पति से तंग आकर पत्नी ने उठाया गलत कदम/ – News

पति से तंग आकर पत्नी ने उठाया गलत कदम/

पति से तंग आकर पत्नी ने उठाया गलत कदम/

नमस्कार दोस्तों।

आज की घटना उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से शुरू होती है।
गदनखेड़ा नाम का गांव है।
वहां रहता है विजय कुमार।
वह गांव का सरपंच बन गया है।

सरपंच बनने से पहले विजय कुमार ने गांव के गरीबों की बहुत मदद की थी।
गरीब लोग मिलकर उसने सरपंच चुना।

जैसे ही विजय कुमार सरपंच बनता है,
2 साल तक उसने अच्छे पैसे कमाए।
उसके पैसों से उसका स्वभाव बदल जाता है।

अब विजय कुमार गरीबों को परेशान करने लगता है।
उसके परिवार में धर्मपत्नी किरण देवी है।
उसके इकलौते बेटे का नाम बबलू है।
बबलू की उम्र सिर्फ 14 साल है।

विजय कुमार बबलू को एक स्कूल में एडमिशन करवाता है।
वह स्कूल छात्रावास वाला है।
बबलू छात्रावास में रहने लगता है।

किरण देवी रोज कहती है,
“सरपंच साहब, मेरे लिए एक आलीशान घर बनवा दो।”
विजय कुमार कहता है, “थोड़े दिन और रुक जाओ। मैं तुम्हारे लिए महल जैसा घर बनवा दूंगा।”

लेकिन किरण देवी दबाव डालती जाती है।
वह जादू-टोनों में भी विश्वास रखती है।

15 मई 2026 को सुबह 9 बजे किरण देवी कहती है,
“सरपंच साहब, जल्दी से आलीशान घर बनवा दो।”
विजय कुमार कहता है, “आज ही किसी मिस्त्री के पास जाऊंगा।”

विजय कुमार मिस्त्री विनोद कुमार के घर पहुंचता है।
विनोद कुमार की पत्नी मंजू देवी दरवाजा खोलती है।

विजय कुमार को मंजू की खूबसूरती देखकर नियत बदल जाती है।
वह सोचता है, “इस महिला को हासिल करना ही पड़ेगा।”

मंजू देवी कहती है, “मेरा पति घर पर नहीं है। मैं चाय बना देती हूं।”
विजय कुमार कहता है, “चाय तो अच्छी है, लेकिन अब घर का दरवाजा बंद कर दो।”

विजय कुमार दरवाजा बंद करता है।
वह मंजू से कहता है, “मैं तुम्हारे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।”
वह कहता है, “तुम्हारा पति मिस्त्री है, पैसे नहीं दे सकता।”

मंजू देवी कहती है, “दिन में कोई आ सकता है।”
विजय कुमार कहता है, “मैं रात को आ जाऊंगा।”

शाम 6:30 बजे विजय कुमार शराब के दो बोतल लेकर आता है।
वह विनोद को भी ले जाता है।

शराब पीते-पीते रात 9:30 बजे विनोद नशे में सो जाता है।
विजय कुमार मंजू को अपने बेडरूम में ले जाता है।
दोनों गलत काम करते हैं।

जब काम खत्म होता है, विजय कुमार पैसे देता है।
वह कहता है, “हर रोज आएगा।”
मंजू सहमत होती है।

कुछ दिनों बाद यह बात गांव में चर्चा बन जाती है।
किरण देवी को भी पता चल जाता है।

30 मई 2026 को किरण देवी कहती है,
“सरपंच साहब, आज खाना तैयार करो। मैं टहलने के लिए बाहर जाऊंगा।”
लेकिन किरण देवी कहती है, “तुम विनोद की पत्नी मंजू के पास जाते हो।”

विजय कुमार गुस्सा करता है।
किरण देवी कहती है, “मैं मायके चली जाऊंगी।”
विजय कुमार कहता है, “मैं उस महिला को नहीं छोड़ूंगा।”

विजय कुमार मंजू के घर चला जाता है।
रात भर वहां रहता है।

किरण देवी अकेली रह जाती है।
वह सोमनाथ तांत्रिक बाबा के पास जाती है।

सोमनाथ तांत्रिक औरतों में विशेषज्ञ है।
वह किरण की खूबसूरती देखकर उलझ जाता है।

किरण तांत्रिक से कहती है,
“मेरा पति मंजू के चक्रव्यूह में फंस गया है।”
सोमनाथ कहता है, “मैं कुटिया में उपाय बताऊंगा। शाम 6:30 बजे आ जाना।”

शाम 6:30 पर किरण कुटिया जाती है।
सोमनाथ जड़ी-बूटियां देता है।

उसमें मूत्र मिलाकर पति को पिलाना।
तीन दिन तक किरण उपाय करती है।
लेकिन फायदा नहीं होता।

5 जून 2026 को किरण दोबारा जाती है।
सोमनाथ दूसरा उपाय बताता है।
जड़ी-बूटियां खाने को कहता है।

जड़ी-बूटियों का असर शुरू होता है।
किरण कपड़े उतारती है।
दोनों गलत काम करते हैं।

सोमनाथ कहता है,
“पति को मार डालो। संपत्ति तुम्हारे नाम हो जाएगी।”
किरण सहमत होती है।

रात 10:30 पर सोमनाथ किरण के घर आता है।
विजय कुमार सो चुका है।

किरण छुरा देती है।
सोमनाथ विजय कुमार की गर्दन काट देता है।
लाश के टुकड़े दो बोरी में भरता है।

वह नदी की तरफ जाता है।
लेकिन रास्ते में राजवीर और गुलाब शराबियों से मिलता है।

बोरियों को देखकर वे उसे पकड़ लेते हैं।
पुलिस को फोन करता है।

पुलिस लाश ले जाती है।
सोमनाथ गिरफ्तार होता है।
तांत्रिक बाबा फोन पोल खोलता है।

किरण देवी भी गिरफ्तार हो जाती है।
दोनों मिलकर हत्या मानते हैं।

जज साहब बाद में सजा सुनाएंगे।

दोस्तों,
इस घटना को सुनाने का उद्देश्य दिल दुखाना नहीं था।
आपको जागरूक करना था।

परिवार में विश्वास रखें।
गलत लोगों पर भरोसा न करें।
सच्चाई को अपनाएं।
घर संभालें।
सावधान रहें।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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