कब्रिस्तान में महिला की ला#श के साथ गलत होने पर ला*श जिंदा हो गई/
शराब के जहर और कब्रिस्तान की सच्चाई
नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज हमारी इस घटना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से होती है। मेरठ जिले में एक हाजीपुर नाम का छोटा सा गांव है और इसी गांव में अनवर नाम का एक मिस्त्री रहता है। अनवर पेशे से एक मेहनती मिस्त्री है। वह लोगों के घर-गृहस्थ बनाता, दीवार-छत बनाता और कई काम करता। शुरू के कुछ सालों तक वह ठीक-ठाक पैसे भी कमाकर रहता था। लेकिन उसके अंदर सबसे बड़ी दो कमियां थीं। अनवर हर रात शराब पीने का दीवाना था। शराब पीने के बाद वह एक शैतान बन जाता था।
हर शाम को वह घर आता, बिना शराब पीए बिना नहीं रुकता। शराब के नशे में वह अपनी पत्नी रुसाना के साथ लड़ता-झगड़ा करता। झगड़े के बाद वह रुसाना को अपने कमरे में ले जाता और घंटों तक उसके साथ गलत, गंदा काम करता। रुसाना इससे बहुत परेशान हो जाती। कुछ दिनों बाद वह अनवर को तलाक दे देती और अपने मायके चली जाती। अनवर अब अकेला रहने लगा।
कुछ दिनों बाद एक दिन सुबह करीब 8 बजे का समय था। अनवर अपने घर में बैठा चाय पी रहा था। उसी समय उसके घर के दरवाजे पर दस्तक हुई। अनवर दरवाजा खोलता है तो सामने गांव का मुखिया रहमान खड़ा था। रहमान अंदर आता है और अनवर को बताता है कि गांव के कब्रिस्तान में बहुत गंदगी फैली हुई है। जानवर वहां आते हैं, मल-मूत्र करते हैं और गंध मचा रहे हैं। वहां चारों तरफ दीवार बनानी होगी और जल्दी खत्म करनी होगी।

अनवर कहता है, “सरपंच साहब, कोई बात की फिक्र मत कीजिए। मैं खुद इस काम को संभाल लूंगा।” रहमान मुस्कुराता है और कहता है, “कल से ही शुरू कर दो।” अनवर कहता है कि उसके पास मजदूर नहीं हैं। रहमान कहता है, “यह तुम्हारी समस्या है, खुद ढूंढो।” अनवर हार मान लेता है और रहमान चला जाता है।
एक घंटा गुजरता है तो अनवर सोचने लगता है कि मजदूर कहां से लाए। वह गांव-गांव घूमता, लेकिन कोई नहीं मिलता। तभी उसे पता चलता है कि इस गांव में एक विधवा महिला सोफिया रहती है जो मजदूरी करती है। अनवर सोफिया के घर पहुंचता है, दस्तक देता है। दरवाजा खुलता है तो सोफिया सामने खड़ी है। अनवर की नजर सोफिया की मखमली त्वचा, गोरी चाल और जवान शरीर पर पड़ते ही उसकी इच्छा खराब हो जाती। वह मन ही मन सोचता है कि यह महिला कितनी खूबसूरत है, विधवा है, मेहनत कर रही है। क्यों न इसे मेहनत पर लगाऊं।
अनवर पूछता है, “सोफिया, तुम मेहनत का काम करती हो?” सोफिया हंसकर कहती है, “आ जाओ घर में, मैं बताती हूं।” अनवर अंदर आता है। सोफिया मजदूरी का काम करती है और कहती है कि उसे सख्त मेहनत चाहिए। अनवर कहता है, “कोई फिक्र मत कीजिए, कल से हम कब्रिस्तान में काम करेंगे।” सोफिया डर जाती है क्योंकि वहां भूत-प्रेत रहते हैं। अनवर उसे मनाता है और कहता है, “मैं तुम्हारे साथ जाऊंगा।”
सोफिया मान जाती है। अनवर कहता है कि उसे दूसरा मजदूर भी चाहिए। सोफिया कहती है, “पड़ोस में अशफाक नाम का लड़का रहता है, वह भी मजदूरी करता है।” अनवर सोफिया को देखते हुए कहता है, “ठीक है, मैं कल सुबह काम शुरू कर दूंगा।”
अगले दिन सुबह 7:30 बजे अनवर सोफिया के घर पहुंचता है। सोफिया पारदर्शक साड़ी पहने थी। अनवर की नजर उसकी खूबसूरती पर पड़ते ही मन का शैतान जाग जाता। वह कहता है, “सोफिया, पहले देर हो गई, चलो कब्रिस्तान चलते हैं।” तीनों – अनवर, सोफिया और अशफाक – कब्रिस्तान पहुंचते हैं। गंदगी देखकर वे काम शुरू कर देते हैं। दो घंटे बाद अशफाक कहता है कि शाम को घर जाना है। अनवर कहता है, “जाओ।”
अब सिर्फ अनवर और सोफिया रह जाते हैं। अंधेरा होने वाला था। सोफिया घर जाना चाहती है। अनवर कहता है, “मैं तुम्हें घर छोड़ आऊंगा।” तभी अनवर सोफिया से कहता है, “तुम्हारे पति का देहांत हो चुका है, मेरी पत्नी ने तलाक दिया है। मैं तुम्हारे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।” सोफिया स्तब्ध रह जाती। अनवर कहता है, “पैसे की फिक्र मत कीजिए।” वह पास के खेत में ले जाता है। खेत में पहुंचकर दोनों की इच्छा पूरी हो जाती। अनवर 1000 रुपये देता है और कहता है, “अब मैं तुम्हारे साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहता हूं।”
सोफिया खुश हो जाती। अनवर उसे घर छोड़ देता है और अपने घर आ जाता। इस तरह उनकी प्रेम कहानी शुरू हो जाती।
लेकिन सोफिया को कुछ नहीं पता था कि आगे अनवर क्या करने वाला है। अगले दिन सुबह 8 बजे अनवर सोफिया के घर पहुंचता है। तीनों कब्रिस्तान जाते हैं। गांव वाले एक महिला की लाश लेकर आते हैं – सानिया की। सानिया गांव की सबसे खूबसूरत औरत थी। लोग उसे दफन करते हैं और चले जाते। शाम को अनवर और अशफाक शराब पीते हैं। अनवर अशफाक को 500 रुपये देता है शराब लाने को। शराब आती है।
रात 9 बजे दोनों नशे में डूबे। अनवर कहता है, “आज रात मैं सानिया की लाश के साथ अपना वक्त गुजारना चाहता हूं।” अशफाक विरोध करता है। अनवर अकेला काम करता है। कब्र खोदता है, सानिया की लाश निकालता है और उसके साथ गंदा काम करता है। जब इच्छा पूरी होती है तो लाश वापस दफन कर देता है। पूरा दिन-रात शराब पीता है और घर लौट जाता।
अगली सुबह 8:30 बजे रहमान सरपंच आता है। अनवर कहता है काम कम है। रहमान 5000 रुपये देता है। सोफिया मायके जाती है। अनवर उसे 2000 रुपये देता है और कमरे में ले जाता। दोनों की इच्छा पूरी होती है। सोफिया कहती है, “मैं दो दिन नहीं आऊंगी।” अनवर काम संभालता है।
शाम 6 बजे अशफाक शराब लाता है। रात 10 बजे दोनों नशे में हैं। अनवर कहता है, “सानिया की लाश निकालकर साथ में काम करेंगे।” अशफाक तैयार हो जाता है। दोनों कब्र खोदते हैं, लाश निकालते हैं। अनवर पहले काम करता है, फिर अशफाक। लेकिन दोनों नहीं जानते थे कि उनका अंत हो रहा है।
कब्रिस्तान के पास ही चार लड़के पार्टी कर रहे थे। आरिफ नाम का लड़का लश्कर शंक करता है। वह देखता है कि अशफाक सानिया की लाश के साथ गंदा काम कर रहा है। आरिफ चीखता है, अपने तीन दोस्त बुलाते हैं। चारों मिलकर अनवर और अशफाक को पकड़ते हैं। उन्हें बुरी तरह पीटते हैं। पुलिस फोन पर बुलाते हैं। एक घंटे बाद पुलिस पहुंचती है। आरिफ चीखता है कि दोनों ने लाश के साथ गंदा काम किया। पुलिस दोनों को पीटती है। अनवर और अशफाक बोलने लगते हैं। दोनों गिरफ्तार हो जाते हैं और चार्जशीट दायर कर दी जाती है।
दोस्तों, इस पूरे घटनाक्रम को सुनाने का मेरा उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं था। बल्कि आपको जागरूक करना था। आपको सावधान करना था। शराब के जहर को समझो। अकेलापन मत भूलो। कब्रिस्तान की सच्चाई मत भूलो। साफ-साफ काम मत करो। अगर तुम भी किसी ऐसी घटना का शिकार हो जाओ तो तुरंत बोलो और खुद को बचाओ। क्योंकि अंधेरे में छिपे शैतान कभी नहीं सोचते कि उनके साथ कौन आएगा।