होली के दिन बेटी ने माता पिता के साथ कर दिया कारनामा/पुलिस के भी होश उड़ गए/ – News

होली के दिन बेटी ने माता पिता के साथ कर दिया कारनामा/पुलिस के भी होश उड़ गए/

होली के दिन बेटी ने माता पिता के साथ कर दिया कारनामा/पुलिस के भी होश उड़ गए/

होली के दिन बेटी ने माता-पिता के साथ कर दिया खौफ़नाक कांड: मेरठ का सनसनीखेज मामला

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई, जिसने न केवल पूरे प्रशासन और पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया, बल्कि समाज और पारिवारिक रिश्तों के वजूद पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह कहानी है गरीबी, लालच, श/राब की घातक लत और एक मासूम बेटी के स्वाभिमान की ब/लि चढ़ाने की, जिसके अंत में एक ऐसा खौ/फ़नाक मंजर देखने को मिला जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।

1. खासपुर गाँव का लखन सिंह और गरीबी का साया

मेरठ जिले के खासपुर गाँव में लखन सिंह नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहता था। लखन सिंह गाँव के बड़े-बड़े ज़मींदारों के खेतों में दिन-रात मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। वह स्वभाव से बहुत ही मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था। कई सालों की खून-पसीने की कमाई से उसने कुछ पैसे भी जोड़ रखे थे।

लेकिन वक्त के साथ लखन सिंह को श/राब पीने की बुरी लत लग गई। धीरे-धीरे यह लत इस कदर हावी हो गई कि लखन को अंदाजा ही नहीं रहा कि कब श/राब उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन चुकी थी। मेहनत से जोड़ी गई पाई-पाई श/राब के नशे में उड़ गई। देखते ही देखते हंसता-खेलता परिवार बेहद तंगहाली और घोर गरीबी के आगोश में समा गया।

लखन के परिवार में उसकी पत्नी सुंदरी देवी थी। सुंदरी देवी देखने में बेहद खूबसूरत महिला थी। गाँव का जो भी व्यक्ति उसे एक नज़र देख लेता, देखता ही रह जाता था। परिवार में उनकी 14 वर्षीय बड़ी बेटी अंजलि भी थी, जो नौवीं कक्षा में पढ़ती थी। अंजलि पढ़ाई-लिखाई में काफी होशियार और समझदार लड़की थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि भविष्य में यही अंजलि अपने ही माता-पिता के साथ एक खौ/फ़नाक वारदात को अंजाम देने वाली थी।

2. ज़मींदार नसीब सिंह की कुदृष्टि और पहला सौदा

खासपुर गाँव का एक बड़ा ज़मींदार था—नसीब सिंह। नसीब सिंह बेहद अय्याश और अ/नैतिक चरित्र का इंसान था। वह गाँव की खूबसूरत महिलाओं पर बुरी नज़र रखता था और उन्हें पैसों व काम का लालच देकर अपने खेतों में बुलाकर ग/लत काम किया करता था।

नसीब सिंह को खबर मिली कि लखन सिंह आजकल बेरोजगार बैठा है और श/राब की लत के कारण कोई ज़मींदार उसे काम पर नहीं रख रहा। नसीब सिंह यह भी जानता था कि लखन की पत्नी सुंदरी देवी बेहद खूबसूरत है। उसने सुंदरी को हासिल करने की एक नापाक योजना बनाई।

10 फरवरी 2026 की सुबह करीब 8:00 बजे नसीब सिंह लखन के घर पहुँचा। उसने लखन को अपने खेतों में काम करने की पेशकश की। लखन और सुंदरी दोनों बेहद खुश हुए कि उनके अच्छे दिन आने वाले हैं। लखन ने अगले ही दिन से नसीब सिंह के खेत पर काम करना शुरू कर दिया।

17 फरवरी 2026 की सुबह नसीब सिंह ने खेत पर लखन को श/राब पिलाई। जब लखन पूरी तरह नशे में धुत्त हो गया, तो नसीब सिंह ने ₹5,000 और श/राब की एक बोतल का लालच देकर लखन से उसकी पत्नी सुंदरी देवी को खेत पर बुलाने को कहा। श/राब और पैसों के लालच में अंधे हो चुके लखन ने तुरंत सुंदरी को फोन करके बुला लिया।

खेत पर पहुँचने के बाद लखन ने सुंदरी को पैसों का सौदा बता दिया। सुंदरी देवी भी चुपचाप मान गई। नसीब सिंह उसे खेत में बने कमरे के अंदर ले गया और बंद कमरे में उनके बीच अ/नैतिक सं/बंध कायम हुए। इसके बदले नसीब सिंह ने सुंदरी को और पैसे दिए, जिन्हें लेकर वह घर लौट आई।

3. बेटी अंजलि का जन्मदिन और ज़मींदारों की हैवानियत

24 फरवरी 2026 को अंजलि का जन्मदिन था। अंजलि ने अपनी माँ सुंदरी से नया मोबाइल फोन खरीदने की ज़िद की। लेकिन घर में पैसे नहीं थे। सुंदरी ने लखन से बात की, पर लखन के पास भी पैसे नहीं थे।

लखन जब खेत पर गया, तो उसने नसीब सिंह से ₹15,000 की मदद माँगी। उसी समय नसीब सिंह का दोस्त चेतन ज़मींदार भी वहाँ पहुँच गया। चेतन भी नसीब सिंह की तरह ही अ/नैतिक प्रवृत्ति का इंसान था। दोनों ज़मींदारों ने बैठकर श/राब पीना शुरू किया और लखन को भी पिलाई।

नशे में धुत होकर नसीब और चेतन ने फिर से सुंदरी को खेत पर बुलाने की शर्त रखी। लखन ने सुंदरी को फोन किया। सुंदरी जब खेत पर पहुँची, तो उसने बेटी के फोन के लिए ₹15,000 की माँग रखी। चेतन जमींदार ने तुरंत ₹15,000 दे दिए। इसके बाद नसीब और चेतन दोनों ज़मींदारों ने सुंदरी देवी के साथ कमरे में अ/नैतिक सं/बंध बनाए।

उस रात करीब 8:30 बजे लखन और सुंदरी ने अंजलि का जन्मदिन मनाया और उसे नया फोन उपहार में दिया। अंजलि बहुत खुश थी, लेकिन वह नहीं जानती थी कि यह फोन किस कदर उसकी माँ के जि/स्म के सौदे से आया है।

रात 10:00 बजे नसीब और चेतन श/राब लेकर लखन के घर पहुँच गए। जब तीनों श/राब पी रहे थे, तब अंजलि की आँख खुल गई। उसने देखा कि दोनों ज़मींदार उसके घर में मौजूद हैं। कुछ देर बाद ज़मींदार सुंदरी देवी को दूसरे कमरे में ले गए और उसके साथ रात बिताई। अंजलि ने सब कुछ अपनी आँखों से देख लिया और कानों से सुन लिया। उसे अहसास हो गया कि उसके माता-पिता गलत और ग/ंदे धं/धे में लिप्त हो चुके हैं।

4. चंद पैसों के लिए बेटी का खौफ़नाक सौदा

1 मार्च 2026 की सुबह लखन फिर खेत पर काम करने गया। वहाँ नसीब और चेतन दोनों बैठकर श/राब पी रहे थे। उन्होंने लखन को भी नशा कराया। नशे में धुत होने पर चेतन ज़मींदार ने एक घिनौनी माँग रखी। उसने कहा— “लखन, आज तुम्हारी पत्नी से काम नहीं चलेगा। तुम्हारी बेटी अंजलि अब बड़ी हो चुकी है, उसे खेत पर बुलाओ।”

शुरुआत में लखन चुप रहा, लेकिन जब चेतन ने ₹1 लाख देने का लालच दिया, तो लखन का ज़मीर पूरी तरह मर गया। लखन ने सुंदरी को फोन करके अंजलि को साथ लेकर खेत पर आने को कहा। जब सुंदरी ने हिचकिचाहट जताई, तो लखन ने ₹1 लाख मिलने की बात बताई। पैसों के लालच में सुंदरी की नीयत भी डोली और उसने भी अपनी ही 14 साल की मासूम बेटी का सौदा स्वीकार कर लिया।

सुंदरी बहाने से अंजलि को खेत ले आई। अंजलि ने जब दोनों ज़मींदारों को देखा, तो उसे अनहोनी का अहसास हो गया। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, दोनों हैवान ज़मींदार मासूम अंजलि को कमरे में ले गए और उसके साथ ग/लत काम किया।

जब काम खत्म हुआ, तो लखन और सुंदरी अपनी बेटी अंजलि को लेकर घर आ गए। अंजलि अपने कमरे में गुमसुम लेट गई। उसकी आत्मा छलनी हो चुकी थी। उसके अपने ही माता-पिता ने चंद रुपयों के लिए उसकी अस्मत का सौदा कर दिया था।

5. ताऊ-ताई की बेरुखी और अंजलि का मानसिक तनाव

इस दर्दनाक हादसे के बाद अंजलि बुरी तरह टूट चुकी थी। वह कई बार अपने ताऊ राजेश और ताई मीनाक्षी के घर गई और रो-रोकर पूरी दास्तान सुनाई। लेकिन ताऊ-ताई ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया— “यह तुम्हारे अपने घर-परिवार का मामला है, हम इसमें कोई दखलंदाज़ी नहीं कर सकते।”

हर तरफ से निराश और लाचार हो चुकी अंजलि के मन में अब गहरे प्रतिशोध और आक्रोश की ज्वाला सुलगने लगी थी। उसे लगने लगा था कि उसके माता-पिता आगे भी उसका सौदा करते रहेंगे और उसकी जिंदगी नरक बना देंगे।

6. 3 मार्च 2026: होली की खौफ़नाक रात और महा-संहार

3 मार्च 2026 की रात करीब 9:00 बजे चेतन ज़मींदार ने लखन को फोन करके अंजलि को दोबारा अपने घर भेजने को कहा। लखन और सुंदरी ने अंजलि पर दबाव बनाया कि वह चेतन के घर चली जाए।

आज अंजलि के चेहरे पर कोई डर नहीं था। उसने शांत स्वर में कहा— “तुम चिंता मत करो, मैं चली जाऊँगी। तुम लोग खाना खाकर सो जाओ, मैं रात 11:00 बजे जाऊँगी और काम खत्म करके लौट आऊँगी।”

माता-पिता बेफिक्र होकर खाना खाकर अपने कमरे में सो गए।

रात के सन्नाटे में, अंजलि अपने बिस्तर से उठी। उसके आँखों में आँसू नहीं, बल्कि बदले की आग थी। उसने घर के कोने में रखी चारा काटने वाली तेज़ धारदार दराँ/ती उठाई। वह दबे पाँव अपने माता-पिता के कमरे में दाखिल हुई।

सबसे पहले उसने सो रही माँ सुंदरी देवी का गला दराँ/ती से काट दिया। सुंदरी के मुँह से ची/ख तक नहीं निकल सकी और मौके पर ही उसका प्रा/ण पखेरू उड़ गया। इसके तुरंत बाद अंजलि ने अपने पिता लखन सिंह के गले पर भी दराँ/ती से ताबड़तोड़ वार करके उसका गला रें/त दिया। कमरे की दीवारें और फर्श ख़ू/न से लाल हो गए।

7. आत्मसमर्पण, पुलिस की तफ़तीश और अंत

अपने माता-पिता की ह/त्या करने के बाद अंजलि सीधे अपने ताऊ राजेश के घर पहुँची। ख़ू/न से सने कपड़ों में अंजलि ने ताऊ को पूरी बात बताई— “मैंने उन दोनों का काम खत्म कर दिया है जो मुझे बेचने में लगे थे।”

राजेश के होश उड़ गए। उसने तुरंत पास के पुलिस स्टेशन में फोन किया। करीब एक घंटे में पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने कमरे से लखन सिंह और सुंदरी देवी के ख़ू/न से लथपथ श/व बरामद किए और पो/स्टमार्टम के लिए भेजे।

पुलिस ने 14 वर्षीय अंजलि को मौके से ही गिर/फ़तार कर लिया। जब थाने की हवालात में पुलिस अधिकारियों ने अंजलि से पूछताछ की और उसने अपनी आपबीती सुनाई, तो कड़क पुलिस अफ़सरों के भी रोंगटे खड़े हो गए। पुलिस यह सोचकर दंग रह गई कि किस तरह श/राब की लत और पैसों के अंधे लालच में माता-पिता अपनी ही मासूम बेटी के सौदेबाज़ बन गए थे।

निष्कर्ष और सीख

मेरठ के खासपुर गाँव का यह दर्दनाक कांड समाज के सामने कई कड़वे सवाल छोड़ जाता है:

  1. श/राब का दुष्परिणाम: श/राब की लत इंसान से उसकी इंसानियत और ज़मीर छीन लेती है।
  2. लालच का अंत: मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों को बेचकर कमाया गया पैसा केवल तबाही और म/ौत का रास्ता खोलता है।
  3. कानूनी न्याय: अंजलि फिलहाल बाल सुधार गृह और अदालत के कानूनी शिकंजे में है। अदालत यह तय करेगी कि कानून की नज़र में उसका यह कदम किस सजा का हकदार है, लेकिन इस घटना ने पूरे समाज को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है।

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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