अमीर मर्दों को जाल में फंसा कर पैसे लूट लेती थी/अंजाम ठीक नहीं हुआ/
अमीर मर्दों को जाल में फंसा कर पैसे लूट लेती थी/अंजाम ठीक नहीं हुआ/
नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है राजस्थान के जिले जोधपुर से। जोधपुर जिले में एक गणेशपुर नाम का गांव पड़ता है और इसी गणेशपुर गांव में रहने वाला लखन सिंह। लखन सिंह इस गांव में गोलगप्पे बेचने का काम किया करता था। इसकी खूब अच्छी खासी कमाई होती थी। अच्छे खासे पैसे भी कमा लिया करता था। लेकिन लखन सिंह की सबसे बड़ी कमजोरी खूबसूरत महिला होती है। लखन सिंह औरतों का गुलाम होता है। लखन सिंह को शाम के समय शराब पीने की भी लत होती है और शराब पीने के बाद लखन सिंह इस गांव की कई महिलाओं के साथ अपनी रातें रंगीन कर लिया करता था। लखन सिंह का बस यही काम होता है।
अब लखन सिंह के परिवार में इसकी धर्मपत्नी होती है जिसका नाम संजना देवी होता है। संजना देवी जो कि देखने में काफी खूबसूरत महिला होती है। संजना इस गांव की सबसे खूबसूरत महिला होती है। लेकिन फिर भी संजना का पति जो लखन सिंह होता है वो गैर औरतों पर मरा करता था। संजना हमेशा अपने पति को एक ही बात कहती थी कि मैं कोई भी बच्चा पैदा करने वाली नहीं हूं। इससे मेरा शरीर खराब हो जाएगा। लेकिन लखन सिंह अपनी पत्नी को अक्सर एक ही बात कहता था कि हम एक ही बच्चा पैदा करेंगे दूसरा बच्चा पैदा नहीं करेंगे लेकिन पत्नी संजना मानने को तैयार नहीं होती है जिसकी वजह से दोनों के बीच अक्सर झगड़े हो जाया करते थे। इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 5 मई 2026 का दिन सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त होता है संजना देवी अपने पति से पूछने लगती है कि तुम इतने अच्छे खासे पैसे कमाते हो सारे पैसे कहां पर उड़ाते हो लेकिन लेकिन उसी समय लखन सिंह कहने लगता है कि जितने भी मैं पैसे कमाता हूं वो सारे घर में खर्च हो जाते हैं और जो पैसे बच जाते हैं उन पैसों को मैं बैंक में जमा कर देता हूं।

पत्नी संजना खुश हो जाती है। इसके बाद संजना कहने लगती है कि अगर ऐसी बात है तो तुम्हें मेरे लिए एक सोने की अंगूठी बनवानी पड़ेगी। अब जैसे सोने की अंगूठी की बात की जाती है तो इसका पति लखन सिंह उसी समय अपनी पत्नी पर भड़क जाता है। कहने लगता है कि मैं तुम्हारे लिए सोने की अंगूठी नहीं बनवा सकता हूं। इस बात पर इसकी पत्नी संजना देवी भी भड़क जाती है और दोनों के बीच काफी देर तक झगड़ा होता रहता है। लेकिन जैसे ही शाम के करीब 4:00 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है तो संजना का भाई गणेश इसके घर पर आ जाता है। संजना अपने भाई गणेश को कहने लगती है कि मैं तुम्हारे साथ तीन-चार दिनों के लिए अपने मायके में जाना चाहती हूं। और इसके बाद संजना का भाई गणेश अपनी बहन संजना को लेकर अपने घर पर चला जाता है और संजना का पति लखन अपने घर पर अकेला रह जाता है। लेकिन अब लखन अपने मन में सोचने लग जाता है कि उसकी पत्नी तो उसको छोड़कर चली गई है। अब मुझे क्या करना चाहिए? कई दिनों तक लखन सिंह काफी परेशान रहता है और इस तरीके से दो-चार दिनों का वक्त गुजर जाता है और तारीख आ जाती है 9 मई 2026 का दिन। सुबह के करीब 11:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। लखन सिंह आज गोलगप्पे बेचने नहीं जाता है। बल्कि लखन सिंह अपने घर में अकेला बैठा होता है। उसी समय घर के दरवाजे पर दस्तक होती है और जैसे लखन सिंह अपने घर का दरवाजा खोलता है तो देखता है कि उसके सामने उसकी पड़ोस की चाची विमला देवी खड़ी होती है। विमला देवी एक विधवा महिला होती है। लेकिन विमला देवी का चाल चलन और चरित्र कुछ ठीक नहीं होता है। विमला की खूबसूरती को देखने के बाद आज लखन सिंह की नियत में कमी आ जाती है। लखन सिंह अपने मन में सोचने लग जाता है कि विमला चाची हर दूसरे तीसरे दिन उसके घर पर आती रहती है। शायद उसकी चाची विमला उसको पसंद करती है।
जब ऐसे-से ख्याल लखन सिंह के मन में आने लग जाते हैं तो लखन सिंह कहने लगता है कि चाची आज बहुत दिनों के बाद तुम मेरे घर पर आई हो। मैं तुम्हारी कैसे मदद कर सकता हूं? इसके बाद विमला देवी कहने लगती है कि मुझे दस हजार की सख्त जरूरत है। मैंने एक सुनना से सोने की अंगूठी खरीद रखी है और उसके दस हजार बाकी बच गए थे। बस वो मुझे दस हजार लौटाने हैं। लेकिन उसी समय लखन सिंह कहने लगता है कि मेरे पास पैसे तो नहीं है। विमला चाची कहने लगती है कि हर समय तुम्हारे पास पैसे रहते हैं। तुम्हारी दुकानदारी अच्छी खासी चलती है। तुम जानबूझकर मना कर रहे हो। अब इसके बाद उसी समय लखन सिंह कहने लगता है कि चाची तुम्हारे घर में इस समय कौन-कौन है? विमला कहने लगती है कि इस समय तो मेरे घर में बच्चे हैं। लेकिन उसी समय लखन सिंह कहने लगता है कि चाची मैं तुम्हें दस हजार तो दे सकता हूं लेकिन तुम्हें मेरे साथ रातें रंगीन करनी पड़ेगी। विमला को जैसे यह बातें कही जाती है तो विमला हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि अगर ऐसी बात है तो कोई बात नहीं तुम आज रात मेरे घर पर आ जाना। मैं तुम्हारी सारी इच्छाओं को पूरा कर दूंगी। अब जैसे ही लखन सिंह को यह बात सुनाई देती है तो लखन सिंह बड़ा खुश हो जाता है। लखन सिंह कहने लगता है कि कोई बात नहीं मैं इसी समय बैंक में जाऊंगा और बैंक से पैसे लेकर मैं सीधा ही तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा। अब विमला देवी भी कहने लगती है कि ठीक है तुम आज रात मेरे घर पर आ जाना। लेकिन उसी समय लखन सिंह कहने लगता है कि तुम्हारे घर पर तुम्हारे बच्चे भी रहते हैं। अब विमला देवी कहती है कि तुम उनकी फिक्र मत करो। तुम मेरे घर पर रात के करीब दस बत्तीस बजे के आसपास आ जाना। बस यह दो चार बातें करने के बाद विमला इस घर से बाहर निकलती है और फिर इसके बाद अपने घर पर चली जाती है और उसी समय लखन सिंह अपने बैंक की पासबुक लेकर नजदीकी बैंक में चला जाता है और बैंक में जाने के बाद अपने बैंक से दस हजार निकलवाता है और दस हजार लेकर लखन सिंह अपने घर पर आ जाता है। जैसे ही शाम के करीब छह बत्तीस बजे के आसपास का वक्त होता है तो लखन सिंह उसी समय विमला चाची के पास फोन कॉल करता है। विमला चाची को कहता है कि चाची मैं दस हजार लेकर अपने घर पर आ चुका हूं और आज मैं दस हजार को लेकर रात के करीब दस बत्तीस बजे के आसपास तेरे घर पर आ जाऊंगा। लेकिन उसी समय विमला कहती है कि मैं तुमसे मिलना चाहती हूं। तुम जल्दी से मेरे घर पर आ जाओ। अब इसके बाद लखन सिंह उसी समय विमला चाची के घर पर चला जाता है। लखन सिंह देखता है कि विमला के दोनों बच्चे घर में खेल रहे होते हैं। अब इसके बाद विमला उसी समय लखन को कहती है कि लखन तुम गांव के मेडिकल स्टोर पर चले जाओ। वहां से कुछ नींद की दवाइयां खरीद कर ले आओ और इसके बाद जैसे ही रात होगी तो मैं उन नींद की दवाइयों को खाने में मिलाकर अपने बच्चों को खिला दूंगी क्योंकि मेरे बच्चे गहरी नींद में सो जाएंगे। अब इसके बाद लखन सिंह उसी समय इसके घर से बाहर निकलता है। गांव के ही एक मेडिकल स्टोर पर चला जाता है। मेडिकल स्टोर पर जाने के बाद मेडिकल स्टोर पर एक लड़का बैठा होता है जिसका नाम किशोर होता है। किशोर को कई गुना ज्यादा दाम देकर उससे नींद की दवाइयां खरीदी जाती है और यह नींद की दवाइयां लेकर लखन सिंह सीधा ही विमला चाची के घर पर आ जाता है और विमला को नींद की दवाइयां देता है। इसके बाद विमला कहती है कि तुम इस समय तो अपने घर पर चले जाओ लेकिन जैसे ही रात होगी तो मेरे घर पर आ जाना। इसके बाद लखन सिंह अपने घर पर चला जाता है और जैसे ही रात के करीब आठ बत्तीस बजे के आसपास का वक्त होता है तो विमला देवी अपने पूरे परिवार के लिए खाना तैयार करती है और विमला उस पूरे खाने में नींद की दवाइयां मिलाती है और अपने बच्चों को खाना खिला देती है और कहती है कि तुम कमरे में जाकर सो जाओ। इसके बाद विमला के दोनों बच्चे खाना खाने के बाद अपने कमरे में चले जाते हैं। लगभग आधे पौने घंटे के बाद विमला के दोनों बच्चों को गहरी नींद आ जाती है और इसके बाद विमला उसी समय मोबाइल फोन उठाती है। लखन सिंह के पास फोन कॉल करती है और लखन सिंह को कहती है कि लखन रास्ता बिल्कुल साफ है। तुम मेरे घर पर आ जाओ। इसके बाद लखन सिंह दस हजार लेकर रात के करीब दस बत्तीस बजे के आसपास अपने घर से बाहर निकलता है और फिर अपनी विधवा चाची विमला के घर पर आता है और फिर इसके बाद विमला चाची को पैसे देता है और विमला चाची अपने घर का दरवाजा बंद करती है और लखन सिंह को लेकर कमरे के अंदर चली जाती है और इसके बाद लखन सिंह और इस महिला विमला के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर इस गलत और गंदे काम को तब तक अंजाम देते हैं जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती है और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो इसके बाद लखन सिंह अपनी विधवा चाची विमला को कहता है कि चाची अब तो मेरा मन जब भी करेगा मैं तेरे घर पर आ जाया करूंगा। विमला चाची को भी पैसे मिल चुके होते हैं। विमला कहने लगती है कि जब भी तुम्हारा मन करे तुम रात के समय मेरे घर पर आ जाया करो। और इस तरीके से लखन और विमला की प्रेम कहानी शुरू हो जाती है। अब तो जब भी लखन का मन करता था लखन सिंह इस महिला के घर पर आता था। इसको पैसे देता था और इसके साथ अपनी रातें रंगीन कर लिया करता था। इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक दिन लखन सिंह अपनी पत्नी संजना के पास फोन कॉल करता है और उसको कहता है कि अगर तुम मेरे घर पर नहीं आओगी तो फिर मैं तुम्हें तलाक दे दूंगा। जिसकी वजह से संजना काफी डर जाती है। इसके बाद संजना देवी जैसे तैसे करके अब अपने पति लखन सिंह के पास आ जाती है और लखन सिंह के साथ घर में रहना शुरू कर देती है। लेकिन लखन सिंह हर रोज रात के करीब नौ बजे के आसपास अपने घर से बाहर निकलता था और विधवा महिला विमला के घर पर चला जाता था। विमला को पैसे देता था। उसके साथ रातें रंगीन कर लिया करता था। अब धीरे-धीरे करके वक्त गुजरता चला जाता है और यह सारी बातें संजना देवी को भी पता चल जाती है। अब जैसे ही इन बातों के बारे में संजना को पता चलता है तो संजना अपने पति लखन को कहने लगती है कि तुम विमला चाची के घर पर जाते हो और उसके साथ अपनी रातें रंगीन करते हो। वो एक ऐसी औरत है जो तुम्हें ठग लेगी और तुम्हारे सारे पैसों पर वो सांप की तरह कुंडली मार लेगी। लेकिन लखन सिंह अपनी पत्नी की सारी बातों को एक कान से सुनता था। दूसरे कान से बाहर निकाल दिया करता था। लगभग एक महीने के अंदर-अंदर अब विमला देवी इस लखन सिंह का सारा बैंक बैलेंस खाली कर चुकी होती है। लखन सिंह के पास बिल्कुल भी पैसे नहीं रहते हैं। लखन सिंह अब उदास और परेशान रहने लग जाता है। लखन सिंह अपने मन में सोचने लग जाता है कि उसके बैंक में जितने भी पैसे थे वह सारे पैसे खत्म हो चुके हैं। और एक दिन ऐसा भी आ जाता है जिसमें रात के करीब दस बजे के आसपास का वक्त होता है। लखन सिंह अपने घर से शराब के नशे में धूत होकर बाहर निकलता है और विधवा महिला विमला के घर पर चला जाता है। विमला के घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है। विमला अपने घर का दरवाजा खोल देती है। विमला देखती है कि उसके सामने नशे में धुत लखन सिंह खड़ा होता है। विमला उसी समय लखन सिंह को कहती है कि आज से तुम्हें मेरे घर पर आने की कोई भी जरूरत नहीं है। ना तो तुम मुझे पैसे देते हो और ना ही कुछ और दे सकते हो। इस तरह से जैसे यह बातें लखन सिंह को कही जाती है तो लखन सिंह के दिलो दिमाग पर इस बात का गहरा असर पड़ जाता है और दूसरी तरफ विमला देवी उसी समय अपने घर का दरवाजा बंद कर लेती है। अब लखन सिंह थक हार कर अपने घर पर आ जाता है। इस तरीके से लखन सिंह अब बिल्कुल टूट जाता है। लखन सिंह अब लोगों से पैसे उधार लिया करता था। उन सारे पैसों की शराब पी जाया करता था। शराब पीने के बाद लखन सिंह अपनी पत्नी संजना देवी के साथ लड़ना झगड़ना शुरू कर देता है। जिसकी वजह से संजना के दिलो दिमाग पर भी गहरा असर पड़ जाता है। अब संजना देवी आगे चलकर दो बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाली थी। जिसकी गूंज पूरे जिले में गूंजने वाली होती है। इस तरीके से अब संजना देवी इस बात के बारे में सोचने लग जाती है कि उसका पति तो शराबी बन चुका है और उसके पति ने जितना पैसा कमाया था वह सारा पैसा विधवा महिला विमला पर लुटा दिया है। अब संजना ये सारी बातें सोचने के बाद गलत रास्ते पर चलने के लिए तैयार हो जाती है और इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है दस जून 2026 का दिन। सुबह के करीब दस बजे के आसपास का वक्त होता है। संजना अपने घर में अकेली बैठी होती है। संजना इस बात के बारे में सोच रही होती है कि उसके घर में काफी गरीबी आ चुकी है। तीन वक्त का खारा भी बड़ी मुश्किल से घर में बनता था। संजना को कहीं से पता चलता है कि इस गांव में एक सुनार भी रहता है और इस सुनार का नाम प्रताप होता है। प्रताप के पास अच्छे खासे पैसे होते हैं। प्रताप के पास सब कुछ होता है लेकिन प्रताप के घर में इसकी पत्नी नहीं होती है क्योंकि प्रताप की पत्नी की मौत हो चुकी होती है और प्रताप के दोनों बच्चे बाहर रहकर नौकरी किया करते थे। प्रताप अपने घर में बिल्कुल अकेला रहता था और इस तरीके से जैसे ही संजना देवी को प्रताप के बारे में यह सब कुछ बातें पता चल जाती है तो संजना अपने घर से बाहर निकलती है और सीधे ही यह महिला संजना देवी प्रताप के घर पर चली जाती है। प्रताप के घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है। प्रताप सुनार उसी समय अपने घर का दरवाजा खोल देता है। सुनार प्रताप देखता है कि उसके दरवाजे पर गांव की सबसे खूबसूरत महिला संजना देवी खड़ी होती है। संजना देवी को देखने के बाद प्रताप की नियत में भी कमी आ चुकी होती है। प्रताप सुनार इस महिला संजना की खूबसूरती को देखते हुए पूछने लग जाता है कि तुम मेरे दरवाजे पर क्यों आई हो? संजना भी उसी समय प्रताप सुनार को कहती है कि देखो मुझे कहीं से पता चला है कि तुम्हारी नौकरानी घर का कामकाज छोड़कर चली गई है और मैं तुम्हारे घर पर नौकरानी का काम करनी चाहती हूं। जैसे यह बातें सुनार को कही जाती है तो प्रताप सुनार हंसते मुस्कुराते हुए कहते हैं कि तुम कल से मेरे घर पर आ सकती हो। इसके बाद संजना बड़ी खुश हो जाती है। लेकिन संजना का इरादा कुछ और होता है और इसके बाद संजना वापस अपने घर पर आ जाती है। अगली सुबह होती है तो सुबह के करीब आठ बजे के आसपास संजना देवी सुनार के घर पर चली जाती है और इसके बाद प्रताप सुनार इस महिला को सारे घर के कामकाज बता देता है। अब इस तरीके से यह महिला संजना देवी इस सुनार के घर में कामकाज करना शुरू कर देती है। थोड़े दिनों के अंदर ही संजना देवी इस सुनार का मन जीत लेती है। इसके दिलो दिमाग पर छा जाती है। प्रताप सुनार भी इस पर विश्वास करना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे करके प्रताप सुनार और इस महिला संजना देवी की नजदीकियां बढ़नी शुरू हो जाती हैं। इन दोनों की बीच की दूरियां कम होने लग जाती है और एक ऐसी तारीख भी आ जाती है जिसमें बीस जून 2026 का दिन होता है। शाम के करीब छह बजे के आसपास का वक्त होता है। संजना देवी अब रसोई के अंदर बैठकर खाना बना रही होती है और उसी समय प्रताप सुनार इस महिला के पास जाता है। प्रताप सुनार कहने लग जाता है कि देखो आज रात तुम्हें मेरे साथ मेरे घर में गुजारनी पड़ेगी। जैसे साफ-साफ शब्दों में यह बात संजना को कही जाती है तो संजना भी इससे कम नहीं होती है। संजना कहने लगती है कि देखो मैं तुम्हारे साथ रात गुजारने के लिए तैयार हूं। लेकिन इस काम के तुम्हें मुझे दस हजार देने पड़ेंगे। मेरे घर में काफी गरीबी है और मैं अपनी गरीबी को दूर करना चाहती हूं। मेरा पति शराबी बन चुका है। मेरा पति तो ना तो मेरी किसी भी जरूरत को पूरा करता है वह किसी काम का नहीं है। प्रताप सुनार कहने लगता है कि तुम्हें फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। आज रात के करीब दस बजे के आसपास तुम मेरे घर पर आ जाना। मैं तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा कर दूंगा। इस तरीके से संजना देवी ने अब गलत रास्ता चुन लिया था। इसके बाद रात के करीब सात बत्तीस बजे के आसपास संजना देवी प्रताप के घर से बाहर निकलती है। अपने घर पर आ जाती है। रात के करीब नौ बत्तीस बजे के आसपास संजना देवी का पति लखन सिंह शराब के नशे में धूत होकर घर पर आता है। इसके बाद जैसे तैसे करके संजना देवी अपने पति लखन को खाना खिलाती है और शराब के नशे की वजह से लखन सिंह को गहरी नींद आ जाती है। अब संजना देवी अपने मन में सोचने लग जाती है कि उसका पति तो गहरी नींद में सो चुका है। क्यों ना मुझे सुनार के पास चलना चाहिए। इस तरीके से दबे पांव अब संजना देवी अपने घर से बाहर निकलती है और फिर सुनार के घर के दरवाजे पर चली जाती है। इसके बाद सुनार प्रताप सिंह उसी समय अपने घर का दरवाजा खोलता है और यह महिला घर के अंदर चली जाती है। संजना देवी प्रताप सुनार को कहने लगती है कि पहले मुझे दस हजार चाहिए। उसके बाद ही मैं तुम्हारे साथ वक्त गुजारूंगी। प्रताप सुनार उसी समय इस महिला को दस हजार देता है और संजना देवी दस हजार को लेकर बड़ी खुश हो जाती है। जिसके बाद सुनार साहब अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर देता है और संजना का हाथ पकड़ कर इसको अपने बैडरूम के अंदर ले जाता है और फिर इसके बाद बंद कमरे में प्रताप सुनार और इस महिला संजना देवी के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करना शुरू कर देते हैं। यह इस काम को तब तक अंजाम देते हैं जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती है। और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो प्रताप सुनार संजना को कहता है कि देखो संजना अब तो तुम्हें हर दूसरी तीसरी रात मेरे साथ गुजारनी पड़ेगी। मैं तुम्हारे जरूरतों को पूरा करता रहूंगा। तुम मेरी जरूरतों को पूरी करते रहना। संजना इसी बात को सोचकर इस घर के अंदर आई थी। अब संजना देवी अपने मन में सिर्फ एक ही बात को सोचती है कि अब प्रताप सुनार उसकी हर जरूरतों को पूरा कर दिया करेगा। अब उसके घर की गरीबी खत्म होने वाली है। लेकिन संजना नहीं जानती थी कि उसने कितना बड़ा गलत कदम उठा लिया था। लेकिन आगे चलकर संजना इससे भी बड़े कांड को अंजाम देने वाली होती है। अब तो जब भी प्रताप सुनार का मन करता था प्रताप सुनार इस महिला को अपने घर पर बुला लिया करता था और इस महिला को कुछ पैसे देकर अपनी रातें रंगीन कर लिया करता था। कई दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है दो जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब दस बजे के आसपास का वक्त होता है। संजना देवी अब प्रताप सुनार के घर के अंदर कामकाज कर रही होती है और उसी समय प्रताप सुनार अपने घर में बैठा होता है। घर के दरवाजे पर दस्तक होती है और प्रताप सुनार अपने घर का दरवाजा खोलता है। प्रताप सुनार देखता है कि उसके ठीक सामने उसका सबसे अच्छा गहरा दोस्त खड़ा होता है और इसके दोस्त का नाम सोहन लाल पटवारी होता है। सोहन लाल पटवारी एक ऐसा पटवारी होता है जो कि औरतों का गुलाम होता है। औरतों में ज्यादा दिलचस्पी रखा करता था। सोहन लाल की पत्नी उसको तलाक देकर जा चुकी थी। सोहन लाल भी अपने घर में अकेला रहता था। और इस तरीके से प्रताप अब अपने दोस्त सोहन लाल को कहने लगता है कि सोहन लाल काफी दिनों के बाद तुम मेरे घर पर आए हो। चलो घर के अंदर बैठ जाते हैं। कुछ बातचीत भी करते हैं। इसके बाद सोहन लाल और प्रताप सुनार यह दोनों घर के अंदर बैठ जाते हैं और घर के अंदर बैठकर बातचीत करना शुरू कर देते हैं। लेकिन उसी समय जो महिला संजना देवी होती है अब इस प्रताप सुनार के घर में कामकाज कर रही थी और सोहन लाल की नजरें जैसे ही संजना देवी की खूबसूरती पर पड़ती है तो संजना की खूबसूरती को देखने के बाद सोहन लाल की नियत में कमी आ जाती है। सोहन लाल अब अपने दोस्त प्रताप सिंह सुनार को कहने लगता है कि तुम्हें इतनी खूबसूरत नौकरानी कहां से मिल गई है? प्रताप सुनार कहते हैं कि हमारे पड़ोस से थोड़ी सी दूरी पर रहती है और बहुत ही अच्छी नौकरानी है। घर के सारे कामकाज अच्छे तरीके से कर लेती है। लेकिन यह सारी बातें संजना देवी भी सुन रही होती है। संजना देवी को पता चल चुका होता है कि सोहन लाल पटवारी के पास भी अच्छे खासे पैसे हैं। और सोहन लाल पटवारी भी एक धनी व्यक्ति है। लेकिन सोहन लाल पटवारी लंगोट का ढीला है। इस बात के बारे में संजना देवी को भली-भांति पता चल चुका होता है। और इस तरीके से अब सोहन लाल और इसका दोस्त प्रताप सिंह दोनों घर के अंदर बैठकर काफी देर तक बातचीत करते हैं। प्रताप सिंह कहने लगता है कि चलो आज घर के अंदर ही बैठकर एक पार्टी कर लेते हैं। सोहन लाल कहता है कि चलो अच्छी बात है और इसके बाद जैसे तैसे करके प्रताप सिंह सुनार शराब भी मंगवा लेता है। दोनों दोस्त बैठकर शाम तक शराब पीते हैं। शाम के करीब पांच बत्तीस बजे के आसपास सोहन लाल शराब पीने के बाद अपने घर पर चला जाता है। दस मिनट का वक्त गुजर जाने के बाद संजना देवी भी अब प्रताप सुनार को कहने लगती है कि सुनार साहब मुझे भी आज घर पर जरूरी काम है। मुझे अपने घर पर जल्दी जाना है। प्रताप सुनार कहने लगता है कि कोई बात नहीं तुम अपने घर पर चली जाओ। इस तरीके से अब संजना देवी भी प्रताप सुनार के घर से बाहर निकलती है। लेकिन संजना अपने घर पर नहीं जाती है। बल्कि संजना देवी सीधे ही सोहन लाल पटवारी के घर पर चली जाती है। घर का दरवाजा खटखटाया जाता है। पटवारी साहब अपने घर का दरवाजा खोल देता है। सोहन लाल पटवारी देखते हैं कि उसके सामने संजना देवी खड़ी होती है और संजना की खूबसूरती को देखते हुए सोहन लाल पटवारी कहने लगता है कि घर के अंदर आ जाओ। इसके बाद संजना देवी घर के अंदर चली जाती है। सोहन लाल अब इस महिला संजना को कहने लगता है कि तुम्हें प्रताप सुनार के घर पर कामकाज करने के कितने पैसे मिलते हैं? संजना देवी कहने लगती है कि प्रताप सुनार मुझे दस हजार देता है। लेकिन सोहन लाल कहने लगता है कि अगर ऐसी बात है तो मैं तुम्हें पचास हजार दिया करूंगा। तुम मेरे घर में कामकाज करना शुरू कर दो। संजना देवी जैसे ही पचास हजार के बारे में सुनती है तो संजना को लालच आ जाता है। संजना कहने लगती है कि यह तो और भी अच्छी बात है। मैं कल से ही तुम्हारे घर पर कामकाज करना शुरू कर दूंगी। इस तरीके से अब संजना देवी सोहन लाल से बातचीत करने के बाद वापस प्रताप सिंह के घर पर आती है। प्रताप सुनार को कहने लगती है कि मैं कल से सोहन लाल के घर पर कामकाज करना शुरू करूंगी क्योंकि वह मुझे पचास हजार हर महीने के दिया करेगा। प्रताप सुनार कहने लगता है कि तुम काम जहां मर्जी कर लो लेकिन तुम्हें रातें मेरे साथ गुजारनी पड़ेगी। अब इसके बाद संजना कहती है कि कोई बात नहीं मैं हर तीसरी चौथी रात तुम्हारे घर पर आ जाया करूंगी। प्रताप सुनार को इस बात से ऐतराज नहीं होता है और इस तरीके से अब संजना देवी सोहन लाल पटवारी के घर पर कामकाज करना शुरू कर देती है। लगभग दो-चार दिनों का ही वक्त गुजर पाता है। अब संजना की नजरें सोहन लाल पटवारी के पैसों पर टिक चुकी होती है। अब संजना देवी एक ऐसा बड़ा कांड करने वाली थी कि जिसकी गूंज पूरे गांव में गूंजने वाली होती है। आखिरकार एक तारीख आ जाती है बारह जुलाई 2026 का दिन। सुबह के आठ बजे के आसपास का वक्त होता है। संजना देवी अब सोहन लाल पटवारी के घर पर जाने के लिए तैयार हो चुकी थी। उसी समय संजना देवी का पति लखन सिंह अपनी पत्नी को कहने लगता है कि संजना तुम्हारे पास इतने पैसे आते कहां से हैं? तुमने कई सोने की अंगूठियां खरीद ली है। दो सोने की चैन भी खरीद ली है। और तुम्हें मुझे देने के लिए तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है। मुझे पांच सौ रुपये दे दो। लेकिन लखन सिंह की पत्नी संजना देवी कहने लगती है कि मेरे पास तुम्हें पैसे देने के लिए नहीं है। मैं तुम्हें पैसे दूंगी और तुम फिर से शराब पीकर घर पर आओगे और फिर से मेरे साथ झगड़ा करोगे। लखन सिंह अपनी पत्नी संजना को कहने लगता है कि मैं आज के बाद तुम्हारे साथ झगड़ा नहीं करूंगा। बस तुम्हें कुछ पैसे देने पड़ेंगे। अब उसी समय संजना देवी अपने पति को पांच सौ रुपये देती है और कहती है कि शराब पीकर घर पर मत आना। और उसी समय लखन सिंह पांच सौ रुपये लेकर अपने घर से बाहर निकल जाता है। इसके बाद संजना देवी भी सोहन लाल पटवारी के घर पर कामकाज करने के लिए चली जाती है। पूरा दिन गुजर जाता है। शाम के करीब छह बजे के आसपास का वक्त होता है। संजना देवी पटवारी के घर में कामकाज कर रही होती है। जबकि पटवारी सोहन लाल आज अपने घर के कमरे में बैठकर शराब पी रहा होता है। सोहन लाल को थोड़ा सा नशा भी हो चुका होता है। सोहन लाल सारा कामकाज छोड़ता है। उसी समय इस महिला संजना के पास आता है। संजना को कहते हैं कि संजना देखो कई दिनों का वक्त गुजर चुका है। तुम मेरे घर पर लगातार कामकाज कर रही हो और आज मैं चाहता हूं कि तुम मेरे साथ अपनी रात गुजारो। अब जैसे ही साफ-साफ शब्दों में इस महिला संजना देवी को यह बातें कही जाती है तो संजना कहने लगती है कि तुम किसी बात की फिक्र मत करो। आज की पूरी रात मैं तुम्हारे साथ गुजारूंगी लेकिन बदले में तुम्हें पांच हजार मुझे देने पड़ेंगे। जैसे यह बात पटवारी सुनता है तो पटवारी कहने लगता है कि पच्चीस हजार मैं तुम्हें दे सकता हूं। लेकिन आज की पूरी रात में मेरे साथ गुजारनी पड़ेगी। पटवारी उसी समय अपनी अलमारी खोलता है। पच्चीस हजार निकालता है और इस महिला संजना देवी को दे देता है। पच्चीस हजार को लेकर संजना बड़ी खुश हो जाती है। संजना कहती है कि पटवारी साहब आज रात दस बजे के आसपास मैं तेरे घर पर आ जाऊंगी। तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा कर दूंगी। और इस तरीके से यह दो चार बातें करने के बाद संजना देवी पच्चीस हजार लेकर अपने घर पर आ जाती है। अब जैसे ही रात के करीब नौ बत्तीस बजे के आसपास का वक्त होता है तो संजना देवी का पति लखन सिंह भी शराब के नशे में धुत होकर अपने घर पर आता है और फिर भी इसकी पत्नी संजना देवी अपने पति लखन सिंह को खाना देती है। खाना खाने के बाद लखन सिंह गहरी नींद में सो जाता है और इसके बाद जो पत्नी संजना होती है दबे पांव आज भी अपने घर से बाहर निकलती है और फिर इसके बाद सोहन लाल पटवारी के घर पर चली जाती है। पटवारी के घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है। सोहन लाल पटवारी अपने घर का दरवाजा खोल देता है और इसके बाद पटवारी साहब इस महिला संजना देवी को लेकर अपने बेडरूम के अंदर चला जाता है। और फिर इसके बाद पटवारी और इस महिला संजना देवी के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। अब जैसे ही इन दोनों का यह काम खत्म होता है तो सोहन लाल पटवारी कहते हैं कि संजना तुम्हें फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। पैसों की मैं सारी कमी को पूरा कर दूंगा लेकिन तुम्हें मेरे साथ रातें गुजारनी होगी। संजना भी कहने लगती है कि पटवारी साहब तुम किसी बात की फिक्र मत करो। जब भी तुम चाहो मुझे अपने घर पर बुला सकते हो। मैं हाजिर हो जाऊंगी। और इस तरीके से आज की रात में संजना देवी पटवारी के घर से बाहर निकलती है। अपने घर पर वापस आ जाती है। अब तो संजना देवी ने दो व्यक्तियों को अपने जाल में फंसा लिया था। पहला प्रताप सुनार होता है। दूसरा सोहन लाल पटवारी होता है। संजना देवी का जब भी मन करता था प्रताप सुनार के घर पर चली जाती थी। उससे पैसे लेती थी। उसके साथ वक्त गुजारती थी। दूसरी तरफ जब भी संजना देवी का मन करता था वह सोहन लाल के घर पर चली जाती थी। और सोहन लाल के साथ भी अपना वक्त गुजार कर उससे कुछ पैसे ले लिया करती थी। और इस तरीके से संजना ने एक ऐसा रास्ता चुन लिया था जो कि बहुत ही भयानक होने वाला था। इस तरीके से एक तारीख आ जाती है पंद्रह जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब दस बजे के आसपास का वक्त होता है। लखन सिंह आज भी अपनी पत्नी संजना से कुछ पैसे मांगता है। संजना अपने पति लखन सिंह को पैसे देने से मना करती है। जिस बात पर दोनों के बीच झगड़ा हो जाता है। झगड़ा होने के बाद लखन सिंह अपनी पत्नी के साथ मारपीट भी करता है। लेकिन पड़ोसी जन बीच बचाव करवा देते हैं। और फिर इसके बाद लखन सिंह अपने घर से बाहर चला जाता है। और आज के समय में संजना लड़ाई झगड़े की वजह से सोहन लाल के घर पर कामकाज करने नहीं जा सकी थी। अब जैसे ही एक घंटे का वक्त गुजर जाता है तो इसके बाद सोहन लाल अपने मन में सोचने लग जाता है कि आज संजना उसके घर पर कामकाज करने क्यों नहीं आई है? उसके घर पर मुझे जाना चाहिए। अब इसके बाद सोहन लाल पटवारी उसी समय अपने दोस्त प्रताप सिंह सुनार के पास फोन कॉल करता है। उसको अपने घर पर बुलाता है। और फिर इसके बाद सोहन लाल और प्रताप सिंह ये दोनों घर के अंदर बैठकर काफी देर तक शराब पीते हैं। और जब दोनों दोस्तों को नशा हो जाता है तो सोहन लाल पटवारी अपने दोस्त प्रताप सिंह को कहने लगता है कि आज मेरे नौकरानी यहां पर नहीं आई है। ऐसा करते हैं कि शराब पीने के बाद हम दोनों उसके घर पर चलते हैं और उसके घर पर ही उसके साथ वक्त गुजारते हैं। प्रताप सुनार कहता है कि उसके घर पर उसका पति लखन रहता है। सोहनल कहता है कि वह तो कहीं ना कहीं शराब पीने के लिए गया होगा और इस तरीके से अब सोहन लाल और प्रताप सिंह दोनों शराब के नशे में धुत होकर सोहन लाल के घर से बाहर निकलते हैं। चंद मिनटों के अंदर ही यह दोनों दोस्त अब लखन सिंह के घर पर पहुंच जाते हैं। लखन सिंह की पत्नी संजना देवी को कई बार आवाजें लगाई जाती है। संजना देवी अपने घर का दरवाजा खोलती है। संजना देखती है कि उसके घर के सामने सोहन लाल पटवारी और प्रताप सिंह सुनार दोनों खड़े होते हैं। दोनों को देखने के बाद संजना देवी कहने लगती है कि तुम अपने घर पर चले जाओ। मेरा पति लखन सिंह किसी भी समय यहां पर आ सकता है। लेकिन सोहन लाल पटवारी पूछने लगता है कि आज तुम मेरे घर पर कामकाज करने क्यों नहीं आई हो? उसी समय संजना देवी कहती है कि आज मेरा और मेरे पति का झगड़ा हो गया था। बस इसी वजह से मैं तुम्हारे घर पर नहीं आई हूं। इसी बीच सोहन लाल पटवारी उसी समय घर के अंदर घुस जाता है। घर के अंदर देखता है कि आज संजना घर पर अकेली होती है। सोहन लाल पटवारी कहने लगता है कि देखो तुम्हारा पति यहां पर नहीं है और ना ही वह तुम्हारे घर पर आने वाला है। हम दोनों तेरे साथ इसी समय अपना वक्त गुजारना चाहते हैं। संजना मना करती है लेकिन ये दोनों दोस्त मानने को तैयार नहीं होते हैं। अब इसके बाद सोहन लाल और इसका दोस्त प्रताप सिंह उसी समय घर का मुख्य दरवाजा बंद करते हैं और इस महिला का हाथ पकड़ कर इसको इसके कमरे के अंदर ले जाते हैं और फिर इसके बाद संजना देवी भी मजबूर होकर इन दोनों के साथ अपना वक्त गुजारना शुरू कर देती है। अब जैसे ही ये तीनों मिलकर इस गलत और गंदे काम को अंजाम दे रहे होते हैं तो उसी समय संजना देवी का पति लखन सिंह भी शराब के नशे में धुत होकर अपने घर पर आ जाता है। लखन सिंह अपनी पत्नी को कई बार आवाज लगाता है। लेकिन लखन सिंह की पत्नी संजना देवी अपने घर का दरवाजा नहीं खोलती है। दस से पंद्रह मिनट का वक्त गुजर जाता है और इतना वक्त गुजर जाने के बाद लखन सिंह को अपनी पत्नी पर बहुत गुस्सा आता है। लखन सिंह गुस्से का वशीभूत होकर उसी समय घर का दरवाजा तोड़ देता है और लखन सिंह जैसे ही घर के अंदर जाता है कमरे में प्रवेश करता है तो लखन सिंह की आंख फटी की फटी रह जाती है। लखन सिंह देखता है कि उसकी पत्नी संजना देवी अब सोहन लाल पटवारी और प्रताप सिंह सुनार के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाई जाती है और इन तीनों को ऐसी आपत्तिजनक स्थिति में देखकर लखन सिंह को बहुत गुस्सा आने लग जाता है। लखन सिंह अपने मन में सोचने लगती है कि उसकी पत्नी के पास इतने सोने के आभूषण कहां से आए थे। लखन सिंह को अब सारी बातों के बारे में पता चल चुका होता है। अब लखन सिंह को इतना ज्यादा गुस्सा आता है कि लखन सिंह घर में पड़ी हुई गंडासी उठा लेता है। लेकिन जैसे ही लखन सिंह के हाथ में गंडासी आती है तो उसी दौरान सोहन लाल पटवारी और प्रताप सिंह सुनार ये दोनों दोस्त इस लखन सिंह को धक्का देकर घर से भागने में कामयाब हो जाते हैं। लेकिन लखन सिंह अपनी पत्नी को छोड़ने वाला नहीं था। लखन सिंह उसी समय अपनी पत्नी संजना को घसीट कर दूसरे कमरे में ले जाता है और इसके बाद उसके हाथ पैर रस्सी के साथ बांध देता है। उसके मुंह में कपड़ा ठूस दिया जाता है। लखन सिंह अपनी पत्नी पर कई बार गंडासियों के साथ करता है। उसके हाथ पैर भी काट दिए जाते हैं। यहां तक कि लखन सिंह अपनी पत्नी संजना देवी के सिर में चार-पांच बार गंडासिया तक मार देता है। जिसकी वजह से संजना देवी की मौके पर ही मौत हो जाती है। लेकिन लखन सिंह यहीं पर नहीं रुकता है। लखन सिंह उस गंडासी को लेकर घर से बाहर निकलता है तो पड़ोसी जन वहां पर इकट्ठे हो जाते हैं। कुछ पड़ोसी घर के अंदर जाकर देखते हैं कि लखन सिंह की पत्नी संजना देवी की लाश कमरे में पड़ी होती है और इसी बीच इन्हीं पड़ोसियों में से एक पड़ोसी जिसका नाम दीपक कुमार होता है नजदीकी पुलिस स्टेशन में फोन कॉल करता है। करीब एक घंटे का वक्त गुजरने के बाद घटना स्थल पर पुलिस आती है। पुलिस इसके बाद संजना देवी का शव बरामद करती है और आधे घंटे के अंदर ही संजना के पति लखन सिंह को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया जाता है। जब पुलिस लखन सिंह से पूछताछ करती है तो लखन सिंह पुलिस को बताता है कि उसकी पत्नी सोहन लाल पटवारी और प्रताप सिंह सुनार के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाई गई थी जिसकी वजह से मैंने अपनी पत्नी का कत्ल कर दिया है। लेकिन लखन सिंह ने जुर्म किया था और इसके बाद जो पुलिस है लखन सिंह के खिलाफ कानूनी कारवाई करने के लिए मजबूर हो जाती है। यह बात भविष्य में तय होने वाली है कि जज साहब लखन सिंह को आखिरकार क्या सजा सुनाने वाला है। लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लखन सिंह ने अपनी पत्नी संजना के साथ जो किया वह सही था या गलत था कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ। तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद वंदे मातरम।