राजस्थान के भरतपुर जिले में भूपेंद्र सिंह ने एक घिनौना अपराध किया: एक ससुर और उसके दोस्त ने अपनी बहू रुचि को दूध में नशीली दवा मिलाकर पिलाकर बेहोश कर दिया।
राजस्थान के भरतपुर जिले में भूपेंद्र सिंह का बड़ा अपराध: बेटी को निर्वस्त्र कर गंदा काम करने वाला ससुर और दोस्त, बहू रुचि बेहोश हो जाती, लेकिन पिता की हत्या और बेटे की बदला की कहानी – पूरी घटना
राजस्थान के भरतपुर जिले के छोटे से गांव अड्डा में एक साधारण परिवार रहता था। भूपेंद्र सिंह एक गरीब किसान थे। उनकी दो एकड़ जमीन थी, लेकिन पत्नी की मौत के बाद उन्होंने शराब की लत लगा ली। धीरे-धीरे घर की हालत खराब हो गई। इकलौता बेटा रमेश कुमार भी पिता के नक्शे पर चलने लगा। रमेश की पत्नी रुचि देवी बहुत खूबसूरत, मेहनती और संस्कारी थी। लेकिन पिता और बेटे का लालच रुचि को भी बर्बाद कर गया।
5 जुलाई 2026 की सुबह थी। भूपेंद्र सिंह ने रमेश से कहा, “बेटा, जमीन बेचकर आलीशान घर बनाओ।” रुचि ने विरोध किया। लड़ाई हुई। रमेश और भूपेंद्र सिंह शराब के ठेके गए। रुचि अकेली रह गई। भूपेंद्र सिंह की नजर रुचि पर खराब हो गई। उसने रमेश को बताया, “रुचि के साथ मिलकर काम करो, जमीन मिलेगी।” रमेश ने हां कर दी।
रात को रमेश शराब में धुत होकर रुचि के कमरे में घुसा। कपड़े फाड़े, रस्सी बांधी, मुंह पर कपड़ा ठूसा और गंदा काम शुरू कर दिया। पिता भूपेंद्र सिंह नशे में आकर घर में घुसा। रुचि को देखा तो लालच बढ़ गया। दोनों ने रुचि के साथ मिलकर गंदा काम किया। रुचि बेहोश हो गई।
अगले दिन पिता और बेटे ने रुचि को फिर से बुलाया। अमरपाल पटवारी ने भी शामिल हो गया। तीनों ने रुचि के साथ मिलकर गंदा काम किया। रुचि बेहोश हो गई और चुप हो गई।

10 दिन बाद पिता और दोस्त ने जमीन का कागज तैयार किया। रुचि ने कहा, “पिताजी, मैं नशीला दूध पिया था। अब मैं चुप रहूंगी।” लेकिन पिता और बेटे की हिम्मत बढ़ गई। 15 अगस्त 2026 की शाम। भूपेंद्र सिंह और अमरपाल पटवारी ने रुचि के कमरे में घुसकर रुचि की गर्दन दीवार से पटकी। रुचि बेहोश हो गई। दोनों ने उसके साथ गंदा काम किया। पिता ने कहा, “मेरी बहू की मौत हो गई।”
अगले दिन पिता और बेटे ने रुचि को मार डाला। पिता की हत्या की – सिर में कुल्हाड़ी मारी। अमरपाल को भी मार डाला। रमेश ने सबको देखा और समझ गया। उसने पिता को हत्या का बदला लिया। पिता की हत्या कर दी। रमेश ने पुलिस को बताया – “मेरी पत्नी और मैंने इन दोनों के साथ गंदा काम किया था। पिता ने मुझे मजबूर किया था।”
पुलिस ने रमेश को गिरफ्तार किया। रुचि अस्पताल में बेहोश थी। पोस्टमार्टम में पिता और अमरपाल की मौत पक्की हुई। रमेश ने पूरा कबूल किया। रुचि ने बाद में कहा, “ससुर और अमरपाल ने मुझे नशीला दूध पिला दिया। मैंने चुप रह लिया।”
दोस्तों, ये घटना भरतपुर के अड्डा गांव की सच्ची घटना है। पिता और बेटे का लालच, रुचि का नशीला दूध और पिता की हत्या – सब कुछ एक परिवार को बर्बाद कर गया। पुलिस ने रमेश को गिरफ्तार किया। जज साहब अब फैसला करेंगे। क्या सजा मिलेगी? जेल? फांसी?
ये कहानी हमें सिखाती है कि पिता-बेटे का लालच कितना खतरनाक होता है। बहू की इज्जत कभी नहीं मिटनी चाहिए। रुचि ने गलती की, लेकिन बदनामी से डरकर चुप रही। पिता और बेटे ने गलत रास्ता चुना।
आज भरतपुर में लोग इस घटना पर बोला करते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग कह रहे हैं – “रमेश ने पिता को हत्या का बदला लिया, लेकिन रुचि का क्या होगा?” कुछ कह रहे हैं – “पिता की हत्या गलत है।”
दोस्तों, ये घटना हमें याद दिलाती है – परिवार में विश्वास रखो। लालच से कोई भी जिंदगी नहीं बचा सकता। रमेश की बदला लेने वाली हिम्मत सही थी, लेकिन पिता और अमरपाल की मौत भी गलत थी।
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