देहरादून का वो हत्याकांड जिसने रिश्तों को हिला दिया: करोड़ों का विवाद, कथित साजिश और बेटे की हत्या
देहरादून का वो हत्याकांड जिसने रिश्तों को हिला दिया: करोड़ों का विवाद, कथित साजिश और बेटे की हत्या
देहरादून, उत्तराखंड।
देहरादून को आमतौर पर शांत, खूबसूरत और अपेक्षाकृत सुरक्षित शहर के रूप में देखा जाता है। लेकिन फरवरी 2026 में शहर में हुई एक हत्या ने लोगों को झकझोर दिया।
11 फरवरी की सुबह वसंत विहार से निकला 40 वर्षीय कारोबारी अर्जुन शर्मा शायद यह सोचकर निकला था कि बाकी दिनों की तरह आज भी उसका दिन सामान्य रहेगा। उसे क्या पता था कि कुछ ही घंटों बाद शहर के बीचोंबीच उसकी जिंदगी खत्म हो जाएगी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि पुलिस के मुताबिक, यह कोई अचानक हुआ हमला नहीं था। जांच आगे बढ़ने पर कथित तौर पर सामने आया कि हत्या के पीछे करोड़ों रुपये का वित्तीय विवाद, पारिवारिक तनाव और कई लोगों के बीच बने जटिल रिश्तों की भूमिका हो सकती है।
हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों का अंतिम सच अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगा।
टेनिस खेलने निकला था अर्जुन
11 फरवरी 2026 की सुबह करीब 8 बजे अर्जुन अपने वसंत विहार स्थित किराए के मकान से निकला।
उसकी रोज की दिनचर्या काफी नियमित थी। वह अपनी मरून रंग की जीप से तिब्बती मार्केट की पार्किंग तक गया और वहां वाहन खड़ा करने के बाद परेड ग्राउंड की तरफ चला गया।
अर्जुन को टेनिस का शौक था और वह नियमित रूप से वहां खेलने जाता था।
करीब 8:30 से 9:30 बजे तक उसने टेनिस खेला। इसके बाद वह लगभग 9:45 बजे एक फल की दुकान पर पहुंचा।
दुकानदार के मुताबिक, अर्जुन ने फल खरीदा और कुछ देर बातचीत भी की।
लेकिन इसके कुछ ही मिनट बाद सब कुछ बदल गया।

भीड़भाड़ वाले बाजार में चली गोली
सुबह करीब 9:50 बजे अर्जुन अपनी गाड़ी की ओर वापस जा रहा था।
इसी दौरान एक स्कूटर पर सवार दो नकाबपोश युवक उसके पीछे पहुंचे।
पुलिस जांच के मुताबिक, पीछे बैठे व्यक्ति ने अर्जुन पर गोली चला दी। गोली उसके सीने में लगी और वह सड़क पर गिर पड़ा।
बाजार में अचानक गोली चलने से अफरा-तफरी मच गई।
लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने अर्जुन को मृत घोषित कर दिया।
घटना ने इसलिए भी चिंता पैदा की क्योंकि वारदात किसी सुनसान जगह पर नहीं, बल्कि शहर के व्यस्त इलाके में हुई थी।
तिब्बती मार्केट और परेड ग्राउंड के आसपास लगातार लोगों की आवाजाही रहती है। पुलिस मुख्यालय और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठान भी इस इलाके से बहुत दूर नहीं हैं।
फिर भी हमलावर गोली चलाकर फरार हो गए।
CCTV ने खोली जांच की पहली कड़ी
पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।
जांच में कथित तौर पर दो संदिग्ध दिखाई दिए, जो घटना से पहले एक दुकान के बाहर स्कूटर के साथ काफी देर तक मौजूद थे।
फुटेज में दोनों को आसपास नजर रखते हुए देखा गया।
इससे पुलिस को शक हुआ कि अर्जुन शायद अचानक चुना गया निशाना नहीं था।
दूसरी फुटेज में अर्जुन टेनिस खेलने के बाद बाजार की तरफ आता दिखाई दिया।
वह अपनी गाड़ी के पास गया, सामान रखा और फिर फल खरीदने चला गया।
पुलिस के मुताबिक, हमलावर पहले से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हो सकते थे।
लेकिन जांच की सबसे बड़ी दिशा तब बदली जब अर्जुन की पत्नी अभिलाषा शर्मा ने FIR दर्ज कराई।
पत्नी की शिकायत ने बदल दिया पूरा मामला
अभिलाषा ने हत्या के पीछे किसी अनजान दुश्मन का नाम नहीं लिया।
उन्होंने अपने ही परिवार और परिचित लोगों पर संदेह जताया।
शिकायत में अर्जुन की मां बीना शर्मा समेत कई लोगों के नाम सामने आए।
अब पुलिस के सामने दो अलग-अलग कड़ियां थीं।
एक तरफ CCTV में दिखाई देने वाले दो शूटर थे।
दूसरी तरफ परिवार के भीतर चल रहा करोड़ों रुपये का कथित विवाद।
सवाल था—क्या अर्जुन की हत्या के पीछे वास्तव में पारिवारिक और आर्थिक विवाद था?
अर्जुन का परिवार और पिता की विरासत
अर्जुन की कहानी केवल एक कारोबारी की कहानी नहीं थी।
उसके पिता कर्नल रमेश चंद्र शर्मा भारतीय सेना में थे और करीब चार दशक पहले एक युद्ध में शहीद हो गए थे।
उस समय अर्जुन और उसका बड़ा भाई अतुल बहुत छोटे थे।
पति की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक मदद के लिए सरकार की ओर से अर्जुन की मां बीना शर्मा को GMS रोड स्थित अमर दीप गैस सर्विस मिली थी।
समय के साथ यह गैस एजेंसी परिवार की महत्वपूर्ण आय का साधन बनी।
अर्जुन बड़ा हुआ तो उसने भी कारोबार की जिम्मेदारी संभाल ली।
वह खेलों का शौकीन था और टेनिस में उसकी विशेष रुचि थी। वह नियमित रूप से टेनिस खेलता था और खेलों से जुड़े आयोजनों में भी सक्रिय रहता था।
अपने शहीद पिता की याद में वह RC Memorial Football Tournament भी आयोजित करता था।
बाहर से देखने पर अर्जुन का जीवन सफल दिखाई देता था।
लेकिन परिवार के भीतर सब कुछ उतना शांत नहीं था।
दोस्ती से शुरू हुआ करोड़ों का विवाद
जांच में एक पुराने दोस्त का नाम सामने आया—विनोद उनियाल।
बताया जाता है कि अर्जुन और विनोद की दोस्ती लगभग 2008 के आसपास हुई थी, जब दोनों MBA की पढ़ाई के दौरान मिले थे।
दोनों के संबंध इतने अच्छे हो गए कि विनोद का शर्मा परिवार में नियमित आना-जाना था।
पुलिस जांच के अनुसार, बाद में विनोद ने अर्जुन के सामने निवेश का प्रस्ताव रखा।
कथित तौर पर बड़े रिटर्न का भरोसा देकर अर्जुन ने उसमें बड़ी रकम निवेश की।
शुरुआत में सब कुछ ठीक चलता दिखाई दिया।
लेकिन बाद में भुगतान को लेकर विवाद शुरू हो गया।
अर्जुन ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया और मामला धीरे-धीरे करोड़ों रुपये के विवाद में बदल गया।
यहीं से वर्षों पुरानी दोस्ती में दरार आने लगी।
मां और बेटे के बीच भी बढ़ गया तनाव
मामला तब और जटिल हो गया जब अर्जुन को कथित तौर पर पता चला कि परिवार से जुड़े कुछ वित्तीय लेनदेन विनोद से जुड़े खातों में हुए थे।
अर्जुन ने इसका विरोध किया।
उसे कथित तौर पर यह बात सबसे ज्यादा परेशान कर रही थी कि जिस व्यक्ति के साथ उसका करोड़ों रुपये का विवाद चल रहा था, उसी पर उसकी मां का भरोसा बना हुआ था।
धीरे-धीरे मां और बेटे के संबंध खराब होने लगे।
मामला इतना बढ़ा कि दोनों पक्ष पुलिस और अदालत तक पहुंच गए।
14 करोड़ की संपत्ति ने बढ़ाई उलझन
जांच में GMS रोड की एक पैतृक संपत्ति का विवाद भी सामने आया।
पुलिस और शिकायतों के मुताबिक, इस संपत्ति को लगभग 14 करोड़ रुपये में बेचने का समझौता हुआ था और खरीदार की ओर से करीब 8 करोड़ रुपये अग्रिम दिए गए थे।
आरोप यह भी सामने आया कि इस रकम का एक बड़ा हिस्सा विनोद से जुड़े खाते में ट्रांसफर किया गया।
अर्जुन ने इस सौदे का विरोध किया।
उसका कहना था कि संपत्ति में उसका भी कानूनी हित है और बिना उसकी सहमति के इसे बेचा नहीं जाना चाहिए।
मामला अदालत तक पहुंचा और संपत्ति को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया।
यानी परिवार के बीच तनाव अब सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं था।
यह पुलिस स्टेशन, अदालत और करोड़ों रुपये की संपत्ति तक पहुंच चुका था।
रिश्तों पर लगे गंभीर आरोप
जांच के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से बीना शर्मा और विनोद उनियाल के संबंधों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए।
अभियोजन का दावा था कि दोनों के बीच कारोबारी संबंधों से आगे व्यक्तिगत संबंध भी थे।
हालांकि, इस तरह के आरोपों को अदालत में प्रमाणित होना अभी बाकी है।
यही कथित संबंध अर्जुन और उसकी मां के बीच तनाव का एक और कारण बताए गए।
इस प्रकार मामले में तीन बड़ी कड़ियां जुड़ती दिखाई दीं—पैसे का विवाद, संपत्ति का विवाद और परिवार के भीतर बढ़ता तनाव।
हत्या की कथित साजिश कैसे सामने आई?
पुलिस के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर दो संदिग्ध शूटरों तक पहुंच बनी।
इनकी पहचान राजीव उर्फ राजू और पंकज राणा के रूप में बताई गई।
पुलिस का आरोप था कि दोनों ने पैसे लेकर अर्जुन की हत्या की।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, हत्या के लिए करीब 12 लाख रुपये की रकम तय होने की बात सामने आई, जिसमें कुछ रकम कथित तौर पर पहले दी गई थी।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि शूटरों के पास अर्जुन की तस्वीर और उसके वाहन से संबंधित जानकारी थी।
इससे जांचकर्ताओं को संदेह हुआ कि अर्जुन की रोजमर्रा की गतिविधियों की जानकारी पहले से जुटाई गई थी।
पुलिस के मुताबिक, घर से मिल रही थी जानकारी
जांच में गैस एजेंसी से जुड़े एक कर्मचारी का नाम भी सामने आया।
पुलिस के अनुसार, अर्जुन की गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई थी।
कर्मचारी को कथित तौर पर अर्जुन की दिनचर्या और उसके आने-जाने के बारे में पूछा जाता था।
लेकिन पुलिस के अनुसार, बाद में उसे संदेह हुआ और उसने ऐसी जानकारी देना बंद कर दिया।
उसने अर्जुन को सावधान भी किया था।
फिर भी 11 फरवरी की सुबह हमलावर अर्जुन तक पहुंचने में सफल रहे।
दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद खुली परतें
हत्या के अगले दिन पुलिस ने दो संदिग्धों को पकड़ा।
पुलिस के मुताबिक, दोनों मुठभेड़ के दौरान घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जांच एजेंसी ने दावा किया कि उनके पास से देसी पिस्तौल, कारतूस और घटना में इस्तेमाल किया गया स्कूटर बरामद हुआ।
पुलिस ने यह भी कहा कि पूछताछ के दौरान दोनों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की और कथित तौर पर पैसों के बदले हत्या करने की बात बताई।
इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ा।
बीना शर्मा, विनोद उनियाल और डॉ. अजय खन्ना समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की गई और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
विनोद की पत्नी का नाम भी शिकायत में सामने आया था, लेकिन पुलिस के अनुसार उस समय उनके खिलाफ पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं मिले थे।
मां को मिली अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति
इस मामले का सबसे भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब बीना शर्मा ने अपने बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी।
नैनीताल हाई कोर्ट ने मानवीय आधार पर उन्हें अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह अनुमति जमानत नहीं थी।
एक तरफ उन पर अपने बेटे की हत्या की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप था।
दूसरी तरफ वह उसी बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहती थीं।
यही विरोधाभास इस मामले को और भी जटिल बना देता है।
क्या अर्जुन को पहले से खतरा था?
मामले में एक और गंभीर सवाल सामने आया—क्या अर्जुन को पहले से अपनी जान का खतरा था?
अर्जुन के मित्रों के अनुसार, उसे कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं।
उसने पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की मांग भी की थी, ऐसा उसके मित्रों का दावा है।
वहीं, उसकी मां भी अलग समय पर अपनी सुरक्षा को लेकर शिकायत कर चुकी थीं और उन्हें पुलिस सुरक्षा मिलने की बात सामने आई।
इससे एक बड़ा सवाल उठता है—
जब किसी व्यक्ति को अपनी जान का खतरा महसूस हो और वह पुलिस तक अपनी बात पहुंचाए, तो ऐसी शिकायतों का आकलन कितनी तेजी और गंभीरता से किया जाना चाहिए?
यह सवाल सिर्फ इस मामले तक सीमित नहीं है। यह हर उस व्यक्ति की सुरक्षा से जुड़ा है जो विवाद के बीच खुद को खतरे में महसूस करता है।
एक परिवार, जिसने सब कुछ खो दिया
अर्जुन शर्मा की हत्या की जांच में अदालत का अंतिम फैसला अभी सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है।
पुलिस की जांच, FIR, CCTV, डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों के कथित बयानों के आधार पर कहानी की कई कड़ियां सामने आई हैं, लेकिन किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय से ही तय होगी।
फिर भी इस मामले ने एक बेहद कड़वी सच्चाई सामने रखी है।
कभी दोस्त रहे लोग विरोधी बन गए।
मां और बेटे के बीच संपत्ति और पैसों को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला अदालत और पुलिस तक पहुंच गया।
और आखिरकार एक जिंदगी चली गई।
करोड़ों रुपये की संपत्ति, वर्षों पुरानी दोस्ती और पारिवारिक रिश्ते—इन सबके बीच अर्जुन की हत्या ने एक परिवार की पूरी तस्वीर बदल दी।
सबसे बड़ा सवाल
अर्जुन की कहानी सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है।
यह इस बात का उदाहरण है कि जब पैसा, संपत्ति, पुराने विवाद और टूटते रिश्ते एक-दूसरे में उलझ जाते हैं, तो परिस्थितियां कितनी गंभीर हो सकती हैं।
लेकिन इस कहानी का अंतिम सच वही होगा जिसे अदालत साक्ष्यों के आधार पर स्वीकार करेगी।
आज भी इस मामले से जुड़े कई सवाल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच हैं।
और शायद सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या समय रहते टूटते रिश्तों और बढ़ते विवाद को संभाला जा सकता था, ताकि एक परिवार अपने ही भीतर इतना न टूटता कि बात मौत तक पहुंच जाती?
इसका जवाब अदालत और जांच की पूरी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।