दादा जी लड़की को बहुत मानते थे फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ ! – News

दादा जी लड़की को बहुत मानते थे फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ !

दादा जी लड़की को बहुत मानते थे फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ !

यह कहानी भागलपुर नामक एक छोटे से गाँव की है। इस गाँव में किरण नाम की एक बहुत ही सुंदर और जवान लड़की अपने माता-पिता और बूढ़े दादाजी, राम खिलावन के साथ रहती थी। राम खिलावन घर पर रहकर खेती-बाड़ी करते थे, जबकि किरण के माता-पिता गाँव के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। किरण कॉलेज में पढ़ती थी और वह पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार थी। उसका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था, इसलिए वह दिन-रात मेहनत से पढ़ाई करती थी।

किरण का अपना एक छोटा सा कमरा था जहाँ वह पढ़ाई करती थी। उसके कमरे में कोई जल्दी आता-जाता नहीं था, क्योंकि सभी जानते थे कि किरण पढ़ाई में व्यस्त रहती है। किरण के माता-पिता बहुत रंगीन मिजाज के थे और हर शाम जल्दी अपने कमरे में चले जाते थे। राम खिलावन भी रात होने के बाद अपने अलग कमरे में जाकर सो जाते थे। किरण अक्सर रात के 1-2 बजे तक जगकर पढ़ाई करती थी और सुबह तैयार होकर कॉलेज चली जाती थी।

किरण के माता-पिता उसे ज्यादा लाड-प्यार नहीं करते थे, लेकिन उसके दादाजी, राम खिलावन, उसे बहुत मानते थे। जब भी किरण को पैसों की जरूरत होती, राम खिलावन उसे बिना किसी हिचकिचाहट के पैसे दे देते थे। किरण हमेशा अपनी कक्षा में अव्वल आती थी और गाँव वाले भी जानते थे कि वह बहुत होनहार है।

एक रात, करीब 12 बजे, जब किरण अपनी परीक्षा की तैयारी कर रही थी, उसे अचानक अपने माता-पिता के कमरे से कुछ अजीब आवाजें सुनाई दीं। वह उनके कमरे के पास गई और उन्हें एक-दूसरे के साथ होते हुए देख लिया। यह देखकर किरण का मन बहुत व्याकुल हो गया। वह वापस अपने कमरे में आ गई, लेकिन उसका पढ़ाई में मन नहीं लगा। वह अपने मन को शांत करने के लिए खुद ही कुछ हरकतें करने लगी, जिससे उसके कमरे से भी आवाजें आने लगीं।

ये आवाजें सुनकर राम खिलावन की नींद खुल गई। जब वह किरण के कमरे के पास गए, तो उन्होंने किरण को वो हरकतें करते हुए देख लिया। यह देखकर उनका भी मन व्याकुल हो गया। उसी समय किरण ने भी अपने दादाजी को देख लिया और वह बहुत शर्मिंदा हुई। राम खिलावन उसके पास गए और उसे समझाया कि उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा करना चाहिए।

किरण भावुक हो गई और अपने दादाजी को बताया कि जब भी वह पढ़ाई करने बैठती है, तो उसके माता-पिता की आवाजें सुनकर उसका मन व्याकुल हो जाता है। राम खिलावन ने उसे समझाया कि गाँव वालों को उससे बहुत उम्मीदें हैं और उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने किरण से कहा कि अगर कभी उसका मन व्याकुल हो, तो वह उन्हें बता दे, वे उसकी मदद करेंगे।

किरण को अपने दादाजी की यह बात अजीब लगी और उसने उन्हें कमरे से जाने के लिए कह दिया। राम खिलावन चले गए और किरण सो गई। अगले दिन, जब किरण कॉलेज से लौटी और रात को फिर से पढ़ाई करने बैठी, तो उसे फिर से वही आवाजें सुनाई दीं। इस बार उसका मन फिर से व्याकुल हो गया और वह सीधे अपने दादाजी के कमरे में चली गई।

किरण ने राम खिलावन से कहा कि उसे उनकी जरूरत है। राम खिलावन समझ गए और उन्होंने किरण को अंदर बुला लिया। उस रात, दोनों ने एक-दूसरे के साथ अपनी इच्छाएं पूरी कीं। इसके बाद से, यह सिलसिला रोज़ का हो गया। किरण ने अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी और उसका सारा ध्यान अपने दादाजी के साथ समय बिताने में लगने लगा।

कुछ दिनों बाद किरण की परीक्षा हुई। जब परिणाम आया, तो किरण के माता-पिता और गाँव वाले यह देखकर हैरान रह गए कि किरण परीक्षा में फेल हो गई थी। किरण को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह तीन दिनों तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकली। उसके माता-पिता उसे समझाने गए, तो किरण रोने लगी और उन्हें सारी सच्चाई बता दी।

किरण ने बताया कि उसके फेल होने का कारण वे ही हैं, क्योंकि उनकी आवाज़ों ने ही उसे व्याकुल किया था। उसने यह भी बताया कि कैसे वह अपने दादाजी के पास गई और कैसे उन दोनों के बीच संबंध बन गए। यह सुनकर किरण के माता-पिता बहुत हैरान हुए। वे राम खिलावन के पास गए और उनसे पूछा कि उन्होंने अपनी पोती के साथ ऐसा क्यों किया।

राम खिलावन को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने कहा कि वे किरण को दुखी नहीं देख सकते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह इस हद तक चली जाएगी। उन्होंने किरण और उसके माता-पिता से माफ़ी मांगी और गाँव छोड़कर चले गए।

इस घटना के बाद, किरण के माता-पिता किरण को लेकर शहर चले गए। वे अब एक किराए के कमरे में रहते हैं और किरण फिर से अपनी डॉक्टर बनने की पढ़ाई पूरी मेहनत से कर रही है। उसने अपनी गलती से सबक सीख लिया है और अब वह अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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