Agra की खूबसूरत विधवा और African लड़के की सच्ची कहानी |
Agra की खूबसूरत विधवा और African लड़के की सच्ची कहानी |
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यह कहानी उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा की है। आगरा जिसे लोग मोहब्बत की निशानी ताजमहल के लिए जानते हैं। उसी शहर के एक शांत और पौश इलाके में अक्षरा नाम की एक बेहद खूबसूरत और युवा महिला रहती थी। अक्षरा दिखने में इतनी आकर्षक थी कि जो भी उसे एक नजर देख लेता उसकी खूबसूरती का कायल हो जाता। उसका सुडोल शरीर, गोरा रंग और मासूम चेहरा किसी का भी मन मोह लेने के लिए काफी था। लेकिन इस बेपनाह खूबसूरती के पीछे दुखों का एक गहरा समंदर छिपा हुआ था। अक्षरा एक विधवा थी। और उस बड़े से आलीशान बंगले में बिल्कुल अकेली रहती थी। उसके पति भारतीय सेना में एक बहुत बड़े और उच्च पद पर अधिकारी थे। जब तक उसके पति जीवित थे अक्षरा की जिंदगी किसी रानी से कम नहीं थी। उसके पति उससे बेइंतहा मोहब्बत करते थे। उसकी हर छोटी बड़ी ख्वाहिश का ख्याल रखते थे और उसे हथेली का छाला बनाकर रखते थे। अक्षरा ने कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं की थी।
लेकिन कहते हैं ना कि किस्मत का लिखा कोई नहीं बदल सकता। एक दिन एक भयानक हादसे में उसके पति की जान चली गई और अक्षरा की हंसती खेलती दुनिया पल भर में उजड़ गई। पति के जाने के बाद अक्षरा के सिर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी कोई संतान भी नहीं थी जिसके सहारे वह अपनी बाकी जिंदगी काट पाती। पति की मौत के बाद वह अपने ही घर में अकेली रह गई। हर दिन हर पल उसे अपने पति की याद सताती। वो घर के कोनेकोने में अपने पति को तलाशती और दिन रात उदास बैठी रहती। उसे लगता था कि जब तक उसके पति जिंदा थे तब तक उसकी जिंदगी में रंग थे। लेकिन अब सब कुछ बेरंग, नीरस और खाली हो चुका है। उसका जीना बेमजा सा हो गया था। हालांकि आर्थिक रूप से अक्षरा को कोई परेशानी नहीं थी। सेना के अधिकारी होने के कारण पति के निधन के बाद सरकार और सेना की तरफ से उसे मुआवजे के तौर पर एक बहुत बड़ी रकम मिली थी। इतनी बड़ी रकम कि वह बिना कुछ किए अपनी पूरी जिंदगी बेहद ऐशो आराम से गुजार सकती थी। अक्षरा ने बुद्धिमानी दिखाते हुए उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा बैंक में सुरक्षित फिक्स डिपॉजिट में जमा कर दिया। जिससे उसे हर महीने अच्छा ब्याज मिलता रहे। बाकी बचे पैसों से उसने आगरा के मुख्य बाजार में कपड़ों की एक थोक दुकान खोल ली। दुकान चलाने के लिए उसने चार पांच भरोसेमंद और मेहनती आदमियों को काम पर रख लिया। वही लोग दुकान का सारा लेनदेन, माल की बिक्री और ग्राहकों को संभालने का काम करते थे। महीने के अंत में जो भी मुनाफा होता वे ईमानदारी से लाकर अक्षरा के हाथ में थमा देते थे। अक्षरा को दुकान जाने की बहुत कम जरूरत पड़ती थी। कभी दो-तीन महीनों में एक बार जब उसका मन होता या हिसाब किताब देखना होता तभी वह दुकान का चक्कर लगाती वरना वह पूरा दिन अपने आलीशान बंगले में अकेली ही अपनी उदासी के साथ वक्त बिताया करती थी।

दिन बीतते गए और मौसम बदला। आगरा में कड़ाके की बारिश का मौसम आ गया। आसमान में काले-कलूटे बादल घिरे रहते और रहरह कर झमाझम बारिश होती थी। एक दिन दोपहर के वक्त अक्षरा को घर के राशन और कुछ जरूरी चीजों की खरीदारी करने के लिए बाजार जाना था। उसने सोचा कि थोड़ी देर रुक जाती है। शायद बारिश थम जाए लेकिन बारिश थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। काफी देर इंतजार करने के बाद जब अक्षरा पूरी तरह उग गई तो उसने छाता लिया और बाजार के लिए पैदल ही निकल पड़ी। सड़क के किनारे फुटपाथ पर चलती हुई वह बाजार की तरफ बढ़ रही थी। बारिश इतनी तेज थी कि छाता होने के बावजूद वो काफी हद तक भीग रही थी। चारों तरफ पानी भरा हुआ था और फुटपाथ पर काई जमने के कारण काफी फिसलन हो गई थी। अक्षरा ध्यान से कदम रख रही थी। लेकिन तभी अचानक उसका एक पैर फिसला और उसका संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। अक्षरा जोर से चीख पड़ी और पीठ के बल जमीन पर गिरने ही वाली थी कि तभी एक मजबूत हाथ ने उसे पीछे से कसकर थाम लिया। अक्षरा की सांसे अटक गई थी। जब उसने खुद को गिरने से बचा हुआ पाया तो उसने राहत की सांस ली और मुड़कर देखा कि आखिर उसे किसने बचाया है।
सामने एक लंबा सुथित शरीर वाला अफ्रीकी लड़का खड़ा था। अक्षरा उसे देखती ही रह गई। वो लड़का सामलेस स्लोने रंग का था। लेकिन उसकी आंखें बहुत मासूम और चेहरा बेहद आकर्षक था। उस लड़के का नाम जसन था। जसन मूल रूप से अमेरिकी नागरिक था और अफ्रीकी मूल का था। वो भारत में आगरा के एक नामी मेडिकल कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन और डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने आया हुआ था। जसन कोई बहुत अमीर खानदान से नहीं था बल्कि एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था। उसके माता-पिता का एक ही सपना था कि उनका बेटा डॉक्टर बने। उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई जोड़कर जसन को पढ़ाई के लिए भारत भेजा था। जसन आगरा में एक छोटा सा कमरा किराए पर लेकर अकेला रहता था। उसके घर वाले हर महीने पढ़ाई और खानेपीने के लिए कुछ पैसे भेज दिया करते थे। जिससे वह जैसे तैसे अपना खर्च चलाता था। उस दिन बारिश में जसन भी किसी काम से बाहर निकला था। जब उसने अक्षरा को गिरते देखा तो तुरंत आगे बढ़कर उसे संभाल लिया।
जब जसन की नजर अक्षरा पर पड़ी तो वह भी एकक उसे देखता ही रह गया। अक्षरा बारिश में भीगी हुई थी। उसके चेहरे पर पानी की बूंदे चमक रही थी। और उसकी बेपनाह खूबसूरती को देखकर जसन कुछ पलों के लिए सब कुछ भूल गया। अक्षरा ने अपने कपड़े ठीक किए और मुस्कुराते हुए कहा, थैंक यू सो मच। अगर आज तुम नहीं होते तो मुझे बहुत गंभीर चोट लग जाती। जसन ने बहुत ही सादगी और विनम्रता से जवाब दिया। मैडम इसमें थैंक यू कहने की कोई बात नहीं है। मैंने तो बस इंसानियत के नाते आपकी मदद की है। कोई भी होता तो यही करता। जसन की यह सादगी और नम्रता अक्षरा के दिल को छू गई। उसने महसूस किया कि यह लड़का अंदर से बहुत ही सच्चा और ईमानदार है। अक्षरा ने पूछा वैसे तुम्हारा नाम क्या है? लड़के ने मुस्कुरा कर कहा मैडम मेरा नाम जसन है। फिर जसन ने पूछा और आपका नाम? अक्षरा ने कहा मुझे लोग अक्षरा कहते हैं। दोनों कुछ देर एक दूसरे को देखते रहे। फिर जसन ने माहौल को हल्का करते हुए पूछा। अक्षरा जी इतनी तेज बारिश में आप अकेली कहां जा रही है?
अक्षरा ने अपनी भीगी हुई लटों को पीछे करते हुए कहा, मैं बाजार कुछ जरूरी सामान और नाश्ता लेने जा रही थी। मुझे नहीं पता था कि मौसम इतना खराब हो जाएगा और रास्ते में मेरा पैर फिसल जाएगा। जसन ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, मैडम अगर आप बुरा ना माने तो क्या मैं आपके साथ बाजार चलूं? बारिश बहुत तेज है और आपके पास काफी सामान हो जाएगा। आपको अकेले परेशानी होगी। मैं सामान उठाने में आपकी मदद कर दूंगा। अक्षरा ने सोचा कि इस अनजान शहर में इतना मददगार लड़का मिलना मुश्किल है। उसने मुस्कुरा कर हां कर दी। इसके बाद दोनों साथ में बाजार गए। जसन ने अक्षरा के साथ घूम-घूम कर राशन, स्नेक्स और घर का सामान खरीदा और सारे भारी थैले खुद उठा लिए। जसन का यह मददगार रवैया देखकर अक्षरा का दिल पसीज गया। खरीदारी खत्म होने के बाद अक्षरा उसे बाजार के ही एक अच्छे रेस्टोर में ले गई। वहां दोनों ने गरमागरम चाय पियो और नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद जब वे बाहर निकले तो जसन ने कहा मैडम सामान बहुत भारी है। चलिए मैं यह सारा सामान आपके घर तक छोड़ देता हूं। अक्षरा ने कहा ठीक है चलो। दोनों अक्षरा के आलीशान बंगले पर पहुंचे। जसन ने सारा सामान अंदर लाकर रख दिया। इसके बाद जब जसन ने जाने के लिए अलविदा कहा तो अक्षरा ने बाहर देखा। बाहर अभी भी मूसलाधार बारिश हो रही थी। अक्षरा ने जसन से कहा देखो जसन बाहर बहुत तेज बारिश हो रही है। इस मौसम में तुम्हारा जाना ठीक नहीं है। तुम थोड़ी देर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठो। जब तक बारिश धीमी होती है, मैं रसोई में जाकर तुम्हारे लिए कड़क चाय और कुछ स्पेशल नाश्ता बनाकर लाती हूं। फिर दोनों साथ में बैठकर चाय पिएंगे। जसन मना नहीं कर सका और सोफे पर बैठ गया। अक्षरा किचन में गई और उसने बहुत ही चाव से स्पेशल चाय बनाई और बिस्कुट व नमकीन प्लेट में सजाकर ले आई। दोनों सोफे पर आमने-सामने बैठ गए और चाय की चुस्कियां लेते हुए बातें करने लगे। बातचीत के दौरान अक्षरा ने पूछा जसन तुम पढ़ाई के अलावा यहां क्या करते हो? क्या कोई जॉब वगैरह करते हो? जसन का चेहरा थोड़ा उदास हो गया। उसने सिर झुका कर कहा नहीं मैडम मैं पिछले कई महीनों से एक अच्छी पार्ट टाइम नौकरी की तलाश कर रहा हूं। लेकिन मुझे कोई काम नहीं मिल रहा।
अक्षरा ने पूछा क्यों? क्या तुम्हारे घरवाले तुम्हें पैसे नहीं भेजते? जसन ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, मैडम सच कहूं तो मेरे घर वाले बहुत अमीर नहीं है। उनकी आर्थिक स्थिति थोड़ी तंग रहती है। वे कभी-कभी समय पर पैसे नहीं भेज पाते। इसलिए मैं चाहता हूं कि मुझे कोई पार्ट टाइम काम मिल जाए ताकि मैं अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठा सकूं और घर वालों पर बोझ ना बनूं। यहां तक कि जिस कमरे में मैं रहता हूं, उसका मकान मालिक भी बहुत सख्त है। कई महीनों से किराया ना दे पाने की वजह से वो मुझे कमरा खाली करने की धमकी दे रहा है। शायद अगले कुछ दिनों में वह मुझे बेघर कर दे। जसन की बातें सुनकर अक्षरा का दिल भर आया। उसे जसन की सच्चाई और उसकी मजबूरी पर बेहद सहानुभूति महसूस हुई। तभी अक्षरा को याद आया कि उसकी थोक कपड़ों की दुकान पर एक कर्मचारी की जगह खाली है। क्योंकि पुराना आदमी हाल ही में अपने गांव लौट गया था। अक्षरा ने जसन की तरफ देखा और कहा जसन क्या तुम मेरी थोक कपड़ों की दुकान पर काम करना चाहोगे? जसन ने हैरान होकर पूछा ओ मैडम क्या आपकी कपड़ों की दुकान भी है? अक्षरा ने कहा हां जसन मेरे पति के जाने के बाद मैंने अपना मन बहलाने और सहारे के लिए वह दुकान खोली थी। वहां कुछ लोग काम करते हैं और जो भी कमाई होती है ईमानदारी से मुझे दे जाते हैं। मुझे तुम बहुत ही ईमानदार और मेहनती लड़के लगते हो। अगर तुम मेरी दुकान पर काम करोगे तो तुम्हें अच्छे पैसे मिल जाएंगे और तुम्हारी पढ़ाई भी आराम से चलती रहेगी। यह सुनकर जसन की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। लेकिन फिर उसने उदास होकर कहा, मैडम, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। लेकिन मेरे रहने की समस्या अभी भी बनी हुई है। मकान मालिक मुझे कल ही कमरा खाली करने को कह रहा है।
अक्षरा ने बिना किसी झिझक के कहा, जसन, तुम रहने की बिल्कुल चिंता मत करो। तुम देख ही रहे हो कि मेरा इतना बड़ा बंगला है और मैं इसमें बिल्कुल अकेली रहती हूं। यहां कई कमरे खाली पड़े हैं। तुम कल ही अपना सामान समेटो और मेरे घर आकर रहने लगो। जसन भावुक हो गया। उसने भरे गले से कहा, मैडम, आप मेरे लिए इतना सब कुछ कर रही है। आज के जमाने में तो कोई अपना भी इतना नहीं करता। मैं आपका यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा। अक्षरा भी भावुक हो गई। तब तक बाहर बारिश भी थम चुकी थी। जसन ने अक्षरा से हाथ मिलाया और कहा ठीक है मैडम मैं कल सुबह ही अपना कमरा खाली करके सारा सामान लेकर आपके घर आ जाऊंगा। मैं रोज सुबह कॉलेज जाऊंगा। फिर दुकान का काम देखूंगा और शाम को आपकी मदद करूंगा। अगले ही दिन सुबह जसन ने अपने किराए के कमरे का सारा सामान एक ऑटो रिक्शा में लादा और सीधे अक्षरा के बंगले पर पहुंच गया। अक्षरा ने उसका मुस्कुराकर स्वागत किया और उसे घर का एक साफ सुथरा और बड़ा सा कमरा रहने के लिए दे दिया। जसन ने अपना सारा सामान वहां सेट कर लिया। उसी दिन से जसन की एक नई जिंदगी शुरू हो गई। वो सुबह कॉलेज जाता। दोपहर से शाम तक अक्षरा की दुकान संभालता, और ईमानदारी से सारा हिसाब किताब रखता। शाम को जब वो घर लौटता, तो अक्षरा के साथ बैठकर बातें करता।
धीरे-धीरे समय बीतने लगा। जसन के आने से अक्षरा की नीरस और खामोश जिंदगी में एक नई चमक आ गई थी। उसका अकेलापन गायब होने लगा था। जो महिला दिनरा अपने मृत पति की यादों में रोया करती थी। अब उसके चेहरे पर अक्सर मुस्कान खिली रहती थी। जसन भी अक्षरा की बहुत इज्जत करता था और उसका पूरा ख्याल रखता था। दिन बीतने के साथ-साथ उन दोनों के बीच की बातचीत एक गहरी दोस्ती में बदल गई। दोनों एक दूसरे के साथ वक्त बिताना पसंद करने लगे। अक्षरा जब भी तैयार होकर आती तो जसन उसे देखता ही रह जाता। अक्षरा की खूबसूरती और उसका सुडोल फिगर जसन को अपनी ओर आकर्षित करने लगा था। वहीं अक्षरा को भी जसन का मजबूत शरीर, उसकी सादगी और उसका ख्याल रखने वाला अंदाज बहुत पसंद आने लगा था। दोनों के दिलों में एक दूसरे के लिए आकर्षण और खिंचाव पैदा हो चुका था। लेकिन कोई भी अपनी जुबान से कुछ कह नहीं पा रहा था। फिर एक दिन मौसम बहुत सुहाना था। शाम के वक्त अक्षरा ने जसन से कहा, जसन आज रात मैंने तुम्हारे लिए बहुत ही खास और स्वादिष्ट खाना बनाया है। इसलिए तुम अपने लिए कुछ मत बनाना। आज हम दोनों एक साथ बैठकर खाना खाएंगे। यह सुनकर जसन बहुत खुश हुआ। रात हुई तो जसन हाथ मुंह धोकर अक्षरा के कमरे में गया। अक्षरा एक बड़ी सी ट्रे में तरह-तरह के पकवान सजाकर ले आई। जब अक्षरा ने खाना परोसा तो जसन ने कहा, मैडम, आपने इतने प्यार से यह खाना बनाया है। मैं इसे अकेले कैसे खा सकता हूं? आज आपको भी मेरे साथ ही खाना होगा। अक्षरा ने हंसते हुए कहा, ठीक है बाबा। और दोनों एक ही बड़ी थाली में बैठकर खाना खाने लगे। खाना बेहद स्वादिष्ट बना था। बातें करतेकरते दोनों ने खाना खत्म किया।
खाना खाने के बाद जसन ने एक लंबी उबासी ली और कहा, मैडम खाना बहुत स्वादिष्ट था। अब मुझे थोड़ी नींद आ रही है। मैं अपने कमरे में सोने जाता हूं। अक्षरा ने तुरंत जसन का हाथ पकड़ लिया और कहा, रुको जसन। मुझे तुमसे कुछ बहुत जरूरी बात करनी है। जसन रुक गया और बोला बताइए मैडम क्या बात है? वैसे सच कहूं तो मैं भी आपसे कुछ कहना चाहता था लेकिन झिझक रहा था। अक्षरा ने मुस्कुराते हुए कहा पहले तुम बताओ। तुम क्या कहना चाहते हो? जसन ने कहा नहीं मैडम पहले आप कहिए। अक्षरा ने जसन की आंखों में आंखें डालते हुए कहा। जसन मैंने अफ्रीकी लड़कों के बारे में बहुत सी बातें सुन रखी हैं। लोग कहते हैं कि अफ्रीकी लड़के शारीरिक रूप से बाकी आम लड़कों से बिल्कुल अलग और बहुत ताकतवर होते हैं। क्या तुम भी सच में सबसे अलग हो? अक्षरा की यह बात सुनकर जसन पल भर के लिए खामोश हो गया। वह समझ गया कि अक्षरा के मन में क्या चल रहा है। काफी समय से विधवा रहने के कारण अक्षरा के भीतर दबी हुई शारीरिक इच्छाएं अब जाग चुकी थीं और वो जसन के साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहती थी। जसन ने थोड़ा गंभीर होकर कहा हां मैडम लोग जो कहते हैं वो सच है। हम शारीरिक रूप से थोड़े अलग और ज्यादा मजबूत होते हैं। लेकिन मैडम आप बिना सोचे समझे यह बात कह रही है। अगर हमने यह सीमा पार की तो इससे आपकी परेशानियां बहुत बढ़ सकती हैं। शायद आप इसे संभाल ना पाएं। अक्षरा ने जसन का हाथ अपने चेहरे पर रखते हुए कहा, जसन इसमें सोचने की क्या बात है? जब हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं। और हम दोनों की रजामंदी है तो फिर डरना कैसा? जो भी अंजाम होगा, मैं खुद संभालूंगी। मुझे बस तुम्हारी एक झलक देखनी है। अक्षरा की इन बातों और उसकी नजदीकी ने जसन के सब्र का बांध तोड़ दिया। वो भी अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पाया और बहक गया। जसन ने अक्षरा की बात मान ली और उसने अक्षरा की इच्छा पूरी करने की ठान ली। उस रात दोनों एक दूसरे में खो गए। अक्षरा सालों से अकेली थी। इसलिए उसने जसन का पूरा साथ दिया और जसन ने भी अक्षरा की हर अधूरी इच्छा को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन जैसा कि जसन ने चेताया था अफ्रीकी लड़कों की शारीरिक बनावट और ताकत आम लोगों से काफी अलग होती है। काफी देर तक चले इस सिलसिले के बाद जब सब कुछ शांत हुआ तो अक्षरा की हालत अचानक बहुत खराब हो गई।
जब जसन ने रोशनी जलाई तो उसने देखा कि अक्षरा बिस्तर से नीचे फर्श पर गिरी हुई है। वह दर्द से कराह रही थी और उससे उठते भी नहीं बन रहा था। उसकी हालत अत्यंत नाजुक हो चुकी थी और वो मदद के लिए गिड़गिड़ा रही थी। यह देखकर जसन के होश उड़ गए। वो घबरा गया और उसे अपने किए पर बेहद पछतावा होने लगा। उसने तुरंत अक्षरा को कपड़ों में लपेटा। अपनी बाहों में उठाया और बिना देर किए अपनी गाड़ी से शहर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल ले गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अक्षरा को तुरंत भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की एक टीम ने अक्षरा का इलाज शुरू किया। काफी जांच के बाद मुख्य डॉक्टर कैबिन से बाहर आए। जसन घबराया हुआ बाहर ही टहल रहा था। डॉक्टर ने जसन से कहा देखिए जसन पेशेंट की अंदरूनी हालत बहुत गंभीर है। उन्हें बहुत ज्यादा शारीरिक आघात पहुंचा है। हमें उनका तुरंत ऑपरेशन और इलाज करना होगा। उन्हें कम से कम दो से चार हफ्ते तक अस्पताल में ही भर्ती रहना पड़ेगा। जसन ने डॉक्टर के आगे हाथ जोड़ लिए और रोते हुए कहा डॉक्टर साहब चाहे जितने भी पैसे लग जाए मैं सब देने को तैयार हूं। मेरी दुकान, मेरा सब कुछ ले लीजिए। लेकिन अक्षरा जी को कुछ नहीं होना चाहिए। वे पूरी तरह ठीक होनी चाहिए। डॉक्टरों ने जसन को ढांडस बंधाया और सही तरीके से अक्षरा का इलाज शुरू कर दिया। जसन अगले चार हफ्तों तक एक पल के लिए भी अस्पताल से बाहर नहीं गया। वह दिनरा अक्षरा के सिरहाने बैठा रहता। उसे दवाइयां देता, उसकी देखभाल करता और उसके जल्दी ठीक होने की दुआएं मांगता। जसन की इस निस्वार्थ सेवा और समर्पण ने अक्षरा का दिल पूरी तरह जीत लिया। धीरे-धीरे डॉक्टरों की मेहनत और जसन की देखभाल रंग लाई। अक्षरा की सेहत में सुधार होने लगा और वह पूरी तरह से ठीक हो गई। चार हफ्ते बाद डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। जसन अक्षरा को लेकर वापस बंगले पर आया। घर के अंदर कदम रखते ही अक्षरा की आंखों से आंसू छलक पड़े। उसने जसन को कसकर गले लगा लिया और फूट-फूट कर रोने लगी। अक्षरा ने रोते हुए कहा, जसन, जब मेरे पति मुझे छोड़कर गए थे, तो मुझे लगा था कि मेरी जिंदगी वही खत्म हो गई है। लेकिन तुमने मेरी जिंदगी में आकर मुझे फिर से जीना सिखाया है। उस रात जो हुआ उसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी। गलती मेरी थी। मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी। लेकिन उस हादसे के बाद जिस तरह तुमने मेरी जान बचाई और मेरी सेवा की, उसने मुझे यह एहसास करा दिया कि तुम मुझसे कितना प्यार करते हो। मैं तुम्हारे इस एहसान को जिंदगी भर नहीं भूल सकती। जसन ने अक्षरा के आंसू पोंछे और कहा, अक्षरा जी, इसमें एहसान की कोई बात नहीं है। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं और आपकी आंखों में आंसू नहीं देख सकता। अक्षरा ने जसन का हाथ अपने हाथों में लिया और उसकी आंखों में देखते हुए कहा जसन अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकती मुझे तुम्हारी आदत हो गई है क्या तुम मुझसे शादी करोगे क्या तुम जिंदगी भर के लिए मेरे पति बनोगे
जसन थोड़ा चौका और बोला अक्षरा जी आप जानती है कि मैं एक अफ्रीकी लड़का हूं समाज के लोग तरह-तरह की बातें करेंगे ताने मारेंगे क्या आप सच में यह फैसला सोच समझ कर ले रही हैं। अक्षरा ने कहा जसन इंसान से गलती एक बार होती है। मुझे अब किसी समाज या किसी के तानों की परवाह नहीं है। मुझे सिर्फ तुम्हारी परवाह है। अब मुझे कुछ नहीं होगा। हम दोनों मिलकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे। अक्षरा का सच्चा प्यार और जिद देखकर जसन का दिल पिघल गया। उसने मुस्कुराते हुए अक्षरा के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद दोनों ने मंदिर में जाकर एक दूसरे को वरमाला पहनाई और कानूनी तौर पर शादी के बंधन में बंध गए। आज अक्षरा और जसन उसी बंगले में पतिप की तरह बेहद खुशी-खुशी अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। जसन अब डॉक्टर बनने के साथ-साथ अक्षरा के थोक कपड़ों के बिजनेस को भी बहुत बड़े स्तर पर संभाल रहा है। दोनों की जिंदगी में फिर से खुशियां लौट आई है और अब उन्हें दुनिया के किसी भी इंसान की बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। तो दोस्तों, यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी जब इंसान को लगता है कि उसकी जिंदगी के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और सब कुछ खत्म हो गया है। ठीक उसी मोड़ से जिंदगी की एक नई और खूबसूरत शुरुआत होती है। जिस अक्षरा ने अपने पति की मौत के बाद खुद को जिंदा लाश बना लिया था। किस्मत ने उसे जसन के रूप में एक ऐसा साथी दिया जिसने उसकी बेरंग जिंदगी में फिर से सतरंगी रंग भर दिए।