बहु को जब सास की सच्चाई पता चली तो पति को सबकुछ बता दिया फिर जो हुआ। – News

बहु को जब सास की सच्चाई पता चली तो पति को सबकुछ बता दिया फिर जो हुआ।

बहु को जब सास की सच्चाई पता चली तो पति को सबकुछ बता दिया फिर जो हुआ।

एपिसोड: पागल बहू और सास की दर्दनाक कहानी

दोस्तों, रात के तकरीबन १:०० बजे का समय हो रहा था। उस समय एक ४५ साल की महिला जो कि अपने प्रेमी के साथ में आपत्तिजनक स्थिति में थी। अपने प्रेमी के साथ उस वक्त वो समय बिता रही थी। लेकिन उसी वक्त जो उसकी जवान बहू होती है, दोस्तों जो कि उसकी नई नवेली बहू होती है और जो कि अपनी सास को जब उसके प्रेमी के साथ उस हालत में देखती है तो फिर उसे देख के रह नहीं जाता और फिर वो एक तरह से बिल्कुल ही पागल हो जाती है।

फिर वो उसी वक्त अपनी सास के पास में जाती है और उसके प्रेमी से जाकर के कहती है कि जो तुमने अभी तक मेरी सास के साथ किया है और वही सब कुछ तुम्हें मेरे भी साथ में करना होगा। अब होता क्या है दोस्तों कि जो वह व्यक्ति होता है वह जब इतना कुछ सुनता है तो फिर वह मन ही मन काफी ज्यादा खुश हो जाता है। और फिर अगले दिन उस महिला के साथ वो जो लड़का होता है वह उसके साथ रिश्ता कायम करने के लिए उसके घर आता लेकिन फिर उसके बाद में दोस्तों एक ऐसी घटना घट जाती है कि जो कि सोशल मीडिया पर बहुत ही तेजी के साथ वायरल होने लगती है।

तो दोस्तों आज की इस कहानी के माध्यम से हम लोग यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिरकार आज की इस घटना में ऐसा क्या हुआ था और उसके बाद सोशल मीडिया पर यह वायरल क्यों हुई। इसके लिए कहानी को अंत तक जरूर सुनिएगा। तो नमस्कार प्रणाम दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे यूट्यूब चैनल में।

दोस्तों कहानी की शुरुआत करें। उससे पहले बस आपसे एक ही रिक्वेस्ट है कि अगर अभी तक आपने हमारे इस चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब कर लीजिएगा। वीडियो पर एक लाइक जरूर दे दीजिएगा। और हां दोस्तों कहानी सुनने के बाद एक प्यारा सा कमेंट जरूर कीजिएगा। आपका इतना करना हमें बहुत मोटिवेशन देता है ताकि हम ऐसी-ऐसी घटनाएं ऐसी-ऐसी सच्ची स्टोरी आपके सामने लाते रहें। तो चलिए दोस्तों अब कहानी की शुरुआत करते हैं।

तो दोस्तों ये जो कहानी है वो बिना स्किप किए अंत तक जरूर सुनिएगा। यकीनन यह कहानी जो है वो आपको बहुत बड़ी सीख और सबक दे के ही जाएगी। अब होता क्या है दोस्तों कि आज की जो हमारी सच्ची घटना है इसकी शुरुआत जो है वह मध्य प्रदेश के छतरपुर से होती है। अब मध्य प्रदेश के छतरपुर का ही एक छोटा सा गांव होता है और उसी गांव में एक व्यक्ति रहा करता था जिसका नाम किशन लाल होता है।

अब जो किशन लाल होते हैं उनके परिवार में किशन लाल और उनकी पत्नी और उनका बेटा होता है और जिस बेटे की उम्र तकरीबन अभी ५ साल के आसपास होती है। अब यह तीन लोगों का परिवार होता है और तीनों लोग बेहद एक दूसरे के साथ भी खुश थे। किशन लाल जो कि खेती किसानी का काम करते थे और उसी से वह अपने परिवार का अब तक पालन पोषण करते आए हैं। समय जो था वो धीरे-धीरे करके ऐसे ही बीत रहा था।

लेकिन इसी बीच उन्हीं के पड़ोस में एक व्यक्ति रहता था। जिस व्यक्ति का नाम भवानी होता है। भवानी सिंह जो होता है दोस्तों वो एक तरह से कह सकते हैं आप कि कहीं ना कहीं गंदी नियत वाला इंसान होता है। अब जो ये भवानी सिंह होता है वो उसकी नियत जो थी वो अब किशन लाल की पत्नी होती है जिनका नाम रमा देवी होती है उन पर ही खराब हो जाती है।

अब वो अक्सर ही रमा देवी को गलत नजरों से देखा करता था। उसके मन में हरदम यही ख्याल रहता था कि कब वो रमा देवी के साथ अपनी इच्छाओं को पूरा कर सके। अब समय तो धीरे-धीरे ऐसे ही बीत रहा था। लेकिन जो रमा देवी थी वो कभी भी भवानी सिंह की तरफ उस नजर से देखी ही नहीं थी। अब धीरे-धीरे ऐसे ही चल रहा था।

अब जो भवानी सिंह और जो किशन लाल होते हैं इन दोनों के ही खेत एक दूसरे के आसपास हैं। यानी कि एक तरह से जो यह भवानी सिंह था वह किशन लाल का घर से भी पड़ोसी था और खेत से भी पड़ोसी होता है। अब भवानी की नियत जो थी वो हर समय किशन लाल की पत्नी रमा पर ही खराब रहती थी। हर समय वो उसे घूरता ही रहता था।

लेकिन अब तक उसे ऐसा मौका नहीं मिल पाया था कि वो रमा के साथ गलत काम कर सके। धीरे-धीरे ऐसे ही करके समय भी बीती जा रहा था। लेकिन दोस्तों कहते हैं ना कि कभी-कभी ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर होता है। अब एक दिन जो यह किशन लाल होता है उसकी अचानक से तबीयत बिगड़ जाती है।

अब जैसे ही उस व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाती है तो फिर जो यह रमा देवी होती है वह अपने पति किशन लाल को लेकर के तुरंत अस्पताल जाती है और अस्पताल में ले जाकर के एडमिट करवाती है और वहां पर किशन लाल का इलाज भी चलता है। डॉक्टर जो है वह बहुत प्रयास करते हैं। लाख कोशिश करते हैं लेकिन फिर भी किशन लाल को बचाया नहीं जा सकता है।

किशन लाल इस दुनिया से चला जाता है। अब रमा देवी पर इस तरह से अचानक पति की मृत्यु का जो दुख था वह ऐसे टूट पड़ा था कि उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया। बल्कि उन्हें इस बात पर कह सकते हैं दोस्तों कि उन्हें इस चीज का यकीन ही नहीं आ रहा था कि कैसे अचानक से उनके पति कुछ ही पल में उसको ऐसे छोड़ करके चले गए थे।

अब रमा देवी का रो-रो करके बुरा हाल हो गया था। अब जैसे ही किशन लाल की मौत हुई थी। अब रामा देवी के यह समझ लीजिए कि उसे यकीन ही नहीं आ रहा था उसका पति है। उसका पति अब साथ है। अब उसके पति के अलावा उसके साथ कोई और नहीं था। उसका एक सात साल का बेटा होता है जिसका नाम भैरव होता है।

अब जो रमा देवी होती है दोस्तों वो अपने पति का अंतिम संस्कार किसी भी तरह करवाती है और फिर उसके बाद में अपने बेटे भैरव के साथ अपने घर पर रहने लगती हैं। क्योंकि अब जो ये रमा देवी थी उनके ही ऊपर अब पूरे घर की जिम्मेदारी आ चुकी थी। खेतीबाड़ी की जिम्मेदारी आ चुकी थी। अपने बेटे का लालनपालन करना था।

उसे पढ़ाना-निखाना था। और इसीलिए जो यह रमा देवी होती है अब वो अपने खेतों में भी बहुत ज्यादा मेहनत से काम करने लगती है। लेकिन फिर भी एक अकेली औरत कितना ही काम कर सकती थी। कितना ही कुछ कर सकती थी उसे एक मर्द की जरूरत जरूर ही पड़ जाती थी कामकाज के सिलसिले में और वही हाल रमा के भी साथ में होता है।

क्योंकि रमा देवी के पास तकरीबन १० बीघा जमीन थी। लेकिन रमा देवी जब १० बीघे खेती को अकेले अपने दम पर कार्य उठाती है तो कभी मजदूर की जरूरत पड़ती थी तो कभी ट्रैक्टर वाले की जरूरत होती थी और इन्हीं चीजों का फायदा उठाकर के जो यह भवानी सिंह होता है वो अब धीरे-धीरे रमा देवी से नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर देता है क्योंकि जो यह रमा देवी होती है जब वो अपने खेतों पर काम करती थी तो भवानी सिंह जो है वो उसके खेतों पर उसके काम में मदद कराने के लिए अक्सर ही सामने आ जाता था।

अब रमा जो थी वो यह देख के काफी खुश हो जाती थी। उसके मन में यही विचार आता था कि आखिरकार जो ये भवानी है वो कितना अच्छा इंसान है जो उसको मदद करता है जो उसके हर काम में उसका हाथ बंटा देता है उसका सहयोग कर देता है। भवानी सिंह की नजर कुछ और ही थी जहां अब समय धीरे-धीरे ऐसे ही बीत रहा था।

अब एक दिन की बात होती है कि रमा देवी जब अपने खेतों में काम कर रही होती है तो उस समय उस समय भवानी सिंह भी उसके ही खेत में अपने खेत में काम कर रहा था जो कि अगल-बगल में ही था लेकिन तभी अचानक से बारिश आ जाती है। अब जैसे ही बारिश आती है तो फिर रमा देवी पूरी तरीके से भीग जाती है और भीगने के बाद अब उसे ठंड लगनी शुरू हो जाती है और उस समय वह बचने के लिए जो भवानी सिंह होता है उसके ही खेत में उसकी ट्यूबवेल की कोठी बनी हुई थी जो कमरा बना हुआ था उसी कमरे में जाकर के वो छिप जाती है और वहीं पर भवानी सिंह भी था।

दोस्तों अब भवानी सिंह जैसे ही उस दिन रमा देवी को इस हालत में देखता है उसके भीगे बदन को देखता है तो फिर अब उससे रह नहीं जाता है क्योंकि पहले से भी उसके ऊपर पर उसकी नियत खराब थी और तभी वो रामा देवी से कहता है उसी वक्त कि रमा देवी मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूं तो वो कहती है कहिए कि क्या बात है तो जो ये भवानी होता है वो कहता है कि अब आपके पति के मौत को तकरीबन ३ साल भी बीत चुके हैं तो क्या इन तीन सालों में कभी भी तुम्हें अपने पति की याद नहीं आती कभी तुम्हें अकेलापन महसूस नहीं होता कभी तुम्हें किसी मर्द की जरूरत का एहसास नहीं होता।

उसकी इतनी बात सुनकर के जो ये रामा देवी होती है उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं और वो रोने लगती है और फिर वो कहती है कि इस चीज को तो सिर्फ मैं समझ सकती हूं कि आखिरकार बिना पति के जिंदगी कैसे बीती है। इस चीज का एहसास मुझे बहुत अच्छे से है। अब जैसे ही इतनी बात भवानी सिंह सुनता है तो फिर दोस्तों क्या होता है कि अब उसे मौका मिल जाता है और फिर वह तुरंत उसी वक्त रमा के आंखों के आंसू पोछने शुरू कर देता है और फिर आंसू पोंछते हुए उसे यह कहता है कि आपको इतना ज्यादा परेशान होने की कोई जरूरत नहीं।

और अगर तुम्हें किसी भी चीज की जरूरत हो किसी भी चीज की परेशानी हो तो तुम बेझिझक मुझसे कह सकती हो मुझसे मांग सकती हो। मैं हर वक्त दिन हो या फिर आधी रात हो मैं तुम्हारा काम करने के लिए तुम्हारा साथ देने के लिए तैयार हूं। अब दोस्तों जैसे ही इतनी बात रमा देवी सुनती है तो फिर वो भवानी की तरफ नजरें उठा के देखना शुरू कर देती है। और अब उसके अंदर एक बहुत ही अच्छा इंसान नजर आता है रमा देवी को। उसे की हर बात उसे पसंद आने लगती है।

और इसी मौके का फायदा उठा के जो यह भवानी सिंह होता है दोस्तों वो रामा देवी का फायदा उठाना शुरू कर देता है। अब वो उसके साथ में शारीरिक संबंध भी कायम करता है। उसके साथ रिश्ते में आ जाता है। अब यह सारी चीजें जो थी वो रमा देवी को भी पसंद आने लगती है क्योंकि अब तीन साल उसके पति को गए हुए हो चुके थे। अब जब उसे भवानी से वह प्यार मिलना शुरू हो जाता है तो रमा देवी भी कहीं ना कहीं खुश हो गई थी क्योंकि उसको हर काम में भवानी का मदद भी मिल जाता था और साथ ही साथ जो पति की कमी थी जो पति का सुख था वो भी पूरा हो रहा था।

अब धीरे-धीरे करके ऐसे ही समय बीत रहा था। अब जो रमा देवी होती है जब भी भवानी के साथ उसे समय मिलता हो चाहे खेत हो खलियान हो या फिर रात हो वह भवानी को अपने घर पर भी बुला लिया करती थी और फिर उसके साथ पति-पत्नी की तरह रिश्ते कायम करती थी। दोनों ही एक दूसरे के साथ रिलेशन में रहते थे। अब धीरे-धीरे करके ऐसे ही समय बीत रहा था।

और इधर जो रमा का बेटा भैरव सिंह होता है दोस्तों वो भी अब धीरे-धीरे करके बड़ा होना शुरू हो चुका था। अब जो यह भैरव होता है धीरे-धीरे करके बड़ा भी हो जाता है। लेकिन फिर भी रमा और भवानी की जो नजदीकियां थीं जो रिश्ते थे वह अब तक इतने सालों तक वैसे ही कायम थे।

अब भैरव के रिश्ते भी आने शुरू हो चुके थे शादी के लिए। और फिर एक लड़की जो कि दिखने में काफी ज्यादा खूबसूरत होती है और जिसका नाम रूपा होता है और फिर रूपा के साथ जो रमा देवी होती है वह अपने बेटे भैरव की रिश्ता तय करवा देती है। शादी करवा देती है। अब उसके घर में उसकी बहू भी आ चुकी थी और अभी उसकी शादी को मात्र तीन दिन ही बीते थे।

अब गांव के जो भी लोग थे वो लोग उसकी बहू को आशीर्वाद देने के लिए उसके घर पर आना शुरू कर देते हैं। चाहे गांव की महिलाएं हो या फिर पुरुष हो जितने भी लोग थे सारे ही लोग उसके घर पर आना शुरू हो जाते हैं और भवानी सिंह भी रमा देवी के घर पर आता है। वो भी उसकी बहू को जब देखता है तो दोस्तों आप यकीन नहीं कर पाएंगे कि जो यह भवानी सिंह था अब तक वो तो सिर्फ रमा देवी के साथ रिश्ते कायम कर रहा था।

उसके साथ ही पल बिता था। लेकिन जब भवानी सिंह बहू के आने के बाद पहली बार रमा देवी के घर पर आता है तो फिर जो यह रमा देवी होती है तभी वह अपनी बहू से कहती है कि देखो यह हमारे गांव के बहुत ही सम्मानित व्यक्ति है और इन्होंने बचपन से लेकर के जब से तुम्हारे ससुर की मौत हुई तब से लेकर अब तक इन्होंने हमारी बहुत मदद की है। यह बहुत ही अच्छे इंसान है।

अब जो रूपा होती है वो तभी जाकर के भवानी के पैर छूती है। लेकिन जैसे ही वो भवानी के पैर छूती है उसी समय जो ये भवानी सिंह होता है दोस्तों वो उसे आशीर्वाद देने के बहाने रूपा के शरीर को अलग ही तरीके से स्पर्श करना शुरू कर देता है। अब रूपा को थोड़ा सा असहज भी महसूस होता है। लेकिन फिर वो सोचती है कि शायद यह उसकी गलतफहमी होगी क्योंकि जो उसकी मां ने बताया वो तो बहुत ही अच्छे इंसान है। बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं।

तो शायद हो सकता है कि मुझे ही कोई गलतफहमी हुई होगी और वह इस बात को एक तरह से पूरी तरह से ही नजरअंदाज कर देती है। अब धीरे-धीरे करके समय भी बीतने लगा था। अब जो यह भवानी सिंह होता है दोस्तों वह रमा सिंह से रमा देवी से कहता है कि रमा जब से तुम्हारी बेटे की शादी हो गई है तब से तो मुझे तुमसे मिलने का टाइम ही नहीं मिल पाया और तुम भी नहीं मिलने आई हो। तो रमा कहती है कि ठीक है आप परेशान मत हो।

अब मुझे जैसे ही मौका मिलेगा मैं आपको तुरंत ही बुलाऊंगी। अब तो शादी के काम में ही बिजी थी। अब क्या होता है कि कुछ दिनों के बाद रात के तकरीबन १:०० बजे का समय हो रहा था। और उस दिन जो यह भैरव उसका बेटा था वो किसी काम से घर से बाहर गया था।

अब उस दिन जो यह रमा होती है वो भवानी के पास फोन करती है और फिर उसे कहती है कि देखो आज बेटा भी घर पर नहीं है। सिर्फ बहू ही घर पर है और बहू जो है वो तो अपने कमरे में सो जाएगी तो इसीलिए हो सके तो आज रात के वक्त तुम मेरे घर पर आ जाना। अब जब भवानी सिंह रात के तकरीबन ११:०० बजे के आसपास जब वह रमा के घर पर जाता है और फिर रमा के कमरे में सीधे पहुंच जाता है।

अब जो उसकी बहू रूपा होती है रूपा उस वक्त खाना वगैरह खाने के बाद अपने कमरे में जाकर के लेट गई थी। लेकिन रात के तकरीबन १:०० बजे के आसपास का वक्त होता है कि उस दिन जो यह रूपा होती है जब उसको अचानक से रात में नींद खुल जाती है तो उसे ऐसा महसूस होता है कि जैसे उसकी सास है उसके सास के कमरे से कुछ उसे आवाजें सुनाई दे जाती हैं और वो अपने बिस्तर से उठ जाती है और फिर बिस्तर से उठने के बाद सीधे ही सास के कमरे की तरफ बढ़ने लगती है।

लेकिन जैसे ही वह कमरे पर पहुंचती है खिड़की से झांक करके अंदर का नजारा देखती है तो फिर उसके पैरों तले से जमीन खिसक जाती है। दरअसल जो उसकी सास थी यानी कि जो रमा देवी थी वो भवानी सिंह के साथ प्यार भरी बातें कर रही थी और जब रूपा उस व्यक्ति को देखती है जो कि भवानी सिंह था। अब जाहिर सी बात है इन दोनों को ही एक दूसरे के साथ में वह आपत्तिजनक स्थिति में देख लेती है।

अब जैसे ही इस हालत में वो अपनी सास और उसके प्रेमी को देखती है तो फिर वो यह देख के एकदम से ही चौंक जाती है और फौरन अपने कमरे में जाकर लेट जाती है और उसके बाद तो पूरी रात उसे अपने कमरे में नींद तक नहीं आती और वो यही सोचकर परेशान हो गई थी कि आखिरकार जो उसकी सास है वो इतनी उम्रदराज औरत है और वो इस उम्र में भी अपने प्रेमी के साथ में भला ये कैसा काम कर रही थी।

अब अगले दिन जो यह भैरव सिंह होता है उसका पति वो अपने घर पर आ गया था और तभी जो यह रूपा होती है वह अपने पति भैरव से बताती है कि दरअसल बात यह है कि जो यह भवानी सिंह नाम का व्यक्ति हमारे घर पर आता है उसकी आदत मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लगती है और मां जी के साथ उसका अफेयर भी चल रहा है।

अब जैसे ही यह बात भैरव सुनता है तो फिर वह अपनी पत्नी को डांटता है और फिर उसे समझाता भी है। कहता है कि अगर इस बात में थोड़ी सी भी सच्चाई होगी तो मैं इस बारे में अपनी मां से जरूर पूछूंगा। अब अगले ही दिन जो यह भैरव होता है अपनी मां से कहता है कि मां आज के बाद जो यह व्यक्ति भवानी है यह अब हमारे घर पर नहीं आना चाहिए। मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है।

अब जो उसकी मां रमा देवी होती है वह भी यह सोचती है कि अब जो बेटा कहेगा वही वह मानेगी क्योंकि इस उम्र में वह बेटे का विरोध नहीं कर सकती थी और अब वो जो काम कर रही थी उसे भी पता था कि गलत है क्योंकि अब उसके घर पर भी उसकी बहू आ चुकी थी तो रमा को भी लगता है कि उसे अब यह सारा चीज जो है वो बंद कर देना चाहिए और फिर वो भवानी से कहती है कि भवानी आज के बाद हम दोनों के बीच का जो यह रिश्ता है हम दोनों को खत्म करना होगा और आज के बाद अब तुम मेरे घर पर भी दोबारा कभी मत आना।

अब जैसे ही ऐसी बात भवानी सुनता है तो वह एकदम से ही परेशान हो जाता है। एकदम से ही गुस्सा होने लगता है। और फिर वह रमा देवी से कहता भी है कि देखो रिशा खत्म कर रही है। यह तो मुझे समझ में आ रहा है कि तुम जानबूझकर ऐसा कर रही हो। लेकिन तुम मुझे अपने घर पर आने से क्यों रोक रही हो। आखिर मैं तुम्हारे घर पर तो तुमसे मिलने के लिए तो आ ही सकता हूं।

अब तभी जो यह रामा होती है वो उसकी बात से सहमत हो जाती है। फिर कहती है कि ठीक है आज के बाद हम दोनों के बीच में कोई निजी रिश्ता नहीं रहेगा। तुम मेरे से मिलने के लिए घर पर आ सकते हो। मेरे से बात करने घर आ सकते हो। अब धीरे-धीरे करके समय बीतने लगता है।

लेकिन इधर जो भवानी था उसकी नियत अब रमा देवी के बाद उसकी बहू जो रूपा थी उसके ऊपर खराब हो चुकी थी। अब होता क्या है दोस्तों कि अब भवानी यही सोचता है कि आखिरकार उसे कब मौका मिले और फिर वो उसकी बहू के भी साथ में अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लग जाए। लेकिन जो उसकी बहू थी वह भवानी सिंह के सामने कभी भी आंख उठा करके देखती तक नहीं।

वह भवानी सिंह के सामने कभी अपने कमरे से भी नहीं निकलती थी जब उसे पता चल जाता था कि भवानी आया है और भवानी इस वजह से कहीं ना कहीं परेशान होने लगा था और फिर वो क्या करता है एक दिन अपने घर पर खीर बना करके वो रमा के घर पर पहुंचता है और फिर उसे जाकर के कहता है कि दरअसल आज मैंने घर पर पूजा करवाया है और उसी पूजा का प्रसाद मैं लेकर के तुम लोगों के लिए आया हूं।

अब जो रमा देवी होती है वह भी उस प्रसाद को खा लेती है और साथ ही साथ वह अपनी बहू को भी बुला के उस प्रसाद को खाने के लिए दे देती है। अब जैसे ही सास बहू दोनों उस खीर को खाती है दोनों ही एक तरह से अचेत अवस्था में चली जाती है। बेहोश हो जाती हैं। और फिर इसी बात का फायदा उठाकर के जो ये भवानी सिंह होता है वो उसकी बहू रूपा के साथ में दोस्तों गलत रिश्ते कायम करता है। उसके साथ गलत काम करता है।

और ये सब कुछ करने के बाद वो वहीं पर बैठा रहता है। यह देखने के लिए कि आखिरकार इन लोगों को कितनी देर के बाद होश आएगा और उस वक्त तक जो यह रमा देवी का बेटा भैरव होता है वो भी अपने घर पर नहीं था। वो अक्सर ही काम के सिलसिले में शहर जाया करता था और जिस दिन यह भवानी उनके लिए खीर लेकर गया था उस दिन भी भैररो जो था वो अपने घर पर नहीं था और अब इसी बात का फायदा जो है यह भवानी सिंह उठा लेता है।

अब कुछ देर तक वो बैठता है और एक डेढ़ घंटे के बाद जब रूपा यानी कि सास और बहू को होश आता है तो फिर रूपा अपनी हालत को देख के वो सारा चीज समझ जाती है कि उसके साथ क्या हुआ और इसके बाद वो काफी ज्यादा डर जाती है परेशान आ जाती है और फिर सीधे भवानी के पास जाती है और फिर कहती है कि देखो तुमने हमारे साथ जो किया वो बहुत गलत काम किया है और अब मैं पुलिस स्टेशन में जाऊंगी और फिर जाकर के वहां पर तुम्हारे खिलाफ रिपोर्ट करवाऊंगी।

अब जैसे ही इतनी बात भवानी सुनता है दोस्तों तो भवानी जो है वह तुरंत ही रमा देवी और उसकी बहू रूपा पर खूब चिल्लाने लगता है। उन्हें धमकी देना शुरू कर देता है। कहता है कि अगर यह बात तुमने भून से भी किसी को बताने की कोशिश की तो फिर मैं तुम्हारे पति यानी कि तुम्हारे बेटे यानी दोनों को ही धमकी देता है कि हत्या कर दूंगा।

अब जैसे ही यह बात रूपा सुनती है तो कहती है कि ठीक है मैं कुछ नहीं करूंगी। आप मेरे पति को कुछ मत करना। और मैं कभी भी इस बात का जिक्र भी कभी किसी से नहीं करूंगी। अब जो भवानी सिंह होता है वह बड़े ही खुशी के साथ वापस से अपने घर लौट जाता है। अब धीरे-धीरे करके समय भी बीतने लगा था।

अब एक दिन जो रूपा होती है वह अपने खेतों में काम करने के लिए जाती है। उस समय जो यह भवानी सिंह होता है वह भी वहीं पर बैठा इंतजार कर रहा था कि रमा देवी रूपा आए। अब जैसे ही वहां पर वो रूपा को देखता है तो कहता है कि रूपा उस दिन मैंने जो तुम्हारे साथ किया था उसका मजा तुम्हें आया था कि नहीं आया था सच बताना।

अब जो रूपा होती है वह मुस्कुरा जाती है और फिर उसे कहती है कि आखिरकार जिस दिन आपने मेरे साथ किया वाकई में मुझे बहुत मजा आया। उतना तो मेरे पति भी मेरे साथ मजा नहीं आता है। अब यह बात सुनकर के जो यह भवानी होता है वो मन ही मन काफी ज्यादा खुश हो जाता है। अब जो यह रूपा होती है वो उसे कहती है कि देखो आज रात को मेरा पति घर पर नहीं रहेगा। तो हो सके तो आज रात को तुम मेरे घर पर मेरे कमरे में आना और फिर हम दोनों एक दूसरे के साथ में बहुत अच्छे प्यार भरे पल बिताएंगे।

अब जो भवानी सिंह होता है यह बात सुनकर के काफी ज्यादा खुश हो जाता है और फिर वह बहुत ही बेसब्री से रात होने का इंतजार करने लगता है। अपनी सास रमा को यह बहू खाना देती है और सास जो होती है वो खाना खाने के बाद अपनी बिस्तर में जाकर के सो जाती है और अब रात के तकरीबन ११:०० बजे थे तो फिर जो यह भवानी सिंह होता है वो चुपचाप अब सीधे रमा के घर पर पहुंच जाता है जहां पर रूपा उसका पहले से ही बेसब्री से इंतजार कर रही थी और अब रूपा भवानी को अपने सीधे बेडरूम में लेकर जाती है और फिर वहां पर ले जाने के बाद में अपने बदन के कपड़ों को हटाना शुरू कर देती है और उसी समय जो यह भवानी होता है वो भी अपनी तैयारियां करना शुरू कर देता है।

लेकिन इसी बीच अचानक से भवानी के पीछे से सर पर काफी तेज वार किया जाता है। अब जैसे ही उस पर पीछे से वार किया जाता है तो भवानी सिंह चीखने चिल्लाना शुरू कर देता है और उसकी चूक पुकार के सुन के जो आसपोस के लोग होते हैं वो सारे लोग भी वहां इकट्ठा हो जाते हैं कि आखिरकार आज रमा देवी के घर पर ऐसा क्या हो रहा है कि इतनी आवाज आ रही थी।

अब जैसे ही गांव वाले मोहल्ले वाले इकट्ठे होते हैं देखते हैं कि जो यह भवानी सिंह होता है वो वहां पर जमीन पर पड़ा हुआ था और जो यह भैरव सिंह था उसके हाथ में कुल्हाड़ी थी और वह उस रूम में अपनी पत्नी के साथ चुपचाप से खड़ा हुआ था। अब यह देख के सारे ही लोग चौंक चुके थे और उसी भीड़ में से कोई एक व्यक्ति पुलिस को फोन कर देता है और मौके पर पुलिस पहुंच भी जाती है और फिर पुलिस पहुंचने के बाद भैरव सिंह कोंगे हाथ कुल्हाड़ी के साथ में गिरफ्तार कर लिया जाता है।

और फिर जब उसे गिरफ्तार करके उससे पूछताछ पुलिस करती है कि आखिरकार तुमने इस व्यक्ति के साथ ऐसा क्यों किया? तभी जो यह भैरव सिंह होता है दोस्तों वह पुलिस वालों के सामने कहानी सुनाना शुरू करता है और फिर पुलिस वाले को वह यह बताता है कि साहब दरअसल यह जो व्यक्ति है यह व्यक्ति मेरी मां के साथ तो गलत से कायम करता भी था। उसके साथ कई सालों से ऐसा ही करता आया था। यहां तक तो मैंने फिर भी सब कुछ सहा है।

लेकिन अब इस जो व्यक्ति की नियत है वो मेरी नई नवेली पत्नी पर भी आ चुकी थी। और यह व्यक्ति जो है वो मेरी पत्नी के साथ में जबरदस्ती गलत काम करने की भी कोशिश करता था। यहां तक कि इसने मेरी पत्नी को नशीला पदार्थ खिला के मेरी पत्नी के साथ में उसके साथ में इसने गलत काम किया था।

और अब दोस्तों जो यह पुलिस होती है वह भवानी के डेड बॉडी को अपनी कस्टडी में लेती है और फिर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है। इधर जो यह भैरव सिंह होता है उसे अब गिरफ्तार कर लिया जाता है और गिरफ्तार करने के बाद अब उसे सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है। तो दोस्तों अब यह बात तो भविष्य के गर्व में छिपी है कि जज साहब भैरव सिंह को आखिर क्या सजा सुनाएंगे?

लेकिन दोस्तों मैं आपसे पूछना चाहती हूं कि क्या जो भैरव सिंह ने किया था भवानी सिंह के साथ क्या वह सही था या गलत था? क्या वह दूसरा रास्ता नहीं अपना सकता था? क्या वह कानून का सहारा नहीं ले सकता था? उसने भवानी सिंह को मारने के लिए खुद की ही जिंदगी बर्बाद कर ली।

अब उसकी मां और उसकी बेटी जीवन भर अकेले पत्नी और उसकी मां जो है वो जीवन भर अकेली रहेंगे। अब पत्नी की भी जिंदगी कहीं ना कहीं बर्बाद हो गई। और उसकी मां तो अकेले में बस अपने आप की अपनी किस्मत को ही खोजती रही कि जब उसने भवानी से मदद ली थी जब भवानी से उसने रिश्ता बनाया था। लेकिन अब उसके पछताने के बावजूद भी कुछ नहीं होने वाला था।

अब उसका बेटा भी भवानी के ही कत्ल के इल्जाम में जेल चला गया था। अब पता नहीं उसे क्या सजा मिलेगी और कब तक वह जेल में रहेगा और क्या होगा। खैर जो होना था अब हो चुका था। आप दोस्तों इस बात पर क्या राय रखते हैं कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा।

तो दोस्तों हमारी कहानी सुनाने का उद्देश्य किसी के भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं। ना ही किसी के दिल को आहत करना है। बस केवल आपको सतर्क करना है। आपको जागरूक करना है। फिर मिलूंगी कल एक और नई वीडियो के साथ। तब तक अपना और अपने परिवार।

NEXT PART

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

Related Articles