पुलिस दरोगा की एक गलती की वजह से मां बेटी ने दरोगा के साथ कर दिया बड़ा करनामा/
पुलिस दरोगा की एक गलती की वजह से मां बेटी ने दरोगा के साथ कर दिया बड़ा करनामा/
पैसे, पावर का जाल और खुद का फैसला: मेरठ की खौफनाक वारदात
गरीबी और परिवार का बोझ
मैं कुलदीप राणा हूँ। आज जो खौफनाक कहानी मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ, वह उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के अलीपुर मोरना गाँव की है।
अलीपुर मोरना गाँव में शीला देवी नाम की एक विधवा महिला रहती थीं। उनकी कुल जमा पूंजी लगभग 10-15 बकरियाँ थीं। रोज सुबह लगभग 9 बजे, शीला देवी अपनी बकरियों को गाँव के जमींदारों के खेतों में चराने ले जाती थीं। जब बकरियों का पेट भर जाता, तो वे उन्हें वापस घर ले आतीं। उस छोटे से बकरियों के झुंड से होने वाली मामूली कमाई पर ही उनके पूरे परिवार का गुजर-बसर टिका हुआ था।
शीला देवी की दो बेटियां थीं। बड़ी बेटी मानसी ने दो साल पहले 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी और अब घर के कामों में हाथ बटाती थी। छोटी बेटी गीता 10वीं कक्षा में पढ़ती थी। गीता बहुत ही समझदार और होनहार लड़की थी। रोज सुबह 8 बजे वह स्कूल जाती और दोपहर 3 बजे तक घर लौट आती थी।
घर के तंग हालातों को देखते हुए शीला देवी हमेशा चाहती थीं कि मानसी को कोई छोटा-मोटा काम मिल जाए ताकि घर का खर्च आसानी से चल सके। मानसी ने कई जगह काम ढूंढने की कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। अभावों के बावजूद तीनों मां-बेटी की जिंदगी शांति से कट रही थी — जब तक कि इस परिवार पर दुखों का पहाड़ नहीं टूट पड़ा।

दरिंदे पुलिसवाले का असली चेहरा
शीला देवी के घर के ठीक बगल में विजय सिंह रहता था, जो स्थानीय थाने में दरोगा (पुलिस अधिकारी) के पद पर तैनात था। उसके पास पैसा और पावर दोनों थे। विजय सिंह के अय्याश और हवस भरे रवैये से तंग आकर उसकी पत्नी ने तलाक का केस कर दिया था और अपने मायके जाकर रहने लगी थी। अकेला रहने के बावजूद, विजय सिंह की गंदी नजर गाँव की खूबसूरत महिलाओं पर टिकी रहती थी। जल्द ही शीला देवी का परिवार भी उसकी हवस की नजरों में आ गया।
घटना की शुरुआत 6 जुलाई 2026 को हुई। उस सुबह करीब 6 बजे मानसी और गीता अपनी मां से इजाजत लेकर पास के शिव मंदिर में पूजा करने निकलीं। शीला देवी ने दोनों से कहा कि पूजा के बाद जल्दी घर लौट आएं ताकि काम में मदद हो सके।
मंदिर जाते वक्त रास्ते में विजय सिंह का घर पड़ता था। दरोगा अपने घर के दरवाजे पर ही खड़ा था। मानसी को देखते ही उसकी नियत खराब हो गई। विजय सिंह ने मानसी को रोककर पूछा: — मानसी, तुम्हारी मां आजकल क्या काम करती हैं? मानसी ने मासूमियत से जवाब दिया: — अंकल, मां तो बस बकरियां चराती हैं। उसी से हमारा घर चलता है। मैं भी काम ढूंढ रही हूँ, अगर कहीं काम मिल जाए तो बहुत सहारा हो जाएगा।
विजय सिंह ने हमदर्दी जताते हुए कहा: — तुम चिंता मत करो। मैं आज ही तुम्हारी मां से बात करने घर आता हूँ।
दोनों बहनें मंदिर चली गईं, लेकिन विजय सिंह के दिमाग में सिर्फ मानसी को पाने की घिनौनी योजना चल रही थी।
गरीब के घर में काली डील
कुछ ही देर में विजय सिंह शीला देवी के घर जा पहुंचा। जब शीला देवी ने दरवाजा खोला, तो विजय सिंह ने देखा कि शीला देवी भी ढलती उम्र में काफी आकर्षक दिखती थीं। उसकी हवस और बढ़ गई — उसने मां और बेटी दोनों को अपना शिकार बनाने का फैसला कर लिया।
विजय सिंह ने झूठी हमदर्दी दिखाते हुए कहा: — मैं मानसी को एक अच्छी नौकरी दिलवा सकता हूँ। लेकिन इसके बदले मुझे क्या मिलेगा?
शीला देवी तुरंत दरोगा का गंदा इशारा समझ गईं। गरीबी से तंग आकर और अपनी बेटी के सुरक्षित भविष्य की खातिर शीला देवी ने भारी मन से इस सौदे को स्वीकार कर लिया।
— ठीक है दरोगा जी, मुझे आपकी शर्त मंजूर है, शीला देवी ने रोते हुए कहा।
विजय सिंह ने शीला देवी को रात में अपने घर आने को कहा, क्योंकि वह अकेला रहता था। जाने से पहले उसने शीला देवी को कुछ पैसे भी दिए ताकि घर में खाने-पीने का सामान आ सके।
उस रात करीब 8:30 बजे, अपनी दोनों बेटियों को खाना खिलाकर सुलाने के बाद, शीला देवी चुपचाप विजय सिंह के घर चली गईं। शराब के नशे में धुत दरोगा ने शीला देवी का शारीरिक शोषण किया। रात 12:30 बजे शीला देवी घर लौटीं, यह सोचकर कि उन्होंने अपनी बेटी के भविष्य के लिए यह बलिदान दिया है।
साजिश का जाल और बड़ी बेटी की बर्बादी
एक हफ्ते बाद, 13 जुलाई 2026 को विजय सिंह ने अपनी अगली चाल चली। वह शहर जाकर घर का राशन, नए कपड़े और सोने की अंगूठी खरीद लाया और शीला देवी के घर जाकर उपहार में दिया। उसने कहा कि कल वह मानसी को नौकरी के इंटरव्यू के लिए अपने एक परिचित के पास ले जाएगा।
मानसी और शीला देवी बेहद खुश हुईं और विजय सिंह को अपना भगवान मानने लगीं। लेकिन जब छोटी बेटी गीता स्कूल से लौटी और उसे यह बात पता चली, तो उसने अपनी मां को आगाह किया: — मां, आप उस पुलिसवाले पर बहुत जल्दी भरोसा कर रही हैं। वह इतना दयालु कैसे हो सकता है? मुझे उसकी नीयत ठीक नहीं लगती। लेकिन शीला देवी ने गीता की बात को शक कहकर टाल दिया।
14 जुलाई की सुबह, विजय सिंह मानसी को अपनी बाइक पर बैठाकर ले गया। वह उसे अनूप सिंह नाम के अपने एक दोस्त के घर ले गया, जो खुद एक अय्याश और रईस इंसान था। विजय सिंह ने अनूप को ऐसा इंसान बताया जो मानसी को नौकरी दिलाएगा।
वहाँ अनूप ने मानसी को कोल्ड ड्रिंक पिलाई, जिसमें पहले से ही बेहोशी की दवा मिली हुई थी। 15-20 मिनट में मानसी बेहोश हो गई। इसके बाद दोनों दरिंदों ने बारी-बारी से उस बेहोश लड़की के साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, विजय सिंह ने अपने फोन से उस घिनौनी हरकत का वीडियो भी बना लिया।
लगभग 5 घंटे बाद जब मानसी को होश आया, तो उसने खुद को बिना कपड़ों के पाया। जब उसने रोते हुए पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी, तो विजय सिंह ने अपना फोन निकालकर वीडियो दिखाया और कहा: — अगर तूने अपना मुंह खोला, तो यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दूंगा। फिर पूरी दुनिया में तेरी थू-थू होगी।
बदनामी के डर और दरोगा की पावर के आगे लाचार होकर मानसी खामोश हो गई। वह घुट-घुटकर विजय सिंह के साथ घर लौट आई और मां से झूठ बोल दिया कि रास्ते के सफर से उसकी तबीयत खराब हो गई है। मानसी की यह खामोशी आगे चलकर एक भयानक त्रासदी बन गई।
छोटी बहन का बढ़ता शक
20 जुलाई 2026 की रात, शराब के नशे में धुत विजय सिंह ने फिर शीला देवी को फोन किया और खाना बनाने के बहाने अपने घर बुलाया। गीता ने अपनी मां को जाने से बहुत रोका, लेकिन शीला देवी नहीं मानीं।
देर रात जब शीला देवी हाथों में कुछ पैसे लिए घर लौटीं, तो जाग रही गीता ने सब देख लिया। गीता समझ गई कि उसकी मां गलत रास्ते पर जा चुकी है, लेकिन वह चुप रही।
हवस की इंतहा और मौके पर फैसला
2 अगस्त 2026 की सुबह, जब शीला देवी बकरियां चराने चली गईं और गीता स्कूल चली गई, तो विजय सिंह मानसी के घर पहुंच गया। उसने उसी वीडियो का डर दिखाकर मानसी को फिर से अपनी हवस का शिकार बनाना चाहा।
अभी दरोगा अपनी घिनौनी हरकत कर ही रहा था कि अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई। बाहर गीता खड़ी थी — वह स्कूल की फीस के पैसे भूल गई थी और वापस लेने आई थी। घर का दरवाजा बंद देखकर और अंदर से विजय सिंह को बाहर निकलते देख गीता का शक यकीन में बदल गया।
विजय सिंह के जाने के बाद, गीता गुस्से में अंदर घुसी और अपनी बहन से पूछा: — क्या तुम भी मां की तरह बन गई हो? कितने पैसे दिए उस पुलिसवाले ने तुम्हें इस गंदे काम के लिए?
मानसी फूट-फूटकर रो पड़ी और उसने गीता को पूरी सच्चाई बता दी — कैसे उसे नशा देकर रेप किया गया और कैसे वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था।
पूरी बात सुनकर गीता का खून खौल उठा: — इस दरिंदे को इसकी सजा मिलकर रहेगी। मां पहले ही बर्बाद हो चुकी है और उसने तुम्हें भी नहीं छोड़ा। आज रात हम इसका अंत कर देंगे!
मानसी डर रही थी क्योंकि विजय सिंह के पास पिस्तौल थी, लेकिन गीता ने अपनी बहन को हिम्मत दी। दोनों ने अपनी मां से यह बात छुपा कर रखी।
उसी रात करीब 9:30 बजे, जब शीला देवी सो गईं, तो मानसी रसोई से दो तेज धारदार चाकू ले आई और एक चाकू गीता को दे दिया। दोनों बहनें चुपचाप विजय सिंह के घर की तरफ बढ़ीं।
जब दरवाजे की घंटी बजी, तो नशे में धुत विजय सिंह ने दरवाजा खोला। मानसी और गीता को एक साथ खड़ा देख वह हवस भरी मुस्कान के साथ उन्हें अंदर ले आया। वह समझ रहा था कि दोनों बहनें पैसों के लिए उसके पास आई हैं।
जैसे ही विजय सिंह मुड़ा, गीता ने पीछे से उस पर चाकू से पहला वार कर दिया। अचानक हुए हमले से बौखलाकर विजय सिंह ने तुरंत अपनी जेब से सरकारी पिस्तौल निकाल ली और गीता पर तान दी।
तभी मानसी ने फुर्ती दिखाते हुए पास में रखा एक भारी गुलदस्ता उठाया और विजय सिंह के सिर पर दे मारा। सिर पर गहरी चोट लगते ही दरोगा के हाथ से पिस्तौल छूटकर फर्श पर गिर गई।
बिना एक पल गंवाए, छोटी बहन गीता ने फर्श से पिस्तौल उठाई और विजय सिंह के सिर पर एक के बाद एक 4 गोलियां दाग दीं। वह भ्रष्ट और दरिंदा दरोगा वहीं खून से लथपथ होकर ढेर हो गया।
आधी रात को गोलियों की गूँज से पूरा अलीपुर मोरना गाँव थर्रा उठा। आसपास के लोग भागकर मौके पर पहुँचे। जब वे घर के अंदर दाखिल हुए, तो नजारा देखकर सन्न रह गए — दरोगा विजय सिंह की लाश फर्श पर पड़ी थी और दोनों बहनें मानसी और गीता चुपचाप वहीं खड़ी थीं।
ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। करीब 2 घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने विजय सिंह के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मानसी व गीता को हिरासत में ले लिया।
थाने में पूछताछ के दौरान मानसी ने रोते हुए दरोगा की प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और रेप की पूरी कहानी बयान कर दी। मानसी के बयान के आधार पर पुलिस ने सह-आरोपी अनूप सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया।
अब अदालत यह तय करेगी कि मानसी, गीता और अनूप सिंह को क्या सजा मिलनी चाहिए।
आपकी नजर में, क्या गीता और मानसी का उस दरिंदे दरोगा को खुद सजा देना सही था या गलत?