पति की एक गलती की वजह से पत्नी ने पति के साथ ये सब कर दिया/
पति की एक गलती की वजह से पत्नी ने पति के साथ ये सब कर दिया/
पाप का अंत: एक दर्दनाक दास्तान
उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में बसौली नाम का एक शांत और समृद्ध गाँव बसा हुआ था। इसी गाँव में बलवान सिंह नाम का एक व्यापारी अपनी पत्नी प्रीति देवी और पाँच साल के मासूम बेटे पारस के साथ रहता था। बलवान सिंह गाँव के मुख्य बाज़ार में कपड़े की एक बड़ी दुकान चलाता था। उसका स्वभाव शुरू में बड़ा मीठा और व्यवहार कुशल था, जिसके कारण गाँव का हर व्यक्ति कपड़ा खरीदने उसी की दुकान पर आता था। बलवान ने अपनी मेहनत और ईमानदारी के बलबूते गाँव में एक आलीशान घर बना लिया था।
दूसरी ओर, उसकी पत्नी प्रीति देवी भी एक सगुणी और परिश्रमी स्त्री थी। वह न केवल घर के सारे कामकाज संभालती थी, बल्कि घर से ही गाँव की महिलाओं को श्रृंगार और सौंदर्य प्रसाधन का सामान भी बेचा करती थी। पति और पत्नी दोनों की अच्छी कमाई की वजह से परिवार में हर तरफ खुशहाली और समृद्धि का माहौल था। उनके घर में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं थी।
लेकिन इंसान का लालच और बुरी संगत अच्छे-भले जीवन को पल भर में तबाही के मोड़ पर ला खड़ा करती है। बलवान सिंह के जीवन में भी यही हुआ। उसकी मुलाकात मोहन सिंह नाम के एक व्यक्ति से हुई, जो धीरे-धीरे उसका गहरा दोस्त बन गया। मोहन सिंह अक्सर शाम के समय शराब की बोतल लेकर बलवान की कपड़े की दुकान पर आ धमकता था।

एक दिन शाम को जब बलवान अपनी दुकान पर बैठा हुआ था, मोहन वहाँ आया और कहने लगा, “बलवान, तुम दिन-रात काम में उलझे रहते हो। इतनी कमाई का क्या फायदा अगर तुम जीवन का आनंद ही न ले सको?” बलवान ने अपनी थकान और व्यस्तता का ज़िक्र किया, तो मोहन ने उसे शराब पीने की सलाह दी। शुरुआत में तो बलवान ने हिचकिचाहट दिखाई, लेकिन मोहन के बार-बार उकसाने पर उसने दुकान का शटर गिरा दिया और अपने दोस्त के साथ बैठकर जाम छलकाने लगा।
धीरे-धीरे यह सिलसिला रोज़ का नियम बन गया। शराब की लत ने बलवान सिंह को पूरी तरह अपनी जकड़ में ले लिया। जो बलवान कभी रात को समय पर घर पहुँचता था, अब वह हर रात नशे में धुत होकर देर से घर लौटने लगा। शराब के नशे में वह अपनी पत्नी प्रीति के साथ अकारण ही झगड़ा और मारपीट करने लगा। प्रीति उसे बार-बार समझाती कि मेहनत से कमाया हुआ धन इस तरह बुरी आदतों में न बर्बाद करे, लेकिन बलवान पर किसी बात का असर नहीं होता था।
शराब की लत के साथ-साथ बलवान के भीतर एक और बुरी वासना जन्म लेने लगी—परस्त्री पर बुरी नज़र डालना। शराब और वासना के इस कॉकटेल ने उसके सोचने-समझने की क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। उसकी नीयत दिन-पर-दिन बिगड़ती जा रही थी और वह अपने ही विनाश की पटकथा लिखने लगा था।
मई 2026 के महीने में गाँव की ही एक बेहद खूबसूरत महिला सुनीता देवी बलवान की दुकान पर आई। सुनीता के पति अनिल कुमार काफी समय से गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे, जिसके कारण उनके घर में आर्थिक तंगी छाई हुई थी। सुनीता ने झिझकते हुए बलवान से कहा, “मालिक, मेरे घर की हालत बहुत खराब है। मुझे अपनी दुकान पर कोई छोटा-मोटा काम दे दीजिए ताकि मैं अपने परिवार का गुज़ारा चला सकूँ।”
सुनीता की सुंदरता को देखकर बलवान की नीयत में खोट आ गया। उसने मन ही मन कामुक विचार बुनते हुए तुरंत सुनीता को नौकरी पर रख लिया। उसी समय मोहन सिंह भी दुकान पर पहुँचा और सुनीता को देखकर उसकी आँखें भी चमक उठीं। अगले दिन से सुनीता दुकान पर काम करने लगी। धीरे-धीरे बलवान और सुनीता के बीच जान-पहचान और नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं।
30 मई 2026 की सुबह, प्रीति ने बलवान को बताया कि उसकी माँ की तबीयत खराब है और वह अपने बेटे पारस को लेकर दो दिनों के लिए अपने मायके जा रही है। उसने बलवान से भी साथ चलने को कहा, लेकिन बलवान ने दुकान का बहाना बनाकर मना कर दिया। जैसे ही प्रीति अपने बेटे के साथ मायके के लिए रवाना हुई, बलवान के मन का शैतान पूरी तरह जाग उठा।
बलवान ने तुरंत सुनीता से कहा कि घर खाली है और आज रात वह उसके घर आए। सुनीता ने भी पैसों के लालच में सहमति दे दी। तय समय के अनुसार रात को जब बलवान शराब पी रहा था, सुनीता उसके घर पहुँची। बलवान ने उसे कुछ पैसे दिए और दोनों ने अनैतिक संबंध बनाए। जाने से पहले बलवान ने सुनीता से कहा कि वह अगली रात भी घर आए क्योंकि उसकी पत्नी अभी मायके में ही है।
अगले दिन बलवान के दोस्त मोहन को जब इस बात का पता चला, तो उसने भी सुनीता के साथ रात बिताने की इच्छा जताई। बलवान ने अपने दोस्त की बात मान ली। उस रात बलवान और मोहन दोनों ने अपने घर पर शराब पी और रात के समय सुनीता को बुलाकर उसके साथ गलत काम किया। सुनीता देर रात पैसे लेकर चुपचाप अपने घर लौट गई।
लेकिन पाप की बात कभी छिपी नहीं रहती। दो दिनों बाद जब प्रीति मायके से वापस लौटी, तो पड़ोसियों में चल रही कानाफूसी उस तक पहुँच गई। जब प्रीति को अपने पति और नौकरानी के इस अनैतिक संबंध का पता चला, तो उसके पैर तले ज़मीन खिसक गई। उसने बलवान को रंगे हाथों पकड़ने जैसी स्थिति में आड़े हाथों लिया। बलवान ने घबराकर प्रीति से माफी मांगी और वादा किया कि वह सुनीता को तुरंत काम से निकाल देगा। परिवार को टूटने से बचाने के लिए प्रीति ने उसे एक अंतिम मौका दिया।
जून 2026 के मध्य में मामला कुछ शांत होता दिखाई दे रहा था। 20 जून को प्रीति की बड़ी बहन नीलम का फोन आया। नीलम ने बताया कि उसकी बेटी एकता (जो प्रीति की भांजी थी) गर्मियों की छुट्टियों में सिलाई-कढ़ाई सीखने के लिए उसके घर आना चाहती है। प्रीति ने खुशी-खुशी अपनी भांजी को बुला लिया। शाम को जब एकता पहुँची, तो प्रीति ने उसका स्वागत किया।
लेकिन जब बलवान शाम को दुकान बंद करके घर लौटा, तो उसकी गंदी नज़र अपनी ही युवा भांजी एकता पर टिक गई। बलवान के दिमाग में एक बेहद घिनौना षड्यंत्र पकने लगा। अगले कुछ दिनों तक वह सही मौके की तलाश में रहा।
25 जून 2026 की सुबह, प्रीति को किसी ज़रूरी काम और दवाइयाँ खरीदने के लिए शहर जाना था। उसने एकता से साथ चलने को कहा, लेकिन एकता ने घर पर रहकर पढ़ाई करने की बात कही। बलवान ने भी प्रीति से कहा कि वह अकेली ही शहर चली जाए। जैसे ही प्रीति शहर के लिए निकली, बलवान ने अपनी दुकान बंद की, ताला लगाया और सीधे शराब के ठेके पर पहुँच गया।
शराब के नशे में धुत होकर बलवान एक मेडिकल स्टोर पर गया। वहाँ काम करने वाले लड़के सुधीर से उसने नींद की तेज़ दवाइयाँ माँगी। सुधीर ने पहले तो मना किया, लेकिन जब बलवान ने दो-तीन गुने पैसे देने की पेशकश की, तो सुधीर ने लालच में आकर उसे नींद की गोलियाँ दे दीं। इसके बाद बलवान ने बाज़ार से एक कोल्ड ड्रिंक खरीदी।
घर पहुँचकर बलवान सीधे बाथरूम में गया और कोल्ड ड्रिंक में नींद की गोलियाँ पीसकर मिला दीं। फिर वह मुस्कुराते हुए कमरे में पढ़ाई कर रही अपनी भांजी एकता के पास गया और कहा, “एकता, बाहर बहुत गर्मी है, यह ठंडी कोल्ड ड्रिंक पी लो।” बेखबर एकता ने बिना किसी शक के वह कोल्ड ड्रिंक पी ली। 15-20 मिनट के भीतर ही दवा के असर से एकता बेहोश हो गई।
जैसे ही एकता बेहोश हुई, बलवान ने घर का मुख्य दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। उसने बेसुध पड़ी अपनी ही भांजी के साथ वह घिनौना और दरिंदगी भरा काम किया जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इस नीच कृत्य को अंजाम देने के बाद वह दूसरे कमरे में जाकर फिर से शराब पीने लगा। अत्यधिक शराब और हैवानियत के नशे में चूर होकर वह वहीं बिस्तर पर गहरी नींद में सो गया।
लगभग तीन घंटे बाद जब प्रीति शहर से वापस लौटी, तो उसने दरवाज़ा खटखटाया। काफी देर तक आवाज़ देने के बाद भी जब किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला, तो प्रीति को चिंता हुई। उसने दीवार फांदकर घर के अंदर प्रवेश किया। जब वह कमरे में पहुँची, तो सामने का दृश्य देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गए।
कमरे में एकता बेसुध और नग्न अवस्था में पड़ी हुई थी। प्रीति समझ गई कि उसकी मासूम भांजी के साथ कुछ बहुत गलत हुआ है। जब वह दौड़कर दूसरे कमरे में गई, तो वहाँ अपने पति बलवान सिंह को शराब के नशे में धुत सोता हुआ पाया। पूरी सच्चाई प्रीति के सामने शीशे की तरह साफ हो चुकी थी। उसके पति ने अपने ही घर में, रिश्ते की मर्यादा को तार-तार करते हुए उसकी भांजी के साथ दरिंदगी की थी।
गुस्से, अपमान और घृणा की ज्वाला में जलती हुई प्रीति ने घर में किसी हथियार की तलाश शुरू की। उसकी नज़र एक धारदार ब्लेड पर पड़ी। उसने बिना एक पल गंवाए ब्लेड उठाया और सोए हुए बलवान के कमरे में दाखिल हुई। गुस्से से अंधी हो चुकी प्रीति ने ब्लेड से बलवान का गला रेत दिया। उसका आक्रोश यहीं नहीं थमा; उसने बलवान के गुप्तांग पर भी वार कर दिया। बलवान तड़प-तड़पकर वहीं ढेर हो गया।
पति की हत्या करने के बाद प्रीति ने भागने की कोशिश नहीं की। उसने कांपते हाथों से अपना फोन उठाया और सीधे पुलिस स्टेशन नंबर मिलाया। उसने पुलिस को पूरे वाकये की जानकारी दी और अपने घर बुलाया।
कुछ ही देर में पुलिस की गाड़ियाँ सायरन बजाती हुई घटनास्थल पर पहुँचीं। पुलिस ने खून से लथपथ बलवान के शव को अपने कब्ज़े में लिया और प्रीति को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। प्रीति ने बिना किसी डर के पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल किया और बलवान की पूरी करतूत बयाँ कर दी।
इस तरह, वासना, नशा और विश्वासघात के इस काले अध्याय का अंत एक भयानक खूनी अंजाम के साथ हुआ। बलवान सिंह को उसके पापों की सजा उसकी जान देकर मिली, जबकि एक हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह तबाह हो गया।