3 दो बहुओं ने मिलकर ससुर के सफाई वाले औजार को ही हटा दिया, पुलिस ने खोला इसके पीछे छिपा खौफनाक राज – News

3 दो बहुओं ने मिलकर ससुर के सफाई वाले औजार को ही हटा दिया, पुलिस ने खोला इसके पीछे छिपा खौफनाक राज

3 दो बहुओं ने मिलकर ससुर के सफाई वाले औजार को ही हटा दिया, पुलिस ने खोला इसके पीछे छिपा खौफनाक राज

भाग 3: पुराने कागजों ने खोला एक और राज

करण सिंह की मौत की जांच अब केवल उस रात हुई घटना तक सीमित नहीं रह गई थी।

पुलिस ने पुराने जमीन के दस्तावेजों की जांच शुरू की तो पता चला कि करण सिंह और उसके बड़े भाई के परिवार के बीच कई वर्षों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था।

करण सिंह के पास करीब चार एकड़ जमीन थी, लेकिन पुराने रिकॉर्ड में जमीन के एक हिस्से को लेकर अलग-अलग दावे दर्ज थे।

जांच अधिकारियों ने गांव के लेखपाल और अन्य संबंधित लोगों से भी जानकारी ली।

इसी दौरान पुलिस को एक पुराना आवेदन मिला, जिसमें करण सिंह ने कुछ वर्ष पहले जमीन पर कब्जे को लेकर शिकायत की थी।

लेकिन इस दस्तावेज में एक और नाम था।

वह नाम था—सुमेर के पिता का।

पुलिस अब सुमेर से दोबारा पूछताछ करने लगी।

सुमेर ने बताया कि उसके पिता और करण सिंह के बीच जमीन को लेकर विवाद जरूर हुआ था, लेकिन बाद में दोनों परिवारों के बीच बातचीत से मामला शांत हो गया था।

उसने यह भी कहा कि उसका करण सिंह की मौत से कोई संबंध नहीं है।

पुलिस ने उसके बयान की स्वतंत्र रूप से जांच शुरू कर दी।

बहुओं के बयानों की भी जांच

दूसरी ओर पुलिस ने दुर्गा और शिवानी के बयानों की अलग-अलग समय पर जांच की।

दोनों महिलाओं ने कहा कि उन्होंने घटना से पहले एक-दूसरे को फोन पर अपनी परेशानी बताई थी।

पुलिस ने उन फोन रिकॉर्ड की जांच की।

रिकॉर्ड में दोनों के बीच बातचीत होना सामने आया, लेकिन बातचीत में क्या कहा गया था, यह पता लगाने के लिए पुलिस ने उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की जांच शुरू की।

जांच अधिकारियों के सामने अब एक महत्वपूर्ण सवाल था—क्या दोनों महिलाओं ने उसी रात अचानक प्रतिक्रिया दी थी, या पहले से कोई योजना बनाई गई थी?

इस सवाल का जवाब घटनास्थल से मिले सबूतों और दोनों के बयानों के बीच संबंध से तलाशा जा रहा था।

गांव में सामने आया एक पुराना विवाद

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि करण सिंह की पत्नी की मृत्यु के बाद परिवार में संपत्ति के बंटवारे को लेकर भी तनाव था।

राकेश की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी दुर्गा और छोटे बेटे बृजेश के परिवार के बीच जमीन के भविष्य को लेकर कई बार चर्चा हुई थी।

करण सिंह कथित तौर पर जमीन अपने नियंत्रण में रखना चाहता था।

हालांकि, इन बातों का हत्या से सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती थी।

पुलिस ने परिवार के अन्य रिश्तेदारों से भी पूछताछ शुरू कर दी।

एक गवाह ने बताई अहम बात

जांच के दौरान एक ग्रामीण ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात उसने घर के आसपास असामान्य गतिविधि देखी थी।

उसने दावा किया कि रात में घर के अंदर से आवाजें आई थीं और कुछ देर बाद दोनों महिलाओं को घबराई हुई स्थिति में देखा गया था।

हालांकि, पुलिस ने इस बयान को भी अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर जांचने की बात कही।

अधिकारियों का कहना था कि किसी भी एक बयान के आधार पर घटना की पूरी तस्वीर तय नहीं की जा सकती।

अब अदालत में तय होगी कानूनी जिम्मेदारी

जांच पूरी होने के बाद पुलिस को यह तय करना होगा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किन धाराओं में आरोप लगाए जा सकते हैं।

दुर्गा और शिवानी के अपने ऊपर लगाए गए कथित यौन हिंसा और धमकी के आरोप भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए थे।

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो घटना की परिस्थितियों को समझने में उनका महत्व हो सकता है।

लेकिन दूसरी ओर, किसी व्यक्ति पर आरोप लगना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है।

अदालत सभी उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों, मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट तथा दोनों पक्षों की दलीलों को देखने के बाद ही अंतिम निर्णय करेगी।

इस मामले ने गांव के सामने एक बेहद गंभीर सवाल छोड़ दिया है।

अगर किसी व्यक्ति को परिवार के भीतर हिंसा, धमकी या यौन अपराध का सामना करना पड़ रहा हो, तो वह समय रहते सुरक्षित तरीके से मदद कैसे प्राप्त करे?

कानून अपने हाथ में लेना स्थिति को और गंभीर बना सकता है।

ऐसी परिस्थितियों में पुलिस, कानूनी सहायता, महिला सहायता सेवाओं और भरोसेमंद लोगों से तुरंत संपर्क करना जरूरी है।

करण सिंह की मौत की जांच अभी जारी थी।

और पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल अब भी वही था—

उस रात घर के अंदर वास्तव में क्या हुआ था, और क्या सामने आई कहानी के पीछे कोई ऐसा सच था जिसे अभी तक किसी ने नहीं बताया था?

इस सवाल का जवाब जांच और अदालत की कार्यवाही से ही सामने आना था।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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