3 ससुराल की पहली रात में विनोद ने जो देखा, उससे बदल गई उसकी जिंदगी
भाग 3: तस्वीर के पीछे छिपा सच
अगली सुबह विनोद ने सबसे पहले उस पुराने लिफाफे को फिर से देखा।
तस्वीर में खड़ा आदमी उसकी फैक्ट्री का कर्मचारी था, लेकिन उसे अब भी समझ नहीं आ रहा था कि उसका पूनम के परिवार से क्या संबंध था।
विनोद ने अपनी फैक्ट्री में उसके बारे में पूछताछ शुरू की।
एक बुजुर्ग कर्मचारी ने बताया, “वह आदमी यहां कई सालों से काम कर रहा है। लेकिन कुछ साल पहले वह अचानक नौकरी छोड़कर चला गया था। बाद में फिर वापस आ गया।”
विनोद को यह बात अजीब लगी।
उसने पूछा, “क्या आपको पता है कि वह पहले कहां काम करता था?”
बुजुर्ग कर्मचारी ने कहा, “सुना था कि वह अरुणाचल प्रदेश के एक गांव में रहता था।”
विनोद चौंक गया।
अब उसे यकीन होने लगा कि यह संयोग नहीं था।
शाम को वह सीधे ससुराल पहुंचा और अपने ससुर को सारी बात बताई।
ससुर ने कुछ देर तक चुप रहने के बाद कहा, “मुझे भी यही शक था।”
तभी कमरे के बाहर खड़ी पूनम ने उनकी बातचीत सुन ली।
वह अंदर आई और बोली, “आप दोनों मुझसे क्या छिपा रहे हैं?”
विनोद और उसके ससुर एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।
आखिरकार ससुर ने पूनम को सब कुछ बता दिया।
तस्वीर देखते ही पूनम कुछ क्षणों के लिए बिल्कुल शांत हो गई।
फिर उसने धीमी आवाज में कहा, “मैं इस आदमी को जानती हूं।”
विनोद हैरान रह गया।
“तुम जानती हो?”

पूनम ने सिर हिलाया।
“जब मैं छोटी थी, तब यह आदमी हमारे गांव आया करता था। पिता जी उससे किसी पुराने काम को लेकर बात करते थे। लेकिन एक दिन अचानक पिता जी ने उससे सारे संबंध खत्म कर दिए थे।”
अब रहस्य और गहरा हो चुका था।
पूनम ने बताया कि उसके पिता ने कभी इस बारे में परिवार से ज्यादा बात नहीं की थी। केवल इतना कहा था कि उस आदमी पर भरोसा करना उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
विनोद ने तस्वीर को ध्यान से देखा।
तभी उसकी नजर तस्वीर के पीछे लिखी एक तारीख पर पड़ी।
तारीख वही थी, जब पूनम के पिता के परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ था।
विनोद ने कहा, “हमें पता लगाना होगा कि उस समय वास्तव में क्या हुआ था।”
तीनों ने पुराने कागजों को खंगालना शुरू किया।
काफी देर बाद उन्हें एक पुरानी रसीद मिली। उस पर उसी आदमी का नाम लिखा था।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि रसीद पर हस्ताक्षर किसी और के थे।
पूनम ने हस्ताक्षर देखते ही कहा,
“ये तो मेरी मां के हस्ताक्षर हैं।”
कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।
कांता भी वहां आ चुकी थीं।
उन्होंने कागज देखा और उनकी आंखों में चिंता साफ दिखाई देने लगी।
ससुर ने पूछा, “कांता, अब तुम्हें हमें सच बताना होगा।”
कांता ने काफी देर तक चुप रहने के बाद कहा,
“मैंने उस समय परिवार को बचाने के लिए एक फैसला लिया था। लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसका असर इतने साल बाद भी हमारे जीवन पर पड़ेगा।”
विनोद ने पूछा, “आखिर आपने क्या किया था?”
कांता ने जवाब देने के लिए मुंह खोला ही था कि बाहर किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी।
सबकी नजर दरवाजे की ओर चली गई।
दरवाजा खुला।
सामने वही आदमी खड़ा था, जिसकी तस्वीर विनोद के हाथ में थी।
वह कुछ क्षण तक सबको देखता रहा।
फिर उसने कहा,
“लगता है, अब तुम्हें सच बताने का समय आ गया है।”
विनोद के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था।
कांता ने कांपती आवाज में कहा,
“तुम इतने साल बाद यहां क्यों आए हो?”
उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने जेब से एक पुराना कागज निकाला और मेज पर रख दिया।
“इस कागज को पढ़ लो। इसके बाद तुम्हें समझ आ जाएगा कि असली गलती किसकी थी।”
विनोद ने कागज उठाया।
लेकिन जैसे ही उसने पहली पंक्ति पढ़ी, उसके हाथ कांपने लगे।
क्योंकि उसमें लिखा था—
“पूनम की शादी से पहले ही यह सच सामने आ जाना चाहिए था…”
विनोद ने धीरे-धीरे पूनम की ओर देखा।
अब उसे एहसास हो चुका था कि यह रहस्य केवल उसके ससुराल का नहीं था।
यह उसके अपने विवाह से जुड़ा हुआ था।