SDM की पत्नी ने नौकर को अपने साथ रखने का फ़ैसला किया |
SDM की पत्नी ने नौकर को अपने साथ रखने का फ़ैसला किया |
भोपाल – 25 सितंबर 2026
भोपाल के एक छोटे से इलाके में रहते हैं एसडीएम विनोद। वे 28 साल के हैं और हाल ही में अपनी पत्नी कनिका के साथ लव मैरिज कर चुके हैं। शादी के दो साल बाद एसडीएम पद पर उनकी तैनाती हो गई। काम का प्रेशर इतना ज्यादा हो गया कि कभी-कभी वे अपने बच्चों को भी समय नहीं दे पाते। उनकी पत्नी कनिका उन्हें समझाती, “कुछ समय हमें भी दे दीजिए, कुछ घूमने भी चलो।” लेकिन विनोद कहते, “मुझे समय नहीं मिल रहा। मेरे ऊपर इतना काम है कि मैं परिवार को भूल जाऊंगा।”
कनिका ने कहा, “मुझे एक नौकर रख लो जो घर और बाजार का काम संभाल ले।” विनोद ने ऑफिस में रवि को बुलाया और बोला, “मेरा भाई मोहन है, वह घर का काम कर सकता है।” रवि ने मोहन को बुलाया। मोहन एक साधारण, सीधा और वफादार लड़का था। विनोद ने उसे ₹25,000 महीना का वादा किया। मोहन खुश हुआ और काम शुरू कर दिया।
कनिका को मोहन की सेवा में बहुत मज़ा आने लगा। वह उसे अपने कामों में लगाती, हाथ-पैर दबवाती, मालिश करवाती और कभी-कभी सर पर हाथ फेरती। मोहन को यह सब काम करने में बहुत मज़ा आता था। वह कनिका से इतना प्यार करता था कि उसे कोई सवाल नहीं करता था।
एक दिन कनिका के पिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। कनिका ने विनोद को बताया, “पापा की तबीयत खराब है, हमें दिल्ली जाना है।” विनोद ने कहा, “मुझे मुख्यमंत्री के साथ काम है, इसलिए मोहन को ले चलो।” कनिका ने मोहन को अपने साथ दिल्ली ले जाया। दिल्ली में वे तीन-चार दिन रुके। मोहन ने कनिका की हर सेवा की। वह उसे घर का काम करवाता, बाजार ले जाता, दुकान पर मदद करता और हर रात उसे मालिश करवाता। कनिका को यह सब काम करने में बहुत मज़ा आता था।

वापस लौटते वक्त मोहन ने कहा, “मैडम, हम उसी होटल में रुकें जहां हम पहले गए थे।” दोनों वहां रुके और होटल के कमरे में रात गुजारी। कनिका ने मोहन से कहा, “तुम्हारी कोई शादीशुदा जैसी बेवफाई नहीं है। तुम मेरे साथ हर काम करते हो।” मोहन ने कहा, “मैडम, मैं मालकिन की तरह ही सेवा कर रहा हूं।” कनिका उसे पैसे देती और कहती, “तुम हमारे सबसे वफादार आदमी हो।”
विनोद को इस बात का शक होने लगा कि उनका भाई मोहन उनकी पत्नी की सेवा में इतना लगा हुआ है। वे गुस्से में मोहन को काम से निकालने का फैसला कर लेते हैं। कनिका से कहते हैं, “मुझे एक नया नौकर चाहिए जो शराब पीने वाला हो।” रमन नाम का नौकर आता है। रमन नशेड़ी और लालची था। वह कनिका को हर समय उपलब्ध रखने लगता था।
एक दिन रमन कनिका को नहाते देखकर पागल हो जाता है। वह उसके पीछे से पकड़ने की कोशिश करता है। कनिका भाग जाती है और तुरंत विनोद को फोन कर देती है। विनोद घर आते हैं, पूरे मामला जानते हैं और पुलिस को फोन कर देते हैं। रमन को गिरफ्तार कर लिया जाता है।
विनोद अब मोहन के पास जाते हैं। माता-पिता डर जाते हैं। विनोद कहते हैं, “मैं मोहन को लाया हूं। उसे वापस काम पर रखो। मैंने उनकी तनख्वाह बढ़ा दी है और ₹400 कर दी है।” मोहन रोते हुए विनोद के पैर छूता है और कहता है, “सर, आपकी गलती थी। मैं मालकिन की सेवा में लगा रहा हूं।” विनोद माफी मांगते हैं और मोहन को वापस ले लेते हैं।
कनिका अब मोहन को अपना सबसे वफादार आदमी मानती है। वह उसे हर काम पर लगाती रहती है। नया नौकर भी लाती रहती है, लेकिन मोहन को कभी काम पर नहीं रखती। विनोद भी कहते हैं, “हम आज के बाद नौकर नहीं बदलेंगे। मोहन हमारे सबसे वफादार आदमी हैं।”
सीख
यह कहानी सिर्फ एसडीएम विनोद और कनिका की नहीं। यह वफादारी, सच्ची सेवा और परिवार की मजबूती की कहानी है। मोहन ने नशा पीकर भी गलत काम नहीं किया। कनिका ने मोहन को प्यार दिया और विनोद ने उसे वापस लिया।
दोस्तों, इस कहानी से सीख मिलती है कि सच्चा नौकर कभी गलत नहीं करता। प्यार और वफादारी से हर मुसीबत पार हो जाती है। अगर कोई घर में वफादार आदमी हो तो उसकी सेवा में हर काम आसान हो जाता है।
आपकी राय क्या है?
- मोहन ने सही किया या गलती की?
- कनिका ने मोहन को प्यार क्यों किया?
- विनोद ने सही फैसला लिया?
- नया नौकर रमन ने क्या किया?
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जय हिंद। जय भोपाल।