। उनसे बड़ी एक बहन है और उससे छोटी भी एक बहन है। बड़ी बहन की शादी करने की उम्र हो गई है लेकिन घर में पैसे नहीं है। स्थिति जो है वो ठीक नहीं है और मैं जो है वो टैक्सी चलाता हूं। ₹15,000 महीने का पाता हूं और जब मैंने ऐड देखा तो उसमें ₹60,000 लिखा था। मुझे लगा कि ₹60,000 अगर मेरी सैलरी मिलेगी तो साल 2 साल कमा करके बहन की बहुत धूमधाम से शादी कर दूंगा।

अब किसी के यहां भी शादी करने जाओ तो उसे दहेज चाहिए होता है और दहेज के नाम पर हमारे पास कुछ नहीं है देने को। अब ऐसी स्थिति हम लोगों के सामने आ गई है कि बहन बड़ी हो गई और हम उसकी शादी नहीं कर पा रहे हैं। समाज भी बेइज्जत था अगर कहीं कुछ उल्टा सीधा हो गया तो बेइज्जती अलग होगी। अब दोस्तों कविता पूरी कहानी ध्यान से सुन रही थी और फिर सुनते-सुनते कहती है कि ठीक है बेटा कोई बात नहीं घबराओ मत हिम्मत रखो सब कुछ ठीक हो जाएगा। बस भगवान पर भरोसा रखो। बाकी के तुम कर्म करते रहो। उससे ज्यादा तुम और क्या कर सकते हो?

तो लड़का कहता है कि हां दादी बस कर ही रहा हूं और बाकी भगवान जाने कि क्या होगा। अब दोस्तों तब तक वह लड़का पूछता है कि दादी आपके साथ कैसे क्या हुआ? तो वह बताती है कि जो मेरे पति थे वो प्रोफेसर रहे थे और अच्छा खासा वो पैसे भी कमाए थे। लेकिन एक रोड एक्सीडेंट में उनकी डेथ हो गई है और डेथ होने के बाद अब शादी हुए कुछ ही दिन हुए तो मुझे बदले में जॉब मिल गई उनकी जगह पर और मैं जॉब करने लगी। प्रोफेसर की जॉब तो नहीं मिली लेकिन मुझे वहां पर बाबू की जॉब मिल गई थी और मैं वही जॉब करने लगी।

पति के जाने के बाद मेरा दोबारा से शादी करने का मन ही नहीं हुआ। अब जो सारी प्रॉपर्टी थी वह जो पति के पिताजी यानी कि जो ससुर जी थे उनके बनाए हुए थे। ससुर जी ने हमारे हिस्से में यह मकान दे दिया। रिटायरमेंट हो चुका है। कुछ पैसे मुझे वह उसके बदले में मिले हैं। ऊपर से मुझे पेंशन भी मिल जाता है। तो मेरा खर्चा आसानी से चल जाता है। और इसी वजह से ना तो मैंने नौकर रखा और ना ही कोई नौकरानी रखा क्योंकि जो पेंशन आती है वो सिर्फ खर्च भर के लिए होता है। आपको तो पता ही है कि शहर में कितनी महंगाई है। आजकल उतनी ही पेंशन मिलती है जितनी की तुम्हारी जरूरत हो।

अब दोस्तों कविता और केशव दोनों एक दूसरे से बातचीत कर रहे थे। लेकिन केशव का चेहरा काफी ज्यादा उदास था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मानो पूरी तरीके से उसने किसी ने बेवकूफ बना लिया। वो काफी ठगा हुआ महसूस कर रहा था। उसकी आंखें भी पूरी तरीके से भरी हुई थी। वो काफी ज्यादा भावुक हो रहा था। कविता उसकी चेहरा देखकर समझ रही थी कि लड़का जो है वो काफी परेशान हो। तभी यह महिला उससे कहती है कि मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि तुम बहुत ज्यादा परेशान हो गए हो। परिवार को लेकर के काफी ज्यादा डिस्टर्ब हो। तो लड़का कहता है कि सब जिम्मेदारी तो बड़े के ऊपर आती है और घर के बड़ा होने के नाते मैं अपनी जिम्मेदारी से मुकर भी नहीं सकता हूं। पिता को मुझसे काफी सारी उम्मीदें हैं कि जो बेटा है वह कमा करके कुछ नहीं कम से कम बहन की शादी में तो सहयोग करेगा। लेकिन इसी चक्कर में मैं तो ठगा गया।

तो कविता कहती है कि तुम घबराओ मत। मुझे तुम दो-ती दिन का टाइम दो। मैं तुम्हारे लिए कोई अच्छा सा इंतजाम कर देती हूं। अब दोस्तों केशव कुछ और काम के लिए गया था। वहां से उसका कोई और ही काम शुरू हो गया था। कविता की बातों को सुनकर उसे थोड़ा तसल्ली मिली थी कि चलो कम से कम कुछ नहीं। मुझे एक जो भरोसा होता है वह तो कम से कम मिला। केशव कहता है कि ठीक है। अब वह उस लड़के से उसका नंबर लेती है और कहती है कि अपना नंबर दे दो। अगर कोई काम मुझे मिलता है तो मैं तुम्हें फोन करूंगी। तो लड़का कहता है कि ठीक है अब नंबर वगैरह भी सब कुछ दे देता है और उसके बाद वो लड़का वहां से अपने घर लौट आ जाता है।

इधर लड़के को अपने घर पर रात भर नींद नहीं आई थी। कसमकस में ही पड़ा रहा कि उसके साथ क्या हुआ है। लोग आजकल कितना फ्रॉड कर रहे हैं सोशल मीडिया पर तरह-तरह के लुभावने विज्ञापन दे के। उसके बाद दोस्तों दो-ती दिन का समय बीत जाता है। कोई रिस्पांस सामने से नहीं आता है। कभी कविता के भी तरफ से और तीन-चार दिन का समय भी जाता है। कोई रिस्पांस नहीं आता है। लगभग 8 से 10 दिन के बाद एक दिन फोन बजता है केशव का।

केशव फोन उठाता है तो सामने से आवाज आता है कि केशव बेटा पहचान गए। वो आवाज महिला कविता की थी। केशव बोला कि हां जी पहचान गया। तो कहती है कि एक काम करो कि कल तुम मेरे घर आना किसी टाइम पर। मैं तो घर पर ही रहती हूं। तुम्हारे लिए एक बहुत ही अच्छा ऑफर है। लड़का बहुत ज्यादा खुश होता है। कहता है कि ठीक है दादी। अब उसने यह नहीं पूछा कि काम क्या है? करना क्या पड़ेगा? सैलरी क्या मिलेगी? वो बस यह बात सुनकर ही खुश हो गया था कि उसके लिए कुछ नया काम करने का मौका उसे मिल जाए ताकि वह अपने काम को कब से उस सैलरी से खुश नहीं था तो उसे नया काम की जरूरत है।

अब उसे यह बात भरोसा हो चुका था कि अगर उन्होंने सामने से ऑफर दिया है तो अच्छा ही ऑफर होगा। अगले दिन नहा धो के सीधा ही वो कविता के घर पर पहुंच जाता है। वहां पहुंचकर घर का बेल बजाता है तो महिला आकर दरवाजा खोलती है और उसे अंदर आने के लिए कहती है। ले जाकर अंदर बैठाती है। केशव से कहती है कि देखो बेटा मेरे पास कोई नौकरी नहीं है। मैंने नौकरी के लिए बहुत सारे लोगों से बात की कि अगर किसी की आप पर्सनल भी गाड़ी चलाओगे तो ₹15,000 से ज्यादा देने की तैयार नहीं। रही बात तुम्हारी बहन की शादी की तो मैंने एक एनजीओ से बात किया है और वह जो एनजीओ है वह ऐसे ही लोगों की मदद करता है जो कि बेसहारा होते हैं और ऐसी लड़कियों की शादी के लिए वो दान भी करता है क्योंकि जो यह संगठन बना है उसमें बहुत सारे लोग डोनेट करते हैं।

यानी कि शादी के लिए वो बहुत सारे लोग डोनेट करते हैं और वो लोग करते हैं जिनकी संताने नहीं होते। मैंने उनसे बात किया है और लगभग तुम्हारी बहन की शादी के लिए ₹2 लाख का इंतजाम वो लोग कर देंगे। तुम अपनी बहन के लिए रिश्ता ढूंढो। यह सुनकर के लड़के को बहुत ही तसल्ली मिली थी उस महिला की तरफ। बोला कि दादी आपकी जो यह मदद है मैं जिंदगी में कभी नहीं भूलूंगा। पूरी जिंदगी आपके एहसानमंद रहूंगा। महिला कहती है कि ठीक है बेटा ज्यादा चिंता मत करो। और रही बात तुम्हारी बहन की शादी की तो वैसे भी मेरी कोई संतान नहीं है। शायद कुछ सोच कर ही तुम्हें भगवान ने मेरे पास भेजा है क्योंकि मुझे भी संतान नहीं हो। मैं भी जो है संतान हीन हूं। और हो सकता है कि तुम्हारी बहन का कन्यादान का शुभ अवसर मुझे भी प्राप्त हो जाए।

तो वह कहता है कि तुम्हारी बहन की शादी में ₹2 लाख मैं भी दे दूंगी। अब यह सुनकर के दोस्तों जो यह लड़का केशव था वह रोने लगता है। उसकी आंखें भर आती है। कहता है कि मुझे यकीन नहीं होता है कि इस दुनिया में आप जैसे लोग भी हैं और भगवान भी है। लेकिन भगवान किसी ना किसी माध्यम से जरूर मिल जाते हैं। आप ही मेरे लिए शायद भगवान बनकर आए हैं। शायद जिसने मुझे मैसेज करके ₹999 मेरा लिया लेकिन माध्यम बनाकर आप तक पहुंचा दिए।

अब दोस्तों कविता उसे पूरा भरोसा देती है कि तुम शादी का इंतजाम करो, तैयारियां करो। पैसे मैं ₹2 लाख डोनेशन भी मिलवाऊंगी और उसके बाद खुद भी देंगे और उसके बाद बहन की धूमधाम से शादी करो। जाकर केशव अपने पिता से कहता है कि बहन के लिए लड़का ढूंढिए शादी का तैयारी कीजिए। पैसे का इंतजाम हो गया है। अब दोस्तों लगभग 6 महीने का समय बीत जाता है। और इस 6 महीने में जो केशव के पिता होते हैं वह अपनी बेटी के लिए लड़का ढूंढते हैं। और जब शादी तय हो जाती है कार्ड वगैरह छप जाता है तो उसे लेकर के लड़का जो है वह पहुंच जाता है कविता के घर।

कविता जो है वह उस कार्ड को उस एनजीओ को देती है। लगभग एक सप्ताह के अंदर-अंदर जो एनजीओ होता है वह उसके पिता के खाते में ₹2 लाख ट्रांसफर कर देता है। और जो यह महिला होती है वह भी ₹2 लाख अपने कहे अनुसार उसके खाते में इसके पिता के खाते में डलवा देती है। और महिला यह भी कहती है कि बेटा अगर कन्यादान करने का शुभ अवसर मिल जाए तो बहुत अच्छी बात होगी। मेरी इच्छा है कि मैं तुम्हारी बहन की शादी में चलूं। यह सुनकर के दोस्तों जो यह केशव था वह बहुत खुश हुआ और बोला कि यह तो मेरा सौभाग्य है कि आप जैसे बुजुर्ग का हमारी बहन को आशीर्वाद मिलेगा।

अब दोस्तों शादी का भी टाइम आ चुका था। बारात का भी टाइम आ चुका था। कविता को यह केशव गांव लेकर जाता है और उसकी देखरेख करता है। कविता जो है वह अपने हाथों से लड़के की बहन का कन्यादान करती है। वर और वधू को आशीर्वाद देती है। सुखमय जीवन का कामनाएं देती है और उसके बाद दोस्तों शादी विवाह बहुत ही अच्छे से हो जाता है। लगभग तीन-चार दिन कविता उनके यहां रहती भी है। उसके मां-बाप भी उसकी बहुत इज्जत कर रहे थे। बहुत सम्मान कर रहे थे। उस लड़के के मां-बाप तो उसके पैरों में गिरे। कहने लगे कि आप ही हमारे लिए भगवान हो। अगर आप नहीं होते तो हमारी बेटी की शादी नहीं हो पाती।

पता नहीं हमारी बेटी कब तक कुंवारी रहती है। दोस्तों सच बात है कि जो आजकल गरीब लोग हैं और जिनके घर में लड़कियां हो जा रही है मानो उनके लिए एक पहाड़ सा दिखने लगता है बेटियों की शादी करना क्योंकि लोग जो है वो पर्सनल खर्च के लिए चाहे जितना खर्चा उड़ा देंगे लेकिन अगर कोई गरीब शादी विवाह के नाम पर उनसे कुछ मांग ले तो बहुत ही कम ऐसे लोग हैं जो देने के लिए तैयार है। ऐसी बात नहीं है कि कोई देने को तैयार नहीं होता। बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो गरीब लोगों की मदद करते हैं। बहुत सारे संगठन भी मदद के लिए चल रहे हैं। अक्सर समाज में यही होता रहा है।

शायद जो यह लड़का केशव था अगर उस विज्ञापन के माध्यम से वहां नहीं पहुंचता तो वो कविता से भी नहीं मिल पाता। और अगर उसे यह महिला नहीं मिलती थी तो फिर उसकी बहन की शादी पता नहीं कितनी देर से होती या कब होती कुछ पता नहीं चलता। लेकिन दोस्तों यह जो केशव की जिंदगी में हुआ शायद यह उसकी किस्मत में ही लिखी हुई थी। लेकिन दोस्तों मैं आपको यह बताना चाहूंगी चाहे आपको सोशल मीडिया पर कितने ही एडवर्टाइज ना मिले चाहे कोई ना मिले ज़्यादातर जो है वो उसमें फ्रॉड भी रहते हैं। अगर एक बार आप लोग से ये पैसा ले लेंगे तो तब आपका पैसा जो है वो वापस नहीं मिलने वाला है। तो इसीलिए सावधानी से इन चीजों का इस्तेमाल करें क्योंकि पूरी से पूरी जानकारी जुटाएं उसके बाद ही कुछ करें। वरना ऐसा भी हो सकता है कि यह लोग जो है वह कभी-कभी इंसान को ब्लैकमेल भी करने लगे थे। केशव उन्हें फंस चुका था लेकिन वह भगवान का साथ उसे मिला कि वह सही जगह पर गया और उसकी किस्मत बदली उसके साथ अच्छा चीज हुआ।

लेकिन सभी के साथ ऐसा नहीं होता है। दोस्तों कई जगह से ऐसे सोशल मीडिया पर ऐसी चीजों को भी डाल दिया जाता है जो कि वाकई में बहुत बड़े फ्रॉड होते हैं। लोग जो है वो उन पर भरोसा करके आगे बढ़ जाते हैं और बाद में पछतावे के सिवा उनके हाथ में कुछ नहीं लगता। तो किसी भी चीज में आगे बढ़ने से पहले उसकी अच्छी तरह से जानकारी ले कि वाकई में वह चीज सही है या नहीं है या फिर किसी ने बस बेवकूफ बनाने के लिए उस ऐड को दिया हुआ है। तो पूरी जानकारी लेने के बाद ही कोई कदम उठाएं। ऐसे कोई भी कदम ना उठाएं दोस्तों। वरना फिर आपके साथ बहुत बड़ी जो है वो फ्रॉड हो सकता है। तो दोस्तों, यह रही कहानी। आप क्या कहना चाहेंगे? कमेंट करके जरूर बताइएगा। वीडियो अच्छी लगी हो तो एक लाइक कर दीजिएगा। चैनल पर नए हैं तो सब्सक्राइब कर दीजिएगा।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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