गरीब अनाथ लड़की ने करोड़पति लड़के की जान बचाई, फिर बदल गई उसकी पूरी जिंदगी
गरीब अनाथ लड़की ने करोड़पति लड़के की जान बचाई, फिर बदल गई उसकी पूरी जिंदगी
दिल्ली की सर्द रात थी।
सड़कें लगभग सुनसान थीं। चारों तरफ घना कोहरा छाया हुआ था और ठंडी हवा हड्डियों तक चुभ रही थी। सड़क के किनारे एक पुरानी बेंच पर एक युवक बेसुध पड़ा था।
उसकी सांसें तेज चल रही थीं।
चेहरा पीला पड़ चुका था।
तभी वहां से एक लड़की गुजरी।
उसके कपड़े साधारण थे। हाथ में एक छोटा-सा बैग था और पैरों में घिसी हुई चप्पलें।
वह लड़की थी—संजना।
संजना ने युवक को देखा तो पहले डर गई।
लेकिन अगले ही पल वह उसके पास दौड़कर पहुंची।
“भैया… सुनिए! आप ठीक हैं?”
युवक ने आंखें खोलने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत बेहद खराब थी।
“पा… पानी…”
संजना ने तुरंत अपना छोटा पानी का बोतल निकाला।
“ये लीजिए पानी। धीरे-धीरे पीजिए।”
उसने युवक को सहारा देकर पानी पिलाया।
फिर अपना एकमात्र शॉल उसके ऊपर डाल दिया।
“आप यहां अकेले मत रहिए। मैं किसी को बुलाती हूं।”
कुछ देर बाद आसपास के लोगों की मदद से युवक को अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल पहुंचने से पहले युवक ने संजना का हाथ पकड़ लिया।
“तुम… कौन हो?”
संजना मुस्कुराई।
“कोई नहीं… बस इंसान हूं।”
और वह वहां से चली गई।
उसे क्या पता था कि जिस इंसान की उसने उस रात जान बचाई थी, वही कुछ साल बाद उसकी पूरी जिंदगी बदलने वाला था।

पांच साल बाद…
मुंबई के एक आलीशान कॉर्पोरेट ऑफिस में एक युवा करोड़पति अपनी कुर्सी पर बैठा था।
नाम था—आरव मल्होत्रा।
देश की बड़ी कंपनियों में उसका नाम लिया जाता था।
लेकिन आज उसके सामने रखी फाइलों पर उसका ध्यान नहीं था।
उसकी आंखों के सामने बार-बार वही चेहरा आ रहा था।
एक गरीब लड़की…
हाथ में पानी की बोतल…
और कंधे पर रखा हुआ अपना शॉल।
आरव ने अपने कर्मचारी सुनील से पूछा,
“कुछ पता चला?”
“सर, हमने पूरे शहर में पता करवाया है। लेकिन उस लड़की का कोई सुराग नहीं मिला।”
आरव ने गहरी सांस ली।
“पांच साल हो गए सुनील। उसने उस रात मेरी जान बचाई थी। मैं उसका शुक्रिया तक नहीं कर पाया।”
“सर, शायद वह आपको भूल चुकी होगी।”
आरव खिड़की से बाहर देखते हुए बोला,
“लेकिन मैं उसे नहीं भूला।”
एक अनजान लड़की की जिंदगी
दूसरी तरफ उसी शहर के एक पुराने मोहल्ले में संजना रहती थी।
संजना के माता-पिता बचपन में ही गुजर चुके थे।
रिश्तेदारों ने उसे अपने घर में रख तो लिया था, लेकिन बेटी की तरह नहीं।
घर के सारे काम उसी से करवाए जाते थे।
सुबह चार बजे उठना…
घर की सफाई…
खाना बनाना…
बर्तन धोना…
और फिर अपनी पढ़ाई के लिए थोड़ा-सा समय निकालना।
संजना का एक सपना था।
वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती थी।
लेकिन उसके सपने का मजाक उड़ाया जाता था।
एक सुबह संजना किताब लेकर बैठी थी।
तभी उसकी मौसी ने आवाज लगाई,
“संजना! अभी तक खाना नहीं बनाया?”
“मौसी, बस दस मिनट… कल मेरा टेस्ट है।”
“टेस्ट? किस चीज का?”
“यूपीएससी की तैयारी कर रही हूं।”
मौसी हंस पड़ी।
“तुम और यूपीएससी? पहले घर के काम