उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery – News

उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery

उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery

उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत: 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा!

(Sushant Singh Rajput Case Mystery)

प्रस्तावना: बंद कमरे का भयानक सच

म/र/ने से पहले की कुछ आखिरी ख्वाहिशें और सुशांत सिंह राजपूत को लेकर फाइनली एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा सामने आ चुका है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाएगी। उस बंद कमरे के पीछे का वह भयानक सच, जिसे सालों से बहुत ही शातिराना तरीके से मीडिया और पूरे देश की जनता से छिपाकर रखा गया था, आज कई सवाल खड़े करता है।

आज का सबसे बड़ा और रोंगटे खड़े कर देने वाला सवाल यही है कि आखिर उस आखिरी रात ऐसा क्या हुआ था कि सुशांत सिंह राजपूत को अपने ही कमरे में अपनी जिंदगी के लिए दूसरों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ा?

सोचिए, जो लड़का दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) में टॉप कर चुका था, जो करोड़ों नौजवानों को मुश्किल से मुश्किल हालात में सीना तानकर लड़ना सिखाता था, वह उस रात बेबस होकर किन लोगों के सामने हाथ जोड़ रहा था? ऐसा कौन सा चक्रव्यूह उस रात बांद्रा वाले फ्लैट में रचा गया था, जिसके आगे एक हंसता-खेलता, चांद-तारों की बातें करने वाला इंसान पूरी तरह लाचार हो गया?

यह कहानी सिर्फ किसी एक घटना की नहीं है, बल्कि यह उस घि/नौ/ने और ताकतवर सिंडिकेट की है, जिसने धीरे-धीरे एक मासूम आउटसाइडर के चारों तरफ दलदल बना दिया था।

1. पटना से मुंबई तक का सफर और असाधारण टैलेंट

कहानी की शुरुआत होती है बिहार की राजधानी पटना से, जहां से एक साधारण परिवार का लड़का अपनी आंखों में बहुत बड़े सपने लेकर निकला था। सुशांत कोई आम लड़का नहीं था। उसका दिमाग आम फिल्मी सितारों जैसा बिल्कुल नहीं था। वह किताबों का दीवाना था, साइंस और स्पेस में उसकी गहरी दिलचस्पी थी और कोडिंग उसका पैशन था।

जब उसने मुंबई की इस माया नगरी में अपने कदम रखे, तो उसके पास न तो किसी बड़े खानदान का सरनेम था और न ही कोई तथाकथित गॉडफादर, जो उसके लिए प्रोड्यूसर्स के दरवाजे खुलवा सके। उसने ग्राउंड लेवल से शुरुआत की:

  • बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम किया।
  • फिर टीवी सीरियल्स में आया और ‘पवित्र रिश्ता’ के जरिए वह हर हिंदुस्तानी घर के ड्राइंग रूम का सबसे चहेता बेटा और भाई बन गया।

लेकिन सुशांत की उड़ान सिर्फ छोटे पर्दे तक सीमित रहने वाली नहीं थी। जब उसने बड़े पर्दे का रुख किया और फिल्म ‘काई पो चे!’ से डेब्यू किया, तो पूरी फिल्म इंडस्ट्री हैरान रह गई। इसके बाद जब उसने ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में काम किया, तो उसने एक्टिंग की ऐसी मिसाल पेश की जिसे देखकर बड़े-बड़े स्टार किड्स और बॉलीवुड के पुराने ठेकेदारों के पसीने छूट गए। धोनी के किरदार में सुशांत ने खुद को इस कदर ढाल लिया था कि लोग स्क्रीन पर धोनी और सुशांत में फर्क करना भूल गए थे।

फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई की और सुशांत सिंह राजपूत रातों-रात एक ऐसा ग्लोबल ब्रांड बन गए, जिसकी डिमांड हर बड़े डायरेक्टर के ऑफिस में होने लगी। यही वह मुकाम था, जहां से बॉलीवुड के कुछ खास कैंप्स और ताकतवर सिंडिकेट्स की रातों की नींद उड़नी शुरू हो गई थी।

2. बॉलीवुड का सिंडिकेट और सुशांत की सादगी

बॉलीवुड का एक बहुत ही कड़वा और अनकहा नियम यह रहा है कि यहां वही आउटसाइडर टिक सकता है जो किसी बड़े खानदान के आगे जी-हुजूरी करे, उनकी पार्टियों में हाथ जोड़कर खड़ा रहे और उनके कैंप का गुलाम बनकर काम करे। लेकिन सुशांत की रगों में जो खून था, वह किसी के सामने झुकना नहीं जानता था।

वह अपनी शर्तों पर काम करने वाला इंसान था। शूटिंग खत्म होने के बाद फिल्मी गॉसिप्स और श/रा/ब की पार्टियों में जाने के बजाय वह अपने घर की बालकनी में लाखों का टेलीस्कोप लगाकर अंतरिक्ष के तारों को निहारता था। वह अपने खाली वक्त में क्वांटम फिजिक्स की किताबें पढ़ता था और नए टेक स्टार्टअप्स पर रिसर्च करता था।

यह बात इंडस्ट्री के उन आकाओं को बुरी तरह खटकने लगी जो यह मानते थे कि सिनेमा उनकी बपौती है। उन्हें यह बर्दाश्त ही नहीं हो रहा था कि पटना से आया एक सीधा-साधा लड़का बिना उनके तलवे चाटे इतना बड़ा सुपरस्टार कैसे बनता जा रहा है। इसी इनसिक्योरिटी और डर की वजह से उस बड़े सिंडिकेट ने अंदर ही अंदर सुशांत के खिलाफ एक बहुत ही खामोश लेकिन बेहद खतरनाक जंग छेड़ दी थी।

3. साइकोलॉजिकल खेल और अलग-थलग करने की साजिश

सुशांत को अलग-थलग करने का यह खेल शुरुआत में बहुत ही साइलेंट तरीके से खेला गया। साल 2016 और 2017 के उस दौर के बड़े अवार्ड फंक्शंस, रेड कारपेट्स और हाई-प्रोफाइल पार्टियों में सुशांत के साथ एक सोची-समझी साजिश के तहत साइकोलॉजिकल गेम खेला जा रहा था:

  • जब भी सुशांत किसी इवेंट में आते, तो इंडस्ट्री के बड़े-बड़े ए-लिस्ट सितारे उन्हें देखकर जानबूझकर अपना मुंह फेर लेते थे।
  • जब सुशांत स्टेज पर अवार्ड लेने या देने जाते थे, तो उनके जोक्स पर जानबूझकर सन्नाटा खींचा जाता था ताकि उनका कॉन्फिडेंस गिर जाए।
  • कई पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर उनके बैकग्राउंड और सीधेपन का मजाक उड़ाने की कोशिशें की गईं।
  • सोशल मीडिया पर एक खास पीआर लॉबी एक्टिव कर दी गई, जिसका काम सिर्फ सुशांत की फिल्मों के रिव्यू खराब करना और उनके नाम के साथ मनगढ़ंत अफवाहें फैलाना था।

लेकिन सुशांत बहुत ही सुलझे हुए और मजबूत इंसान थे। वह चेहरे पर मासूम सी स्माइल लिए इन सारी हरकतों को इग्नोर करते रहे। उन्हें लगता था कि अगर वह चुपचाप अपने काम पर फोकस करेंगे और अपनी मेहनत से जवाब देंगे, तो एक दिन यह सारा विरोध अपने आप खत्म हो जाएगा। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि जिस सिस्टम से वह लड़ रहे थे, वह पर्दे के पीछे किस हद तक गिर सकता है।

4. साल 2017 का वो वाकया और सलमान खान से टकराव

साल 2017 में एक ऐसा वाकया घटा जिसने सुशांत और बॉलीवुड के रसूखदार चेहरे सलमान खान के बीच एक खुली रंजिश की शुरुआत कर दी। धोनी फिल्म की ऐतिहासिक कामयाबी के बाद सलमान खान की प्रोडक्शन कंपनी (SKF) भी सुशांत को लेकर एक बड़ा प्रोजेक्ट प्लान कर रही थी। सलमान की टीम और सुशांत के बीच शुरुआती बातचीत भी चल रही थी।

तभी एक हाई-प्रोफाइल पार्टी में सब कुछ उलट-पुलट हो गया:

  1. उस पार्टी में सूरज पंचोली भी मौजूद थे, जिन्हें सलमान अपना मेंटोर मानते थे।
  2. पार्टी के दौरान किसी बात को लेकर सुशांत सिंह राजपूत और सूरज पंचोली के बीच तीखी बहस हो गई।
  3. मामला शांत होने के बाद सूरज पंचोली ने सीधे अपने गॉडफादर सलमान खान को फोन लगाकर बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर दिया।

जब यह बात सलमान तक पहुंची, तो उन्होंने इसे अपने ईगो की लड़ाई बना लिया और सीधे सुशांत सिंह राजपूत को फोन लगा दिया। फोन पर सलमान का लहजा बेहद तल्ख और गुस्से से भरा था। उन्होंने सूरज पंचोली से उलझने को लेकर सुशांत को जमकर लताड़ना शुरू कर दिया।

लेकिन सुशांत एक स्वाभिमानी और आत्मसम्मान से समझौता न करने वाले इंसान थे। सुशांत ने फोन पर दबने के बजाय बहुत ही शांत लेकिन दो टूक शब्दों में सलमान से कहा कि गलती उनकी नहीं थी, और वह किसी की बेवजह बदतमीजी बर्दाश्त नहीं करेंगे और न ही झूठी माफी मांगेंगे।

सुशांत का यह बेबाक रवैया सलमान खान के लिए एक बड़ा झटका था। इस फोन कॉल के तुरंत बाद सलमान ने सुशांत के साथ बनने वाली उस बड़ी फिल्म को फौरन कैंसिल करवा दिया। इतना ही नहीं, इंडस्ट्री में अनऑफिशियल मैसेज फैला दिए गए कि सुशांत को नए प्रोजेक्ट्स में साइन करने से पहले दस बार सोचा जाए। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब रिपोर्टर ने सुशांत के बारे में पूछा, तो सलमान ने बेरुखी से कहा था— “कौन सुशांत? कौन है सुशांत सिंह राजपूत?”

5. ‘ड्राइव’ फिल्म की साजिश और ‘छिछोरे’ से करारा जवाब

यह रंजिश 2018 और 2019 के दौरान और गहरी होती चली गई। करण जौहर की फिल्म ‘ड्राइव’ (Drive) में सुशांत सिंह राजपूत और जैकलिन फर्नांडिस लीड रोल में थे।

इस फिल्म के साथ जो किया गया, वह किसी भी एक्टर का मनोबल तोड़ने के लिए काफी था:

  • फिल्म को जानबूझकर 2 साल तक डिब्बे में बंद रखा गया।
  • मार्केट में ऐसी नेगेटिव खबरें फैलाई गईं कि इसकी एडिटिंग और VFX घटिया हैं।
  • अंत में बिना किसी प्रमोशन के इसे थिएटर्स के बजाय सीधे ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर डंप कर दिया गया ताकि सुशांत की मार्केट वैल्यू क्रैश हो जाए।

सुशांत अंदर से दुखी जरूर हुए, लेकिन उनका हौसला टूटा नहीं। उन्होंने इस वार का जवाब अपनी शानदार फिल्म ‘छिछोरे’ (Chhichhore) से दिया। जब ‘छिछोरे’ रिलीज हुई, तो उसने बॉक्स ऑफिस पर 150 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस करके यह साबित कर दिया कि दर्शक सुशांत के टैलेंट के दीवाने हैं। इस सफलता ने विरोधियों के कैंप में खलबली मचा दी।

6. बिग बॉस के सेट पर हुआ थ/प्प/ड़ कांड और हा/था/पा/ई

साल 2018 के आखिर में जब फिल्म ‘केदारनाथ’ रिलीज होने वाली थी, तब सारा अली खान और सुशांत सिंह राजपूत ‘बिग बॉस’ के सेट पर प्रमोशन के लिए गए थे।

कैमरे के सामने सब नॉर्मल दिख रहा था, लेकिन बैकस्टेज पर सुशांत और शो के होस्ट के बीच जबरदस्त खिंचाव था।

बैकस्टेज की घटना:

  • सेट के लॉबी एरिया में एक बैकग्राउंड डांसर अपनी गर्लफ्रेंड से वीडियो कॉल पर बात कर रहा था।
  • उसकी गर्लफ्रेंड के कहने पर जब उसने कैमरा घुमाया, तो फ्रेम में होस्ट और सुशांत सिंह राजपूत आ गए, जिनके बीच तीखी बहस और गाली-गलौज चल रही थी।
  • गुस्से में आकर होस्ट ने अपना आपा खो दिया और सुशांत सिंह राजपूत के ऊपर हा/थ उ/ठा दिया। सुशांत को थ/प्प/ड़ मा/रा गया और ध/क्का-मु/क्की की गई।
  • वीडियो कॉल पर उस लड़की ने तुरंत स्क्रीन रिकॉर्डिंग ऑन कर ली थी।
  • घटना के तुरंत बाद सिक्योरिटी गार्ड्स ने वहां खड़े लड़कों के फोन जबरन छीनकर जमीन पर प/ट/ककर तोड़ दिए।

लेकिन उस लड़की ने स्क्रीन रिकॉर्डिंग का छोटा सा हिस्सा और स्क्रीनशॉट्स अपने करीबी को भेज दिए थे, जो बाद में ‘गणेश’ नाम के शख्स तक पहुंचे। इस बे/इज्ज/ती और हिं/सा ने सुशांत की आत्मा को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था।

7. पेनड्राइव, डायरियां और सुशांत का मास्टर प्लान

2019 के आखिर तक सुशांत ने खुद को बॉलीवुड की पार्टियों से पूरी तरह अलग कर लिया और अपने बांद्रा वाले फ्लैट में समय बिताने लगे। लेकिन वह हार मानने वालों में से नहीं थे।

सुशांत ने अपने लैपटॉप, पर्सनल डायरियों और एक सीक्रेट पेनड्राइव में बॉलीवुड के अंदर चलने वाले काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा तैयार करना शुरू कर दिया:

  • फर्जी और शोषणकारी कॉन्ट्रैक्ट्स।
  • पैसों का हेरफेर और हवाला।
  • अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट्स का दबाव।
  • उनके साथ घटी तमाम 13 बड़ी घटनाओं के पुख्ता सबूत।

जून 2020 का पहला हफ्ता शुरू होते ही सुशांत को अहसास होने लगा था कि उनका पीछा किया जा रहा है और फोन टैप हो रहे हैं। सुशांत ने 15 या 16 जून को एक नेशनल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का प्लान बनाया था, जिसमें वह सारे सबूत और नाम देश की जनता के सामने रखने वाले थे।

लेकिन यह खबर सिंडिकेट तक लीक हो गई। 8 जून को सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा साल्यान की सं/दि/ग्ध अवस्था में मौ/त हो गई। दिशा की अचानक हुई मौ/त से सुशांत बुरी तरह डर गए थे और बार-बार कह रहे थे— “वह लोग मुझे भी नहीं छोड़ेंगे।”

8. 13 जून की काली रात: बेबसी और गिड़गिड़ाना

13 जून 2020 की रात बांद्रा की उस सोसाइटी में करीब 11:00 बजे के बाद कुछ अनजान गाड़ियां दाखिल हुईं।

सुशांत के फ्लैट के अंदर कुछ ताकतवर लोग घुसे। वहां सिर्फ बहस नहीं हुई, बल्कि वह डिजिटल डेटा, लैपटॉप और सीक्रेट पेनड्राइव छीनने के लिए मा/र-पी/ट और द/रिं/द/गी शुरू हो गई।

जब सुशांत ने झुकने से मना कर दिया, तो उन लोगों ने अपनी पूरी ताकत दिखा दी। जो लड़का अपनी डायरी में जिंदगी के 50 सपने लिख चुका था, वह उस रात उन है/वा/नों के सामने बेबस खड़ा था। जब सुशांत को अपनी जा/न जा/ती हुई दिखी, तो वह अपनी जिंदगी के लिए हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगे। लेकिन उन बंद दरवाजों के पीछे छिपे लोगों के दिलों में कोई रहम नहीं था।

9. 14 जून की सुबह और सबूत मिटाने की साजिश

14 जून की सुबह जब बांद्रा वाले फ्लैट का दरवाजा तोड़ा गया, तो सुशांत की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं। जिस जुबान को 24 घंटे बाद देश के सामने सबसे बड़ा सच बोलना था, उसे हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया था।

इसके बाद सिस्टम ने जिस तेजी से इसे खुदकुशी का रूप देने की कोशिश की, उसने कई सवाल खड़े किए:

  1. फोन सीलिंग में लापरवाही: जो मोबाइल तुरंत सील होना चाहिए था, वह 17 जून तक ऑन रहा और उसमें से चैट्स व फाइल्स डिलीट की जाती रहीं।
  2. पो/स्ट/मा/र्ट/म और मोर्चरी रिपोर्ट: कूपर अस्पताल के अटेंडेंट ने कैमरे के सामने खुलासा किया कि सुशांत के शरीर पर चो/टों के गंभीर निशान थे और गले पर निशान किसी पतली ता/र का था।
  3. मौ/त का समय गायब: एम्स (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड की जांच में पाया गया कि पो/स्ट/मा/र्ट/म रिपोर्ट से मौ/त का सही समय (Time of Death) ही गायब कर दिया गया था।
  4. CCTV फुटेज: सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज को मिटाया गया था, जिसमें अनजान चेहरे और पिछले गेट से बैग लेकर भागते लोग दिखे थे।

निष्कर्ष: खामोशी जो आज भी इंसाफ मांगती है

एक ऐसा नौजवान जो दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का टॉपर था, जिसने चांद पर जमीन खरीदी थी, जो नासा जाने और बच्चों को फ्री में स्पेस साइंस सिखाने के सपने देखता था—उसे डिप्रेशन का झूठा टैग देकर बदनाम करने की कोशिश की गई।

सुशांत सिंह राजपूत कोई कमजोर इंसान नहीं थे, वह उस भ्रष्ट सिस्टम से अकेले लड़ रहे थे। उस रात बंद कमरे में जो हुआ, कूपर अस्पताल की फाइलों में जो लीपापोती हुई और वह गायब पेनड्राइव—यह सारे सवाल आज भी चीख-चीख कर इंसाफ मांग रहे हैं। उस रात सुशांत भले ही बेबस होकर गिड़गिड़ाए हों, लेकिन उनकी खामोशी ने उस पूरे सिंडिकेट की बुनियाद हिलाकर रख दी।

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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