ससुर ने बहु के साथ बनाया गलत रिश्ता
ससुर ने बहु के साथ बनाया गलत रिश्ता
पिता का पाप और बेटे का बदला
दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे यूट्यूब चैनल पर। आज की कहानी है उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव से। गाँव का नाम है सूरजपुर। वहाँ रहता है एक गरीब किसान, नाम है सत्येंद्र सिंह। सत्येंद्र सिंह अपनी पत्नी के साथ छोटी-मोटी जमीन पर खेती-बाड़ी करता था। उसके पास दो-तीन बीघा ज़मीन थी। वह रात-दिन मेहनत करता, लेकिन उसके पैसे कभी-कभी थोड़े-बहुत और आने लगे। पत्नी की मौत हो गई तो सत्येंद्र का घर बदल गया।
सत्येंद्र अब शराब का दीवाना हो गया। दिन भर खेत में काम करता, शाम को शराब की दुकान पर जाकर नशा करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह शराबी, कबाबी और शैतान बन गया। गाँव की कई खूबसूरत औरतों के साथ उसका वक्त बिता चुका था। उसके पैसे खत्म होने लगे। अब उसकी नज़र छोटी ज़मीन पर पड़ी। उसने सोचा कि ज़मीन बेचकर कुछ पैसे कमा लूँ। उसके एक ही बेटा था, नाम था रवि। रवि की शादी हो चुकी थी एक खूबसूरत लड़की पूजा से। पूजा गाँव की एक संस्कारी औरत थी। वह घर संभालती, रवि की किराने की दुकान चलाती और अच्छे पैसे भी कमाती।

धीरे-धीरे समय बीतने लगा। रवि भी अपने पिता के रास्ते पर चल पड़ा। रोज़ रात के 9-10 बजे वह शराब की दुकान पर जाता, नशे में धुत होकर घर आता। पत्नी पूजा के साथ झगड़े होते, लेकिन कुछ नहीं बदलता। सत्येंद्र और रवि दोनों अपनी बहू पूजा पर नज़र डालने लगे। पूजा कुछ नहीं जानती थी। एक दिन सुबह के 8 बजे सत्येंद्र ने रवि को बुलाया। बोला, “बेटा, अब घर की हालत खराब हो गई है। सिर्फ दो कमरे हैं। मैं ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचकर तुम्हारे लिए महँगा घर बना दूँगा।”
पूजा पास खड़ी थी। उसने कहा, “पिताजी, जमीन मत बेचिए। मेहनत से घर बना लीजिए।” लेकिन सत्येंद्र और रवि दोनों की बातें मानने को तैयार नहीं थे। रवि गुस्से में पूजा को गालियाँ देने लगा। विवाद हुआ। सत्येंद्र ने बीच बचाव किया और रवि दुकान पर चला गया। पूजा अकेली घर में रह गई। सत्येंद्र की नज़र पूजा पर टिक गई थी। शाम को एक हैंडसम लड़का सुजीत रवि के घर आया। पूजा ने दरवाजा खोला। सुजीत ने कहा, “भाभी, मेरे दोस्त से मिलने आया हूँ।” लेकिन रवि शराब की दुकान पर था। सुजीत ने कहा, “तो मैं उसके पास जाकर शराब ला दूँ।”
दोनों दोस्त शराब की दुकान पर गए, फिर नदी के पास बैठकर पार्टी करने लगे। रवि नशे में धुत होकर घर आया। मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया। पूजा कमरे में थी। रवि ने कमरे का दरवाजा बंद किया, रस्सियाँ लाकर पूजा के हाथ-पैर बाँध दिए, कपड़े फाड़ दिए और गलत काम करने लगा। पूजा हाथ जोड़कर रो रही थी, लेकिन रवि कुछ नहीं सुन रहा था।
ठीक उसी समय सत्येंद्र शराब के नशे में घर आया। दरवाजा खुला पड़ा था। उसकी नज़र पूजा पर पड़ी। उसने कहा, “रवि, कमरा तो बंद करो।” लेकिन रवि जानवर जैसा व्यवहार कर रहा था। सत्येंद्र ने दरवाजा बंद किया। रवि काम जारी रखा। बाहर निकलकर रवि ने सुजीत को फोन करके कहा, “यार, आज पार्टी करो। मैंने बहू के साथ कुछ कर लिया।” सुजीत ने कहा, “ठीक है, मैं आता हूँ।”
रवि ने अमान (पटवारी) को 1 लाख का कर्ज लौटाने के लिए एक एकड़ ज़मीन बेचने का सौदा किया। अमान को पूजा की खूबसूरती देखकर लालच आया। उसने कहा, “जमीन बेचोगे तो बहू के साथ रात बिताओगे।” सत्येंद्र ने हाँ कर दी। अमान ने पूजा को नशीला दूध पिला दिया। रात 10 बजे अमान आया। सत्येंद्र ने कहा, “बहू बेहोश है, तुम्हारी इच्छा पूरी कर लो।” अमान ने भी गलत काम किया।
अगली सुबह पूजा होश में आई। उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे। उसने ससुर से पूछा, “आपने रात को क्या किया?” सत्येंद्र ने चाकू निकाला। कहा, “मेरे दोस्त अमान के साथ भी किया। तुम्हें कुछ नहीं पता चलेगा।” पूजा डर गई, लेकिन चुप हो गई। तीन-चार दिन बाद अमान ने सत्येंद्र को ज़मीन के सारे पैसे दे दिए और कागज़ात पूरा हो गए।
रवि ने अपने दोस्त सुजीत के साथ खेत में पार्टी करने का बहाना किया। सत्येंद्र ने अमान को फोन करके कहा, “आज मेरी बहू अकेली है, तुम आ जाओ।” अमान और सत्येंद्र शराब पीते रहे। नशे में दोनों ने घर का दरवाजा बंद किया। सत्येंद्र ने पूजा का सिर दीवार से पटक दिया। पूजा बेहोश हो गई। दोनों ने गलत काम किया। फिर अमान ने कहा, “बहू मर गई है, घर में दफन कर दो।” सत्येंद्र ने कहा, “घर में दफनाने के लिए खोदना पड़ेगा।” दोनों शराब पीते रहे।
तभी दरवाजे पर आवाज आई। सत्येंद्र ने दरवाजा खोला। रवि आया था। नशा उतर चुका था। वह पूजा के कमरे में गया। देखा कि पूजा अचेत अवस्था में है, सिर पर चोट लगी हुई है। रवि डर गया। “पिताजी! यह आपने किया है?” सत्येंद्र ने कहा, “यह तुम्हारी पत्नी नहीं है।” रवि गुस्से में पिता को थप्पड़ मारा। अमान ने भेद खोल दिया, “हाँ, मैंने और तुम्हारे पिता ने तुम्हारी पत्नी के साथ किया।” रवि ने कुल्हाड़ी उठाई। पिता और अमान दोनों को वार किया। रवि ने अपनी पत्नी को पुलिस स्टेशन ले जाकर बचा लिया।
पुलिस आया। देखा कि सत्येंद्र और अमान दोनों मारे गए, पूजा शव की तरह पड़ी थी। लेकिन पूजा की साँस चल रही थी। रवि ने कबूल किया, “मैंने इन लोगों के साथ गलत काम किया था, इसलिए मैंने हत्या कर दी।” तीन-चार दिन बाद पूजा होश में आई। उसने पुलिस को बयान दिया कि ससुर और अमान ने मिलकर गलत काम किया था।
जज साहब ने रवि को सजा सुनाई। लेकिन दोस्तों, रवि ने जो किया सही था या गलत? हत्या तो अपराध है, सजा भी मिलनी चाहिए। लेकिन क्या वह ससुर और दोस्तों के खिलाफ जाकर बचा था? कमेंट में बताइएगा।