सलमान खान ने छोटी बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए किया बोन मैरो डोनेट, सालों पुरानी कहानी फिर हुई वायरल
सलमान खान ने छोटी बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए किया बोन मैरो डोनेट, सालों पुरानी कहानी फिर हुई वायरल
बॉलीवुड के ‘भाईजान’ को उनके करोड़ों प्रशंसक उनकी फिल्मों, स्टाइल और दमदार व्यक्तित्व के लिए जानते हैं। लेकिन उनकी जिंदगी का एक ऐसा पहलू भी है, जिसकी चर्चा अक्सर उनकी फिल्मों की चमक के पीछे दब जाती है—जरूरतमंद लोगों की मदद करने की उनकी कोशिश।
साल 2010 में सलमान खान से जुड़ी एक ऐसी ही घटना सामने आई थी, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। एक छोटी बच्ची को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। उसकी मदद के लिए सलमान खान आगे आए और उन्होंने भारत में बोन मैरो डोनेशन को लेकर जागरूकता फैलाने की पहल भी की।
यह कहानी आज भी इसलिए याद की जाती है क्योंकि इसमें एक बड़े फिल्म स्टार की लोकप्रियता से ज्यादा महत्वपूर्ण उनकी व्यक्तिगत भागीदारी और एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश थी।
एक छोटी बच्ची की कहानी ने सलमान को किया प्रभावित
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सलमान खान को करीब चार साल पहले पूजा नाम की एक बच्ची के बारे में पता चला था, जिसे बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत थी।
उस समय बोन मैरो डोनर की उपलब्धता भारत में एक बड़ी चुनौती थी। किसी जरूरतमंद मरीज के लिए उपयुक्त डोनर मिलना आसान नहीं होता।
पूजा की कहानी के बारे में जानने के बाद सलमान ने केवल सहानुभूति व्यक्त नहीं की, बल्कि खुद इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने का फैसला किया।
उन्होंने अपने फुटबॉल ग्रुप के लोगों को भी बोन मैरो डोनेशन के लिए आगे आने के लिए प्रेरित किया।
लेकिन अंतिम समय में कई लोग पीछे हट गए।
ऐसे समय में सलमान और उनके भाई आगे आए और दोनों ने बोन मैरो डोनेट किया। उस समय Marrow Donor Registry India यानी MDRI से जुड़े डॉ. सुनील पारेख ने इस पहल की पुष्टि की थी।
सलमान बने MDRI से जुड़े पहले डोनर्स में
साल 2010 की रिपोर्टों के मुताबिक सलमान खान MDRI से बोन मैरो डोनर के रूप में जुड़े और इस पहल को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया।
उनका उद्देश्य सिर्फ खुद डोनर बनना नहीं था। वह चाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ लोग बोन मैरो डोनेशन के बारे में जानकारी हासिल करें और जरूरत पड़ने पर मरीजों की मदद के लिए आगे आएं।
उस दौर में भारत में बोन मैरो डोनर्स की संख्या काफी कम बताई गई थी।
सलमान ने लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि किसी की जिंदगी बचाने के लिए डोनेशन के बारे में डरने के बजाय सही जानकारी हासिल करना जरूरी है।

सलमान ने लोगों से क्या अपील की थी?
सलमान खान ने बोन मैरो डोनेशन को लेकर लोगों से आगे आने की अपील की थी।
उनका संदेश सीधा था—अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति डोनर बनने के योग्य है, तो उसकी मदद किसी मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में सिर्फ जागरूकता की कमी ही समस्या नहीं है, बल्कि लोगों के डर और मानसिकता के कारण भी कई लोग डोनेशन से पीछे हटते हैं।
उनकी अपील ने इस विषय को आम लोगों और बॉलीवुड के बीच चर्चा में ला दिया।
उस समय उनकी charitable foundation ‘Being Human’ ने भी MDRI के साथ मिलकर बोन मैरो डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने का समर्थन किया था।
बोन मैरो आखिर होता क्या है?
बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा हमारे शरीर की हड्डियों के अंदर मौजूद नरम ऊतक होता है, जहां रक्त कोशिकाएं बनती हैं।
कुछ गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों में मरीज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट जीवनरक्षक उपचार का हिस्सा बन सकता है।
NDTV की उस समय की रिपोर्ट के अनुसार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत रक्त कैंसर, थैलेसीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया और कुछ अन्य गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों में पड़ सकती है।
हालांकि, बोन मैरो डोनेशन और ट्रांसप्लांट एक चिकित्सा प्रक्रिया है और डोनर की पात्रता तथा मरीज के साथ अनुकूलता का फैसला विशेषज्ञ डॉक्टर और संबंधित मेडिकल टीम करती है।
इसलिए किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया की जानकारी के आधार पर खुद मेडिकल निर्णय लेने के बजाय प्रमाणित चिकित्सा विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।
क्यों खास थी सलमान की पहल?
सलमान खान उस समय भारत के सबसे लोकप्रिय फिल्म सितारों में से एक थे।
ऐसे में जब कोई बड़ा सेलिब्रिटी किसी कम चर्चित स्वास्थ्य विषय को सार्वजनिक रूप से उठाता है, तो उस मुद्दे पर आम लोगों का अनुसार, उन्होंने अपने दोस्तों और बॉलीवुड से जुड़े लोगों को भी इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की को यह जानकर हैरानी हुई कि सलमान ने वर्षों पहले बोन मैरो डोने ने इस पुरानी घटना को दोबारा प्रकाशित किया और बताया कि 2010 में सल घटना नहीं है, बल्कि करीब डेढ़ दशक पुरानी कहानी है जो समय-समय पर दोर रजिस्ट्रियों के बारे में जानेंगे, उतनी ही संभावना बढ़ सकती है कि व्यक्तिगत और चिकित्सकीय निर्णय है। इसके लिए आधिकारिक डोनर रजिस्ट्री और जुड़ी यह पुरानी कहानी यह याद दिलाती है कि किसी की लोकप्रियता का इस्तेमाल सामाजिक जाग शुरू हुई यह कहानी सलमान खान और उनके भाई अरबाज खान के डोनेशन तक पहुंची और फिर भारत में बोन मैरो डोनेशन को लेकर शायद यही वजह है कि सलमान खान से जुड़ी यह कहानी उनकी फिल्मों और स्टारडम से ध्यान जाना स्वाभाविक है।
सलमान ने अपने स्टारडम का इस्तेमाल बोन मैरो डोनेशन की जरूरत के बारे में बात करने के लिए किया।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने दोस्तों और बॉलीवुड से जुड़े लोगों को भी इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की थी।
उनका संदेश यह था कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए एक डोनर की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
सालों बाद फिर वायरल हुई कहानी
जुलाई 2024 में सलमान खान के इस पुराने नेक काम की कहानी सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में फिर चर्चा में आई।
कई लोगों को यह जानकर हैरानी हुई कि सलमान ने वर्षों पहले बोन मैरो डोनेशन के लिए पहल की थी।
Hindustan Times और Times of India सहित कई मीडिया संस्थानों ने इस पुरानी घटना को दोबारा प्रकाशित किया और बताया कि 2010 में सलमान ने MDRI के साथ जुड़कर बोन मैरो डोनेशन किया था।
यानी यह कोई हाल की घटना नहीं है, बल्कि करीब डेढ़ दशक पुरानी कहानी है जो समय-समय पर दोबारा लोगों का ध्यान आकर्षित करती है।
सिर्फ स्टारडम नहीं, जागरूकता भी जरूरी
सलमान खान की इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि किसी गंभीर बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना भी मदद का एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है।
भारत जैसे विशाल देश में हजारों मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उपयुक्त डोनर की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे में जितने अधिक योग्य लोग डोनर रजिस्ट्रियों के बारे में जानेंगे, उतनी ही संभावना बढ़ सकती है कि जरूरत पड़ने पर किसी मरीज को उपयुक्त मैच मिल सके।
हालांकि डोनर बनना व्यक्तिगत और चिकित्सकीय निर्णय है। इसके लिए आधिकारिक डोनर रजिस्ट्री और डॉक्टरों से सही जानकारी लेना जरूरी है।
सलमान की कहानी ने छोड़ा बड़ा संदेश
फिल्मी दुनिया में सितारों की जिंदगी अक्सर ग्लैमर, कैमरों और सुर्खियों से जुड़ी होती है।
लेकिन सलमान खान की बोन मैरो डोनेशन से जुड़ी यह पुरानी कहानी यह याद दिलाती है कि किसी की लोकप्रियता का इस्तेमाल सामाजिक जागरूकता के लिए भी किया जा सकता है।
एक छोटी बच्ची की बीमारी की खबर से शुरू हुई यह कहानी सलमान खान और उनके भाई अरबाज खान के डोनेशन तक पहुंची और फिर भारत में बोन मैरो डोनेशन को लेकर चर्चा का हिस्सा बनी।
आज, वर्षों बाद जब यह कहानी फिर सामने आती है, तो इसका संदेश अब भी प्रासंगिक है—
किसी जरूरतमंद की मदद करने के लिए हमेशा करोड़ों रुपये की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी सही समय पर उठाया गया एक छोटा-सा कदम भी किसी के लिए बहुत बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।