एक 17 साल की दसवीं क्लास की लड़की सोशल मीडिया की लत का शिकार हो गई: अफ्रीका का एक “जादूगर”… उसे पांच दिनों तक परेशान करता रहा; उसने यह बात उसके परिवार से छिपाई और साथ ही उसे पुलिस के चक्कर में भी डाल दिया—क्या यह कोई जादू था या सिर्फ़ एक स्कैम?
एक 17 साल की दसवीं क्लास की लड़की सोशल मीडिया की लत का शिकार हो गई: अफ्रीका का एक “जादूगर”… उसे पांच दिनों तक परेशान करता रहा; उसने यह बात उसके परिवार से छिपाई और साथ ही उसे पुलिस के चक्कर में भी डाल दिया—क्या यह कोई जादू था या सिर्फ़ एक स्कैम?
उत्तर प्रदेश के संभलगढ़ जिले में एक 17-18 साल की कक्षा 10वीं की छात्रा पूनम शर्मा अपनी पढ़ाई और परिवार के लिए हर दिन स्कूल जाती थी। उसके पास पिता ने दिया बड़ा Android फोन था। रीलें देखने के लिए वह अपने हाथों का इस्तेमाल करती थी। दिन भर स्कूल, खाना, फिर फोन में रीलें और… वह लत उसका साथ नहीं छोड़ रही थी। चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन न लगना, शरीर में दर्द शुरू हो गया। पूनम समझ गई कि यह लत उसे पूरी तरह नष्ट कर देगी। उसने अपनी सहेली से कहा, “मुझे किसी के पास ले चलो जो यह आदत छुड़ाए।” सहेली ने कहा, “मेरे नजर में अफ्रीका का काला हबसी है, वह झाड़फूंक करता है।” पूनम ने हां कर दी।
यह कहानी शुरू होती है संभलगढ़ की सुनसान झाड़ियों में। लेकिन अंत में आया पुलिस का थाना, नाबालिग होने की वजह से सलाखों के पीछे जाना और दवाओं का इलाज। क्या यह अफ्रीका से आए जादूगर का काला जादू था या सिर्फ एक धोखेबाज का साजिश? आज यह पूरी घटना उत्तर प्रदेश की सोशल मीडिया लत और युवाओं की हताशा की कहानी है। यह पोस्ट अंत तक पढ़ें, लाइक करें और कमेंट में बताएं कि आप क्या सोचते हैं।
पूनम शर्मा की साधारण जिंदगी
संभलगढ़ के एक छोटे से मोहल्ले में रहती पूनम शर्मा। उम्र 17-18 साल। कक्षा 10वीं में पढ़ती थी। पिता हरिराम ने उसे अच्छा Android फोन दिया ताकि पढ़ाई में मदद मिले। लेकिन फोन सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं, रीलें देखने का माध्यम बन गया। स्कूल जाते समय, स्कूल से लौटते समय, खाने के बाद… हर खाली पल फोन हाथ में। रीलें आतीं, मन में डट नहीं पाता, हाथ का इस्तेमाल शुरू।
पहले दिन तो हल्का लगा। लेकिन जल्दी ही दिन भर चिड़चिड़ापन महसूस होने लगा। पढ़ाई में मन नहीं लगता। स्कूल में चुपचाप बैठकर भी मन में रीलें घूमतीं। पिता-माता को कुछ नहीं बताया। वे सोचते थे, “बच्ची पढ़ रही है, ठीक है।” लेकिन शरीर में दर्द शुरू हो गया। पूनम अकेली सोचती, “काश कोई निस्तारण कर दे।”
सहेली से बात – अफ्रीका का काला हबसी
एक दिन स्कूल में सहेली से बात हुई। सहेली भी उसी लत में थी। उसने कहा, “मेरी नजर में एक अफ्रीका का आदमी है, काला दिखने में, लेकिन ताकत में 10 गुना ज्यादा। वह झाड़फूंक करता है।” पूनम ने पूछा, “क्या सच में काम करता है?” सहेली हंसकर बोली, “हां, छुट्टी पर चलते हैं।” पूनम ने हां कर दी।
छुट्टी के बाद दोनों सहेलियां संभलगढ़ के जंगल की कुटिया पहुंचीं। काला आदमी, 40 साल का, हट्टा-कट्टा, काला चेहरा। पूनम डर गई। सहेली ने कहा, “यह मेरा दोस्त है, बाबा।” पूनम ने अपनी समस्या बताई। बाबा ने कहा, “पांच दिन लगातार आओ। फूल, चावल, फल ले आओ। तब तक मेरी रस्म करूंगा।”

पहले दिन – झाड़फूंक और चाय
पूनम ने परिवार को बताया, “कल छुपकर देखना।” परिवार ने हां कर दी। पहले दिन दोनों सहेलियां कुटिया पहुंचीं। बाबा ने चावल, फूल, फल लाए। पूनम ने झाड़फूंक की रस्म की। उसके बाद चाय और जूस दिया गया। जूस में कुछ पाउडर मिला था। पीने के बाद पूनम का सिर घूमने लगा।
बाबा ने कहा, “अब आपका काम शुरू होता है।” पूनम को अपने बेडरूम में ले जाकर गलत काम किया। पूनम ने तुरंत दर्द महसूस किया। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। बाबा ने 5 दिन की बात की। पूनम सुध में आ गई और घर चली गई।
दूसरे दिन – लत छुटने का दावा
पूनम ने कहा, “बाबा, मेरा शरीर दुख रहा है, लत निकल रही है।” बाबा ने हंसकर कहा, “हां, यही लत शरीर से बाहर निकल रही है। कल फिर आओ।” पूनम स्कूल गई, छुट्टी पर आकर कुटिया पहुंची। बाबा ने चाय-जूस दिया। गलत काम फिर शुरू। लेकिन इस बार दर्द और ज्यादा। पूनम चिल्लाई, “बाबा! रुक जाओ!” बाबा ने कहा, “यह लत का दर्द है।”
पूंनम को पता नहीं था कि यह सिर्फ शराब या कोई पाउडर का असर है। वह सोच रही थी अफ्रीका का जादू।
तीसरा दिन – अकेली पहुंची पूनम
तीसरे दिन पूनम अकेली पहुंची। सहेली स्कूल नहीं जा पाई थी। बाबा ने चाय-जूस दी। फिर बेडरूम में ले जाकर गलत काम शुरू। पूनम की चीखें जंगल में गूंजीं। कोई नहीं आया। बाबा ने कहा, “अब लत खत्म।” पूनम को पता नहीं था कि दवा दी गई थी।
चौथा दिन – दर्द और सच्चाई
चौथे दिन पूनम सुध में आई। घर वालों ने पूछा, “क्या हुआ?” पूनम रो पड़ी। उसने कहा, “मैंने झाड़फूंक किया, लेकिन दर्द हो रहा है।” परिवार ने कहा, “कल छुपकर देख।” पूनम ने अगले दिन कुटिया पहुंची।
अंतिम दिन – परिवार ने पकड़ा
पूनम ने कहा, “मैं छुपकर सब देखना चाहती हूं।” परिवार ने छुपकर देखा। बाबा ने पूनम को बेडरूम में बुलाया। गलत काम शुरू होते ही पूनम के परिवार ने दरवाजा खोला। बाबा ने पूनम के हाथ पकड़ लिए। परिवार ने उसे पुलिस थाने में ले जाया।
पूनम को पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज हुआ। वह नाबालिग थी, इसलिए सलाखों के पीछे भेज दिया गया। इलाज के लिए डॉक्टर पास लिया गया। डॉक्टर ने दवाएं दीं। पूनम को घर लाया गया।
घर वालों की सच्चाई
घर वाले बोले, “हमको पहले ही बतानी थी। आज ऐसा नहीं होता।” पूनम रो पड़ी। वह समझ गई कि यह सब एक धोखा था।
सीख – सोशल मीडिया और युवाओं की हताशा
दोस्तों, यह कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं। यह उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं की है जो सोशल मीडिया की लत में फंस गए हैं। रीलें देखते-देखते लत बन जाती है। परिवार से सलाह न लेकर अजनबी के पास जाने से क्या हुआ। अफ्रीका का काला हबसी – यह सिर्फ एक धोखेबाज था। उसने जादू का दिखावा कर शोषण किया।
आज पूनम का शरीर, मानसिक स्थिति, पढ़ाई सब बिगड़ गया। लत के दर्द से वह बीमार थी। अगर उसने पहले परिवार से बात की होती, तो यह सब नहीं होता।