दामाद ऐसा करेगा सोचा नहीं था।
दामाद ऐसा करेगा सोचा नहीं था
भाग 1: प्रस्तावना और पारिवारिक पृष्ठभूमि
यह घटना एक छोटे से गांव से शुरू होती है, जहां सरिता नाम की लगभग 40 से 42 वर्ष की एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक महिला रहती थी। सरिता के पति का काफी समय पहले ही निधन हो चुका था। पति के असमय चले जाने के बाद सरिता घर पर बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। लंबे समय तक जीवनसाथी का साथ न मिलने और अकेलेपन के कारण सरिता के स्वभाव और सोच में काफी बदलाव आ चुका था। वह अक्सर अपने सूनेपन को दूर करने के लिए मन ही मन अजीब-अजीब बातें सोचा करती थी और उसका मिजाज भी काफी चंचल व रंगीन होने लगा था।
सरिता की एक नौजवान और बेहद खूबसूरत बेटी थी, जिसका नाम लवली था। सरिता ने करीब 4 वर्ष पहले लवली की शादी पास ही के एक गांव में रहने वाले प्रमोद नाम के युवक से करवाई थी। प्रमोद पेशे से ऑटो चलाता था। वह रोजाना सुबह उठकर खाना खाने के बाद ऑटो लेकर शहर जाता था और दिनभर मेहनत करने के बाद शाम को घर लौट आता था।
भाग 2: वैवाहिक जीवन का तनाव और शिकायत
दिखने में प्रमोद काफी हट्टा-कट्टा, तगड़ा और नौजवान था, जबकि उसकी पत्नी लवली स्वभाव से शर्मीली और शरीर से काफी दुबली-पतली थी। शादी के कुछ समय बीतने के बाद ही दोनों के दांपत्य जीवन में समस्याएं आने लगीं। प्रमोद की श/ा/री/रि/क जरूरतें और अपेक्षाएं काफी ज्यादा थीं, जिन्हें लवली का दुबला शरीर सहन नहीं कर पाता था।
रा/त्रि के समय जब भी प्रमोद उसके करीब आने की कोशिश करता, लवली उससे दूर भागने लगती थी। प्रमोद की शारीरिक क्षमता के सामने लवली खुद को असहाय महसूस करती थी। इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर बहस, विवाद और झगड़े होने लगे थे।
तंग आकर एक दिन लवली ने अपनी मां सरिता को फोन मिलाया। उसने रोते-रोते अपनी मां को प्रमोद और अपने बीच चल रही सारी समस्याओं के बारे में विस्तार से बता दिया। लवली ने कहा कि प्रमोद रा/त्रि के वक्त उसके साथ काफी सख्ती बरतता है और अपनी मनमानी करता है, जिससे वह बहुत परेशान हो चुकी है और अब उसके साथ एक छत के नीचे नहीं रहना चाहती।
भाग 3: सास और दामाद का संवाद
सरिता ने जब अपनी बेटी के मुंह से दामाद प्रमोद की श/ा/री/रि/क ताकत और उसकी आदतों के बारे में सुना, तो उसके मन में एक अजीब सी हलचल शुरू हो गई। अपनी ही बेटी को समझाने के बजाय सरिता के मन में अपने दामाद के प्रति एक अलग ही क/ा/म/ना और उत्सुकता जाग उठी।
सरिता ने लवली से कहा— “बेटी, अभी दामाद जी नौजवान हैं, उनमें काफी जवानी और ताकत है, इसलिए वे ऐसा करते हैं। धीरे-धीरे समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन लवली अपनी जिद पर अड़ी रही कि वह अब सहन नहीं कर सकती। इसके बाद सरिता ने कहा कि वह खुद दामाद से बात करके उसे समझाएगी।
सरिता ने खुद दामाद प्रमोद के पास फोन मिलाया। बात-बात में सरिता ने प्रमोद से कहा कि लवली उसकी शिकायत कर रही थी। इस पर प्रमोद ने अपनी सास से कहा— “सासू मां, आपकी बेटी मेरी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाती और रा/त्रि को मुझसे दूर भागती है, जिससे मैं बहुत परेशान रहता हूं।”
यह सुनते ही सरिता ने बिना किसी झिझक के कहा— “दामाद जी, मैं भी घर में अकेली रहती हूं और मेरा भी मन नहीं लगता। अगर आपको कोई परेशानी है तो आप कभी मुझसे आकर मिलिए, मैं आपकी जरूरतों का ध्यान रख सकती हूं।” सरिता की ऐसी अ/म/र्या/दि/त और निर्लज्ज बातें सुनकर प्रमोद हैरान रह गया। प्रमोद ने लोक-लाज की दुहाई देते हुए कहा कि आप मेरी सास हैं, ऐसी बातें करना शोभा नहीं देता और उसने फोन काट दिया।
भाग 4: ससुराल आगमन और चालाकी
कुछ दिनों बाद, प्रमोद और लवली के बीच फिर से भारी झगड़ा हुआ। लवली गुस्से में आकर बिना अपने पति या सास-ससुर को बताए अपने मायके (मां सरिता के घर) चली आई। सरिता अपनी बेटी को घर आया देख मन ही मन बहुत खुश हुई, क्योंकि उसके दिमाग में दामाद को लेकर उल्टे-सीधे विचार चल रहे थे। सरिता को पूरा यकीन था कि दामाद अपनी पत्नी को लेने उसके घर जरूर आएगा।
लवली के मायके आए हुए 8 से 10 दिन बीत गए। इस दौरान प्रमोद ने हाल-चाल जानने के लिए अपनी सास और पत्नी दोनों को फोन किया। लेकिन सरिता ने अपनी बेटी का फोन उठवाने से मना कर दिया और खुद भी फोन नहीं उठाया। सरिता की यह एक सोची-समझी चाल थी ताकि फोन न उठाने पर प्रमोद परेशान होकर खुद उसके घर चला आए।
आखिरकार तीन-चार दिनों तक फोन न उठने से परेशान होकर प्रमोद अपनी पत्नी लवली को लेने अपने ससुराल पहुंच गया। ससुराल पहुंचने पर सरिता ने दामाद का बहुत गरमजोशी से स्वागत किया। सरिता ने प्रमोद को मीठी-मीठी बातों में उलझाया और उसे समझा-बुझाकर 4-5 दिनों के लिए ससुराल में ही रुकने के लिए राजी कर लिया।
भाग 5: रात की घटना और खौफनाक योजना
ससुराल में मेहमानों के ठहरने के लिए एक अलग कमरा बना हुआ था, जहां प्रमोद रुकता था। जबकि सरिता और उसकी बेटी लवली एक अलग कमरे में सोती थीं। ससुराल में रहते हुए जब 7 से 8 दिन बीत गए, तो एक रात प्रमोद का मन अपनी पत्नी के पास जाने के लिए काफी व्याकुल होने लगा।
रात के सन्नाटे में प्रमोद अपने कमरे से निकला और लवली के कमरे की तरफ बढ़ा। लेकिन उसी समय उसकी सास सरिता की आंख खुल गई। सरिता दबे पांव बाहर आई और प्रमोद का रास्ता रोकते हुए बोली— “दामाद जी, इतने दिनों से आप अकेले हैं। मेरे पति भी अब इस दुनिया में नहीं हैं और मैं भी तन्हा हूं। आज आप मेरे साथ चलिए।”
प्रमोद ने रिश्ते की मर्यादा और समाज के डर की बात कही, लेकिन सरिता ने उसकी एक न सुनी और उसे अपने जाल में फंसाने लगी। हालांकि, उसी पल कमरे के अंदर से लवली के जागने की आहट हुई, जिससे दोनों घबरा गए और उस रात बचकर अपने-अपने कमरे में लौट गए।
अगले दिन सुबह, सरिता और प्रमोद ने एकांत में मिलकर एक योजना बनाई। प्रमोद ने सरिता से कहा— “जब तक लवली जागती रहेगी, तब तक हमारा अ/ं/त/रं/ग स/म्बंध कभी संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए मैं शहर के मेडिकल स्टोर से तेज नीं/द क/ी गो/लि/यां लेकर आता हूं। शाम को खाने में मिलाकर उसे दे देना, जिससे वह सोती रहे।”
भाग 6: नींद की गोली और अ/नै/ति/क स/म्बंध
दोपहर करीब 11 बजे प्रमोद अपने ससुराल से निकला और नजदीकी शहर चला गया। वहां के एक मेडिकल स्टोर से उसने तेज असर वाली नीं/द क/ी गो/लि/यां खरीदीं। साथ ही, उसने अपने लिए भी कुछ अ/ौ/ष/धि/यां (पावर टेबलेट्स) खरीद लीं। शाम को घर लौटकर प्रमोद ने वे नीं/द क/ी गो/लि/यां सरिता को सौंप दीं।
रात को करीब 8:30 बजे जब सब खाना खाने बैठे, तो सरिता ने चालाकी से सब्जी में नीं/द क/ी गो/ली पीसकर अपनी ही सगी बेटी लवली को खिला दी। खाना खाने के आधे घंटे के भीतर ही दवाई का गहरा असर होने लगा और लवली बेसुध होकर गहरी नींद में सो गई।
लगभग डेढ़ घंटे बाद, जब प्रमोद और सरिता को पक्का यकीन हो गया कि लवली पूरी तरह गहरी नींद में सो चुकी है, तो प्रमोद अपने कमरे से निकला। सरिता और उसका दामाद चुपके से एक अलग खाली कमरे में चले गए।
उस रात सरिता और उसके दामाद के बीच मर्यादा और पवित्र रिश्ते की सारी सीमाएं टूट गईं। प्रमोद ने पहले से ही कुछ शक्तिशाली अ/ौ/ष/धि/यां ले रखी थीं, जिसके कारण दोनों के बीच करीब 2 से 3 घंटे तक लगातार अ/ं/त/रं/ग क/ा/र्य/क्र/म जारी रहा।
भाग 7: दुष्परिणाम और पछतावा
लगातार कई घंटों तक चले इस अ/नै/ति/क क/ा/र्य/क्र/म के कारण धीरे-धीरे सरिता की हालत बिगड़ने लगी। दामाद की अत्यधिक श/ा/री/रि/क ताकत और क्षमता के आगे सरिता की सहनशक्ति जवाब दे गई। सरिता का शरीर पूरी तरह से टूट चुका था और वह दर्द से कराहने लगी थी।
जब अगली सुबह हुई और सरिता बिस्तर से उठने की कोशिश करने लगी, तो उससे ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था और चला भी नहीं जा रहा था। उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उससे घर का कोई भी काम नहीं हो पा रहा था।
तब जाकर सरिता को अहसास हुआ कि उसकी बेटी लवली अपने पति प्रमोद के बारे में जो कुछ भी कहती थी, वह एक-एक शब्द बिल्कुल सच था। वासना के अंधेपन में सरिता ने जिस दामाद के लिए अपनी मर्यादा बेची थी, उसी दामाद की आदतों ने उसे बुरी तरह तोड़कर रख दिया था।
मर्यादा, धर्म और पवित्र रिश्ते को तार-तार करने के बाद अब सरिता के पास पछतावे के आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं बचा था। लेकिन अब वक्त निकल चुका था और अपनी ही सगी बेटी के साथ किया गया यह नीच विश्वासघात कभी नहीं मिट सकता था।