सगे बेटे ने अपनी मां को गंडासी से का**ट दिया/ वजह जानकर पुलिस भी सोचने पर मजबूर हो गई/
सगे बेटे ने अपनी मां को गंडासी से का**ट दिया/ वजह जानकर पुलिस भी सोचने पर मजबूर हो गई/
नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से। बागपत जिले में एक पिछड़ा नाम का गांव पड़ता है और इसी बीच पपड़ी गांव में रहने वाली मीना देवी।
मीना देवी एक बहुत ही गरीब और विधवा महिला होती है। मीना देवी के पति बलदेव सिंह की दो साल पहले मौत हो गई थी जिसकी वजह से मीना देवी विधवा हो गई थी। लेकिन मीना देवी अपने घर की गरीबी को दूर करना चाहती थी और मीना देवी अपने घर की गरीबी को दूर करने के लिए मेहनत मजदूरी का काम करना शुरू कर देती है। लेकिन कुछ दिनों के बाद मीना देवी को मेहनत मजदूरी का काम मिलना बंद हो जाता है। मीना देवी काफी उदास और परेशान रहने लग जाती है। मीना देवी जब भी किसी जमींदार के पास काम मांगने के लिए जाया करती थी तो गांव के जमींदार इसके सामने बस एक ही शर्त रखते थे कि काम तुम्हें तब मिलेगा जब तुम हमारे साथ एक रात गुजार लोगी और इस तरीके से यह विधवा महिला मीना देवी अपने घर पर वापस आ जाया करती थी।

मीना देवी के परिवार में इसका इकलौता ही बेटा होता है जिसका नाम प्रताप होता है। प्रताप जो कि नौवीं कक्षा में अपनी पढ़ाई किया करता था। प्रताप दिन रात किताबों पर लगा रहता था। प्रताप इतना मेहनती और ईमानदार लड़का होता है कि इसकी मां मीना देवी अपने बेटे प्रताप को देखकर बड़ी खुश हो जाया करती थी। प्रताप भी अपनी गरीबी को दूर करना चाहता था। प्रताप पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहता था। लेकिन आगे चलकर प्रताप और प्रताप की मां मीना देवी के साथ बहुत बड़े बड़े कांड होने वाले थे जिसके बारे में मीना देवी और प्रताप कुछ भी नहीं जानते थे।
इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक दिन ऐसा भी आ जाता है जिसमें सुबह के करीब सात बजे के आसपास का वक्त होता है। मीना देवी अपने बेटे प्रताप को कहती है कि प्रताप तुम्हें जल्दी स्कूल में जाना चाहिए। लेकिन प्रताप अपनी मां की बात को टालते हुए कहने लगता है कि मां तुम यह दिहाड़ी मजदूरी का काम करना बंद कर दो। तुम पढ़े लिखे हो। तुम गांव में कोई छोटी सी किराने की दुकान खोल लो। तुम्हारी दुकान अच्छी खासी चल सकती है क्योंकि हमारे गांव में गिने चुने किराने की दुकानें हैं। जैसे ही बेटा प्रताप यह बातें कहता है तो यह सारी बातें मीना को भी अच्छी लग जाती है। मीना अपने मन में सोचने लग जाती है कि बेटा प्रताप बिल्कुल सही बात कह रहा है और इसके बाद प्रताप खाना खाने के बाद अपने स्कूल में पढ़ाई करने के लिए चला जाता है।
आधे घंटे का वक्त गुजरने के बाद अब जैसे तैसे करके यह महिला मीना देवी भी किसी जमींदार के काम पर चली जाती है और वहां पर दिहाड़ी मजदूरी करना शुरू कर देती है और वहां पर एक साहूकार आ जाता है और इस साहूकार का नाम रतन सिंह होता है। रतन सिंह एक ऐसा साहूकार होता है जो कि औरतों पर हमेशा गंदी नजर रखा करता था और औरतों में इसकी बहुत ज्यादा दिलचस्पी होती है। रतन सिंह अपने घर में अकेला रहता था। पत्नी की मौत हो गई थी और इसके बच्चे शहर में रहकर नौकरी किया करते थे। रतन सिंह हमेशा अपने घर में अकेला रहता था। लेकिन रतन सिंह के पास पैसा और पावर दोनों होती है। रतन सिंह इस गांव के लोगों को ब्याज पर पैसे देने का काम किया करता था और यह बात यह महिला मीना देवी भी जानती थी। इसके बाद रतन सिंह की नजरें जैसे ही मीना देवी की खूबसूरती और इसकी सुंदरता पर पड़ती है तो रतन सिंह इसके पास आ जाता है और रतन सिंह मीना देवी को कहता है कि मीना क्यों तुम अपनी जवानी को ऐसे बर्बाद कर रही हो। तुम अपनी जवानी को बर्बाद मत करो। तुम अपनी जवानी का ठीक इस्तेमाल करो।
जब ऐसी ऐसी बातें मीना के सामने कही जाती है तो मीना चुप रह जाती है। मीना देवी उसी समय इस साहूकार रतन सिंह को कहती है कि साहूकार साहब मैं इस गांव में अपनी एक किराने की दुकान खोलना चाहती हूं और दुकान खोलने के लिए मुझे लाखों की जरूरत पड़ेगी। तुम्हें मेरी मदद करनी पड़ेगी। जब ऐसी ऐसी बातें साहूकार के सामने की जाती हैं तो साहूकार कहने लगता है कि मैं तुम्हें लाख देने के लिए तैयार हूं। लेकिन तुम्हें अपना घर मेरे पास गिरवी रखना पड़ेगा। जैसे यह बातें मीना को कही जाती है तो मीना देवी कहती है कि मैं अपना घर गिरवी रखने के लिए तैयार हूं। तुम कागजी कारवाई शुरू कर दो। उसी समय रतन सिंह कहते हैं कि चलो बड़ी अच्छी बात है। अगर तुम अपना घर गिरवी रखती हो तो ऐसा करना कि आज रात करीब आठ बजे के आसपास तुम मेरे घर पर आ जाना और वहीं पर बैठकर कागजी कारवाई करेंगे और फिर मैं तुम्हें लाख दे दूंगा। और इसके बाद रतन सिंह यहां से चला जाता है।
इसके बाद यह महिला पूरा दिन मेहनत मजदूरी करती है और मेहनत मजदूरी करने के बाद जैसे ही शाम के करीब छह बजे के आसपास का वक्त हो जाता है तो मीना देवी अपने घर पर आ जाती है। मीना देवी देखती है कि उसका बेटा प्रताप सिंह घर के अंदर बैठकर पढ़ाई लिखाई कर रहा होता है। मीना देवी उसी समय अपने बेटे प्रताप को कहती है कि प्रताप अब तो मैं अपनी एक किराने की दुकान खोल लूंगी और हमारी दुकान भी अच्छी चलेगी और हम भी अपनी गरीबी को दूर करेंगे और सबसे पहले हम अपना अच्छा घर बनाएंगे। लेकिन प्रताप सिंह कहने लग जाता है कि मां पैसे कहां से आएंगे। मां मीना देवी हंसते मुस्कुराते हुए अपने बेटे प्रताप को कहती है कि बेटा प्रताप मुझे आज रतन सिंह साहूकार मिला था और मैंने रतन सिंह साहूकार से बातचीत करके देख ली है। रतन सिंह साहूकार हमारा घर गिरवी रख के लाख दे देगा और फिर इसके बाद मैं अपनी दुकान खोलूंगी और जैसे जैसे करके मेरी दुकान अच्छी चलेगी तो इसके बाद मैं धीरे धीरे करके रतन सिंह साहूकार के सारे पैसे चुका दूंगी और जैसे सारे पैसे चुका दिए जाएंगे तो हमारा घर भी छूट जाएगा। लड़का प्रताप हंसते मुस्कुराते हुए अपनी मां को कहता है कि मां यह तो बहुत अच्छी बात है और इस तरीके से रात को जाती है।
रात के करीब साढ़े सात बजे के आसपास मीना देवी अपने बेटे को खाना खिलाती है और अपने बेटे प्रताप को कहती है कि प्रताप तुम पढ़ाई करो और मैं रतन सिंह साहूकार के घर पर जाती हूं और वहां से लाख लेकर आती हूं। इस तरीके से मीना देवी उसी समय अपने घर से बाहर निकल जाती है। थोड़ी देर के बाद मीना देवी साहूकार रतन सिंह के घर पर चली जाती है। रतन सिंह साहूकार अपने घर में अकेला बैठा होता है और रतन सिंह शराब भी पी रहा होता है। रतन सिंह को काफी नशा हो चुका था और नशे में रतन सिंह की हिम्मत इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि जैसे ही यह महिला घर के अंदर प्रवेश करती है तो उसी समय रतन सिंह इस महिला मीना देवी को कहता है कि देखो मीना तुम्हें घर गिरवी रखने की कोई जरूरत नहीं है। मैं तुम्हें ऐसे ही बिना घर गिरवी रखे हुए भी लाख दे सकता हूं। जब यह बात मीना के सामने कही जाती है तो मीना हैरान हो जाती है। लेकिन दूसरे ही पल साहूकार रतन सिंह कहता है कि तुम्हें बस हर रोज मेरा बिस्तर गर्म करना पड़ेगा। अगर तुम यह सब करने के लिए तैयार हो तो मैं तुम्हें लाख देने के लिए तैयार हूं।
जब ऐसी बड़ी बात मीना देवी सुनती है तो मीना देवी चिंता में पड़ जाती है। लेकिन साहूकार रतन सिंह कहने लगता है कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। किसी को कानों कान तक खबर नहीं होगी और हम अपनी इच्छाओं को पूरा करेंगे और मैं तुम्हारी जरूरतों को पूरा करूंगा। इस तरीके से इस महिला मीना देवी को मजबूर कर दिया जाता है। मीना देवी को भी लालच आ जाता है और लालच की वशीभूत होकर मीना देवी इसकी शर्त को मान लेती है और जैसे ही मीना देवी इसकी शर्तों को मान लेती है तो मीना कहती है कि मैं यह सब करने के लिए तैयार हूं। अब इसके बाद साहूकार रतन सिंह कहता है कि अगर तुम तैयार हो तो घर का दरवाजा जल्दी से बंद कर दो। और फिर इसके बाद मीना देवी खुद ब खुद इस घर का मुख्य दरवाजा बंद कर देती है। और इसके बाद रतन सिंह साहूकार मीना देवी का हाथ पकड़ कर इसको अपने बैडरूम के अंदर ले जाता है। बेडरूम के अंदर जाने के बाद बीना देवी और रतन सिंह के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो इसके बाद रतन सिंह कहता है कि देखो मैं तुम्हें लाख दे रहा हूं लेकिन तुम्हें भी हर रोज मेरे घर पर आकर मेरा बिस्तर गर्म करना पड़ेगा। मीना देवी कहती है कि तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मुझे लाख दे दो और मैं हर रोज तुम्हारे घर पर आ जाया करूंगी। और इसके बाद रतन सिंह इस महिला मीना देवी को लाख देता है और कहता है कि हर रोज तुम्हें आना पड़ेगा।
मीना देवी लाखों को लेकर खुश हो जाती है। अब मीना देवी इससे भी बड़े बड़े कांड करने के लिए तैयार हो जाती है। जैसे तैसे करके मीना देवी लाख लेकर अपने घर पर आ जाती है। मीना देवी जैसे ही अपने घर पर पहुंचती है तो देखती है कि उसका बेटा प्रताप सिंह अपनी मां का इंतजार करते करते गहरी नींद में सो चुका था। और इसके बाद मीना देवी भी गहरी नींद में सो जाती है। और दो चार दिनों का वक्त गुजरने के बाद मीना देवी इस गांव में एक अपनी किराने की दुकान खोल लेती है। और देखते ही देखते मीना देवी की यह किराने की दुकान अच्छी खासी चल पड़ती है। कुछ लोग तो इसकी खूबसूरती और सुंदरता को देखकर ही इसकी दुकान पर आ जाया करते थे और मीना देवी भी इन लोगों के साथ हंस हंस कर मीठी मीठी बातचीत किया करती थी। जिसकी वजह से इसकी दुकान बहुत अच्छी चल पड़ती है। गांव के लगभग ज्यादातर लोग इसी के पास अपना घर का सामान खरीदने के लिए आया करते थे। लेकिन मीना देवी अब इससे भी बड़े बड़े कांड करने वाली थी जिसके बारे में बेटा प्रताप कुछ भी नहीं जानता था।
इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है दस जुलाई दो हजार छब्बीस का दिन। सुबह के करीब सात बजे के आसपास का वक्त होता है। बेटा प्रताप अपनी मां मीना देवी को कहने लगता है कि मां हमारी दुकान बहुत अच्छी चल पड़ी है। अब तो हमारे घर की गरीबी दूर हो जाएगी। इसके बाद तो हम भी अपना एक बड़ा आलीशान घर बना लेंगे। मां भी हंसते मुस्कुराते हुए अपने बेटे प्रताप को कहती है कि प्रताप मैं तुम्हारे लिए सब कुछ कर रही हूं। मैं तुम्हें पढ़ा लिखाकर एक अच्छा इंसान बनाना चाहती हूं। प्रताप भी कहने लगता है कि मां तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं बड़ा होकर तुम्हारे घर की सारी गरीबी को सारे दुख तकलीफों को दूर कर दूंगा। बस यह दो चार बातें करने के बाद अब प्रताप सिंह अपना बैग लेता है और बैग लेने के बाद अपने स्कूल में पढ़ाई करने के लिए चला जाता है। थोड़ी देर के बाद मीना देवी भी अपनी दुकान पर आ जाती है और दुकान में व्यस्त हो जाती है। कुछ ग्राहक दुकान पर आते हैं और सामान खरीदते हैं और अपने घरों पर लौट जाते हैं। लेकिन थोड़ा सा वक्त गुजर जाने के बाद उसी समय गांव का साहूकार रतन सिंह इसकी दुकान पर आता है। रतन सिंह मीना को कहने लगता है कि मीना मुझे एक पैकेट सिगरेट का चाहिए। इसके बाद मीना देवी रतन सिंह को सिगरेट देती है और सिगरेट देने के बाद अब रतन सिंह कहने लगता है कि देखो मीना कई दिनों का वक्त गुजर चुका है। तुम मेरे घर पर अभी तक रात के समय नहीं आई हो और वैसे भी आज मेरा एक दोस्त मेरे घर पर आने वाला है और मेरे दोस्त का नाम बृजमोहन है और तुम्हें आज रात मेरे घर पर आना पड़ेगा और मेरे साथ और मेरे दोस्त बृजमोहन के साथ वक्त गुजारना पड़ेगा। उसी समय मीना देवी हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि साहूकार साहब तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं रात के करीब दस बजे के आसपास तेरे घर पर पहुंच जाऊंगी। रतन सिंह भी खुश होकर कहता है कि यह तो बहुत अच्छी बात है। आज रात तुम मेरे घर पर आ जाना। और इसके बाद रतन सिंह यहां से निकलता है अपने घर पर चला जाता है।
जैसे ही पूरा दिन गुजर जाता है तो रात के करीब आठ बजे के आसपास का वक्त हो जाता है। और उसी समय मां मीना देवी अपने बेटे प्रताप को कहती है कि बेटा प्रताप मैं रतन सिंह के घर पर जा रही हूं। क्योंकि महीने की पहली किस्त मुझे लौटानी ही पड़ेगी। मैं उसको पैसे देने जा रही हूं। प्रताप कहने लगता है कि मां कोई बात नहीं तुम जा सकती हो और इसके बाद जो मीना देवी होती है रात के ही समय में अपने घर से बाहर निकल जाती है। थोड़ी देर के बाद मीना देवी रतन सिंह के घर पर पहुंच जाती है और इसके बाद जैसे ही मीना देवी रतन सिंह घर में प्रवेश करती है तो देखती है कि वहां पर रतन सिंह और उसका दोस्त बृजमोहन यह दोनों बैठकर शराब पी रहे होते हैं। दोनों को काफी नशा भी हो चुका होता है। और जैसे ही बृजमोहन की नजरें मीना देवी की खूबसूरती और इसके यौवन पर पड़ती है तो बृजमोहन बड़ा खुश हो जाता है। बृजमोहन अपने दोस्त रतन सिंह को कहने लगता है कि रतन सिंह तुमने तो कोहिनूर हीरा ढूंढ रखा है। इतनी खूबसूरत महिला तुम्हें कैसे मिल गई है। रतन सिंह कहने लगता है कि इस खूबसूरत हीरे को हासिल करने के लिए मैंने लाख दे रखे हैं और लाखों की कीमत तो मैं हर रात वसूल करता हूं। जब ऐसी ऐसी बातें बृजमोहन सुनता है तो बृजमोहन खुश होकर कहता है कि आज तो मैं भी मीना देवी के साथ वक्त गुजारने वाला हूं। रतन सिंह हंसते मुस्कुराते हुए कहता है कि कोई बात नहीं तुम भी इसके साथ वक्त गुजार सकते हो। इसके बाद रतन सिंह उसी समय मीना देवी का हाथ पकड़कर इसको अपने बैडरूम के अंदर खींच लेता है और फिर इसके बाद रतन सिंह और मीना देवी के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करना शुरू कर देते हैं। और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो इसके बाद रतन सिंह कमरे से बाहर निकलता है। रतन सिंह अपने दोस्त बृजमोहन को कहने लगता है कि बृजमोहन तुम भी बहती गंगा में डुबकी लगा सकते हो। इसके बाद बृजमोहन भी खुश होकर उसी समय इस कमरे में जाता है। कमरे में जाने के बाद इस महिला मीना के साथ आपत्तिजनक स्थिति में आता है और फिर इसके बाद बृजमोहन और मीना देवी के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। और जैसे ही बृजमोहन की भी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो बृजमोहन खुश होकर इस महिला मीना देवी को कुछ पैसे देता है। बृजमोहन कहने लगता है कि मैं भी हर तीसरी चौथी रात अब रतन सिंह के घर पर आ जाया करूंगा और तुम्हें रतन सिंह के घर पर हर रोज आना पड़ेगा। उसी समय मीना देवी हंसते मुस्कुराते हुए कहने लगती है कि बृजमोहन जी तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं हर तीसरी चौथी रात रतन सिंह के घर पर आती रहती हूं। कभी कभी तो रतन सिंह भी मेरे घर पर चला जाता है। बस यह दो चार बातें करने के बाद उसी समय मीना देवी इस घर से बाहर निकलती है। तब तक रात के ग्यारह तीस बज चुके होते हैं और मीना देवी अब जैसे ही अपने घर पर पहुंचती है तो देखती है कि उसका बेटा प्रताप आज सोया नहीं था। आज प्रताप जाग रहा होता है। प्रताप सिंह उसी समय अपनी मां को कहने लगता है कि मां तुम कहां पर रह गई थी। रात के ग्यारह तीस बजे के आसपास का वक्त हो चुका है। इतनी देर तुमने कहां लगा दी। अब इसके बाद मां मीना देवी अपने बेटे प्रताप को कहने लगती है कि बेटा प्रताप थोड़ा हिसाब किताब का जो काम था वो उलझ गया था। बस उसी हिसाब किताब को जोड़ने में देरी हो गई है। लेकिन प्रताप अब थोड़ा थोड़ा समझने लग जाता है। प्रताप अपनी मां के बारे में गंदी बात सोचना शुरू कर देता है। और वैसे भी प्रताप का सोचना बिल्कुल स्वाभाविक होता है। प्रताप अपनी मां को सामने से कुछ भी नहीं कहता है और इस तरीके से प्रताप की मां मीना देवी गलत रास्ते पर चल पड़ी थी। मीना देवी अपनी गरीबी को दूर करते करते एक दलदल में उतर चुकी थी। मीना देवी अब आगे चलकर इससे भी बड़े बड़े और भयानक कांड करने वाली थी जिसकी गूंज पूरे जिले में गूंजने वाली होती है। अब तो हर तीसरी चौथी रात मीना देवी रतन सिंह के घर पर जाने लगती है। रतन सिंह और बृजमोहन दोनों के साथ अपना वक्त गुजार कर इनसे कुछ पैसे लेना शुरू कर देती है। मीना देवी का बस यही काम बन जाता है। मीना देवी अपनी दुकान पर जरूर जाया करती थी लेकिन मीना ने गलत रास्ता चुन लिया था। इसका अंजाम बहुत बुरा होने वाला था।
आखिरकार कुछ दिनों का और वक्त गुजर जाता है। मीना देवी का दिल अब रतन सिंह और बृजमोहन से भर चुका होता है। मीना देवी फिर भी हर रोज रात के समय इन दोनों के पास जाती थी। रतन सिंह और बृजमोहन के साथ रात गुजार कर इन दोनों से पैसे वसूल कर लिया करती थी। लेकिन अब मीना देवी किसी दूसरे गैर मर्द का सहारा लेने के बारे में सोचना शुरू कर देती है। कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है चौबीस जुलाई दो हजार छब्बीस का दिन। रात के करीब आठ बजे के आसपास का वक्त होता है। मीना देवी अपनी दुकान में बिल्कुल अकेली बैठी होती है। उस समय दुकान में कोई भी ग्राहक नहीं होता है। और उसी समय गांव का एक ट्रक ड्राइवर अपना ट्रक लेकर इसकी दुकान के ठीक सामने आ जाता है और फिर इसके बाद यह ट्रक ड्राइवर अपना ट्रक रोक लेता है और इस ट्रक ड्राइवर का नाम गुलाब सिंह होता है। गुलाब सिंह के पास भी अच्छा खासा पैसा होता है। गुलाब सिंह एक बड़ा ही हैंडसम नौजवान लड़का होता है। गुलाब सिंह अपने ट्रक से नीचे उतरता है और फिर सिगरेट खरीदने के लिए इस दुकान पर आ जाता है। गुलाब सिंह जैसे ही दुकान के अंदर प्रवेश करता है तो गुलाब सिंह की नजरें इस महिला मीना देवी की खूबसूरती और इसके यौवन पर पड़ जाती है। गुलाब सिंह जैसे ही इतनी खूबसूरत महिला को देखता है तो गुलाब सिंह अपने आप खो बैठता है। गुलाब सिंह उसी समय इस महिला मीना देवी को कहता है कि मुझे सिगरेट खरीदनी है और इसके बाद यह मीना देवी सिगरेट का एक पैकेट गुलाब सिंह को पकड़ा देती है। लेकिन गुलाब सिंह सिगरेट पकड़ते पकड़ते उसी समय मीना देवी का हाथ पकड़ लेता है। मीना देवी को यह हाथ पकड़ना अच्छा लग जाता है। मीना देवी गुलाब सिंह की किसी भी बात का विरोध तक नहीं करती है और इसके बाद गुलाब सिंह की हिम्मत और भी ज्यादा बढ़ जाती है। गुलाब सिंह उसी समय इस महिला मीना देवी को कहने लगता है कि मीना भाभी मैं तुम्हारे साथ एक रात गुजारना चाहता हूं। जैसे यह बात मीना देवी के सामने कही जाती है तो मीना देवी कहने लगती है कि अगर तुम मेरे साथ रात गुजारना चाहते हो तो आज रात करीब ग्यारह बजे के आसपास मेरे घर पर आ सकते हो। मैं दरवाजा खुला छोड़ दूंगी। तुम घर के अंदर आ जाना। गुलाब सिंह खुश होकर सिगरेट का पैकेट लेता है और पैसे देता है और कहता है कि आज रात करीब ग्यारह बजे के आसपास मैं तेरे घर पर आ जाऊंगा। और इस तरीके से गुलाब सिंह और मीना देवी की दोनों की योजना बन जाती है।
इसके बाद गुलाब सिंह इस दुकान से बाहर निकलता है। अपने घर पर चला जाता है। दूसरी तरफ मीना देवी भी अपनी दुकान बंद करती है। दुकान बंद करने के बाद अपने घर पर आ जाती है और घर पर आने के बाद मीना देवी अपने बेटे प्रताप को कहती है कि प्रताप आज रात तुम जल्दी सो जाना क्योंकि सुबह तुम्हें जल्दी स्कूल में भी जाना है। प्रताप अपनी मां की सारी बातों को मानकर उसी समय लाइट बंद कर देता है और अपने कमरे में जाकर लेट जाता है। थोड़ी देर के बाद प्रताप को गहरी नींद आ जाती है और जैसे ही प्रताप को नींद आती है तो उसी समय मीना देवी गुलाब सिंह ट्रक ड्राइवर के पास फोन कॉल करती है और गुलाब सिंह को कहती है कि देखो मेरा बेटा गहरी नींद में सो चुका है। तुम मेरे घर पर आ सकते हो। मैंने दरवाजा खुला छोड़ दिया है और इसके बाद गुलाब सिंह अपने घर से बाहर निकलता है। गुलाब सिंह देखते ही देखते मीना देवी के घर पर पहुंच जाता है। घर के अंदर प्रवेश करता है और मीना तक भी पहुंच जाता है। मीना उसी समय अपने कमरे से बाहर निकलती है और गुलाब सिंह ट्रक ड्राइवर का हाथ खींचकर इसको अपने बेडरूम के अंदर ले जाती है। और फिर इसके बाद गुलाब सिंह और मीना के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी जरूरतों को अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो इसके बाद गुलाब सिंह ट्रक ड्राइवर इस महिला को कुछ पैसे देता है और मीना को कहता है कि अब तो जब भी मेरा मन करेगा मैं तेरे घर पर आ जाऊंगा। मीना देवी भी खुश होकर कहती है कि मैं तुम्हारे पास फोन कॉल कर दिया करूंगी और तुम्हें अपने घर पर बुला लिया करूंगी। इसके बाद गुलाब सिंह अपना काम खत्म करने के बाद रात के करीब ग्यारह तीस बजे के आसपास इस घर से बाहर निकलता है। लेकिन उसी समय मीना देवी के एक पड़ोसन रीटा देवी इस गुलाब ट्रक ड्राइवर को इसके घर से बाहर निकलते हुए देख लेती है। रीटा देवी सब कुछ समझ जाती है। रीटा देवी अपने मन में सोचने लग जाती है कि गुलाब ट्रक ड्राइवर इस महिला मीना देवी के साथ सोने के लिए घर पर आता है। रीटा देवी इस बात के बारे में भी जानती थी कि रतन सिंह और बृजमोहन भी इस महिला के घर पर आते हैं। लेकिन अब रीटा देवी चुप बैठने वाली नहीं होती है। आखिरकार पूरी रात गुजर जाती है और जैसे ही अगला दिन होता है तो सुबह के करीब साढ़े सात बजे के आसपास मीना देवी का बेटा प्रताप सिंह अपने घर से तैयार होकर स्कूल में जाने के लिए बाहर निकलता है और उसी समय पड़ोसन रीटा देवी प्रताप सिंह को आवाज लगाती है। प्रताप सिंह दौड़ा दौड़ा रीटा देवी के पास चला जाता है और रीटा देवी उसी समय प्रताप को कहने लगती है कि प्रताप तुम्हारे घर के अंदर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। तेरी मां मीना देवी लोगों को रात के समय अपने घर पर बुलाती है। प्रताप सिंह रीटा देवी की सारी बातों को सुनकर हैरान रह जाता है। लेकिन अब रीटा देवी प्रताप को कहती है कि कल रात की बात है। तुम्हारी मां मीना देवी के साथ वक्त गुजारने के लिए गुलाब सिंह ट्रक ड्राइवर आया था। मैंने अपनी आंखों से देखा है और तेरी मां मीना देवी के साथ वक्त गुजारने के लिए रतन सिंह और उसका दोस्त बृज मोहन भी आते हैं। मैंने उनको भी कई बार रात के समय घर पर आते हुए देखा है। प्रताप सिंह जैसे ही रीटा देवी की इन बातों को सुन लेता है तो इस बात का असर प्रताप के दिलो दिमाग पर गहरा पड़ जाता है। प्रताप सिंह रीटा देवी की सारी बातों को सुनकर अपने स्कूल में चला जाता है। लेकिन प्रताप सिंह को पढ़ाई जमती नहीं है। प्रताप सिंह हर समय पूरा दिन अपनी मां मीना देवी के बारे में यह सारी बातें सोचता रहता है। आखिरकार दो बजे के आसपास का वक्त हो जाता है और प्रताप सिंह के स्कूल की छुट्टी हो जाती है। थकाहारा प्रताप सिंह अपने स्कूल से बाहर निकलता है अपने घर की तरफ चल पड़ता है। प्रताप सिंह जैसे अपने घर पर पहुंचता है तो देखता है कि घर का दरवाजा अंदर से बंद होता है। प्रताप सिंह अपनी मां मीना देवी को कई बार आवाज लगाता है। मीना देवी उसी समय अपने घर का दरवाजा खोलती है और इसके बाद प्रताप सिंह घर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। लेकिन प्रताप सिंह जैसे ही घर के अंदर प्रवेश करता है तो एक कमरे के अंदर रतन सिंह बैठकर अपने कपड़े ठीक कर रहा होता है और रतन सिंह को ऐसी आपत्तिजनक स्थिति में देखकर प्रताप की आंखें फटी की फटी रह जाती है। प्रताप अपने मन में सोचने लग जाता है कि उसकी मां ने गलत रास्ता चुन लिया है और रीटा देवी चाची ने जो भी बातें कही है वह सारी बातें सच है। लेकिन यह सब होने के बाद भी प्रताप सिंह चुप रह जाता है और उसी समय रतन सिंह इस लड़के प्रताप को कहने लगता है कि प्रताप मैं तुम्हारी मां से कुछ पैसे लेने के लिए आया था। तेरी मां ने मेरे लाख लौटाने हैं और उनमें से दूसरी पता नहीं तीसरी किस्त मुझे लौटाई गई है और मैं अब अपने घर पर जाता हूं। रतन सिंह जैसे ही घर से बाहर निकलता है तो उसी समय प्रताप सिंह अपनी मां को कहने लगता है कि मां आज के बाद यह आदमी हमारे घर पर नहीं आना चाहिए। मुझे यह आदमी अच्छा नहीं लगता है। इसका चाल चलन और चरित्र बिल्कुल खराब है। जब ऐसी ऐसी बातें मीना देवी के सामने कही जाती है तो मीना देवी को इस बात पर गुस्सा आ जाता है। मीना देवी उसी समय अपने बेटे प्रताप को डांटना शुरू कर देती है फटकारना शुरू कर देती है और कहती है कि तुम्हें आदमियों की परख नहीं है। यह तो शुक्र है कि रतन सिंह यहां से चला गया है। नहीं तो तुम उसके सामने मेरी बेइज्जती कर सकते थे। जब ऐसी बड़ी बड़ी बातें मीना देवी अपने बेटे प्रताप सिंह को कहती है तो प्रताप सिंह के दिलो दिमाग पर यह बातें भी असर कर जाती है और इसके बाद पूरा दिन गुजरने के बाद रात का समय हो जाता है। रात के नौ बजे के आसपास मीना देवी अपने बेटे को खाना खिलाती है। प्रताप खुश होकर खाना खाता है और अपनी मां को कहता है कि मां मैं अपने कमरे में सोने के लिए जा रहा हूं। इस तरीके से प्रताप सिंह अपने कमरे में चला जाता है और लेट जाता है लेकिन प्रताप सिंह को नींद नहीं आती है। दूसरी तरफ प्रताप सिंह की मां मीना देवी अपने कमरे में जाकर लेट जाती है और देखते ही देखते मीना देवी को गहरी नींद आ जाती है। रात के ग्यारह बजे चुके होते हैं लेकिन प्रताप सिंह को नींद नहीं आई थी। प्रताप सिंह के दिलो दिमाग पर यह सारी बातें अपना असर छोड़ चुकी होती है। प्रताप सिंह उसी समय अपने कमरे से बाहर निकलता है। कमरे से बाहर निकलने के बाद घर में हथियार तलाशना शुरू कर देता है। प्रताप सिंह के हाथ में एक पुरानी जंग लगी गंडासी आ जाती है। प्रताप सिंह उस गंडासी को लेकर अपनी मां के कमरे में चला जाता है। और इसके बाद प्रताप सिंह उस गंडासी के साथ अपनी मां मीना देवी की गर्दन धड़ से काटकर अलग कर देता है। और जैसे इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम दे दिया जाता है तो प्रताप सिंह रात के ही समय में उस गंडासी को लेकर अपने घर से बाहर निकलता है और पड़ोसन चाची रीटा के घर पर चला जाता है और रीटा चाची को कहता है कि मैंने अपनी मां का कत्ल कर दिया है। मैंने अपनी मां मीना देवी की गर्दन इस गंडासी के साथ काट दी है। रीटा देवी दौड़ी दौड़ी उसी समय घर के अंदर जाती है। घर के अंदर रीटा देवी देखती है कि घर के अंदर तो मीना देवी की सिर कटी लाश पड़ी होती है। रीटा देवी उसी समय इस लाश को देखकर हैरान रह जाती है। रीटा चीखने चिल्लाने लगती है और उसी समय अपना मोबाइल फोन लेकर नजदीकी पुलिस स्टेशन में फोन कॉल करती है। करीब दो घंटे के बाद घटना स्थल पर पुलिस पहुंचती है। पुलिस घर के अंदर प्रवेश करती है और मीना देवी का शव अपने कब्जे में लेती है और इसके बाद रीटा से पूछताछ शुरू कर दी जाती है। रीटा कहने लगती है कि प्रताप ने अपनी मां मीना देवी की हत्या कर दी है और इसके बाद जब प्रताप से पूछताछ शुरू कर दी जाती है तो प्रताप सिंह पुलिस के सामने अपनी मां की पूरी कहानी रखता है। प्रताप सिंह पुलिस को बताता है कि उसकी मां गलत रास्ते पर चल पड़ी थी। बस इसी वजह से मैंने उसकी हत्या कर दी है। और जब पुलिस इस लड़के की पूरी कहानी को सुनती है तो पुलिस के भी होश उड़ जाते हैं। लेकिन लड़के प्रताप ने जुर्म किया था। पुलिस प्रताप सिंह को गिरफ्तार करती है। पुलिस थाने में ले जाती है और आगे की कानूनी कारवाई शुरू कर देती है। यह बात भविष्य में छिपी है कि जज साहब प्रताप सिंह को आखिरकार क्या सजा सुनाने वाले हैं। लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रताप सिंह ने अपनी मां मीना देवी के साथ जो किया क्या वह सही था या गलत था। कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ। तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद।