बेटे ने भरी पंचायत में बाप को कुल्हाड़ी से का*ट दिया/ S.P साहब के होश उड़ गए/
बेटे ने भरी पंचायत में बाप को कुल्हाड़ी से का*ट दिया/ S.P साहब के होश उड़ गए/
दोस्तों, आज की कहानी: भतीजे और मौसी का गुप्त रिश्ता – एक बुजुर्ग दादी की नजर में क्या हुआ
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने वाले हैं जो दिल को छू लेने वाली है। यह कहानी है उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपौली नाम के एक छोटे से गांव की। इसी गांव में रहते थे शिवकुमार। शिवकुमार रोज दिहाड़ी मजदूरी का काम करते थे। गांव के लोग कभी उन्हें पूरी रकम नहीं देते थे, कभी कम। इस गरीबी ने उनके घर में आग लगाकर रख दी थी। उनके पास सिर्फ एक ही कमरा था, जिसमें पति-पत्नी शिवकुमार और उनकी सुंदर पत्नी सविता देवी रहते थे। सविता देखने में बहुत खूबसूरत और जवान थी। दोनों की एकमात्र बेटी थी बुलबुला, जो अपने मामा-मौसी के घर जा रही थी।
कुछ दिनों बाद 20 जून 2026 को सुबह हो चुका था। घर में राशन-पीनी खत्म हो चुकी थी। सविता ने पति से कहा, “देखो शिवकुमार, घर का कुछ नहीं बचा। हम भूखे मर जाएंगे।” शिवकुमार ने कहा, “कोई बात नहीं, मैं काम ढूंढ लूंगा।” उन्होंने अपने दोस्त रतन सिंह के पास जाकर बताया कि गरीबी से त्रस्त हैं। रतन ने कहा, “मेरा होटल है, 10 किलोमीटर दूर। रात में नौकरी करो, मैं 15 हजार रुपये दूंगा।” शिवकुमार ने मंजूर कर लिया। लेकिन रतन ने साफ कहा, “होटल में उल्टा काम है। विधवाएं और नाखुश पत्नियां आती हैं। तुम उन्हें रात में खुश करना पड़ेगा।” शिवकुमार ने बिना सोचे-समझे हां कर दी।
उसी शाम 8 बजे रतन सिंह अपनी मोटरसाइकिल लेकर शिवकुमार के घर पहुंचा। सविता ने दरवाजा खोला। रतन सिंह की नजर सविता पर पड़ी और उसकी आंखों में लालच की चमक दिखाई दी। वह सोचने लगा कि अपनी पत्नी को हासिल करना पड़ेगा। शिवकुमार और रतन सिंह मोटरसाइकिल पर बैठकर होटल चले गए। रतन सिंह ने शिवकुमार को कमरा नंबर 4 में भेज दिया। रात 10:30 बजे रचना देवी अपनी बड़ी गाड़ी लेकर आई। रतन सिंह ने उसे बताया कि कमरा 4 है। रचना देवी ने दरवाजा खोला और शिवकुमार को देखकर मुस्कुराई। दोनों के बीच गलत रिश्ते शुरू हो गए। रचना ने पूरी रात गुजारी और खुश होकर पैसे दिए। रतन सिंह को भी पैसे मिल गए।

इस तरह शिवकुमार का काम शुरू हो गया। वह हर रात होटल में नई-नई औरतों के साथ समय गुजारता। पैसे आने लगे तो वह शराब पीने लगा। घर में झगड़े होने लगे। बेटी बुलबुला को हर बार समझाना पड़ता कि पापा शराब पीकर जानवर बन जाते हैं। महीने बीत गए। 27 जुलाई 2026 को रतन सिंह फिर आया। घर पहुंचते ही उसकी नजर सविता पर पड़ी। दोनों ने शराब पी। नशे में रतन सिंह ने कहा, “तुम्हारी पत्नी भी मेरे होटल में काम कर सकती है।” शिवकुमार का जामीर मर गया। उसने कहा, “मैं पैसे के लिए कुछ भी कर सकता हूं।” रतन सिंह ने कहा, “ठीक है, आज रात 9 बजे तुम पत्नी को लेकर आना।”
सविता को जब यह बात पता चली तो वह डर गई। लेकिन शिवकुमार ने धमकी दी, “वरना तलाक दे दूंगा।” सविता मान गई। उसी रात भूषण नाम का धनी व्यक्ति आया। रतन सिंह ने सविता को कमरे में भेजा। सविता ने रोते हुए कहा कि वह अपने पति के साथ आई है। लेकिन भूषण ने उसे बांधा, गाला दिया और बिना राजामंदी के गलत रिश्ते शुरू कर दिए। सविता रोती रही। भूषण ने पूरी रात गुजारी और पैसे लिए।
सविता के पति शिवकुमार ने उसे धमकी दी। रचना देवी भी आई। दोनों ने कमरे में गलत काम शुरू किया। रतन सिंह ने सविता को बेच दिया। पूरे रात सविता कई ग्राहकों के साथ गुजारी। सुबह घर लौटी तो उदास थी। बुलबुला का जन्मदिन आया था। 18 अगस्त 2026 को बुलबुला ने कहा, “मां आज मेरे जन्मदिन का केक लाऊं।” सविता ने हां कर दी। बुलबुला शहर गया, केक खरीदा और कपड़े। शाम को पिता-माता ने जन्मदिन मनाया। रतन सिंह फिर आया। नशे में उसने सविता को 10 हजार रुपये दिए और कहा कि वह सविता के साथ समय गुजारना चाहता है।
रतन सिंह ने सविता को पकड़ लिया। बिना राजामंदी के गलत काम शुरू। पूरी रात गुजरी। सुबह शिवकुमार सविता को घर लाया। सविता ने कहा, “अब मुझे तलाक दे दो।” शिवकुमार ने गुस्से में पिटाई शुरू कर दी। बुलबुला ने रोका। दोनों ने एकांत कमरे में बात की। सविता ने बुलबुला को सब बताया कि हर रात मां को ग्राहकों के साथ गंदा काम करवाया जाता है। बुलबुला गुस्से में पिता के पास गया। पिता ने कहा, “पैसे के लिए मैं सब कर सकता हूं।” बुलबुला ने कोहला उठाई और पिता की कमर में कुल्हाड़ी मार दी। पिता पंचायत में भागा। बुलबुला भी कुल्हाड़ी लेकर पंचायत पहुंचा। उसने पिता की गर्दन धड़ से अलग कर दी।
पंचायत वाले हैरान रह गए। पुलिस आई। सविता ने महेश को गिरफ्तार करवाया। महेश ने पुलिस के सामने सारी कहानी बता दी। दोस्तों, इस कहानी से हमें सिखना चाहिए कि गरीबी और लालच कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। पापा की हत्या से बेटी की जिंदगी बर्बाद हो गई। सविता को तलाक मिला और वह अकेली रह गई। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि परिवार में विश्वास रखो, लालच के चक्कर में मत पड़ो। अगर कोई ऐसी स्थिति आए तो परिवार के सदस्यों से बात करो।
दोस्तों, क्या आपको लगता है कि बुलबुला ने गलती की थी या नहीं? कमेंट में जरूर बताएं। अगर कहानी पसंद आई तो लाइक और शेयर जरूर करें। मिलते हैं अगली कहानी में किसी और दिलचस्प घटना के साथ। तब तक के लिए जय हिंद, वंदे मातरम।