PART 3 दामाद ऐसा करेगा सोचा नहीं था।
दामाद ऐसा करेगा सोचा नहीं था (भाग 3)
भाग 1: गांव में थू-थू और पंचायत का कड़ा फैसला
लवली के घर छोड़कर चले जाने के बाद, यह खौफनाक बात पूरे गांव में आग की तरह फैल गई। एक मां और उसके दामाद के बीच बने इस अ/नै/ति/क स/म्बंध और नीं/द क/ी गो/ली देकर बेटी को बेसुध करने की खबर से गांव के बड़े-बुजुर्ग स्तब्ध रह गए।
गांव के सरपंच ने तुरंत आपातकालीन पंचायत बुलाई। सरिता को सिर झुकाए पंचायत के बीच में खड़ा किया गया। गांव वालों ने सरिता पर लालच, वा/स/ना और ममता को कलंकित करने के गंभीर आरोप लगाए।
पंचायत ने एकमत होकर फैसला सुनाया— “जिस महिला ने अपनी सगी बेटी का दांपत्य जीवन उजाड़ दिया और अ/म/र्या/दि/त क/ृत्य किया, उसे इस समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।” पंचायत ने सरिता का पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) कर दिया और आदेश दिया कि गांव का कोई भी व्यक्ति उससे बातचीत नहीं करेगा।
भाग 2: लवली का साहसी कदम और पुलिस कार्रवाई
उधर, शहर जाकर लवली ने तय किया कि वह केवल चुप रहकर आंसू नहीं बहाएगी। उसने अपने चरित्रहीन पति प्रमोद और मां सरिता द्वारा की गई इस आपराधिक साजिश के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया।
लवली सीधे महिला थाना पहुंची और प्रमोद के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, खाने में नीं/द क/ी गो/ली मिलाकर श/ा/री/रि/क श/ो/ष/ण करने और ब्लै/क/मे/लिं/ग की लिखित शिकायत (FIR) दर्ज करवाई।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। जांच अधिकारी जब उस मेडिकल स्टोर पर पहुंचे जहां से प्रमोद ने नीं/द क/ी गो/लि/यां और पावर टेबलेट्स खरीदी थीं, तो सीसीटीवी फुटेज और बिल से प्रमोद की करतूत का पक्का सबूत मिल गया।
भाग 3: प्रमोद की गिरफ्तारी और जेल की सलाखें
पुलिस की एक टीम ने दबिश देकर प्रमोद को धर दबोचा। जब पुलिस की सख्त पूछताछ हुई, तो प्रमोद के पसीने छूट गए। उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि उसने अपनी सास सरिता के साथ मिलकर अपनी पत्नी को बेसुध करने के लिए जहरीली नीं/द क/ी गो/ली दी थी और सास को ब्लै/क/मे/ल करके अ/नै/ति/क क/ा/र्य/क्र/म को अंजाम दिया था।
न्यायालय ने प्रमोद की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे जेल भेज दिया। प्रमोद का ऑटो बिक गया, उसके माता-पिता ने भी उसकी इस नीच ह/व/स और घिनौने क/ृत्य के कारण उससे सारे रिश्ते तोड़ लिए। जो दामाद अपनी वासना के अहंकार में अंधा हो चुका था, अब वह जेल की सलाखों के पीछे पछतावे की रोटियां तोड़ रहा था।
भाग 4: सरिता की तन्हाई और मानसिक विक्षिप्तता
उधर अपने सूने घर में अकेली पड़ी सरिता की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। गांव का कोई भी राशन वाला उसे सामान नहीं देता था और ना ही कोई उससे बात करता था। रात के अंधेरे में उसे अपने ही क/ृ/त्यों और पापों का डर सताने लगा था।
सरिता को बार-बार अपनी बेटी लवली के वे शब्द याद आते जो उसने घर छोड़ते वक्त कहे थे। अपनी घटिया क/ा/म/ना और श/ा/री/रि/क ह/व/स के कारण सरिता ने अपनी बेटी, अपना घर और समाज में अपनी बची-कुची इज्जत सब कुछ खो दिया था।
गहरे अवसाद और घोर अपराधबोध के कारण सरिता का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा। वह दिन भर अपने ही घर के कोने में बैठकर रोती रहती और भगवान से मौत की भीख मांगती, लेकिन उसके पा/पो/ं की सजा अभी पूरी नहीं हुई थी।
भाग 5: लवली की नई शुरुआत और अंतिम सीख
इस भयंकर तूफान से गुजरने के बाद लवली ने खुद को टूटने नहीं दिया। उसने शहर में एक सिलाई केंद्र और ब्यूटी पार्लर का काम सीखा और अपने बलपूते पर जीना शुरू किया। उसने साबित कर दिया कि नारी अबला नहीं है और धोखा देने वाले चाहे पति हो या सगी मां, गलत का विरोध करना ही सच्चा धर्म है।
यह घटना आज भी समाज के लिए एक खौफनाक चेतावनी है कि जब व्यक्ति मर्यादा, नैतिक मूल्यों और पवित्र रिश्तों की सीमा लांघकर केवल श/ा/री/रि/क वा/स/ना और अ/नै/ति/क स/म्बंधों के पीछे भागता है, तो उसका अंत प्रमोद और सरिता जैसा ही दर्दनाक और बर्बादी से भरा होता है।