साक्षी देवी का घिनौना जुर्म: खेत में @@@ मिली… मां ने अपने पोते की #की और अपनी बेटी का @@@ दिया।
साक्षी देवी का घिनौना जुर्म: खेत में @@@ मिली… मां ने अपने पोते की #की और अपनी बेटी का @@@ दिया।
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के अमवा गांव में एक साधारण लेकिन सुखी लगने वाला घर था। वेद प्रकाश, 35 साल का मेहनती किसान, 6 एकड़ जमीन का मालिक, गरीबों को ब्याज पर पैसे देने वाला ईमानदार आदमी। गांव वाले उसकी इज्जत करते थे। लेकिन उसकी पत्नी साक्षी देवी, 32 साल की, बेहद खूबसूरत, गोरी चिट्टी और युवा महिला, घर की जिम्मेदारी संभालती हुई भी अकेली महसूस करने लगी।
6 साल पहले वेद प्रकाश की मोटरसाइकिल एक ट्रैक्टर से टकराई। डॉक्टरों ने चेतावनी दी – भविष्य में न बच्चा होगा, न पत्नी का सुख। साक्षी देवी की जरूरतें, इच्छाएं और एक अकेलेपन ने उन्हें गलत रास्ते पर ले लिया। पहले बिजली मिस्त्री पारस के साथ गलत संबंध, फिर अपने ही छोटे भतीजे शक्ति के साथ।
30 जुलाई 2026 की सुबह। वेद प्रकाश शहर गया था दवाइयां और सामान लाने। साक्षी देवी और शक्ति घर पर थे। शाम को दोनों वापस आए, खाना खाया, फिर शक्ति को साक्षी देवी ने अपने कमरे में बुला लिया। वेद प्रकाश नींद नहीं आ रही थी। दिमाग में सब याद आ रहा था – साक्षी और शक्ति का हाथ पकड़ना, शक्ति का चेherा।
उसने घर में हथियार तलाशा। सबसे पहले भतीजे के कमरे में गया। एक तलवार से गर्दन काट दी। शक्ति का सिर अलग हो गया, खून से पूरा कमरा लाल। फिर साक्षी देवी के कमरे में। साक्षी नींद में थी। वेद प्रकाश ने उसे जगाया और पूछा – “मुझे बता, कौन-कौन के साथ रातें रंग रही थी?” साक्षी डर गई और बता दिया – पारस और शक्ति के साथ। गुस्से में वेद प्रकाश ने अपनी पत्नी की गर्दन भी काट दी।
रात के 10:30 बजे दोनों कमरों में दो सिर कटे शव पड़े थे। वेद प्रकाश बिना डरे मोबाइल उठाया और पुलिस को फोन किया – “मैंने अपनी पत्नी और भतीजे का कत्ल कर दिया।”
सुबह पुलिस पहुंची। दो सिर कटे हुए शव, घर में खून का सारा निशान। वेद प्रकाश को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। थाने में उसने सारी बात बता दी – “मेरी पत्नी गलत रास्ते पर थी, भतीजे के साथ। जब मैंने देखा तो हथियार उठा लिया।”
पुलिस ने तुरंत पोस्टमार्टम कराया और मामला सिविल कोर्ट में भेज दिया। पूरे गांव में मशगुल हो गया। लोग सोच रहे थे – एक पति ने अपनी पत्नी और भतीजे को क्यों काट दिया? क्या साक्षी और शक्ति को माफ करना चाहिए था?

वेद प्रकाश का मामला अभी जज साहब के सामने है। सजा तय होने वाली है – मौत की सजा या उम्रकैद। लेकिन इस घटना ने पूरा बलरामपुर हिलाया।
यह कहानी हमें याद दिलाती है कि घर में अकेलापन, बिना जिम्मेदारी और बिना संवाद के साथ रहने से क्या हो सकता है। परिवार की इज्जत, प्यार और समर्पण से ही सुख मिलता है। गलत रास्ते पर चलने वाले को कभी न्याय मिलता है।
अब पूछना यह है – क्या वेद प्रकाश ने गलती की या सही? क्या साक्षी और शक्ति को माफ करना चाहिए था? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।
यह घटना किसी का दिल दुखाने के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए है।
वेद प्रकाश का केस अभी चल रहा है। जज साहब क्या फैसला देंगे? यह सवाल पूरा इलका आज भी चर्चा में है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आइए थोड़ा पीछे चलते हैं, 6 साल पहले की ओर, ताकि समझ आए कि आज का यह भयानक दृश्य कैसे बनता था।
साक्षी देवी और वेद प्रकाश की शादी के बाद से ही घर में शांति नहीं थी। वेद प्रकाश सुबह खेत में जाते, शाम को थके हुए लौटते। खाना खाते तो सो जाते। साक्षी देवी अकेली। रात को उनका शारीरिक संबंध सिर्फ शारीरिक होता, भावनात्मक नहीं। साक्षी देवी ने सोचा – “अगर पति सुख नहीं दे रहा तो क्या मैं अकेला रहूंगी?”
पहले पारस की बात। एक दिन साक्षी देवी के फ्रिज खराब हो गया। साक्षी ने पारस को फोन किया। पारस आया, 15 मिनट में फ्रिज ठीक किया और 600 रुपये लिए। लेकिन साक्षी देवी ने 2000 रुपये दिए। “भैया जी, मेरी इच्छाएं पूरी कर दो।” पारस ने कहा – “अच्छा भाभी जी, मैं तैयार हूं।” और घर में कुछ मिनutes के अंदर ही दोनों का गलत संबंध शुरू हो गया।
यह सिर्फ एक बार नहीं हुआ। हर हफ्ते साक्षी देवी पारस को फोन करती और पारस अपनी मोटरसाइकिल लेकर आता। साक्षी देवी का अकेलापन खत्म हो रहा था। लेकिन इच्छाएं और बढ़ रही थीं।
तब आया शक्ति। वेद प्रकाश का छोटा भतीजा, 16 साल का, गांव का हंसमुख लड़का। एक दिन वेद प्रकाश का बड़ा भाई मोहन प्रकाश ने फोन किया – “भाई, शक्ति मेरे पास से निकला हुआ है। उसे मेरे पास भेज दो, खेती सिखाओ।”
शक्ति आया। घर के दरवाजे पर दस्तक। साक्षी देवी दरवाजा खोली। शक्ति ने गले लगाया। साक्षी देवी को शक्ति का छूना अच्छा लगा। आधे घंटे बाद वेद प्रकाश घर आया। सब सामान्य लगने लगा।
लेकिन अकेलेपन साक्षी देवी को परेशान करता रहा। 10 दिन बाद शक्ति ने कहा – “चाची जी, आज मैं भी खेत में चलूंगा।” साक्षी देवी ने कहा – “शक्ति, आज मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी। 6 महीने से अकेली हूँ।”
दोनों मोटरसाइकिल पर बैठे ईख के खेत में गए। दूर-दूर तक कोई नहीं। साक्षी देवी ने शक्ति को मजबूर किया। शक्ति हार मान गया। दोनों मिलकर अपनी जरूरतें पूरी करने लगे। गलत रिश्ता शुरू हो गया।
अब सवाल उठता है – क्या वेद प्रकाश को कुछ पता था? नहीं। वह शहर में था। लेकिन बाद में सब पता चला।
30 जुलाई की रात वेद प्रकाश ने सब कुछ देख लिया। उसने हथियार उठाया। शक्ति के कमरे में गया, तलवार चलाई। शक्ति का सिर कट गया। फिर साक्षी के कमरे में। साक्षी ने पल-पल की पोल खोली – “पारस के साथ… और शक्ति के साथ।” वेद प्रकाश ने गुस्से में साक्षी की गर्दन भी काट दी।
पुलिस पहुंची तो घर में खून का सागर था। दोनों शव कटे हुए पड़े थे। वेद प्रकाश ने शांति से कहा – “मैंने सब किया।”
पुलिस ने कहा – “जज साहब के सामने मामला जाएगा। सजा मौत की सजा हो सकती है।”
दोस्तों, यह कहानी सिर्फ एक कांड नहीं। यह है अकेलेपन, बिना संवाद के, बिना प्यार के, बिना परिवार के महत्व को समझने का परिणाम।
आज पूरा बलरामपुर गाँव में लोग चर्चा कर रहे हैं। क्या वेद प्रकाश ने सही किया? क्या साक्षी और शक्ति को माफ करना चाहिए था? क्या यह परिवार को बचा सकता था?
कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।
यह घटना किसी का दिल दुखाने के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए है।
वेद प्रकाश का केस अभी चल रहा है। जज साहब क्या फैसला देंगे? यह सवाल पूरा इलका आज भी चर्चा में है।