विश्वासघात की गहरी खाई: अलवर की एक रूहानी और खौफनाक साजिश
विश्वासघात की गहरी खाई: अलवर की एक रूहानी और खौफनाक साजिश
प्रस्तावना राजस्थान की वीर धरा पर बसा अलवर जिला अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी जिले के ‘कठूमर’ नाम के एक छोटे से गांव में एक ऐसी घटना घटी जिसने मानवता और रिश्तों की पवित्रता पर एक गहरा दाग लगा दिया। यह कहानी एक 18 साल की मासूम लड़की रचना की है, जो अपनी ही सगी दादी के बुने हुए एक ऐसे जाल में फंस गई थी, जहाँ ‘भूत-प्रेत’ के नाम पर उसकी अस्मत का सौदा किया जा रहा था।
अध्याय 1: गरीबी की मार और रचना का संघर्ष
अलवर के धूल भरे रास्तों और सरसों के खेतों के बीच कठूमर गांव में एक छोटा सा कच्चा मकान था। इस मकान में रचना अपनी दादी कांता के साथ रहती थी। रचना के जीवन की शुरुआत दुखों के साथ हुई थी। जब वह मात्र 8 साल की थी, उसके माता-पिता एक सड़क दुर्घटना में चल बसे थे। तब से उसके दादा रमेश और दादी कांता ने ही उसे पाल-पोसकर बड़ा किया।
रचना बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थी। उसने गरीबी के बावजूद कड़ी मेहनत की और 12वीं कक्षा अच्छे अंकों से पास की। वह आगे कॉलेज जाकर शिक्षिका बनना चाहती थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक साल पहले उसके दादा रमेश की भी मृत्यु हो गई। दादा की मौत ने घर की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह चरमरा दिया। घर में अब कमाने वाला कोई नहीं था।
अपनी दादी को बुढ़ापे में मजदूरी करते देख रचना का दिल पसीज गया। उसने अपनी पढ़ाई का सपना कुर्बान कर दिया और खुद खेतों में मजदूरी करना शुरू कर दिया। वह सुबह जल्दी उठकर घर का सारा काम करती, फिर जमींदारों के खेतों में जाकर पसीना बहाती और रात को थककर चूर होकर लौटती। उसने सिलाई-कढ़ाई का काम भी शुरू किया ताकि घर में दो पैसे और आ सकें।
अध्याय 2: वह अजीब रात और रूहानी डर की शुरुआत
फरवरी 2026 की शुरुआत थी। राजस्थान में हल्की ठंड अभी बाकी थी। एक रात रचना जब गहरी नींद में सो रही थी, उसे एक अजीब सा सपना आया। उसने देखा कि उसके स्वर्गीय दादा रमेश कमरे में आए हैं और उसके बिस्तर के पास बैठे हैं। सपने में उसे लगा कि दादा उसे प्यार कर रहे हैं, लेकिन वह प्यार दादा जैसा नहीं बल्कि कुछ /अजीब/ और /डरावना/ था।
अगली सुबह जब वह जगी, तो उसे बहुत थकान महसूस हो रही थी। उसने अपनी दादी कांता से कहा, “दादी, आज रात दादाजी सपने में आए थे। वह मुझे /गलत/तरीके/ से छू रहे थे। मुझे बहुत डर लग रहा है।”
कांता ने उसे पुचकारते हुए कहा, “पगली, दादाजी तो तुझे बहुत प्यार करते थे। वह तुझे क्यों डराएंगे? यह तेरा वहम है। तू दिनभर काम करती है, इसलिए शायद तुझे ऐसे सपने आते हैं।” कांता ने उसे गर्म दूध का गिलास थमाया और काम पर भेज दिया। लेकिन रचना के मन में एक अनजाना डर बैठ गया था।