ससुर की शराब के नशे में बहू को लूटने की घटना: राजस्थान के एक गांव में हुई एक दर्दनाक सच्ची घटना – News

ससुर की शराब के नशे में बहू को लूटने की घटना: राजस्थान के एक गांव में हुई एक दर्दनाक सच्ची घटना

ससुर की शराब के नशे में बहू को लूटने की घटना: राजस्थान के एक गांव में हुई एक दर्दनाक सच्ची घटना

ससुर की शराब के नशे में बहू को लूटने की घटना: राजस्थान के एक गांव में हुई एक दर्दनाक सच्ची घटना

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ससुर की शराब के नशे में बहू को लूटने की घटना: राजस्थान के एक गांव में हुई एक दर्दनाक सच्ची घटना

नमस्कार दोस्तों, आज मैं आप सभी लोगों को बताने वाली हूं कि एक ऐसी कहानी, एक ऐसी घटना के बारे में जिसको सुनने के बाद आप सभी लोग बहुत हैरान परेशान होंगे।

दरअसल दोस्तों, एक महिला जिस महिला की उम्र तकरीबन 32 33 साल के करीब होती है और उस महिला का नाम सुनीता होती है।

दोस्तों, जो महिला होती है उसकी शादी को लगभग 12 सालों का समय बीत चुका था।

और यह सुनीता जो थी वो पिछले 12 सालों से अपने ससुराल में रह रही थी।

दोस्तों जो सुनीता का पति होता है वो बाहर रह के जॉब किया करता था जो कि अक्सर ही दो चार छ महीने में ही घर आया करता था।

दोस्तों जो सुनीता होती है वो अपने ससुराल में अपने ससुर के साथ अकेली रहती थी।

अब दोस्तों जो कहानी मैं आप सभी लोगों को बता रही हूं यह आज ही यानी कि बीते कल होली के दिन ही हुए लगभग 11:00 बजे की घटना है।

दोस्तों 11:00 बजे का समय होता है।

जो सुनीता होती है वो अपने घर पर अकेली होती है।

और जो उसका ससुर होता है वो अपने दोस्तों के साथ होली खेलने के लिए चला गया था।

और फिर दोस्तों होली खेलने के बहाने से सुनीता के ससुर को शराब पीने का पूरा मौका मिल जाता है।

और फिर जो सुनीता का ससुर होता है वो अपने दोस्तों मित्रों के साथ बैठकर के खूब सारी शराब का सेवन कर रहा था।

और फिर पूरे नशे में धुत हो के जो सुनीता का ससुर होता है फिर वो होली खेलकर अपने घर पर लौट आता है।

और घर पर आने के बाद दोस्तों जो ससुर जो होता है जो सुनीता उसके हाथ में रंग होता है।

अब जब सुनीता का ससुर अपनी बहू को बिना रंग में होली खेले हुए देखता है और बिना रंगे हुए देखता है तो फिर उसके दिमाग में पता नहीं क्या आता है क्या नहीं आता है कि सुनीता का ससुर जो है वो सुनीता को ही रंग लगाना शुरू कर देता है।

रंग लगाते हुए यहां तक तो ठीक था लेकिन फिर उसके बाद जो सुनीता का ससुर होता है वो सुनीता को अपने गोद में उठा लेता है।

और फिर गोद में उठाने के बाद वह सीधा ही अपने कमरे में लेकर के चला जाता है।

सुनीता जो थी वो अपने ससुर को अपनी तरफ से रोकने का प्रयास कर रही थी।

लेकिन दोस्तों सुनीता जो थी वो अपने ससुर से जीत नहीं पाती है।

और फिर उसके बाद जो सुनीता का ससुर होता है वो सुनीता के साथ कमरे में उसे ले जा के उसके साथ कुछ ऐसा कारनामा करने लगता है कि जिसके बारे में जब आप जानेंगे तो सच बता रही हूं दोस्तों कि आपके भी पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी।

और आप कल्पना भी नहीं कर पाएंगे कि सुनीता के ससुर ने सुनीता के साथ क्या-क्या काम किया था।

आखिर उन दोनों के बीच में दोस्तों ऐसा क्या हुआ होता कि सुनीता की स्थिति जो थी वह खराब हो गई थी।

यह सारी जानकारी मैं शुरू से लेकर अंत तक आपको आज इस वीडियो में बताने वाली हूं।

लेकिन उससे पहले बस आपसे एक ही रिक्वेस्ट है कि आप सभी लोग इस वीडियो को पूरा देखिएगा और अगर वीडियो अच्छी लग जाए तो वीडियो को लाइक करके चैनल को सब्सक्राइब करके एक प्यारा सा कमेंट आप लोग जरूर कीजिएगा।

दरअसल दोस्तों आज की इस सच्ची घटना की जो शुरुआत होती है दोस्तों यह घटना राजस्थान से शुरुआत होती है।

दोस्तों राजस्थान के एक छोटे से गांव के अंदर इस सुनीता नाम की लड़की का जन्म हुआ था।

दोस्तों मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि जो सुनीता होती है वो एक ऐसे घर में उसका जन्म हुआ था जिस घर के अंदर दोस्तों सुनीता का जो पूरा परिवार होता है वो खेतीबाड़ी का काम किया करता था।

सुनीता के माता-पिता के पास खुद की जमीन बिल्कुल भी नहीं थी।

दोस्तों मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि सुनीता के जो माता-पिता होते हैं वो लोगों के खेतों में काम करके वहां से जो भी वो लोग पैसे कमाते थे उन्हीं पैसे से सुनीता के घर का जो पूरा खर्चा हुआ करता था वो चला करता था।

लेकिन दोस्तों सुनीता अपने माता-पिता के साथ उस जीवन में भी काफी ज्यादा ही खुश थी।

ऐसा बात नहीं कि उसे कोई दिक्कत नहीं थी।

अब दोस्तों आप सभी लोगों को पता है कि खुशी खुश रहने वाले लोग झोपड़ी में भी खुश रह लेते हैं और ना रहने वाले लोग महल में भी नहीं रह पाते हैं।

अब दोस्तों जो सुनीता होती है धीरे-धीरे समय के साथ अपने परिवार में रहते हुए बड़ी हो जाती है और फिर बड़ी होने के बाद जो सुनीता होती है वह जब अपनी 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी कर लेती है उस परीक्षा को पास करने के बाद दोस्तों जो सुनीता होती है अब उसका एडमिशन जो है वो कॉलेज के अंदर करा दिया जाता है।

और फिर जब सुनीता अपने कॉलेज में पढ़ाई लिखाई करने के लिए जाती है तो आप सभी लोगों को पता है दोस्तों की कॉलेज के अंदर जितने भी लड़के या लड़कियां होती है सबकी उम्र जो है वो लगभग सेम ही होती है। यानी कि हम उम्र ही होते हैं। काफी ज्यादा जो है उम्र में कोई अंतर नहीं होता है।

अब दोस्तों जब सावित्री सुनीता कॉलेज में जाती है और कॉलेज के में कई लड़कियों से वो अपनी दोस्ती करती है। लड़कों से भी उसकी दोस्ती होती है।

और फिर दोस्तों उसी कॉलेज के अंदर लड़का एक लड़का होता है जिस लड़के का नाम जो है वो संजय होता है।

दोस्तों जो संजय था वो देखने में काफी हैंडसम और स्मार्ट था और कहीं ना कहीं सुनीता को यह जो संजय था वह काफी ज्यादा पसंद किया करता था।

अब धीरे-धीरे इन दोनों के बीच की जो बातें हैं वह धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी। इनकी दोस्ती जो थी वो काफी ज्यादा गहरी होती चली जा रही थी और दोस्तों आप तो यह बात जानते ही हैं कि ये दोस्ती कब प्यार में बदलने वाली थी ये तो उन दोनों को भी नहीं पता था।

अब दोस्तों जो संजय था वो एक अच्छे खासे परिवार से था। संजय के घर में पैसे रुपए की कोई कमी नहीं थी। अच्छे खानदान से था। अच्छे पैसे वाला था। घर में कहीं से किसी चीज की कोई कमी नहीं थी।

और दोस्तों सुनीता को वो अच्छे-अच्छे गिफ्ट दिलाया करता था। कपड़े लत्ते खाने पीने कई सारी चीजें। कहने का मतलब यह है कि जो सुनीता को संजय था वह बहुत ही ज्यादा खुश रखा रखा करता था।

अब धीरे-धीरे ऐसे ही समय बीतने लगता है और जो यह संजय है जो सुनीता है वो संजय को काफी ज्यादा पसंद करने शुरू कर देती है और ये दोनों जो थे वो एक दूसरे से काफी गहराई से प्यार करना शुरू कर देते हैं।

जब दोस्तों इन्हें कॉलेज के अंदर लगभग एक से डेढ़ साल का समय गुजर जाता है तो फिर दोस्तों एक डेढ़ साल का समय बीतने के बाद यह जो सुनीता का बॉयफ्रेंड होता है संजय यह सुनीता को एक फोन दिला देता है।

और फिर फोन लेने के बाद सुनीता जो थी वो अपने घर पर ही रह के अब ज्यादातर समय वह फोन पर ही बात कर रही थी।

दरअसल सुनीता के माता-पिता को शुरुआत में तो उसके बारे में ऐसी वैसी कोई बातें नहीं पता चलती है क्योंकि वो सारा दिन खेतों में काम करते थे। शाम को घर आते थे और जो शाम को सुनीता होती थी वो फोन का इस्तेमाल नहीं किया करती थी।

दिन में जभी भी उसको टाइम मिलता था वो फोन पर बात करती थी और शाम को वो अपने माता-पिता के आने से पहले फोन को छुपा दिया करती थी ताकि उसके माता-पिता को उसके फोन के बारे में कुछ पता ना चल सके।

लेकिन दोस्तों आप सभी लोग इस बात को अच्छे तरीके से जानते हैं कि चाहे कोई कितना ही कोई ना इन चीजों को छुपा ले चाहे वो कितनी ही कोशिश क्यों ना कर ले लेकिन कहीं ना कहीं उन चीजों के बारे में पता चल ही जाता है और उस मैटर का खुलासा जो है वो हो ही जाता है।

अब दोस्तों धीरे-धीरे जो सुनीता की मां होती है उसे अब सुनीता के ऊपर कुछ अलग उसके व्यवहार से कुछ शक होने लगा था।

और कई बार सुनीता की मां सुनीता की बातों के बात फोन पर बात करते हुए भी पकड़ी हुई और जब ऐसा कुछ होता है तो फिर गांव के लोगों की जो सोच होती है वह थोड़ी कुछ अलग ही होती थी।

दोस्तों सुनीता की जो मां होती है वह तुरंत ही सुनीता के पिता से यह सारी बात बताती है कि जो यह हमारी बेटी है वो इस तरीके से उसके पास एक फोन भी है और हमने तो उसे कोई फोन भी नहीं दिलाया है।

तो जाहिर सी बात है कि आखिर इसे किसने फोन दिया होगा और इसके बीच का क्या रहा होगा आप समझ सकते हैं।

अब इस बारे में जो सुनीता के मामू मम्मी पापा होते हैं इस चीज के बारे में पूरी तरह से पता लगाना शुरू कर देते हैं।

लेकिन धीरे-धीरे जब वो सुनीता को समझाने और डांटने की कोशिश करते हैं तो जो सुनीता है वो अपने माता-पिता को सारी सच्चाई बयां कर देती है। कहने लगती है कि इस तरीके से मैं जिस कॉलेज में पढ़ती हूं उसी कॉलेज में यह भी लड़का पढ़ता है और यह लड़का जो है वो काफी अच्छे घर से भी है और यह मुझसे बहुत ज्यादा प्यार भी करता है और इसी ने मुझे गिफ्ट किया है और हम दोनों ने आगे भविष्य में शादी करने का भी फैसला किया है।

यहां पर दोस्तों सुनीता के मम्मी पापा ने पहले तो सुनीता को समझाने की कोशिश की कि सुनीता जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ होगा नहीं।

यह जो लड़के हैं यह अमीर परिवार से आते हैं और यह लोग तुम्हें कब छोड़ देंगे तुम्हें पता ही नहीं चलेगा। वो सिर्फ तुम्हारा इस्तेमाल करना चाहता होगा।

यहां पर दोस्तों सुनीता जो है वो अपने माता-पिता को समझाना शुरू कर देती है। कहने लगती है कि आप लोग इस चीज की बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। मुझे संजय पर पूरापूरा विश्वास है। वो कभी भी मुझे धोखा नहीं देने वाला है।

यहां पर दोस्तों सुनीता के माता-पिता के काफी समझाने के बाद जो सुनीता है वो अपने माता-पिता की कोई भी बात को नहीं मानती है।

और फिर उसके बाद वो अब उस लड़के से सरेआम ही रिश्ता रखना बात करना शुरू कर देती है।

तभी दोस्तों जो सुनीता के मां मम्मी पापा है वो एक दिन सुनीता से कहते हैं कि बेटा अगर तुम्हें उस लड़के से शादी करनी है तो तुम ऐसा करो कि तुम उस लड़के को हमारे घर पर बुलाओ। हम उससे बातचीत करते हैं और फिर उसके बाद हम तुम्हारी खुशी से उसकी शादी करा देंगे।

हमने कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि दोस्तों जो सुनीता के मम्मी पापा को थे उन्हें पता था कि वो गरीब है और वो ज्यादा जबरदस्ती करेंगे तो हो सकता है कि उनकी बेटी जो है वो कहीं अगर लड़के के साथ कहीं चली गई तो फिर वो गांव में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे और इसीलिए हमें जो है सच्चाई से बातचीत करके उस लड़के से शादी कर देना चाहिए और ये दोनों माता-पिता आपस में सलाह करके ऐसा डिसीजन लेते हैं।

यहां पर दोस्तों जो सुनेता होती है यही बात संजय को बताती है। यानी कि अपने बॉयफ्रेंड को ये फोन पर करके सारी बात बताती है कि इस तरीके से मम्मी पापा ने फैसला किया है और वो लोग हमारी शादी के लिए भी मान गए हैं तो तुम ऐसा करो कि तुम अपने माता-पिता को लेकर के मेरे घर पर आओ और फिर उसके बाद जो हमारी शादी की बातें हैं वो आगे हम लोग बढ़ाएंगे।

यहां पर दोस्तों जो लड़का संजय होता है वो इस लड़की की बातों को सुनकर के अपने माता-पिता को लेकर के वो सीधा इस सुनीता के घर पर आ जाता है।

दोस्तों सुनीता का जो घर था वो काफी ज्यादा छोटा छोटा था।

जाहिर सी बात ये लोग बहुत ज्यादा कोई पैसे वाले तो थे नहीं लेकिन संजय जो था वो सच में ही सुनीता से बहुत ज्यादा प्यार करता था और इसीलिए जब वो लोग इनके घर पर आते हैं तो वो तुरंत ही सुनीता को देख के हां भर लेते हैं और फिर मौके पर जो है वो सुनीता और संजय की सगाई करवा दी जाती है।

अब दोस्तों मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि जो सुनीता होती है जब उसकी सगाई संजय से होती है तो वो बहुत ज्यादा खुश हो जाती है और जाहिर सी बात है वो खुश होने वाली बात भी थी क्योंकि जो सुनीता थी वो एक गरीब घर से एक अमीर घर में जाने वाली थी और उसके जीवन साथी के रूप में उसे फ्री में मिला था तो उसकी खुशी के बाद जाहिर सी बात है कोई ठिकाना उसे खुशी का नहीं था।

और फिर इस तरह से अब सुनीता की शादी भी संजय से करा दी जाती है और सुनीता जो है वो अपने ससुराल चली जाती है।

अब दोस्तों मैं आपको सुनीता के ससुराल वालों के बारे में कुछ बता देती हूं।

सुनीता के ससुराल में केवल तीन ही लोग रह करते थे।

सुनीता के सास ससुर और सुनीता का जो पति था संजय।

दोस्तों जब सुनीता शादी हो जाने के बाद अपने ससुराल में जाती है तो उसका जो पति संजय होता है वो भी अपनी पढ़ाई को वहीं पर ड्रॉप कर देता है और फिर वो कोई और काम धंधा करना शुरू कर देता है और समय धीरे-धीरे ऐसे ही बीतने लगता है।

अब जो सुनीता है वो अपने ससुराल में अपने सास ससुर और वो अपने पति के साथ बहुत ही खुशहाली के साथ अपनी जीवन जी रही थी।

दोस्तों सुनीता को अपने ससुराल में किसी चीज की कोई कमी नहीं महसूस हुई थी।

वक्त ऐसे ही धीरे-धीरे बीत रहा था और सुनीता की शादी को अब कई सालों का समय भी बीत जाता है।

कई सालों का समय बीत जाने के बाद भी सुनीता ने अभी तक किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया था।

दोस्तों मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि जो सुनीता का ससुर था और जो उसका पति था जिसका नाम संजय था।

संजय जो था वो किसी बाहर की कंपनी में काम करता था और जिस कंपनी में वो बहुत ही ऊंची पोस्ट पर कार्यरत था और जिसकी वजह से वो काफी अच्छे खासे पैसे भी कमा रहा था।

दोस्तों मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि क्या होता है कि शुरुआत में तो सुनीता का जो पति होता है वो अपनी ही पास की कंपनियों में अपनी ही नजदीकी जगहों पर वो काम किया करता था लेकिन सुनीता का जो पति था वो काफी ज्यादा टैलेंटेड था और वो लड़का जो था वो काफी जल्दी ही किसी चीज को वो सीख जाया करता था और इसीलिए वो जहां पर भी काम किया करता था काफी लगन और मेहनत से किया करता था और उसे इसीलिए उसे अच्छी से अच्छी पोस्ट मिला करती थी और फिर दोस्तों जल्द ही जो सुनीता का पति होता है उसे दूसरे शहर से ऑफर आने लगते हैं और आखिर में जो सुनीता का पति होता है जब उसकी शादी को 6 से 7 साल का समय बीत जाता है तब दोस्तों जो सुनीता का पति है वह दूसरे शहर में काम करने के लिए चला जाता है।

अब दोस्तों आप सभी लोगों को पता है कि अगर हमारे शहर में वो काम करता वो अपने ही गांव पर रहता तो टाइम टू टाइम अपने काम पर आ जाता था अपने घर से चला जाया करता था तो इस तरह से वो नजदीकी जगह पर काम करके रोज ही अपनी पत्नी से मिलने लिया करता था लेकिन जब वो दूसरे शहर में बहुत दूर चला गया तो जाहिर सी बात है अब उसका हर दिन आना या हर महीने आना संभव नहीं था और इसीलिए जो सुनीता का पति का प्यार था वो अब काफी ज्यादा कम हो गया था और सुनीता अपने पति के प्यार की वजह से अब परेशान भी रहने लगी थी।

और सबसे ज्यादा जो परेशानी सुनीता को थी वो ये थी दोस्तों कि सुनीता की शादी को अब लगभग 7 आठ साल का समय गुजर चुका था और अभी तक सुनीता ने किसी भी बच्चे को जन्म नहीं दिया था।

अब दोस्तों आप कैसे भी मान सकते हो कि सुनीता को शायद अपने पति का प्यार नहीं मिला या फिर कहीं ना कहीं किसी चीज में कमी होने की वजह से जो सुनीता थी वो अभी तक मां नहीं बन पाई थी।

यहां पर दोस्तों जो सुनीता की सास होती है वह हमेशा ही सुनीता से टोका करती थी और इसके बारे में वह गलत बातें भी बोलने लगी थी।

सुनीता अपनी सास की इन बातों को सुनकर के इस कान से सुनती और दूसरे कान से निकाल दिया करती थी क्योंकि सुनीता की भी मजबूरी थी अपनी सास की इन बातों को सुनने की।

अब ऐसे ही धीरे-धीरे समय बीतने लगता है।

अब जो सुनीता के ससुर था वो कभी भी किसी बात के लिए अपनी बहू को रोकताटोकता नहीं था।

लेकिन जो सुनीता की सास थी वो हमेशा ही किसी ना किसी बात को लेकर के सुनीता से आए दिन उसका विवाद हो ही जा रहा था।

लेकिन दोस्तों मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि अभी पिछले साल की बात है कि जो सुनीता की सांस थी वो अचानक से काफी ज्यादा बीमार हो गई थी और वो बीमार भी कुछ इस तरह होती है कि उसे अच्छे से अच्छे हॉस्पिटल्स में दिखाया जाता है।

सुनीता का पति भी घर पर आया था। अपनी मां का अच्छे से इलाज करवाने के लिए अच्छे से अच्छे अस्पताल में ले जाता है।

लेकिन दोस्तों वो कहते हैं ना कि जिस इंसान की जितनी उम्र लिखी है वो इंसान तो उतनी ही दिए जाएगा और होता भी कुछ ऐसा ही है।

काफी इलाज कराने के बावजूद भी काफी कोशिशों के बावजूद भी सुनीता की जो सास होती है वो इस दुनिया को छोड़ के चली जाती है।

अब इस बात का दुख तो था जो था वो तो मां बेटे और बहू सभी को हुआ था और फिर सुनीता जो थी अब अपने ससुराल में अपने ससुर के साथ अकेली रहने के लिए मजबूर हो गई थी।

क्योंकि सुनीता के सास के गुजर जाने के बाद जो सुनीता का पति होता है वह फिर से दूसरी कंपनी में काम करने के लिए कुछ ही दिन रुकने के बाद चला जाता है दोस्तों।

अब दोस्तों यहां पर जो सुनीता होती है वो काफी ज्यादा परेशान रहने लगी थी और अपने ससुराल में वो कहीं ना कहीं उसका दिल नहीं लग रहा था।

दोस्तों सुनीता को जो पूरे महल में खुशी थी वो मिल नहीं पा रही थी और सुनीता ने अपने ससुर के बारे में भी कोई भी गलत चीजें जो थी वो नहीं सोची हुई थी।

लेकिन सुनीता को यह पता नहीं था कि आने वाले समय के अंदर जो उसका ससुर है वो उसके साथ क्या करने वाला था।

दोस्तों मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि जो सुनीता का ससुर होता है वो थोड़ी शराब का सेवन किया करता था। यानी कि वो ड्रिंक का शौकीन था।

लेकिन दोस्तों वो शराब का सेवन तभी करता था या तो जब कोई खुशी हो कोई त्यौहार हो या कोई शादी समारा हो या ऐसे वो रोज शराब नहीं पिया करता था और इस बारे में सुनीता को अच्छे से पता था कि उसका ससुर जो है वो ओकेजनली शराब पीता है।

अब दोस्तों आप सभी को पता है कि अभी होली का त्यौहार चला था। तो दोस्तों होली से लगभग तीन-चार दिनों की पहले की बात है।

सुनीता ने अपने पति के पास काफी सारे फोन किए थे ताकि होली में उसका पति घर आ जाए।

लेकिन दोस्तों जो सुनीता का पति होता है वो काफी ज्यादा अपने काम में बिजी होने के कारण वो घर पर आने के लिए मना कर देता है।

कहने लगता है कि मुझे अभी कंपनी में काफी ज्यादा काम है और मुझे किसी कारण की वजह से अभी छुट्टी मिल भी नहीं पाएगी और इसीलिए मैं इस होली पर जो है वो घर पर नहीं आ पाऊंगा।

यहां पर दोस्तों जब सुनीता अपने पति से बहुत सारी रिक्वेस्ट करती है।

लेकिन जो सुनीता का पति होता है वो दोस्तों पूरी तरीके से सुनीता से साफ मना कर देता है कि चाहे जो हो मैं अभी नहीं आ पाऊंगा।

अब दोस्तों सुनीता के हाथ में कुछ भी नहीं था। अगर पति मना भी कर देता है तो वो कर भी क्या सकती है और फिर उसके बाद दोस्तों फिर वो अपनी जिंदगी जो है वो ऐसे ही जीना शुरू कर देते हैं।

अब दोस्तों पता था कि तीन दिन के बाद होने आने वाली थी और फिर जो कहानी मैं आप सभी लोगों को बता रही हूं ये घटना जो है वो होली के दिन ही घटी है।

यानी कि दोस्तों 4 मार्च 2026 सुबह के लगभग 11:30 12 बजे की ये घटना घटती है।

दोस्तों सुबह का वक्त होता है।

मैं आप सभी लोगों को बता दूं कि जो सुनीता का ससुर होता है वो अपने दोस्तों के साथ सुबह लगभग 7:00 बजे होली खेलने के लिए घर से बाहर निकल गया था।

अब सुनीता अपने घर पर अकेली थी।

अब सुनीता किसके साथ होली खेले किसके साथ ना खेले तो वह उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

तो इसीलिए वह अपने घर से भी बाहर नहीं निकली थी।

और इसीलिए सुनीता जो है वो स्नान वगैरह खाना पीना बना करके अपने कमरे में जाकर बैठ जाती है क्योंकि उसका पति आया नहीं था तो कहीं ना कहीं उसके दिल में भी जो चाह थी वो अधूरी रह गई थी और उसके घर में भी कोई नहीं था जिसके जिसके साथ वो खेल सकती थी।

और इसीलिए जो सुनीता होती है वो नए कपड़े पहन करके अपने कमरे में बैठ जाती है और इधर जो सुनीता का ससुर होता है वो अपने दोस्तों के साथ होली तो खेलता है लेकिन होली खेलतेखेलते वो काफी ज्यादा शराब भी अपने दोस्तों के साथ बैठ के पी लेता है।

अब दोस्तों सुनीता के ससुर को जो ससुर के दोस्त होते हैं वो काफी ज्यादा मात्रा में शराब पिला देते देते हैं और इतनी ज्यादा वो ड्रिंक कर लेता है कि उसे खुद भी यह नहीं पता चल पा रहा था कि वो क्या कर रहा है और क्या नहीं कर रहा है।

अब दोस्तों लगभग 12:00 बजे के आसपास का टाइम होता है।

अब जब सुनीता का ससुर पूरी तरीके से अपने दोस्तों के साथ होली खेल लेता है अब उसका दिल भर जाता है तो फिर लगभग 12:00 बजे के आसपास जो सुनीता का ससुर होता है वो अपने घर का दरवाजा आकर के बजाना शुरू कर देता है।

इधर जो सुनीता होती है वह जैसे ही अपने ससुर का दरवाजा खटखटाने की आवाज वह सुनती है तो फिर सुनीता जो है वह तुरंत आकर के अपने घर का मुखिया दरवाजा खोलती है और दरवाजा खोलने के बाद सुनीता ये देखती है कि जो जो उसका ससुर है वो पूरी तरीके से रंगों में सना हुआ है और शराब का भी सेवन किया हुआ है और उसका दिमाग जो है वो पूरी तरीके से पूरा घूमा हुआ है और उसके व्यवहार में उसके लिए कुछ उसे ठीक नहीं महसूस हुआ।

और दोस्तों सुनीता के ससुर के शरीर से काफी ज्यादा शरीर शराब की खुशबू आ रही थी और वो जो थी बदबू कहे या जो भी है वह महसूस कर लिया था सुनीता ने।

लेकिन सुनीता कुछ नहीं कहती है और सीधे वह दरवाजा खोल करके वापस अपने कमरे में लौटने लगती है।

लेकिन दोस्तों तभी सुनीता का जो ससुर होता है वो देखता है कि जो उसकी बहू है वो बिल्कुल भी उसे रंग नहीं लगा हुआ है। उसको कहीं भी रंग नहीं लगा हुआ है।

और ये जब उसका ससुर देखता है तो सोचने लगता है कि यार मेरी जो बहू है उसे किसी ने रंग क्यों नहीं लगाया? आखिर इसने होली क्यों नहीं खेली।

और फिर दोस्तों सुनीता का ससुर यह भूल जाता है कि यह उसकी बहू है और उसके साथ उसका होली खेलने का हक तो बिल्कुल भी नहीं था और जिस तरीके से खेला वैसा तो बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि उसने बहुत ज्यादा ड्रिंक कर रखी थी और वो यह भूल चुका था कि यह उसकी कुकी बहू थी उसकी बेटे की पत्नी होती है।

दोस्तों सुनीता के ससुर के हाथों में काफी ज्यादा रंग भी लगा हुआ था और रंग और फिर उसका वो रंग लेते हुए जो सुनीता का ससुर होता है वो सुनीता के पास जाता है और फिर वो सुनीता को रंग लगाना शुरू कर देता है।

दोस्तों सुनीता का ससुर जब उसे रंग लगा रहा होता है तो वह समझ नहीं पा रही थी कि वह कैसा रिएक्ट करे।

वो अपने उस समय ससुर का कोई विरोध नहीं करती है बल्कि वो अपने आप को बचाने की थोड़ा दूर हटने की कोशिश कर रही थी क्योंकि सुनीता का ससुर जो था वो उसे बहुत ही अलग तरीके से रंग लगाने की कोशिश कर रहा था जो कि सरासर गलत था।

और दोस्तों जो सुनीता होती है वो बचते-बचते अपने कमरे में जाकर के छुप जाती है लेकिन दोस्तों सुनीता का जो ससुर होता है वो नशे की हालत में इतना दूर था कि उसे समझ नहीं पा रहा था और वो इन चीजों को भी भूल गया था कि उसके बहू के साथ उसे कैसा व्यवहार करना चाहिए और कैसा नहीं करना चाहिए।

और फिर उसके बाद जो सुनीता का ससुर होता है वह अपनी बहू के पीछे-पीछे उसके सीधे ही कमरे में चला जाता है और फिर कमरे में जाने के बाद वो सुनीता को अपने हाथ में यानी कि गले लगा लेता है और फिर उसे अपनी गोद में उठा लेता है।

सुनीता अपने ससुर को पूरी तरीके से इस चीज के लिए रोकने के लिए कोशिश कर रही थी कि आप यह क्या कर रहे हैं। ऐसा मत कीजिए मैं आपकी बहू हूं।

लेकिन सुनीता ने सोचा कि शायद यह मुझे इस तरह से रंग लगाने की कोशिश कर रहा था।

लेकिन दोस्तों सुनीता को नहीं पता था कि उसका जो ससुर है वो आज उसके साथ क्या-क्या करने वाला था।

दोस्तों वो सुनीता को उठाता है और उठाने के बाद वह सीधा उसे अपने कमरे की तरफ ले आता है और फिर कमरे में लाने के बाद दोस्तों सबसे पहले वो उसे बेड पर पटक देता है और फिर बेड पर पटकने के बाद बहुत ही गलत तरीके से सुनीता का जो ससुर है वो उसके ऊपर रंग लगाना शुरू कर देता है।

उसके संवेदनशील अंगों तक वो रंग लगा रहा था।

दोस्तों सुनीता जो थी वो अपने आप को बचाते-बचाते काफी ज्यादा परेशान और थक गई थी।

और फिर दोस्तों अब सुनीता में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो अपने ससुर से बच करके उससे दूर भाग सके।

और फिर उसके बाद दोस्तों नशे की हालत में जो सुनीता का ससुर होता है वह दोस्तों अपनी बहू के साथ वह सब करता है जो कि उसे नहीं करना चाहिए था।

वो काम जो एक पति-पत्नी के बीच में होता है और ससुर ने उसके साथ यह सब कुछ किया और बाद में सुनीता ने इस चीज का विरोध भी नहीं किया।

शुरू शुरू में तो वो इस चीज का थोड़ा बहुत विरोध भी कर रही थी।

लेकिन जब थोड़ा सा समय वो एक दूसरे के सामने समय साथ बिताते हैं तो फिर बाद में अब सुनीता को भी ये चीजें अच्छी लगने लग जाती है और फिर वो अपने ससुर को खुली छूट दे देती है और फिर उसका ससुर जो है वो अपने मन से जिस भी तरह से चाह रहा था वैसे उसके साथ समय बिता रहा था और फिर दोनों ही मिलकर इस पल को एंजॉय करने लगते हैं।

लेकिन सुनीता को यह नहीं पता था कि आज जो उसका ससुर है वो उसे कुछ ऐसी हालत कर देगा कि जो उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

और फिर दोस्तों होता भी कुछ ऐसा ही है।

सुनीता का ससुर जो है वह लगातार सुनीता के साथ लगभग 2 घंटे तक ऐसा कार्यक्रम करता है दोस्तों कि जिस कार्यक्रम की वजह से सुनीता की जो हालत थी वो काफी ज्यादा खराब हो गई थी।

खराब ही नहीं दोस्तों बल्कि जो सुनीता है वो बेहोश तक हो जाती है।

तो दोस्तों इस तरीके से इस होली के त्यौहार पर ससुर और बहू जो थे वो दोनों की मुलाकात हुई थी।

तो दोस्तों यह रही कहानी।

दोस्तों हमारी कहानी सुनाने का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है ना ही किसी के दिल को आहात करना है।

बस केवल आपको सतर्क करना है आपको जागरूक करना है।

यह घटना राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुई थी जहां सुनीता और उसके ससुर ससुराल में अकेले रहते थे।

सुनीता का ससुर हमेशा शराब का शौकीन रहता था लेकिन होली जैसे त्योहार पर उसने शराब पीकर नशे में धुत हो गया।

सुनीता अकेली थी क्योंकि पति काम में व्यस्त था और सास पहले ही गुजर चुकी थी।

होली खेलने के बहाने वह नशे में आ गया और रंग लगाते हुए बहू को उठाकर कमरे में ले गया।

सुनीता ने विरोध किया लेकिन नशे की वजह से वह समझ नहीं पाया।

कमरे में पहुंचकर उसने सुनीता को पटक दिया और अत्यधिक हिंसा की।

सुनीता बचने की कोशिश कर रही थी लेकिन थक चुकी थी।

नशे में ससुर ने परिवार की इज्जत से खेलकर सुनीता को गलत काम करवाया।

शुरू में विरोध करने पर बाद में नशे में वह रुक गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सुनीता की शारीरिक और मानसिक हालत बिगड़ गई।

वह बेहोश हो गई और दो घंटे तक ऐसे ही रहा।

ससुर का नशा कम होने पर उसने सुनीता को बचा लिया लेकिन देर हो चुकी थी।

सुनीता ने गंभीर चोटें प्राप्त कीं।

उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

ससुर ने पछतावा किया लेकिन समय पहले था।

दोस्तों यह घटना बताने का उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नहीं है बल्कि आपको सतर्क रहने की सलाह देना है।

परिवार में कोई भी समस्या हो तो तुरंत बात करें।

किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाएं।

होली के ऐसे त्योहार पर शराब से बचें।

परिवार की इज्जत और सुरक्षा पहले।

सुनीता की कहानी हमें याद दिलाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

अब इस घटना को समझने के लिए हमें सुनीता के पूरे जीवन का एक-एक हिस्सा जानना चाहिए।

सुनीता का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुआ था।

उसके माता-पिता बहुत गरीब थे लेकिन वे खुद की जमीन पर खेती करते थे।

सुनीता बचपन से ही माता-पिता के साथ खुश थी।

वह खेतों में खेलती थी और परिवार के साथ खुश रहती थी।

स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कॉलेज में दाखिला ले ली।

कॉलेज में वह पढ़ाई के साथ-साथ संजय से दोस्ती करने लगी।

संजय उसका पसंदीदा लड़का बन गया।

संजय अमीर परिवार से था और सुनीता को बहुत सारे गिफ्ट देता था।

उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

एक-डेढ़ साल बाद संजय ने सुनीता को फोन दिया।

सुनीता के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने डांटा लेकिन सुनीता ने सच्चाई बता दी।

माता-पिता ने समझाने की कोशिश की लेकिन सुनीता नहीं मानी।

फिर उन्होंने सुनीता के पिता से सगाई करने का फैसला किया।

संजय माता-पिता के घर आया और सगाई हो गई।

शादी हो गई और सुनीता अपने ससुराल चली गई।

ससुराल में सुनीता खुश थी लेकिन पति के काम के कारण समय कम मिलता था।

शादी के 8 साल बाद भी सुनीता मां नहीं बनी थी।

सास हमेशा टोका करती थी।

पिछले साल सास की तबीयत बिगड़ गई और वह चली गई।

सुनीता अब अकेली रह गई थी।

पति फिर दूसरे शहर चला गया।

सुनीता को अकेलापन महसूस हो रहा था।

होली आने वाली थी।

सुनीता ने पति से फोन करके होली पर आने को मांगा लेकिन पति मना कर दिया।

सुनीता अकेली होली खेलने के लिए तैयार थी।

सुबह 7 बजे ससुर होली खेलने के लिए बाहर गया और शराब पीने लगा।

सुबह 11 बजे वह वापस आया और दरवाजा खटखटाया।

सुनीता ने दरवाजा खोला।

ससुर रंगों में सना हुआ नशे में था।

सुनीता ने रंग लगाने से मना किया लेकिन ससुर गुस्सा हो गया।

वह सुनीता को उठाकर कमरे में ले गया।

सुनीता ने विरोध किया लेकिन नशे में वह समझ नहीं पाया।

कमरे में पहुंचकर ससुर ने सुनीता को पटक दिया और उस पर रंग लगा दिया।

सुनीता बचने की कोशिश कर रही थी लेकिन थक चुकी थी।

नशे में ससुर ने सुनीता के साथ गलत काम किया।

शुरू में विरोध करने पर बाद में सुनीता को अच्छी लगने लगी।

ससुर 2 घंटे तक ऐसा रहा और सुनीता बेहोश हो गई।

ससुर का नशा कम होने पर वह सुनीता को बचा लिया।

सुनीता को गंभीर चोटें आईं।

ससुर ने पछतावा किया लेकिन देर हो चुकी थी।

दोस्तों यह घटना हमें सिखाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

परिवार में कोई भी समस्या हो तो तुरंत बात करें।

किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाएं।

होली के ऐसे त्योहार पर शराब से बचें।

परिवार की इज्जत और सुरक्षा पहले।

सुनीता की कहानी हमें याद दिलाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

अब इस घटना को समझने के लिए हमें सुनीता के पूरे जीवन का एक-एक हिस्सा जानना चाहिए।

सुनीता का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुआ था।

उसके माता-पिता बहुत गरीब थे लेकिन वे खुद की जमीन पर खेती करते थे।

सुनीता बचपन से ही माता-पिता के साथ खुश थी।

वह खेतों में खेलती थी और परिवार के साथ खुश रहती थी।

स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कॉलेज में दाखिला ले ली।

कॉलेज में वह पढ़ाई के साथ-साथ संजय से दोस्ती करने लगी।

संजय उसका पसंदीदा लड़का बन गया।

संजय अमीर परिवार से था और सुनीता को बहुत सारे गिफ्ट देता था।

उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

एक-डेढ़ साल बाद संजय ने सुनीता को फोन दिया।

सुनीता के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने डांटा लेकिन सुनीता ने सच्चाई बता दी।

माता-पिता ने समझाने की कोशिश की लेकिन सुनीता नहीं मानी।

फिर उन्होंने सुनीता के पिता से सगाई करने का फैसला किया।

संजय माता-पिता के घर आया और सगाई हो गई।

शादी हो गई और सुनीता अपने ससुराल चली गई।

ससुराल में सुनीता खुश थी लेकिन पति के काम के कारण समय कम मिलता था।

शादी के 8 साल बाद भी सुनीता मां नहीं बनी थी।

सास हमेशा टोका करती थी।

पिछले साल सास की तबीयत बिगड़ गई और वह चली गई।

सुनीता अब अकेली रह गई थी।

पति फिर दूसरे शहर चला गया।

सुनीता को अकेलापन महसूस हो रहा था।

होली आने वाली थी।

सुनीता ने पति से फोन करके होली पर आने को मांगा लेकिन पति मना कर दिया।

सुनीता अकेली होली खेलने के लिए तैयार थी।

सुबह 7 बजे ससुर होली खेलने के लिए बाहर गया और शराब पीने लगा।

सुबह 11 बजे वह वापस आया और दरवाजा खटखटाया।

सुनीता ने दरवाजा खोला।

ससुर रंगों में सना हुआ नशे में था।

सुनीता ने रंग लगाने से मना किया लेकिन ससुर गुस्सा हो गया।

वह सुनीता को उठाकर कमरे में ले गया।

सुनीता ने विरोध किया लेकिन नशे में वह समझ नहीं पाया।

कमरे में पहुंचकर ससुर ने सुनीता को पटक दिया और उस पर रंग लगा दिया।

सुनीता बचने की कोशिश कर रही थी लेकिन थक चुकी थी।

नशे में ससुर ने सुनीता के साथ गलत काम किया।

शुरू में विरोध करने पर बाद में सुनीता को अच्छी लगने लगी।

ससुर 2 घंटे तक ऐसा रहा और सुनीता बेहोश हो गई।

ससुर का नशा कम होने पर वह सुनीता को बचा लिया।

सुनीता को गंभीर चोटें आईं।

ससुर ने पछतावा किया लेकिन देर हो चुकी थी।

दोस्तों यह घटना हमें सिखाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

परिवार में कोई भी समस्या हो तो तुरंत बात करें।

किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाएं।

होली के ऐसे त्योहार पर शराब से बचें।

परिवार की इज्जत और सुरक्षा पहले।

सुनीता की कहानी हमें याद दिलाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

अब इस घटना को समझने के लिए हमें सुनीता के पूरे जीवन का एक-एक हिस्सा जानना चाहिए।

सुनीता का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुआ था।

उसके माता-पिता बहुत गरीब थे लेकिन वे खुद की जमीन पर खेती करते थे।

सुनीता बचपन से ही माता-पिता के साथ खुश थी।

वह खेतों में खेलती थी और परिवार के साथ खुश रहती थी।

स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कॉलेज में दाखिला ले ली।

कॉलेज में वह पढ़ाई के साथ-साथ संजय से दोस्ती करने लगी।

संजय उसका पसंदीदा लड़का बन गया।

संजय अमीर परिवार से था और सुनीता को बहुत सारे गिफ्ट देता था।

उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

एक-डेढ़ साल बाद संजय ने सुनीता को फोन दिया।

सुनीता के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने डांटा लेकिन सुनीता ने सच्चाई बता दी।

माता-पिता ने समझाने की कोशिश की लेकिन सुनीता नहीं मानी।

फिर उन्होंने सुनीता के पिता से सगाई करने का फैसला किया।

संजय माता-पिता के घर आया और सगाई हो गई।

शादी हो गई और सुनीता अपने ससुराल चली गई।

ससुराल में सुनीता खुश थी लेकिन पति के काम के कारण समय कम मिलता था।

शादी के 8 साल बाद भी सुनीता मां नहीं बनी थी।

सास हमेशा टोका करती थी।

पिछले साल सास की तबीयत बिगड़ गई और वह चली गई।

सुनीता अब अकेली रह गई थी।

पति फिर दूसरे शहर चला गया।

सुनीता को अकेलापन महसूस हो रहा था।

होली आने वाली थी।

सुनीता ने पति से फोन करके होली पर आने को मांगा लेकिन पति मना कर दिया।

सुनीता अकेली होली खेलने के लिए तैयार थी।

सुबह 7 बजे ससुर होली खेलने के लिए बाहर गया और शराब पीने लगा।

सुबह 11 बजे वह वापस आया और दरवाजा खटखटाया।

सुनीता ने दरवाजा खोला।

ससुर रंगों में सना हुआ नशे में था।

सुनीता ने रंग लगाने से मना किया लेकिन ससुर गुस्सा हो गया।

वह सुनीता को उठाकर कमरे में ले गया।

सुनीता ने विरोध किया लेकिन नशे में वह समझ नहीं पाया।

कमरे में पहुंचकर ससुर ने सुनीता को पटक दिया और उस पर रंग लगा दिया।

सुनीता बचने की कोशिश कर रही थी लेकिन थक चुकी थी।

नशे में ससुर ने सुनीता के साथ गलत काम किया।

शुरू में विरोध करने पर बाद में सुनीता को अच्छी लगने लगी।

ससुर 2 घंटे तक ऐसा रहा और सुनीता बेहोश हो गई।

ससुर का नशा कम होने पर वह सुनीता को बचा लिया।

सुनीता को गंभीर चोटें आईं।

ससुर ने पछतावा किया लेकिन देर हो चुकी थी।

दोस्तों यह घटना हमें सिखाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

परिवार में कोई भी समस्या हो तो तुरंत बात करें।

किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाएं।

होली के ऐसे त्योहार पर शराब से बचें।

परिवार की इज्जत और सुरक्षा पहले।

सुनीता की कहानी हमें याद दिलाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

अब इस घटना को समझने के लिए हमें सुनीता के पूरे जीवन का एक-एक हिस्सा जानना चाहिए।

सुनीता का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुआ था।

उसके माता-पिता बहुत गरीब थे लेकिन वे खुद की जमीन पर खेती करते थे।

सुनीता बचपन से ही माता-पिता के साथ खुश थी।

वह खेतों में खेलती थी और परिवार के साथ खुश रहती थी।

स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कॉलेज में दाखिला ले ली।

कॉलेज में वह पढ़ाई के साथ-साथ संजय से दोस्ती करने लगी।

संजय उसका पसंदीदा लड़का बन गया।

संजय अमीर परिवार से था और सुनीता को बहुत सारे गिफ्ट देता था।

उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

एक-डेढ़ साल बाद संजय ने सुनीता को फोन दिया।

सुनीता के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने डांटा लेकिन सुनीता ने सच्चाई बता दी।

माता-पिता ने समझाने की कोशिश की लेकिन सुनीता नहीं मानी।

फिर उन्होंने सुनीता के पिता से सगाई करने का फैसला किया।

संजय माता-पिता के घर आया और सगाई हो गई।

शादी हो गई और सुनीता अपने ससुराल चली गई।

ससुराल में सुनीता खुश थी लेकिन पति के काम के कारण समय कम मिलता था।

शादी के 8 साल बाद भी सुनीता मां नहीं बनी थी।

सास हमेशा टोका करती थी।

पिछले साल सास की तबीयत बिगड़ गई और वह चली गई।

सुनीता अब अकेली रह गई थी।

पति फिर दूसरे शहर चला गया।

सुनीता को अकेलापन महसूस हो रहा था।

होली आने वाली थी।

सुनीता ने पति से फोन करके होली पर आने को मांगा लेकिन पति मना कर दिया।

सुनीता अकेली होली खेलने के लिए तैयार थी।

सुबह 7 बजे ससुर होली खेलने के लिए बाहर गया और शराब पीने लगा।

सुबह 11 बजे वह वापस आया और दरवाजा खटखटाया।

सुनीता ने दरवाजा खोला।

ससुर रंगों में सना हुआ नशे में था।

सुनीता ने रंग लगाने से मना किया लेकिन ससुर गुस्सा हो गया।

वह सुनीता को उठाकर कमरे में ले गया।

सुनीता ने विरोध किया लेकिन नशे में वह समझ नहीं पाया।

कमरे में पहुंचकर ससुर ने सुनीता को पटक दिया और उस पर रंग लगा दिया।

सुनीता बचने की कोशिश कर रही थी लेकिन थक चुकी थी।

नशे में ससुर ने सुनीता के साथ गलत काम किया।

शुरू में विरोध करने पर बाद में सुनीता को अच्छी लगने लगी।

ससुर 2 घंटे तक ऐसा रहा और सुनीता बेहोश हो गई।

ससुर का नशा कम होने पर वह सुनीता को बचा लिया।

सुनीता को गंभीर चोटें आईं।

ससुर ने पछतावा किया लेकिन देर हो चुकी थी।

दोस्तों यह घटना हमें सिखाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

परिवार में कोई भी समस्या हो तो तुरंत बात करें।

किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाएं।

होली के ऐसे त्योहार पर शराब से बचें।

परिवार की इज्जत और सुरक्षा पहले।

सुनीता की कहानी हमें याद दिलाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

अब इस घटना को समझने के लिए हमें सुनीता के पूरे जीवन का एक-एक हिस्सा जानना चाहिए।

सुनीता का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुआ था।

उसके माता-पिता बहुत गरीब थे लेकिन वे खुद की जमीन पर खेती करते थे।

सुनीता बचपन से ही माता-पिता के साथ खुश थी।

वह खेतों में खेलती थी और परिवार के साथ खुश रहती थी।

स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कॉलेज में दाखिला ले ली।

कॉलेज में वह पढ़ाई के साथ-साथ संजय से दोस्ती करने लगी।

संजय उसका पसंदीदा लड़का बन गया।

संजय अमीर परिवार से था और सुनीता को बहुत सारे गिफ्ट देता था।

उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

एक-डेढ़ साल बाद संजय ने सुनीता को फोन दिया।

सुनीता के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने डांटा लेकिन सुनीता ने सच्चाई बता दी।

माता-पिता ने समझाने की कोशिश की लेकिन सुनीता नहीं मानी।

फिर उन्होंने सुनीता के पिता से सगाई करने का फैसला किया।

संजय माता-पिता के घर आया और सगाई हो गई।

शादी हो गई और सुनीता अपने ससुराल चली गई।

ससुराल में सुनीता खुश थी लेकिन पति के काम के कारण समय कम मिलता था।

शादी के 8 साल बाद भी सुनीता मां नहीं बनी थी।

सास हमेशा टोका करती थी।

पिछले साल सास की तबीयत बिगड़ गई और वह चली गई।

सुनीता अब अकेली रह गई थी।

पति फिर दूसरे शहर चला गया।

सुनीता को अकेलापन महसूस हो रहा था।

होली आने वाली थी।

सुनीता ने पति से फोन करके होली पर आने को मांगा लेकिन पति मना कर दिया।

सुनीता अकेली होली खेलने के लिए तैयार थी।

सुबह 7 बजे ससुर होली खेलने के लिए बाहर गया और शराब पीने लगा।

सुबह 11 बजे वह वापस आया और दरवाजा खटखटाया।

सुनीता ने दरवाजा खोला।

ससुर रंगों में सना हुआ नशे में था।

सुनीता ने रंग लगाने से मना किया लेकिन ससुर गुस्सा हो गया।

वह सुनीता को उठाकर कमरे में ले गया।

सुनीता ने विरोध किया लेकिन नशे में वह समझ नहीं पाया।

कमरे में पहुंचकर ससुर ने सुनीता को पटक दिया और उस पर रंग लगा दिया।

सुनीता बचने की कोशिश कर रही थी लेकिन थक चुकी थी।

नशे में ससुर ने सुनीता के साथ गलत काम किया।

शुरू में विरोध करने पर बाद में सुनीता को अच्छी लगने लगी।

ससुर 2 घंटे तक ऐसा रहा और सुनीता बेहोश हो गई।

ससुर का नशा कम होने पर वह सुनीता को बचा लिया।

सुनीता को गंभीर चोटें आईं।

ससुर ने पछतावा किया लेकिन देर हो चुकी थी।

दोस्तों यह घटना हमें सिखाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

परिवार में कोई भी समस्या हो तो तुरंत बात करें।

किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाएं।

होली के ऐसे त्योहार पर शराब से बचें।

परिवार की इज्जत और सुरक्षा पहले।

सुनीता की कहानी हमें याद दिलाती है कि अकेलापन और नशे की वजह से कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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