भाभी ने सगे देवर को मौ#*त के घा*#ट उतार दिया/ वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
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पाप का अंत: एक खौफनाक बदला
राजस्थान के भरतपुर जिले में एक छोटा सा गाँव है—अनपुर। इस गाँव में रहने वाली बरखा देवी की कहानी किसी बुरे सपने से कम नहीं है। सात साल पहले कैंसर की वजह से उनके पति बलदेव सिंह का निधन हो गया था, और तब से बरखा देवी विधवा हो गईं। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। घर की सारी जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर लेते हुए, उन्होंने गाँव में कपड़े की एक दुकान खोली। यह दुकान बहुत अच्छी चलने लगी और इसके मुनाफे से बरखा ने न सिर्फ एक आलीशान घर बनाया, बल्कि गाँव में एक प्लॉट भी खरीदा।
बरखा देवी कामकाज में बहुत व्यस्त रहती थीं। जब भी वह दुकान पर होतीं, गाँव के पुरुष उनकी खूबसूरती पर मोहित होकर उन्हें घूरते रहते। कुछ ग्राहक तो सिर्फ उन्हें देखने के लिए ही दुकान पर आते थे। लेकिन बरखा ने हमेशा उन लोगों से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखी।

बरखा के परिवार में उनका एक देवर भी था—इंद्रजीत सिंह। इंद्रजीत पेशे से एक ट्रक ड्राइवर था और उसे शराब, कबाब, और शबाब का शौक था। वह औरतों में बहुत दिलचस्पी लेता था और जो भी खूबसूरत महिला उसके जाल में फँसती, वह उसे पैसों का लालच देकर अपने बिस्तर तक ले जाता। उसका यही काम था। जब भी वह अपना ट्रक लेकर गाँव से बाहर जाता, तो महीने में एक-आध दिन के लिए ही घर लौटता।
बरखा के परिवार में उनकी इकलौती बेटी भी थी—नेहा। नेहा 12वीं कक्षा में पढ़ रही थी, लेकिन उसका पढ़ाई में बिलकुल मन नहीं लगता था। वह अक्सर अपनी माँ से कहती कि 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देगी। बरखा अपनी बेटी को समझाती कि पढ़ाई जीवन में कितनी जरूरी है, लेकिन नेहा उनकी बातों को एक कान से सुनती और दूसरे से निकाल देती।
समय बीतता गया और एक दिन रात के करीब 8:30 बजे, इंद्रजीत शराब के नशे में धुत होकर घर आया। उसने देखा कि बरखा देवी अकेली खाना बना रही हैं। नेहा अपनी एक सहेली के जन्मदिन की पार्टी में गई हुई थी। मौका पाकर इंद्रजीत अपनी भाभी के पास गया और बेशर्मी से बोला, “भाभी, आज मैं तुम्हारे साथ अपना वक्त गुजारना चाहता हूँ।”
यह सुनकर बरखा को बहुत गुस्सा आया और उसने उसी समय अपने देवर को एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इंद्रजीत को भी गुस्सा आ गया और उसने कहा, “अब मैं इस घर में कभी नहीं आऊँगा।” कुछ कपड़े लेकर वह उसी रात घर से निकल गया और अपना ट्रक लेकर गाँव से चला गया।
कुछ समय बाद, 25 जून 2026 की सुबह, नेहा स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी। उसने अपनी माँ से कहा, “माँ, मेरा पढ़ाई में बिलकुल मन नहीं लगता। मैं सोचती हूँ कि आज से ही पढ़ाई बंद कर दूँ।” बरखा ने उसे काफी समझाया और नेहा स्कूल चली गई। थोड़ी देर बाद बरखा भी अपनी दुकान पर चली गई और कामकाज में व्यस्त हो गई।
कुछ घंटों बाद, बरखा की एक पड़ोसन, लता, दुकान पर आई। लता ने कहा, “बरखा, मेरे बेटे प्रकाश ने 12वीं पास कर ली है, लेकिन उसे कोई काम नहीं मिल रहा। मैं चाहती हूँ कि तुम उसे अपनी दुकान पर रख लो।” बरखा ने लता से कहा कि वह अपने बेटे को भेज दे, वह उससे बात करेगी।
लता ने घर जाकर प्रकाश को बरखा की दुकान पर भेजा। प्रकाश जैसे ही दुकान में घुसा, बरखा की नज़र उसकी कद काठी पर पड़ी। प्रकाश को देखकर बरखा की नियत खराब हो गई। उसने सोचा कि यह नौजवान लड़का उसकी सारी इच्छाओं को पूरा कर सकता है। बरखा ने प्रकाश को ₹5000 महीने की नौकरी पर रख लिया।
प्रकाश बहुत मेहनती लड़का था। वह रोज दुकान पर आता और रात को घर लौट जाता। लेकिन बरखा की नज़रें तो प्रकाश पर ही टिकी रहती थीं। वह उसे हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थी।
15 जून 2026 की सुबह, नेहा अपनी एक सहेली सलोनी के जन्मदिन पर जाने के लिए तैयार हो रही थी। बरखा ने उसे टोका कि वह हर दूसरे-तीसरे दिन किसी न किसी सहेली के घर चली जाती है। नेहा ने कहा कि वह सुबह 10 बजे जाएगी और रात 8:30-9 बजे तक लौट आएगी। बरखा ने उसे जाने दिया और खुद दुकान चली गई।
थोड़ी देर बाद प्रकाश दुकान पर आया और बरखा से ₹000 माँगे, क्योंकि उसे अपनी माँ के लिए दवाइयाँ और घर का राशन खरीदना था। बरखा ने कहा, “मेरे पास दुकान में पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं घर से लाकर दे सकती हूँ। तुम्हें मेरे साथ घर चलना होगा।” प्रकाश मान गया और दोनों घर चले गए।
घर पहुँचकर बरखा ने प्रकाश से कहा, “मैं घर में बिलकुल अकेली हूँ। मेरा अकेलापन मुझे बहुत परेशान करता है।” बरखा ने प्रकाश को ₹000 दिए और कहा, “आज तुम्हें मेरी सारी इच्छाएँ पूरी करनी पड़ेंगी।” गरीबी से परेशान प्रकाश मान गया और बरखा ने घर का दरवाजा बंद कर दिया।
बरखा और प्रकाश के बीच गलत रिश्ते कायम हो गए। दोनों ने अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा किया। बरखा ने प्रकाश से कहा कि वह उसे हमेशा पैसे देगी, लेकिन उसे बरखा की जरूरतों का ख्याल रखना होगा। प्रकाश राजी हो गया और दोनों की प्रेम कहानी शुरू हो गई।
2 जुलाई 2026 की सुबह, बरखा नेहा के लिए खाना बना रही थी। नेहा ने कहा कि चाचा इंद्रजीत आज घर आ रहे हैं। बरखा ने कहा कि वह झूठ बोल रहा है। नेहा स्कूल चली गई और बरखा अपनी दुकान पर। प्रकाश भी दुकान पर आ गया।
दोपहर 11 बजे बरखा ने सोचा कि घर पर कोई नहीं है, क्यों न प्रकाश के साथ वक्त गुजार लिया जाए। उसने प्रकाश से कहा कि वह घर आ जाए। प्रकाश मान गया और दुकान बंद करके बरखा के घर पहुँच गया।
दोनों के बीच फिर से गलत रिश्ते कायम हुए। लेकिन तभी नेहा ने घर का दरवाजा खोला और देखा कि इंद्रजीत खड़ा है। इंद्रजीत ने प्रकाश को आपत्तिजनक स्थिति में देखा और उसे खूब गालियाँ दीं और पीटकर घर से निकाल दिया।
इंद्रजीत ने बरखा से कहा, “तुम गलत रास्ते पर चल पड़ी हो।” बरखा ने रोते हुए कहा कि यह बात किसी को मत बताना। इंद्रजीत ने शर्त रखी कि आज रात बरखा को उसके साथ वक्त गुजारना होगा। बरखा मजबूर होकर मान गई।
शाम को नेहा स्कूल से लौटी और चाचा को देखकर खुश हो गई। उसने कहा कि कल उसका जन्मदिन है और वह खेत जाना चाहती है। इंद्रजीत मान गया। रात को इंद्रजीत ने शराब पी और बरखा के कमरे में गया। दोनों के बीच गलत रिश्ते कायम हुए।
अगले दिन, नेहा का जन्मदिन था। इंद्रजीत ने नेहा से कहा कि वे खेत जाएँगे। इंद्रजीत ने पहले खेत जाकर शराब पी और फिर नेहा को लेकर खेत गया। खेत में नेहा को अकेली देखकर इंद्रजीत की नियत खराब हो गई। उसने शराब पी और फिर नेहा की गर्दन पर दराती रखकर उसके साथ गलत काम किया।
इंद्रजीत ने नेहा को धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो वह उसे और उसकी माँ को मार देगा। नेहा डरी-सहमी घर लौटी। शाम को बरखा ने देखा कि नेहा बहुत उदास है। जब बरखा ने नेहा के जन्मदिन की बात की, तो नेहा फूट-फूट कर रोने लगी और बताया कि चाचा ने उसके साथ क्या किया है।
यह सुनकर बरखा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तय किया कि वह इंद्रजीत को जान से मार देगी। रात को इंद्रजीत शराब के नशे में धुत होकर घर आया और बरखा से कहा कि वह रात 10 बजे उसके कमरे में आए।
बरखा ने नेहा से कहा कि आज वे इंद्रजीत को खत्म कर देंगे। रात को बरखा और नेहा इंद्रजीत के कमरे में गए। नेहा ने इंद्रजीत के पेट में सरिया घोंप दिया। बरखा ने इंद्रजीत के कपड़े उतारे और चाकू से उसका प्राइवेट पार्ट काट दिया। फिर नेहा ने चाकू से उसका गला काट दिया।
पड़ोसी खून-खराबे की आवाज सुनकर आए और उन्होंने इंद्रजीत की सिर कटी लाश देखी। पुलिस आई और बरखा और नेहा को गिरफ्तार कर लिया। बरखा ने पुलिस को सब कुछ सच-सच बता दिया। पुलिस ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
इस कहानी से यह साफ होता है कि पाप का अंत हमेशा बुरा होता है। बरखा और इंद्रजीत ने जो भी गलत काम किए, उसका अंजाम उन्हें भुगतना ही पड़ा।
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