करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था
करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था

करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था
दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो दिल को छू लेगी।
यह कहानी है हैदराबाद की।
एक छोटे से इलाके में 24 साल का अमन रहता था। बचपन में अनाथ। माता-पिता की मौत के बाद वह अनाथालय में रहा। बड़ा होने पर वह घर से निकल आया और सुबह जल्दी उठकर फल-जूस की गाड़ी सजाकर शहर की सड़क पर ठेले लगाता। उसके पास सिर्फ एक छोटी सी बेंच थी। गरीबों से सस्ता जूस लेता और कभी किसी बुजुर्ग या बच्चे के पास पैसे ना हो तो मुफ्त जूस पिला देता।

एक दिन एक बुजुर्ग ने पूछा, “बेटा, हर किसी की मदद क्यों करता है? तुझे भी तो पैसे कमाने हैं।” अमन मुस्कुराया, “बाबा, पैसे तो मेहनत से कमा लेंगे। लेकिन इंसान की मदद का मौका हर रोज नहीं मिलता।” बुजुर्ग ने उसकी पीठ थपथपाई और कहा, “बेटा, तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है।”
उसी शहर में राजेंद्र मल्होत्रा नाम का एक करोड़पति कारोबारी रहता था। उसके पास कई मकान, जमीनें और बड़े-बड़े बिजनेस थे। लेकिन उसकी जिंदगी में एक बड़ा कमी थी। उसकी इकलौती बेटी शीतल 28 साल की समझदार, पढ़ी-लिखी लड़की थी। राजेंद्र अपनी बेटी से बहुत प्यार करता था। शीतल की शादी विक्रम नाम के एक अमीर लड़के से हुई थी। लेकिन विक्रम शराब और गुस्से का दीवाना था। छोटी-छोटी बात पर शीतल पर मारपीट करता था। शीतल चुप रहती रही। एक दिन उसने मां को फोन करके रोते हुए सब बता दिया। राजेंद्र बेटी को वापस लेकर आया। विक्रम से बात की लेकिन वो शीतल को ही दोष देने लगा। राजेंद्र ने अपनी बेटी का तलाक करवा दिया। शीतल टूट चुकी थी।
एक शाम राजेंद्र ने बेटी से कहा, “शीतल, अब दोबारा शादी नहीं करनी तो ठीक। लेकिन मैं तुम्हें किसी के हाथ में नहीं सौंपना चाहता जो तुम्हें कम समझे। चाहे वह गरीब ही क्यों ना हो।”
उसी दिन राजेंद्र जॉगिंग के लिए बाहर निकला। सड़क पर ठंडी हवा चल रही थी। अचानक उसका सिर घूमने लगा। वह गिरने वाला था। पास से एक आदमी दौड़कर आया। उसने कहा, “बाबा, बैठो। मैं आपको सहारा दूंगा।” अमन था वह। अमन ने राजेंद्र को अपनी छोटी बेंच पर बिठाया। मौसंबी का जूस पिलाया। राजेंद्र की हालत ठीक हुई। अमन ने कहा, “साहब, इंसान इंसान का काम आता है।” राजेंद्र ने उसे देखा और दिल में एक नया विचार जागा।
उसके बाद राजेंद्र रोज अमन के जूस के ठेले पर जूस पीने लगता। अमन के साथ बातें करने लगा। अमन ने कहा, “अंकल, अगर मैं अमीर हो जाऊं तो भी गरीबों की मदद जारी रखूंगा।” राजेंद्र ने सोचा, यही वो लड़का है जिसकी मुझे तलाश थी।
एक दिन राजेंद्र ने अमन को अपने बंगले पर बुलाया। अमन आया तो बंगला देखकर हैरान हो गया। राजेंद्र ने कहा, “बेटा, आज तुम मेरे अंकल हो।” दोनों ने खाना खाया। राजेंद्र की बेटी शीतल भी वहां थी। पहली मुलाकात हुई। शीतल को अमन का व्यवहार पसंद आया।
कुछ दिन बाद राजेंद्र ने अमन को ऑफिस में काम सौंपा। अमन ने ईमानदारी से काम किया। राजेंद्र ने अपनी संपत्ति के कुछ हिस्से अमन के नाम कर दिए। शीतल ने भी अमन को अपना दिल दे दिया था।
एक दिन राजेंद्र ने दोनों को एक साथ बुलाया। बोला, “मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों मिलकर शादी कर लो।” शीतल की आंखें भर आईं। अमन ने कहा, “अंकल, अगर मैं शीतल से शादी करूं तो आपकी संपत्ति के लिए नहीं, सिर्फ इज्जत के लिए करूंगा।” राजेंद्र ने कहा, “बेटा, तुम मेरे बेटे हो।”
शादी तय हुई। लेकिन शादी से पहले कुछ रिश्तेदारों ने विरोध किया। किसी ने कहा कि जूस वाला लड़का करोड़पति की बेटी के साथ शादी कर रहा है। अमन ने राजेंद्र से कहा, “अंकल, अगर मेरी वजह से आपकी बेटी को अपने ही परिवार के सामने अपमानित होना पड़े तो मैं पीछे हट जाऊंगा।” राजेंद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया। बोले, “बेटा, तुम पीछे नहीं हटोगे। इस बार फैसला मेरी बेटी करेगी.” उधर शीतल ने भी सब कुछ सब सुन लिया था। वह अपने पिता के पास आई और बोली, “पापा, मेरी पहली शादी में सबने मेरी जिंदगी का फैसला मेरे लिए किया था। इस बार मैं खुद फैसला करूंगी.” राजेंद्र ने कहा, “तुम्हारा फैसला ही मेरा फैसला है.” लेकिन उसी रात अमन के पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने कहा, “अगर तुमने शीतल से शादी की तो तुम्हें बहुत पछताना पड़ेगा.” अमन ने पूछा, “आप कौन बोल रहे हैं?” उधर से कोई जवाब नहीं आया और फोन कट गया। अमन कुछ देर तक मोबाइल को देखता रहा। उसे समझ आ गया था कि शीतल से शादी का रास्ता उतना आसान नहीं होने वाला था जितना उसने सोचा था।
और दोस्तों, उसे अभी यह पता नहीं था कि यह फोन किसने किया था। फोन कटने के बाद अमन काफी देर तक सोचता रहा। उसने किसी को यह बात नहीं बताई। अमन नहीं चाहता था कि उसकी वजह से राजेंद्र और शीतल परेशान हो। लेकिन अगले दिन सुबह जब वह अपने जूस के ठेले पर पहुंचा तो वहां एक आदमी पहले से उसका इंतजार कर रहा था। अमन ने उसे देखते हुए पूछा, “आप कौन हैं?” उस आदमी ने कहा, “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.” अमन ने कहा, “कहिए.” वो आदमी बोला, “तुम्हें पता है शीतल की पहली शादी क्यों टूटी?” अमन ने गंभीर होकर कहा, “हां, मुझे पता है.” आदमी ने कहा, “तुम्हें जो बताया गया वह पूरी सच्चाई नहीं है.” अमन चुप हो गया। उस आदमी ने जेब से कुछ कागज निकाले और कहा, “अगर तुमने यह शादी की तो तुम्हें बहुत नुकसान हो सकता है.” अमन ने कागज लेने से इंकार कर दिया। उसने कहा, “अगर आपके पास कोई सच्चाई है तो सीधे राजेंद्र अंकल के सामने जाकर बताइए। मेरे सामने आधी अधूरी बातें करके किसी के बारे में गलतफहमी पैदा मत कीजिए.” वह आदमी कुछ पल तक अमन को देखता रहा और फिर वहां से चला गया।
लेकिन अमन के मन में सवाल पैदा हो गया था। आखिर वह आदमी कौन था और वह शीतल की शादी क्यों रोकना चाहता था? अमन ने उसी दिन राजेंद्र को सारी बात बता दी। राजेंद्र ने गंभीर होकर कहा, “बेटा, मुझे शक है कि यह विक्रम के परिवार की कोई चाल हो सकती है.” अमन ने पूछा, “क्या विक्रम दोबारा शीतल की जिंदगी में आना चाहता है?” राजेंद्र ने कहा, “मुझे नहीं पता.” लेकिन मैं अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहता.” राजेंद्र ने तुरंत अपने पुराने वकील से संपर्क किया और शीतल के तलाक से जुड़े सभी दस्तावेज फिर से निकलवाए। वकील ने साफ बताया कि शीतल का तलाक कानून कानूनी रूप से पूरा हो चुका था और उसके खिलाफ कोई ऐसी बात नहीं थी जिससे उसकी दूसरी शादी पर कोई सवाल उठता। राजेंद्र ने राहत की सांस ली। लेकिन उसने फिर भी अमन से कहा, “बेटा, अगर तुम्हें लगता है कि यह रिश्ता तुम्हारे लिए मुश्किल हो सकता है तो तुम पीछे हट सकते हो.” अमन ने राजेंद्र की तरफ देखा और बोला, “अंकल, मैं मुश्किल से डरकर रिश्ता नहीं तोड़ना चाहता लेकिन मैं यह भी नहीं चाहता कि शीतल की वजह से आपको कोई परेशानी हो.” राजेंद्र ने कहा, “तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी यही है कि तुम हर बात में दूसरों के बारे में सोचते हो.” अमन ने कहा, “अंकल, मुझे बचपन से एक बात समझ आई है। इंसान के पास पैसा हो या ना हो अगर उसके पास किसी का साथ देने का दिल है तो वह कभी गरीब नहीं होता.”
उधर शीतल भी इस पूरे मामले से परेशान थी। उसने अमन से कहा, “अगर आपको मेरे कारण कोई परेशानी हो रही है तो आप पीछे हट सकते हैं। मैं आपको मजबूर नहीं करूंगी.” अमन ने उसकी तरफ देखा और बोला, “शीतल जी, मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं.” वह बोली, “क्या?” बोला, “आपने मुझे कभी अपनी जिंदगी में बोझ समझा?” शीतल तुरंत कहा, “नहीं.” अमन मुस्कुराकर बोला, “तो फिर मैं आपको अपनी जिंदगी में बोझ कैसे समझ सकता हूं?” शीतल की आंखों में आंसू आ गए। अमन ने कहा, “आपके साथ जो हुआ वह आपका अतीत है। मैं आपका भविष्य देखना चाहता हूं.” शीतल रोते हुए बोली, “लेकिन मुझे डर लगता है.” अमन ने कहा, “डर मुझे भी लगता है, लेकिन अगर दो लोग एक दूसरे का हाथ पकड़ लें तो डर छोटा हो जाता है.” यह सुनकर शीतल ने पहली बार अमन का हाथ पकड़ लिया। दोनों कुछ पल तक चुप रहे।
इधर राजेंद्र ने शादी की तैयारी शुरू कर दी। वह चाहता था कि शादी बहुत धूमधाम से हो। उसने अमन से कहा, “बेटा, शादी में तुम्हारे लिए नए कपड़े, गाड़ी और बाकी सब चीजें मैं अपनी तरफ से दूंगा.” अमन ने कहा, “अंकल, कपड़े आप दे सकते हैं। लेकिन एक बात मैं आपसे जरूर कहना चाहता हूं. शादी में मेरे लिए बहुत ज्यादा खर्च मत कीजिए.” राजेंद्र ने कहा, “क्यों?” अमन बोला, “क्योंकि मैं नहीं चाहता कि लोग यह कहें कि जूस वाला लड़का करोड़पति के घर में जाकर अमीर बन गया। मैं चाहता हूं कि लोग कहें कि दो अच्छे इंसानों ने एक दूसरे को चुना.” राजेंद्र की आंखें नम हो गई। उसने कहा, “बेटा, आज मुझे तुम पर गर्व है.”
शादी की तारीख तय हो गई लेकिन शादी से दो दिन पहले एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे घर को हिला दिया। राजेंद्र के ऑफिस में अचानक एक जरूरी फाइल गायब हो गई। उस फाइल में राजेंद्र की कई महत्वपूर्ण संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज थे। सभी कर्मचारियों से पूछताछ हुई। किसी को कुछ पता नहीं था। लेकिन उसी शाम किसी ने राजेंद्र से कहा, “साहब, आखिर आखिरी बार वह फाइल अमन के हाथ में देखी गई थी.” राजेंद्र कुछ पल के लिए चुप हो गया। अमन को बुलाया गया। राजेंद्र ने पूछा, “बेटा, क्या तुमने वह फाइल देखी थी?” अमन ने कहा, “जी अंकल, मैंने देखी थी लेकिन मैंने उसे छुआ भी नहीं था.” एक रिश्तेदार तुरंत बोल पड़ा। “यही तो बात है। इसे पता है कि शादी के बाद इतनी बड़ी संपत्ति का हिस्सा इसे मिल सकता है. शायद इसने पहले ही दस्तावेज अपने पास कर लिए हो.” अमन का चेहरा उतर गया। वह कुछ नहीं बोला। शीतल ने गुस्से में कहा, “बस कीजिए. अमन के बारे में ऐसा बोलने से पहले सबूत दीजिए.”
रिश्तेदार बोला, “मैं तो सिर्फ शक की बात कर रहा हूं.” अमन ने राजेंद्र की तरफ देखा। उसकी आंखों में दुख था। वह बोला, “अंकल, अगर आपको भी मुझ पर शक है तो मैं आज ही इस घर से चला जाऊंगा.” राजेंद्र तुरंत उठ खड़ा हुआ। उसने कहा, “मुझे तुम पर शक नहीं है.” अमन ने कहा, “लेकिन अगर मेरे कारण आपके परिवार में दरार पड़ रही है तो मैं यह रिश्ता नहीं चाहता.” शीतल रोते हुए बोली, “अमन, ऐसा मत कहिए.” अमन ने कहा, “मैं नहीं चाहता कि शादी के बाद हर छोटी बात पर मेरी नियत पर सवाल उठे.” राजेंद्र ने कहा, “तुम कहीं नहीं जाओगे.” फिर उसने अपने मैनेजर से पूछा, “आखिरी बार फाइल कहां देखी गई थी?” मैनेजर ने बताया कि फाइल को ऑफिस के पुराने रिकॉर्ड रूम में रखा गया था। राजेंद्र तुरंत वहां गया। कुछ देर खोजने के बाद उसे पता चला कि फाइल एक दूसरी अलमारी में रख दी गई थी। दरअसल एक कर्मचारी ने पुराने दस्तावेजों को व्यवस्थित करते समय उसे गलती से दूसरी जगह रख दिया था। फाइल मिलते ही राजेंद्र ने सबके सामने कहा, “जिस लड़के पर तुम लोगों ने शक किया था आज उसी की ईमानदारी के सामने तुम सबकी सोच छटी पड़ गई.”
वह रिश्तेदार की तरफ देखकर बोला, “अमन को मेरी संपत्ति की जरूरत नहीं है। अगर उसे पैसा चाहिए होता तो वह उस दिन मेरे दिए हुए लिफाफे में रखी रकम लेकर भाग सकता था। लेकिन उसने एक रुपया भी नहीं लिया.” कमरे में खामोशी छा गई। अमन की आंखों में आंसू थे। राजेंद्र उसके पास गया और सबके सामने उसका हाथ पकड़ लिया और बोले, “आज से यह सिर्फ मेरी बेटी का होने वाला पति नहीं है। यह मेरा बेटा है.” शीतल अपने पिता से लिपट कर रो पड़ी।
दोस्तों, आखिर वह दिन भी आ गया जिसका इंतजार सब कर रहे थे। शादी का मंडप सज चुका था। अमन साधारण कपड़ों में बैठा था। राजेंद्र ने अपनी तरफ से शादी में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी थी। लेकिन अमन की इच्छा के अनुसार शादी को जरूरत से ज्यादा दिखावे वाला नहीं बनाया गया था। जब शीतल दुल्हन बनकर मंडप में आई तो अमन की नजर उस पर पड़ी। शीतल की आंखों में खुशी के साथ आंसू भी थे। उसे अपनी पहली शादी याद आ रही थी। लेकिन आज उसके मन में डर नहीं था क्योंकि आज उसके सामने ऐसा इंसान बैठा था जो उसे उसके अतीत से नहीं उसके वर्तमान से पहचानता था। फेरे फेरे शुरू हुए। पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे। अमन और शीतल एक दूसरे के साथ-साथ फेरे ले रहे थे।
सातवें फेरे के बाद अमन ने शीतल की तरफ देखकर कहा, “मैं आपसे एक वादा करता हूं। मैं आपको कभी किसी चीज के लिए मजबूर नहीं करूंगा। हम दोनों मिलकर जिंदगी के फैसले करेंगे.” शीतल की आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने कहा, “और मैं वादा करती हूं कि मैं आपके साथ हर मुश्किल में खड़ी रहूंगी.” राजेंद्र दूर खड़ा यह सब देख रहा था। उसकी आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे। शादी के बाद राजेंद्र ने अमन को अपने पास बुलाया। उसने कहा, “बेटा, यह कागज लो.” अमन ने पूछा, “यह क्या है?” राजेंद्र ने कहा, “तुम्हारे नाम कुछ संपत्ति कर रहा हूं.” अमन ने कागज लेने से इंकार कर दिया। बोला, “अंकल, मुझे इसकी जरूरत नहीं है.” राजेंद्र ने कहा, “यह तुम्हें खरीदने के लिए नहीं है। यह एक पिता की तरफ से अपने बेटे के लिए है.”
अमन कुछ नहीं बोला। राजेंद्र ने कहा, “तुमने मुझे यह सिखाया है कि असली अमीरी बैंक खाते में नहीं इंसान के चरित्र में होती। इसलिए आज मुझे लगता है कि मेरी संपत्ति का सही हकदार वही इंसान है जो उसके पीछे नहीं भागता.” अमन की आंखों में आंसू आ गए। उसने कागज ले लिया लेकिन उसने कहा, “अंकल, मैं वादा करता हूं कि इस संपत्ति का इस्तेमाल सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी करूंगा.” राजेंद्र ने उसे गले लगा लिया।
समय बीतता गया। अमन ने जूस का अपना काम बंद नहीं किया। राजेंद्र ने उसकी मदद से शहर में एक बड़ी जूस और हेल्थ ड्रिंक की दुकान शुरू करवाई। कुछ ही समय में अमन ने अपने काम को इतना बढ़ाया कि उसके पास कई कर्मचारी काम करने लगे। लेकिन अमन में कोई घमंड नहीं आया। वह आज भी सुबह उठकर सबसे पहले अपनी दुकान पर जाता था। एक दिन वही बुजुर्ग महिला उसके पास आई जिसे उसने कभी पैसे ना होने पर मुफ्त जूस पिलाया था। अमन ने उसे पहचान लिया। वह तुरंत उठकर उसके पास गया। बोला, “अम्मा, आप बैठिए.” महिला ने कहा, “बेटा, अब तो तुम्हारी बड़ी दुकान हो गई. मुझे पहचान लिया.” अमन मुस्कुरा कर बोला, “अम्मा, जिसने मुझे दुआ दी हो उसे मैं कैसे भूल सकता हूं?” शीतल यह सब देख रही थी। उसने मुस्कुराकर कहा, “अमन, आपने अपना वादा निभा दिया.” अमन ने पूछा, “कौन सा?” शीतल बोली, “आपने कहा था कि अगर कभी आपके पास पैसा आया तो आप जरूरतमंद बच्चों की मदद करेंगे.” अमन ने कहा, “हां, और वह काम अभी शुरू हुआ है.” कुछ महीनों बाद अमन ने गरीब बच्चों के लिए एक छोटा सा शिक्षा केंद्र खुलवाया। वहां उन बच्चों को पढ़ाया जाने लगा जिनके माता-पिता उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे। राजेंद्र अक्सर वहां जाता और बच्चों को देखकर खुश होता।
एक दिन उसने अमन से कहा, “बेटा, जब तुम पहली बार मेरे घर आए थे तो तुमने कहा था कि बिना मेहनत के ज्यादा पैसे लेने की आदत नहीं डालना चाहता. आज तुम करोड़ों की संपत्ति के बीच खड़े हो। लेकिन तुम्हारे अंदर कोई बदलाव नहीं आया.” अमन ने मुस्कुराकर कहा, “अंकल, आपने मुझे पैसा नहीं दिया। आपने मुझे परिवार दिया.” राजेंद्र की आंखों में आंसू आ गए। वो बोला, “नहीं बेटा, परिवार तुमने मुझे दिया है.”
दोस्तों, इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिंदगी में इंसान की कीमत उसकी जेब से नहीं उसके चरित्र से तय होती है। अमन के पास पैसा नहीं था लेकिन उसके पास ईमानदारी थी। शीतल के पास एक टूटा हुआ अतीत था। लेकिन उसके अंदर फिर से खुश होने की हिम्मत थी। राजेंद्र के पास करोड़ों की संपत्ति थी। लेकिन वह अपनी बेटी के लिए सिर्फ एक ऐसा इंसान चाहता था जो उसे सम्मान दे। और आखिरकार तीनों को वही मिला जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी. इसलिए दोस्तों, कभी किसी इंसान को उसके कपड़ों, उसके काम या उसकी आर्थिक स्थिति देखकर छोटा मत समझिए। क्योंकि हो सकता है जिसके पास आज कुछ नहीं है उसके पास कल पूरी दुनिया हो और हो सकता है जिसके पास आज करोड़ों रुपए हैं उसे भी जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत सिर्फ एक सच्चे इंसान की हो।
याद रखिए, पैसा इंसान को अमीर बना सकता है लेकिन संस्कार ही उसे बड़ा इंसान बनाते हैं। रिश्ते दौलत से नहीं भरोसे से टिकते हैं और सच्चा जीवन साथी वही है जो आपके अच्छे समय में नहीं बल्कि आपके बुरे समय में आपका हाथ पकड़ कर कहे “मैं तुम्हारे साथ हूं”. दोस्तों, यहां पर कहानी का अंत होता है और यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताइएगा और हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लीजिएगा क्योंकि मैं आप लोगों के लिए एक से बढ़कर एक कहानियां लेकर आता रहता हूं। धन्यवाद