लंदन की महिला को अमीर पति के ड्राइवर दोस्त से इश्क इंडिया घूमने के बहाने आई फिर कर दिया कत्ल!
लंदन की महिला को अमीर पति के ड्राइवर दोस्त से इश्क इंडिया घूमने के बहाने आई फिर कर दिया कत्ल!
**बेटे की गवाही, नींद की बिरयानी और फांसी की सजा: शाहजहांपुर का वह केस जिसने अदालत और समाज दोनों को झकझोर दिया**
सात अक्टूबर 2023 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की अदालत में भीड़ सामान्य से कहीं अधिक थी। मीडिया, वकील, परिवार और पुलिस—सब एक ही सवाल लेकर बैठे थे। कटघरे में लंदन की भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक रमनदीप कौर खड़ी थीं। जज एडीजे पंकज श्रीवास्तव ने गवाहों और सबूतों के आधार पर धारा 302 के तहत उन्हें मृत्युदंड सुनाया। फैसले के साथ यह भी कहा गया कि सजा तब तक पूरी मानी जाएगी जब तक प्राण न निकल जाएं। अदालत में बैठे ज्यादातर लोग हैरान थे। और भी हैरानी तब हुई जब पता चला कि सबसे निर्णायक गवाही उसी महिला के बेटे अर्जुन की थी—जो नौ महीने उसकी कोख में रहा, और सालों बाद मां के खिलाफ खड़ा हुआ।
कहानी 1990 से शुरू होती है। शाहजहांपुर के थाना बंडा क्षेत्र के गांव बसंतापुर में बलदेव सिंह रहते थे। बेटे सुखजीत सिंह उर्फ सोनू का जालंधर में दाखिला कराना चाहते थे। पत्नी वंशजीत कौर और एक दोस्त के साथ कार से निकले। हादसे में बलदेव और दोस्त की मौके पर मौत हो गई, पत्नी बच गईं। तीन बेटियां और एक बेटा उनकी जिम्मेदारी पर आ गए। बड़ी बेटी कुलविंदर बाद में लंदन के डर्बी में बस गईं, मनजीत जालंधर और कमल गांव गदाई सांडा चली गईं। पति की अधूरी इच्छा पूरी करते हुए वंशजीत ने सोनू का दाखिला जालंधर कराया और कहा कि पिता का सपना अब तुम्हें पूरा करना है।
स्कूल में सोनू की दोस्ती गुरुप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू से हुई। छुट्टियों में एक-दूसरे के घर आना-जाना लगा। बीस साल के होने पर बहन ने लंदन बुलाया। सोनू गए, पढ़ाई के साथ काम भी खोजा। वहीं मुलाकात रमनदीप कौर से हुई—भारतीय जड़ों वाली ब्रिटिश नागरिक, देखने में आकर्षक। पहली नजर का लगाव शादी तक पहुंच गया। परिवार राजी हुआ। साल 2005 में विवाह हुआ। नागरिकता रमनदीप की थी, सोनू की नहीं। दोनों ने कार्शलटन में पिज्जा आउटलेट खोला। काम चला। 2007 में बेटा अर्जुन पैदा हुआ, 2010 में आर्यन। बच्चों की पढ़ाई के लिए आउटलेट बंद कर डर्बी में ट्रांसपोर्ट का कारोबार शुरू किया। घर, गाड़ियां और व्यापार बढ़ा। गांव में करीब तेईस एकड़ जमीन से भी आय आती थी। लखपति से करोड़पति वाली भावना घर में बैठने लगी।

नवंबर 2015 में सोनू ने पत्नी और बेटों को सरप्राइज दिया—लंदन से दुबई की यात्रा। एयरपोर्ट पर बचपन का दोस्त मिट्ठू इंतजार कर रहा था। कपूरथला के गांव जैनपुर का वह लड़का अब दुबई में टैक्सी चलाता था। उसने भाभी और भतीजों को घुमाया। इन्हीं दिनों रमनदीप मिट्ठू से जुड़ती चली गईं। नंबर बदले, सोशल मीडिया पर जुड़े, बातचीत बढ़ी। सोनू कारोबार में व्यस्त रहे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि पत्नी और दोस्त की नजदीकी कहां तक जा रही है।
दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। मिट्ठू ने तलाक की बात कही। रमनदीप राजी नहीं हुईं। वजह साफ थी—गांव की करोड़ों की जमीन, पति की बीमा पॉलिसी से लाखों पाउंड, बैंक में जमा, लंदन के घर-गाड़ियां और ट्रांसपोर्ट बिजनेस। उनका कहना था कि मिट्ठू ड्राइवर हैं, आर्थिक स्थिति कमजोर है। अगर पति रास्ते से हट जाए तो सब कुछ उनके हिस्से आएगा, फिर शादी के बाद मिट्ठू का हो जाएगा। योजना भारत में बनाने की बात हुई। दलील यह दी गई कि यहां कानून लचीला है, पुलिस और व्यवस्था पैसे से प्रभावित हो सकती है।
अट्ठाईस जुलाई 2016 को परिवार भारत आया। चंडीगढ़, अमृतसर और आसपास घूमे। पंद्रह अगस्त को बसंतापुर पहुंचे। मिट्ठू साथ थे। रमनदीप दबाव बढ़ाती रहीं कि पति को किसी भी सूरत में हटाना है। मिट्ठू दुबई जाने का बहाना कर आसपास ही रहे। फिर एक रात की योजना बनी। नींद की गोलियां लाई गईं। परिवार से पूछा गया कि क्या खाना है। सबने बिरयानी चुनी। घर के दो कुत्तों के लिए भी खाना बनाया गया। बिरयानी में नींद की दवा मिलाई गई, कुत्तों के भोजन में जहरीला पदार्थ। एक-दो सितंबर 2016 की मध्यरात्रि के आसपास कुत्ते मर चुके थे। जिन्होंने बिरयानी खाई वे गहरी नींद में थे। नौ वर्षीय अर्जुन ने कम खाया था, पेट पहले से भरा था।
आधी रात मिट्ठू घर में घुसे। हाथ में हथौड़ा था। सोए हुए सोनू पर वार हुआ, चीख निकली। अर्जुन जाग गया। रमनदीप को बेटे के जागने का अहसास नहीं हुआ। उन्होंने पति की चीख दबाने के लिए तकिया से मुंह ढक लिया और छाती पर बैठ गईं। इसके बाद धारदार हथियार से हमला हुआ। कमरा खून से भर गया। नौ साल का बच्चा डरा-सहमा सब देखता रहा—मां और वह अंकल जो उसे प्यार करते थे।
सुबह नौकर जागे, सास नींद की दवा के असर से उठने में कठिनाई महसूस कर रही थीं। रमनदीप ने शोर मचाया, नाटक किया। पुलिस आई। महिला मोबाइल से भीड़, खून और मरे कुत्तों की तस्वीरें लेने लगीं। पूछने पर कहा कि लंदन जाकर दिखाने के लिए सबूत चाहिए। यह हरकत संदिग्ध लगी। मृतक के परिवार में रिटायर्ड डीएसपी प्यारा सिंह ने पूछताछ शुरू की। सवाल यह था कि चार साल बाद भारत आया व्यक्ति यहां किसका दुश्मन था, और हमला सिर्फ उसी पर क्यों हुआ। घर को लूट जैसा दिखाने की कोशिश भी हुई थी।
नाम आया मिट्ठू सिंह का। जैनपुर में पिता ने बताया कि बेटा इकतीस अक्टूबर को अमृतसर एयरपोर्ट से दुबई जा रहा था, फोन पर दुबई पहुंचने की बात कही, लेकिन साथ रहने वाले ने कहा कि वह पहुंचा ही नहीं। मोबाइल लोकेशन निकली तो दो सितंबर की रात करीब साढ़े आठ बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मिली। पुलिस ने विमान के पास पहुंच चुके व्यक्ति को रोक लिया और उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले कर दिया।
जांच में प्रेम संबंध, संपत्ति और बीमा का मकसद जुड़ता गया। अर्जुन ने बताया कि हत्या मिट्ठू अंकल और मां ने की। सबूत जमा हुए, चार्जशीट दाखिल हुई। करीब सात साल बाद फैसला आया। अर्जुन बुआ के पास रहे, छोटे भाई भी दिल्ली में बुआ के साथ। सोलह वर्ष के होने पर अर्जुन भारत आए और अदालत में बयान दिया। रमनदीप को फांसी, मिट्ठू को आजीवन कारावास मिला। प्रेमिका को कठोर सजा इसलिए भी बताई गई कि उन्होंने भारतीय पुलिस और अदालत को कमजोर समझा था। शाहजहांपुर जेल में रखने के बाद वे मानसिक रूप से भी अस्थिर बताई गईं।
फैसले के बाद अर्जुन से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मां को फंदे पर लटकते देखना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने पिता का गला घोंटा और चाकू से हमला किया था। यह बात चर्चा का विषय बन गई। रमनदीप आज भी कहती हैं कि उन्हें झूठे आरोप में फंसाया गया, परिवार ने जमीन और संपत्ति हथियाने के लिए साजिश रची। लेकिन सबसे मजबूत गवाह उनके अपने बेटे रहे।
यह प्रकरण प्रेम, लालच और विश्वासघात की कहानी है। सुख-सुविधाओं की कमी नहीं थी, फिर भी पति के गरीब दोस्त के लिए पूरा जीवन दांव पर लगा दिया गया। बच्चे ने जो देखा, वह सबूत बन गया। कानून ने अंत में वही कहा जो उस रात अंधेरे कमरे में एक बच्चा देख चुका था। सजा पर अपील और आगे की प्रक्रिया अदालतों के स्तर पर चल सकती है, लेकिन सामाजिक सवाल वही रहता है—संपत्ति की भूख रिश्ते को कितनी दूर तक खा सकती है, और एक बच्चे की आंखें कितना कुछ बदल सकती हैं।