(FINAL: PART 2)Bhaskar Shetty case 300 करोड़ के मालिक की पत्नी को बेटे की उम्र के ज्योतिषी से इश्क में एक कत्ल!
भास्कर शेट्टी हत्याकांड (Part 2) – कानून का शिकंजा और अदालत का फैसला
भाग 1: पुलिस तफ्तीश और फॉरेंसिक सबूतों का जाल
भास्कर शेट्टी की ८१ वर्षीय मां गुलाबी शेट्टी की ज़िद और हिम्मत रंग लाई। पुलिस ने जब राजेश्वरी और उसके प्रेमी निरंजन भट्ट को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो साज़िश की एक-एक परत खुलती चली गई। आरोपी यह सोचते थे कि शव को पूरी तरह जलाकर राख को पल्ली नदी में बहा देने से सारा सबूत मिट जाएगा और कानून के हाथ उन तक कभी नहीं पहुँच पाएंगे।
लेकिन फॉरेंसिक साइंस की आधुनिक तकनीकों ने आरोपियों के इस भ्रम को तोड़ दिया।
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सीआईडी (CID) की जांच: सीआईडी की टीम ने जब नंदालिके में स्थित निरंजन भट्ट के घर और उसके हवन कुंड की बारीकी से जांच की, तो टाइल्स बदले जाने के बावजूद फॉरेंसिक विशेषज्ञों को वहां से खून के सूक्ष्म नमूने (DNA samples) मिल गए।
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पल्ली नदी से साक्ष्य: गोताखोरों की मदद से पल्ली नदी से जलने के बाद बची हुई मानव हड्डियों के कुछ टुकड़े और पीड़ित की कलाई की घड़ी बरामद की गई।
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डीएनए मिलान (DNA Matching): नदी से मिली हड्डियों और हवन कुंड से मिले नमूनों का डीएनए भास्कर शेट्टी की मां गुलाबी शेट्टी के डीएनए से मैच कर गया। इसने अदालत में यह साबित कर दिया कि वह राख और अवशेष भास्कर शेट्टी के ही थे।
भाग 2: अदालत की सुनवाई और गवाहों के बयान
उदुपी के सत्र न्यायालय (District and Sessions Court) में इस चर्चित हत्याकांड का मुकदमा चला। अदालत के सामने सरकारी वकील ने इस पूरे मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभ से दुर्लभतम) की श्रेणी में रखते हुए दलील दी:
“माननीय जज साहब, यह केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि एक पवित्र रिश्ते (पति-पत्नी और पिता-पुत्र) का कत्ल है। एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर और अपने ही जन्मदाता बेटे को ढाल बनाकर उस इंसान की निर्मम हत्या कर दी, जिसने अपनी पूरी जिंदगी उनके ऐशो-आराम और बेहतर भविष्य के लिए दुबई में मजदूरी से शुरुआत करके ३०० करोड़ की संपत्ति खड़ी की थी। ऐसे अपराधियों को समाज में रहने का कोई हक नहीं है।”
अदालत में ८१ साल की मां गुलाबी शेट्टी ने रुंधे गले से गवाही दी कि कैसे उसके बेटे ने अपनी आखिरी इच्छा में सारी संपत्ति मां के नाम और अनाथालय को दान करने का फैसला किया था, और इसी लालच व बेइंतहा हवस में उसकी हत्या कर दी गई।
भाग 3: कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
मामले की पूरी सुनवाई, फॉरेंसिक सबूतों और गवाहों के बयानों को देखने के बाद ८ जून २०२१ को उदुपी की अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया:
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मुख्य आरोपियों को सजा: अदालत ने मृतक की पत्नी राजेश्वरी शेट्टी, बेटे नवनीत शेट्टी और ज्योतिषी प्रेमी निरंजन भट्ट को भास्कर शेट्टी की हत्या और सबूत मिटाने की साजिश का दोषी पाया। तीनों को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) और भारी जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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सबूत मिटाने के सह-आरोपी: निरंजन भट्ट के पिता श्रीनिवास भट्ट और ड्राइवर राघवेंद्र को सबूत छुपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, सबूतों के अभाव में ड्राइवर को बरी कर दिया गया, जबकि निरंजन के पिता की मुकदमा चलने के दौरान बीमारी के कारण मृत्यु हो गई।
भाग 4: संपत्ति का हक और मां का अधूरा सपना
भास्कर शेट्टी ने अपनी मृत्यु से ठीक पहले जो वसीयत बनाई थी, कानूनन उसे लागू किया गया।
३०० करोड़ की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उस वृद्ध मां गुलाबी शेट्टी के पास गया और बाकी संपत्ति भास्कर शेट्टी की अंतिम इच्छा के अनुसार अनाथालयों और दान-पुण्य के कार्यों में दे दी गई। पत्नी राजेश्वरी और बेटे नवनीत को, जिन्होंने धन के लालच में यह खौफनाक कदम उठाया था, संपत्ति का एक रुपया भी नसीब नहीं हुआ। उनके हिस्से में आई तो सिर्फ जेल की काली सलाखें, तन्हाई और उम्रकैद की सजा।
निष्कर्ष और सीख:
यह वास्तविक घटना समाज के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी और सीख है:
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अंधा लालच और अनैतिक संबंध विनाश की ओर ले जाते हैं: धन-दौलत और वासना का अंधापन इंसान से उसके सबसे करीबी रिश्तों का कत्ल करवा देता है, लेकिन अंत में इसका नतीजा केवल तबाही होता है।
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अपराध कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून से नहीं छुप सकता: अपराधियों ने सबूत मिटाने के लिए शव के टुकड़े किए, हवन कुंड में जलाया और राख नदी में बहा दी, लेकिन सच फिर भी सामने आ ही गया।