मैं घर में बिल्कुल अकेली थी और फिर वो शराब के नशे में घर आ गया/
मैं घर में बिल्कुल अकेली थी और फिर वो शराब के नशे में घर आ गया/
नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से। बरेली जिले में एक बुखारा नाम का गांव पड़ता है और ऋषि बुखारा गांव में रहने वाली कांता देवी।
कांता देवी एक बहुत ही गरीब और विधवा महिला होती है। कांता देवी मेहनत मजदूरी का काम किया करती थी। कांता देवी जमींदारों के घर पर झाड़ू पोछे का काम किया करती थी। तब जाकर कांता देवी के घर का गुजारा चलता था। कांता देवी के परिवार में इसका इकलौता ही बेटा होता है जिसका नाम शंकर होता है। शंकर जो कि 11वीं कक्षा में अपनी पढ़ाई किया करता था। लेकिन शंकर हर रोज स्कूल में तो जाता करता था लेकिन अपने दोस्तों के साथ आवारा घूमता करता था।

यहां तक कि शंकर अपने एक दोस्त गगन के साथ बैठकर नशा भी किया करता था। धीरे-धीरे करके शंकर को नशे की लत पड़ जाती है और इसके बाद शंकर नशे की गिरफ्त में पड़ जाता है। तो शंकर अपने दोस्त गगन के साथ हर रोज बैठकर नशा किया करता था। लेकिन मां जो कांता होती है अपने बेटे शंकर को हमेशा एक ही बात कहती थी कि बेटा यह नशा करना अच्छा नहीं है। नशा तुम्हारे जीवन को बर्बाद कर देगा। इसको छोड़ने में ही फायदा है और तुम स्कूल में भी पढ़ाई करना बंद कर चुके हो।
लेकिन बेटा शंकर अपनी मां को सिर्फ एक ही बात कहता था कि मां एक दिन मैं पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बन जाऊंगा। और मां कांता देवी अपने बेटे की बातों पर यकीन कर लिया करती थी। लेकिन आगे चलकर शंकर दो बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाला था जिसके बारे में कांता देवी को भनक तक नहीं होती है।
इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजरने के बाद एक तारीख आ जाती है। 7 जुलाई 2026 का दिन सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का समय होता है। बेटा शंकर अपनी मां को कहता है कि मां मुझे 1000 की जरूरत है। कांता देवी कहती है कि बेटा मेरे पास पैसे नहीं है। जैसे ही कांता देवी अपने बेटे को यह बातें कहती है तो बेटा शंकर बड़ा परेशान हो जाता है। लेकिन इसके बाद कांता अपने कामकाज करने के लिए घर से बाहर निकल कर चली जाती है। बेटा शंकर आज घर में बिल्कुल अकेला रह जाता है और इसके बाद शंकर अपने एक दोस्त गगन के पास फोन कॉल करता है। गगन को अपने घर पर बुला लेता है। गगन एक अच्छे परिवार का बेटा होता है लेकिन गगन अच्छा नहीं होता है। गगन अपने पिता से पैसे मांग लिया करता था और गगन का पिता इसको पैसे दे दिया करता था और आज के समय में गगन सिंह अपने घर में चोरी करके कुछ पैसे लेकर इस लड़के शंकर के घर पर आया था। गगन अपने दोस्त शंकर को कहता है कि आज मैंने अपने घर में चोरी कर रखी है। चलो कहीं से नशे का इंतजाम कर लेते हैं। इसके बाद गगन और शंकर दोनों कहीं से नशे का इंतजाम करके घर पर वापस आ जाते हैं और घर के अंदर ही बैठकर दोनों दोस्त नशा करना शुरू कर देते हैं। उसी समय घर के मुख्य दरवाजे पर दस्तक होती है और जैसे ही शंकर घर का दरवाजा खोलता है तो शंकर देखता है कि उसके पड़ोस की एक खूबसूरत चाची पुष्पा देवी उसके सामने खड़ी होती है। पुष्पा देवी एक ऐसी औरत होती है जिसका चाल चलन और चरित्र बिल्कुल खराब होता है। पुष्पा देवी हैंडसम नौजवान लड़कों को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया करती थी और इन हैंडसम नौजवान लड़कों के साथ अपनी रात रंगीन करके इनसे पैसे वसूल कर लिया करती थी और आज के समय में पुष्पा देवी इस लड़के शंकर के घर पर इससे पैसे उधार मांगने के लिए आई थी। इसके बाद पुष्पा देवी शंकर को कहती है कि शंकर मुझे 1000 की सख्त जरूरत है। तुम मुझे 1000 दे दो। लेकिन शंकर कहने लगता है कि चाची मेरे पास तो पैसे नहीं है। इसके बाद पुष्पा की नजरें गगन पर पड़ जाती है। गगन को देखने के बाद पुष्पा देवी कहने लगती है कि तुम गगन से उधार लेकर पैसे मुझे दे दो। शंकर कहता है कि मेरे दोस्त गगन के पास भी पैसे नहीं है। लेकिन गगन के पास हमेशा पैसे रहते थे। गगन उसी समय कहने लगता है कि चाची हमारे पास एक भी रुपया नहीं है। लेकिन इसके बाद पुष्पा देवी अपना रंग दिखाना शुरू कर देती है। पुष्पा देवी उसी समय घर का मुख्य दरवाजा बंद करने के बाद गगन के पास आती है और गगन को कहती है कि अगर तुम दोनों मुझे पैसे दे सकते हो तो मैं तुम्हारी जरूरतों को तुम्हारी इच्छाओं को पूरा कर सकती हूं। मैं तुम दोनों को खुश कर सकती हूं। जैसे यह बात शंकर के सामने कही जाती है तो शंकर के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है। लेकिन शंकर मन ही मन खुश भी होता है। उसी समय शंकर और गगन कहने लगते हैं कि चाची अगर ऐसी बात है तो हम तुम्हें 1000 देने के लिए तैयार हैं। लेकिन बदले में तुम्हें हम दोनों को खुश करना पड़ेगा। पुष्पा चाची यह सब करने के लिए तैयार हो जाती है। और इसके बाद गगन इस महिला पुष्पा को कहता है कि तुम्हें हमारे साथ कमरे के अंदर चलना पड़ेगा। और इसके बाद पुष्पा देवी खुद ब खुद इन दोनों लड़कों को कमरे के अंदर ले जाती है। और इसके बाद यह दोनों दोस्त मिलकर पुष्पा देवी के साथ अपने गलत रिश्ते कायम करने लग जाते हैं। ये तीनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। ये तीनों मिलकर इस गलत काम को तब तक अंजाम देते हैं जब तक इन तीनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं। और जैसे इन तीनों की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो इसके बाद जो पुष्पा देवी होती है इस घर से बाहर निकलती है। लेकिन आज पुष्पा देवी को पुष्पा देवी की पड़ोसन रीटा देवी ने देख लिया था। रीटा देवी सब कुछ समझ गई थी। रीटा देवी इस बात को समझ गई पुष्पा देवी शंकर और उसके दोस्त गगन के साथ इस समय अपनी रंगरलियां मना कर आई है। रीटा चुप बैठने वाली नहीं होती है। जैसे शाम के करीब 6:00 बजे के आसपास का समय होता है तो शंकर की मां कांता देवी अपने घर पर आती है। रीटा उसी समय कांता के पास जाती है और कांता को कहती है कि कांता तेरा बेटा शंकर तेरे हाथ से निकल चुका है। तेरा बेटा शंकर पड़ोस की महिला पुष्पा देवी के साथ अपनी रातें रंगीन करता है और पुष्पा देवी को पैसे देता है। लेकिन कांता देवी रीटा को कहती है कि रीटा यह बातें तुम्हें किसी को नहीं बतानी है। नहीं तो आगे चलकर भविष्य में मेरे बेटे की शादी नहीं होगी। रीटा कहती है कि मैं किसी को नहीं बताऊंगी लेकिन तुम अपने बेटे को संभालो। इसके बाद रीटा देवी कांता के घर से बाहर निकलती है और अपने घर पर चली जाती है। जैसे रात का समय होता है तो शंकर अपने घर पर आता है और शंकर की मां कांता देवी अपने बेटे शंकर पर भड़क जाती है और शंकर को कहती है कि बेटा तुम गलत रास्ते पर चल पड़े हो। तुम उस महिला पुष्पा के चक्रव्यूह में फंस चुके हो। पुष्पा देवी तुम्हें बर्बाद कर सकती है। लेकिन शंकर अपनी मां कांता को कहने लगता है कि मां आज के बाद मैं पुष्पा के घर पर नहीं जाऊंगा और ना ही मैं पुष्पा को अपने घर पर बुलाऊंगा। मैं पुष्पा से बिल्कुल भी नहीं मिलूंगा और कल से ही मैं किसी फैक्ट्री में कामकाज करना शुरू कर दूंगा। जैसे तैसे करके शंकर अपनी मां कांता देवी को यकीन दिला देता है। लेकिन शंकर आज सच बोल रहा था। इस तरीके से जैसे अगला दिन होता है तो शंकर किसी फैक्ट्री में मेहनत मजदूरी का काम करने के लिए चला जाता है और इस तरीके से शंकर लगभग सुधर चुका होता है। लेकिन आगे चलकर शंकर एक ऐसी बड़ी घटना को अंजाम देने वाला था कि जिसकी गूंज पूरे जिले में गूंजने वाली थी। शंकर हर रोज सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास फैक्ट्री में जाता करता था। रात के करीब 8:00 बजे के आसपास फैक्ट्री से मेहनत मजदूरी करके अपने घर पर आता करता था। और दूसरी तरफ कांता देवी भी अपने बेटे पर यकीन करना शुरू कर देती है। इस तरीके से काफी लंबा समय गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 5 अगस्त 2026 का दिन और आज के समय में कांता देवी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो जाती है। कांता देवी अपने बेटे शंकर को कहने लगती है कि बेटा शंकर मेरी तबीयत आजकल खराब रहती है और मैं घर के कामकाज भी नहीं कर पाती हूं और ना ही मैं जमींदारों के घर पर झाड़ू पोछे का काम कर पाती हूं। घर का गुजारा कैसे चलेगा। शंकर कहने लगता है कि मां तुम किसी बात की चिंता मत करो। अब तो मैं मेहनत मजदूरी का काम करना शुरू कर दिया है और जैसे ही मुझे पैसे मिलेंगे तो इसके बाद मैं सारे पैसे तुझे लाकर दे दूंगा। मां खुश हो जाती है लेकिन कांता बीमार थी। कांता देवी इसके बाद अपने भाई मानसिंह के पास फोन कॉल करती है और मानसिंह को कहती है कि मानसिंह आजकल मेरी तबीयत बहुत ज्यादा खराब रहती है। तू ऐसा कर अपनी बेटी दिव्या को मेरे घर पर भेज दे। और जैसे ही मैं ठीक हो जाऊंगी तो इसके बाद तुम्हारी बेटी दिव्या वापस तुम्हारे घर पर पहुंच जाएगी। मानसिंह अपनी बहन को कहने लगता है कि तुम किसी बात की फिक्र मत करो। शाम के करीब 6:00 बजे के आसपास मैं अपनी बेटी दिव्या को लेकर तेरे घर पर आ जाऊंगा। और इसके बाद मानसिंह फोन काट देता है। अब जैसे ही शाम के करीब 6:00 बजे के आसपास का समय हो जाता है तो मानसिंह अपनी बेटी दिव्या को लेकर अपनी बहन कांता के घर पर आता है और अपनी बहन कांता से मिलता है और कांता को कहता है कि कांता मेरी बेटी दिव्या का ख्याल रखना। कांता अपने भाई मानसिंह को कहती है कि तुम किसी बात की फिक्र मत करो। अब तो मेरा बेटा शंकर भी सुधर गया है और मैं तुम्हारी बेटी दिव्या का अच्छे से ख्याल रखूंगी और जैसे ही मेरी तबीयत ठीक हो जाएगी तो मैं दिव्या को तेरे घर पर वापस भेज दूंगी तब तक दिव्या मेरे घर पर कामकाज किया करे। मानसिंह खुश होकर कहता है कि यह तो बहुत अच्छी बात है और इसके बाद मानसिंह इस घर से निकलता है अपने घर पर वापस चला जाता है। इस तरीके से अब दिव्या अपनी इस बुआ कांता से मिलती है और घर के कामकाज में व्यस्त हो जाती है। अब जैसे ही रात के करीब 8:30 बजे के आसपास का समय हो जाता है तो शंकर भी थका हारा अपने घर पर आता है। शंकर देखता है कि घर के अंदर उसके मामा की बेटी दिव्या बैठी होती है। दिव्या को देखकर शंकर बड़ा खुश हो जाता है। शंकर कहने लगता है कि दिव्या यह तो बहुत अच्छी बात है जो तू हमारे घर पर आ गई है। मेरा भी मन लगा रहेगा और मां का भी मन लगा रहेगा। और मां की तबीयत कुछ ठीक भी नहीं रहती है। तू घर के कामकाज कर दिया करेगी और मैं कमाने के लिए फैक्ट्री में चला जाया करूंगा। इस तरीके से दिव्या और दिव्या का यह भाई शंकर काफी देर तक बैठकर घर के अंदर बातचीत करते रहते हैं। इस तरीके से दिव्या भी खुश होती है। शंकर भी खुश होता है और शंकर की मां कांता देवी भी खुश होती है। अब तो शंकर हर रोज सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास अपनी फैक्ट्री में चला जाता था और बेटी दिव्या घर के कामकाज कर लिया करती थी। कांता देवी चारपाई पर लेटी रहती थी। इस तरीके से लगभग 10 दिनों का समय गुजर जाता है और इतना समय गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 16 अगस्त 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का समय होता है। कांता देवी अब दिव्या को कहती है कि दिव्या अब तो मेरी तबीयत ठीक हो चुकी है। मैं तुझे एक दो दिन के बाद तेरे घर पर भेजने वाली हूं। दिव्या कहने लगती है कि बुआ जी अब तो मेरा इस घर में मन लग चुका है। मैं दो चार दिनों के लिए और इस घर में रहना चाहती हूं। बुआ कांता देवी अपनी इस भतीजी को खुश होकर कहती है कि कोई बात नहीं घर तेरा है। तू जितने दिन मेरे घर पर रहना चाहती है रह सकती है। इसके बाद कांता देवी कहने लगती है कि दिव्या अब मुझे जमींदार के घर पर झाड़ू पोछे का काम करने के लिए जाना पड़ेगा। दिव्या कहती है कि बुआ तू एक दो दिन और आराम कर ले। इसके बाद काम पर चली जाना। लेकिन कांता देवी जिद पकड़ लेती है। कांता कहती है कि नहीं मुझे जाना ही पड़ेगा। और इसके बाद कांता देवी इस घर से बाहर निकलती है और जमींदारों के घर पर झाड़ू पोछे का काम करने के लिए चली जाती है। थोड़ी देर के बाद दिव्या का जो भाई शंकर होता है दिव्या को कहता है कि दिव्या मुझे भी अब फैक्ट्री में जाना है और मैं रात के ही समय घर पर वापस आऊंगा। दिव्या खुश होकर शंकर को कहती है कि कोई बात नहीं मैं रात का खाना तेरे लिए बनाकर रखूंगी। और इसके बाद शंकर अपने घर से साइकिल लेकर अपनी फैक्ट्री में चला जाता है। जैसे ही दोपहर के करीब 2:00 बजे के आसपास का समय होता है तो शंकर को आज इस फैक्ट्री से कुछ पैसे मिलते हैं और शंकर को जैसे ही पैसे मिलते हैं तो शंकर का माथा ठनक जाता है। शंकर के दिमाग में वही फिर से ख्याल आने शुरू हो जाते हैं। शंकर पैसों को देखकर बड़ा खुश हो जाता है और उसी समय शंकर अपनी जेब से मोबाइल फोन निकालता है और अपने दोस्त गगन के पास फोन कॉल करता है। अपने दोस्त गगन को कहता है कि गगन आज मुझे फैक्ट्री से पैसे मिल चुके हैं। चलो ऐसा करते हैं कि कहीं से नशा खरीद लेते हैं और कहीं एकांत स्थान पर बैठकर नशा कर लेते हैं। गगन भी खुश होकर कहता है कि शंकर ऐसी बात है तो मैं मोटरसाइकिल लेकर अभी तेरी फैक्ट्री में ही आ जाता हूं। शंकर कहता है कि तू जल्दी से मेरी फैक्ट्री में ही आ जा। और इसके बाद गगन गांव से अपनी मोटरसाइकिल लेकर सीधा ही अपने दोस्त शंकर के पास फैक्ट्री में चला जाता है। फैक्ट्री में जाने के बाद गगन और शंकर दोनों ही मोटरसाइकिल पर बैठते हैं और इस फैक्ट्री से बाहर निकल जाते हैं। जैसे तैसे करके शंकर और गगन उन पैसों से नशा खरीदते हैं और नशा खरीदने के बाद खेतों में बैठकर काफी देर तक नशा करते हैं। और जब दोनों दोस्तों को नशा हो जाता है तो इसके बाद शंकर अपने दोस्त गगन को कहता है कि गगन चलो गांव में चलते हैं। और इसके बाद शंकर और गगन दोनों ही मोटरसाइकिल के माध्यम से गांव में पहुंच जाते हैं। जैसे ही दोनों दोस्त गांव में पहुंच जाते हैं तो शंकर गगन को कहता है कि शंकर अब मुझे अपने घर पर चलना चाहिए। तुम अपने घर पर चले जाओ। और इस तरीके से गगन अपने घर पर चला जाता है और शंकर भी अपने घर की तरफ चल पड़ता है। शंकर जैसे ही अपने घर पर पहुंचता है तो अपने घर के दरवाजे पर दस्तक देता है और इसके बाद शंकर की बहन दिव्या अपने घर का दरवाजा खोल देती है। जैसे ही दिव्या शंकर को देखती है तो शंकर को देखने के बाद दिव्या कहने लगती है कि शंकर आज तो तुमने काफी ज्यादा नशा कर रखा है। शंकर कहने लगता है कि दिव्या मेरा दोस्त गगन मिल गया था और उसके साथ बैठकर थोड़ा सा नशा कर लिया है। लेकिन तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। इसके बाद लड़का शंकर घर के अंदर प्रवेश कर जाता है। शंकर देखता है कि आज दिव्या घर में बिल्कुल अकेली होती है और दिव्या को अकेली घर में देखकर आज शंकर की नियत दिव्या पर खराब हो जाती है। शंकर इसके बाद दिव्या को कहते हैं कि दिव्या तुम खाना लेकर मेरे कमरे में आ जाना। मैं कमरे में बैठकर खाना खाऊंगा। दिव्या भी हंसते मुस्कुराते हुए अपने भाई को कहती है कि कोई बात नहीं मैं तुम्हारे लिए अभी खाना लेकर आती हूं। इस तरीके से शंकर अपने कमरे में जाकर बैठ जाता है और फिर इसके बाद दिव्या खाना गर्म करती है और खाना लेकर अपने भाई शंकर के कमरे में चली जाती है। शंकर घर में कमरे में अकेला बैठा होता है। शंकर मौका पाते ही घर में एक आरी का ब्लेड उठा लेता है और ब्लेड उठाने के बाद अपनी बहन दिव्या को मौके पर ही पकड़ लेता है। उसकी गर्दन पर उस ब्लेड को रख लेता है और दिव्या को धमकी देता है और कहता है कि अगर तुमने चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो तेरा गला यहीं पर काट दूंगा। दिव्या जैसे ही अपने गले पर ब्लेड रखा देखती है तो काफी डर जाती है। दिव्या सोचने लगती है कि उसका भाई शंकर नशे की हालत में है और नशे की हालत में उसका गला तक भी काट सकता है। दिव्या चुप रहती है खामोश हो जाती है। लेकिन इसके बाद शंकर उसी समय इस कमरे का दरवाजा बंद कर लेता है और फिर इसके बाद दिव्या को घसीट कर बिस्तर पर ले जाता है और फिर इसके बाद यह लड़का शंकर हद पार कर देता है। शंकर अपनी बहन के बारे में इतना तक नहीं सोचता है कि यह उसके मामा की बेटी है। उसकी बहन लगती है। शंकर दिव्या के साथ गलत और गंदा काम करना शुरू कर देता है। शंकर की आज आत्मा मर चुकी थी। शंकर का जमीर खत्म हो चुका था। दिव्या अपने भाई के सामने हाथ जोड़ती है और कहती है कि यह बिल्कुल गलत है। तुम गलत काम कर रहे हो। लेकिन शंकर नशे में होता है और नशे की हालत में शंकर इस गलत काम को अंजाम देता चला जाता है। शंकर इस गलत काम को काफी देर तक करता है और जैसे ही शंकर की इच्छा पूरी हो जाती है तो इसके बाद शंकर दिव्या को धमकी देता है डराता है और कहता है कि यह बात किसी को मत बताना और अगर तुमने यह बात किसी को बताई तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा। धमकी देने के बाद शंकर इस कमरे से बाहर निकलता है। दूसरे कमरे में जाकर गहरी नींद में सो जाता है। दो-ती घंटे का समय गुजर जाता है। लेकिन जो लड़की दिव्या होती है वह अपने कमरे में लेटी होती है रो रही होती है और अपनी बुआ के आने का इंतजार कर रही होती है। जैसे तैसे करके शाम हो जाती है और शाम के समय जैसे ही कांता अपने घर पर पहुंचती है तो कांता देखती है कि दिव्या कमरे के अंदर लेटी हुई थी और रो रही थी। कांता पूछने लग जाती है कि दिव्या ऐसी कौन सी बात है कि जिसकी वजह से तुम इतनी रो रही हो और काफी परेशान भी हो। दिव्या चुप बैठने वाली नहीं होती है। दिव्या रोते-रोते अपनी पूरी कहानी अपनी इस बुआ कांता को सुनाती है और कांता को कहती है कि तुम्हारे बेटे ने मेरे साथ गंदा और गलत काम किया है। कांता देवी जैसे ही दिव्या की बातों को सुनती है तो कांता को इस बात पर बहुत गुस्सा आता है। कांता अपने घर में हथियार तलाशना शुरू कर देती है। जैसे ही कांता घर में हथियार तलाश कर रही होती है तो कांता देवी के हाथ में कुल्हाड़ी आ जाती है और कांता देवी इसके बाद उस कुल्हाड़ी को लेकर अपने बेटे शंकर के कमरे में चली जाती है। शंकर के कमरे में जाने के बाद कांता देवी देखते ही देखते अपने बेटे शंकर की गर्दन कुल्हाड़ी के साथ काट देती है और जैसे ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया जाता है तो शंकर की बहन जो दिव्या होती है वह चीखना चिल्लाना शुरू कर देती है। लेकिन जो कांता होती है इस पूरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद अपना मोबाइल फोन उठाती है नजदीकी पुलिस स्टेशन में फोन कॉल करती है और पुलिस को बताती है कि मैंने अपने बेटे का कत्ल कर दिया है। 2 घंटे का समय गुजरने के बाद घटना स्थल पर पुलिस पहुंचती है। पुलिस इसके बाद शंकर का शव अपने कब्जे में लेती है और मौके पर ही शंकर की मां कांता को गिरफ्तार कर लिया जाता है। कांता को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस जब कांता से पूछताछ करना शुरू कर देती है तो कांता अपनी इस भतीजी दिव्या की बीती हुई पूरी कहानी पुलिस के सामने रखती है। कांता बताती है कि मेरे बेटे ने अपनी ही बहन दिव्या के साथ गंदा और गलत काम किया था। जिसकी वजह से मैंने अपने बेटे की हत्या कर दी है और इसके बाद पुलिस मजबूर होकर कांता देवी के खिलाफ आगे की कानूनी कारवाई शुरू कर देती है। यह बात भविष्य में तय की जाएगी कि जज साहब कांता देवी को आखिरकार क्या सजा सुनाने वाला है। लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांता देवी ने अपने बेटे शंकर के साथ जो किया क्या वह सही था या गलत था। कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ। तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद वंदे मातरम।